Zameen Ka Batwara Kaise Kare: पटना में पुश्तैनी ज़मीन और वंशावली
सीधा जवाब
पुश्तैनी ज़मीन का बँटवारा तीन कदम में: वंशावली, लिखित बँटवारा, फिर दाखिल-खारिज।
- वंशावली बनाइए, जिसमें सभी वारिस हों, बेटियाँ भी।
- पारिवारिक संपत्ति के रजिस्टर्ड बँटवारा-पत्र पर सिर्फ़ ₹50 स्टांप + ₹50 रजिस्ट्री फ़ीस लगती है।
- बँटवारे के 90 दिन के भीतर दाखिल-खारिज कराइए, ताकि हर हिस्सेदार की अलग जमाबंदी बने। यह मुफ़्त है।
पर जब तक जमाबंदी दादा-परदादा के नाम है, कागज़ में ज़मीन पूरे परिवार की है।
📑 8 हिस्सों में सीधे जाएँ
पटना में पुश्तैनी ज़मीन का बँटवारा: पूरा तरीका एक नज़र में
| कदम | क्या करना है | कागज़ / जगह |
|---|---|---|
| 1 | रिकॉर्ड देखें: ज़मीन किसके नाम है, कितना रकबा है, कितने खेसरे हैं | बिहार भूमि पर जमाबंदी पंजी, खतियान (खतियान कैसे निकालें) |
| 2 | वंशावली बनाएँ: जमाबंदी/खतियान वाले रैयत से आज के हर जीवित वारिस तक | गाँव में सरपंच; शहरी क्षेत्र के लिए अंचल कार्यालय से पूछें (नीचे देखें) |
| 3 | मृत्यु प्रमाण पत्र जुटाएँ: जिन पूर्वजों के नाम ज़मीन है | पंचायत / नगर निकाय |
| 4 | हिस्से तय करें और कौन-सा टुकड़ा किसका, यह खेसरा और चौहद्दी के साथ लिखें | ज़रूरत हो तो अमीन से नापी (बिहार भूमि पर "ई-मापी") |
| 5 | बँटवारा-पत्र रजिस्टर्ड कराएँ, सभी हिस्सेदारों के दस्तख़त के साथ | रजिस्ट्री ऑफ़िस (अवर निबंधन कार्यालय); पारिवारिक संपत्ति पर ₹50 + ₹50 |
| 6 | दाखिल-खारिज (बँटवारा नामांतरण) का ऑनलाइन आवेदन, 90 दिन के भीतर | बिहार भूमि पोर्टल; कोई सरकारी फ़ीस नहीं |
| 7 | नई जमाबंदी जाँचें, लगान रसीद अपने नाम कटवाएँ, SMS अलर्ट चालू करें | बिहार भूमि |
वंशावली क्या है और कौन बनाता है?
वंशावली (कुर्सीनामा) रिकॉर्ड वाले रैयत से आज के वारिसों तक का परिवार-वृक्ष है। इसमें हर व्यक्ति के बच्चे, कौन गुज़र चुका है, और गुज़रे वारिस के बच्चे दिखते हैं। बँटवारे, विरासत वाले दाखिल-खारिज और विशेष सर्वे, तीनों में यही पहला कागज़ है। राजस्व विभाग के दाखिल-खारिज FAQ के अनुसार विरासत वाले दाखिल-खारिज में मृत्यु प्रमाण पत्र और वंशावली लगती है।
- गाँव में सरपंच वंशावली देते हैं।
- पटना शहर में दिसंबर 2025 की ख़बरों के अनुसार नगर निकाय क्षेत्र में अब अंचल अधिकारी (CO) वंशावली दे सकते हैं। हमें विभाग की वेबसाइट पर वह आदेश नहीं मिला, इसलिए पहले अपने अंचल कार्यालय से पक्का करें (पटना CO के नंबर)।
सबसे आम ग़लती: शादीशुदा बेटियाँ, गुज़र चुके भाई के बच्चे, या दूसरी शादी के बच्चे छूट जाते हैं। बाद में उनमें से कोई आपत्ति करता है और बँटवारा अटक जाता है। नाम और रिश्ते ठीक वैसे लिखें जैसे सरकारी कागज़ में हैं।
किसका कितना हक़? बेटियों का भी
हिंदू परिवारों में हिस्से हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 से तय होते हैं:
- पुश्तैनी (संयुक्त परिवार) संपत्ति में बेटी का हक़ बेटे के बराबर है। 2005 के बदलाव के बाद बेटी जन्म से हिस्सेदार (coparcener) है, शादी की कोई शर्त नहीं। विनीता शर्मा बनाम राकेश शर्मा (11 अगस्त 2020) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बेटी का हक़ बराबर है। वह 2005 से पहले जन्मी हो या बाद में, और पिता 9.9.2005 को जीवित हों या नहीं। 20 दिसंबर 2004 से पहले पूरे हो चुके बँटवारे या बिक्री दोबारा नहीं खुलते।
- किसी की अपनी कमाई की संपत्ति, बिना वसीयत के, "क्लास I" वारिसों को जाती है: बेटा, बेटी, विधवा और माँ एक साथ। सर्वे FAQ का उदाहरण: एक बेटा, एक बेटी, माँ और पिता छोड़कर गुज़रे व्यक्ति का खाता बेटे, बेटी और माँ के नाम 1/3–1/3 खुलेगा। पिता को कुछ नहीं, क्योंकि पिता क्लास I वारिस नहीं।
ज़मीन पुश्तैनी है या अपनी कमाई की, कौन कब गुज़रा, वसीयत है या नहीं, इनसे हिस्से बदलते हैं। हिस्से कागज़ पर लिखने से पहले वकील से मामला दिखाइए। जिस भाई-बहन को हिस्सा नहीं चाहिए, वे रजिस्टर्ड रिलीज़ डीड (हक़त्याग) से छोड़ें, सिर्फ़ ज़ुबानी नहीं।
बँटवारा कितने तरीके से होता है, और दाखिल-खारिज में कौन-सा माना जाता है?
FAQ के अनुसार इनमें से कोई एक कागज़ चलता है:
| बँटवारे का तरीका | दाखिल-खारिज में क्या लगेगा | हमारी राय |
|---|---|---|
| रजिस्टर्ड बँटवारा-पत्र | रजिस्टर्ड बँटवारा दस्तावेज़ की कॉपी | सबसे सुरक्षित; पारिवारिक संपत्ति पर ख़र्च सिर्फ़ ₹100 |
| आपसी बँटवारा (बिना रजिस्ट्री) | सभी हिस्सेदारों के दस्तख़त वाला बँटवारा-पत्र + सभी की लिखित सहमति | चल जाता है, पर बाद में कोई मुकर जाए तो कमज़ोर पड़ता है |
| पंचायती बँटवारा | पंचायती बँटवारे की कॉपी + सभी हिस्सेदारों की लिखित सहमति | वही जोखिम; सहमति हो तो इसे भी रजिस्टर्ड करा लें |
| कोर्ट का बँटवारा | सक्षम न्यायालय के बँटवारा आदेश की कॉपी | जब सहमति न बने |
"खेत तो बाबूजी के समय ही बँट गया था" काफ़ी नहीं। विनीता शर्मा फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा: बेटी के हक़ के ख़िलाफ़ ज़ुबानी बँटवारा नहीं माना जाएगा। मान्य तरीका रजिस्टर्ड बँटवारा-पत्र या कोर्ट की डिक्री है। ज़ुबानी बँटवारा सिर्फ़ ख़ास मामलों में, पुराने सरकारी कागज़ के सबूत के साथ चलता है। इसलिए पुराना बँटवारा भी अब रजिस्टर्ड कागज़ पर ले आइए।
बिहार में बँटवारे की रजिस्ट्री का ख़र्च कितना है?
| दस्तावेज़ | स्टांप ड्यूटी | रजिस्ट्री फ़ीस |
|---|---|---|
| विरासत में मिली / पारिवारिक संपत्ति का बँटवारा | ₹50 | ₹50 |
| बाक़ी बँटवारे (जैसे दो दोस्तों ने मिलकर ख़रीदी ज़मीन) | बॉन्ड वाली दर से | 2%, सबसे बड़े हिस्सेदार का हिस्सा छोड़कर |
| पुश्तैनी संपत्ति की रिलीज़ डीड (भाई/बहन, माता/पिता, पति/पत्नी आदि के बीच) | हिस्से की MVR वाली क़ीमत का 3% | ₹1,000 |
मतलब बँटवारा सस्ता है, रिलीज़ डीड नहीं। बहन को हिस्सा देना है, तो बँटवारे में ही उसका टुकड़ा अलग करना ₹100 में हो जाता है। गिफ़्ट, सेटलमेंट और POA की दरें: परिवार के कागज़ों पर स्टांप ड्यूटी। बाक़ी ख़र्च: पटना रजिस्ट्री ख़र्च। "पारिवारिक संपत्ति" किसे मानेंगे, अपने रजिस्ट्री ऑफ़िस से पक्का कर लें।
स्रोत: निबंधन विभाग की स्टांप ड्यूटी और फ़ीस तालिका (पूरी सूची सबसे नीचे)।
हर हिस्सेदार के नाम अलग जमाबंदी कैसे बनेगी?
बँटवारा-पत्र से जमाबंदी अपने-आप नहीं बदलती। हर हिस्सेदार की अलग जमाबंदी के लिए दाखिल-खारिज (बँटवारा नामांतरण) ज़रूरी है:
- कहाँ: biharbhumi.bihar.gov.in पर "ऑनलाइन दाखिल-खारिज", अपने लॉगिन से। स्टेप: ऑनलाइन दाखिल-खारिज गाइड।
- कागज़: बँटवारा-पत्र/आदेश, वंशावली, पूर्वज का मृत्यु प्रमाण पत्र, और सभी हिस्सेदारों के नाम और मोबाइल नंबर।
- पहले रिकॉर्ड ठीक: ऑनलाइन जमाबंदी में खाता, खेसरा या रकबा ग़लत है, तो पहले परिमार्जन प्लस से सुधारें। विभाग के 2025 के राजस्व महा-अभियान में भी यही क्रम था।
- समय-सीमा: बँटवारे के 90 दिन के भीतर; उसके बाद देरी माफ़ी (delay condonation) का आवेदन लगाना होगा।
- फ़ीस और समय: दाखिल-खारिज मुफ़्त है। आपत्ति न हो तो CO 35 कार्य दिवस में, आपत्ति हो तो 75 कार्य दिवस में फ़ैसला करेंगे।
भाई ने बिना बँटवारे के पुश्तैनी ज़मीन बेच दी, अब क्या?
दाखिल-खारिज FAQ में इसका सीधा जवाब है। सिर्फ़ केवाले से रिकॉर्ड में मालिकाना नहीं बदलता; उसके लिए दाखिल-खारिज चाहिए। ख़रीदार आवेदन करे, तो आप आपत्ति दर्ज कर सकते हैं। आपत्ति सही पाई गई, तो CO रिकॉर्ड नहीं बदलेंगे।
- पता कैसे चलेगा: अपनी जमाबंदी पर SMS अलर्ट, और बिहार भूमि पर अपने प्लॉट पर दायर आवेदन देखते रहिए: ज़मीन फ़्रॉड से कैसे बचें।
- ख़रीदार को क्या चाहिए: जमाबंदी रैयत के अलावा किसी से ज़मीन ली हो, तो दाखिल-खारिज में वंशावली, बेचने वाले का रिश्ता साबित करने वाला कागज़ और बाक़ी हिस्सेदारों की सहमति लगती है।
बँटवारे पर परिवार में सहमति न बने तो कहाँ जाएँ?
| रास्ता | कब |
|---|---|
| DCLR (भूमि सुधार उप समाहर्ता) के पास, बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम, 2009 के तहत | इसमें "भू-खंड का विभाजन", सीमा-विवाद और रिकॉर्ड में सुधार जैसे मामले आते हैं। वाद बिहार भूमि के "ऑनलाइन राजस्व न्यायालय" से भी दायर होता है। DCLR के आदेश के ख़िलाफ़ 30 दिन में आयुक्त के पास अपील। |
| सिविल कोर्ट में बँटवारे का मुक़दमा | जब हिस्से पर ही विवाद हो (कौन वारिस है, ज़मीन पुश्तैनी है या नहीं, वसीयत)। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार प्रारंभिक डिक्री सिर्फ़ हिस्सा तय करती है; असली बँटवारा अंतिम डिक्री से होता है। |
कौन-सा रास्ता सही है, कागज़ देखकर वकील ही बता सकते हैं। पहले एक बार परिवार के साथ बैठकर सहमति की कोशिश कीजिए। रजिस्टर्ड बँटवारा सबसे सस्ता रास्ता है।
आपको क्या करना चाहिए? (हमारी सलाह)
- बँटवारा टालिए मत। आज के तीन भाई-बहन बीस साल में बारह चचेरे भाई-बहन हो सकते हैं।
- बँटवारा रजिस्टर्ड कराइए। पारिवारिक संपत्ति पर सरकारी ख़र्च कुल ₹100।
- बेटियों को शामिल कीजिए: उनका हिस्सा अलग कीजिए, या वे अपनी मर्ज़ी से रजिस्टर्ड रिलीज़ डीड से छोड़ें। उन्हें छोड़कर हुआ बँटवारा चुनौती में आ सकता है।
- 90 दिन के भीतर दाखिल-खारिज कराइए और नई जमाबंदी पर SMS अलर्ट चालू कीजिए।
- पटना से बाहर रहते हैं? बँटवारे में ख़ुद आइए या रजिस्टर्ड पावर ऑफ़ अटॉर्नी दीजिए: बाहर रहकर प्रॉपर्टी कैसे ख़रीदें।
- पुश्तैनी ज़मीन ख़रीद रहे हैं? 6 ज़रूरी जाँच नीचे बंद बॉक्स में हैं।
ज़मीन के बँटवारे से जुड़े सवाल-जवाब
जमाबंदी दादाजी के नाम है। क्या मैं ज़मीन बेच सकता हूँ?
रजिस्ट्री हो जाएगी: समीउल्लाह बनाम बिहार राज्य (7 नवंबर 2025) में सुप्रीम कोर्ट ने एक बिहार नियम रद्द किया। उस नियम से जमाबंदी बेचने वाले के नाम न होने पर रजिस्ट्री रोकी जा सकती थी। पर आप सिर्फ़ अपना हिस्सा बेच सकते हैं, और ख़रीदार के दाखिल-खारिज में वंशावली, रिश्ते का सबूत और हिस्सेदारों की सहमति लगेगी। यानी रजिस्टर्ड केवाला पूरे मालिकाना हक़ का सबूत नहीं। सुरक्षित क्रम: पहले बँटवारा और अलग जमाबंदी, फिर बिक्री।
क्या विरासत और बँटवारे का एक ही आवेदन होता है?
दिसंबर 2025 की ख़बरों के अनुसार बिहार भूमि पर "विरासत-सह-बँटवारा" का एक ही आवेदन जुड़ा है। अब वारिसों को एक-एक करके अलग दाखिल-खारिज नहीं कराना पड़ेगा। आवेदन के समय यह विकल्प देखिए; न मिले तो हल्का कर्मचारी या अंचल कार्यालय से पूछिए।
विशेष सर्वे में वंशावली कैसे दी जाती है?
प्रपत्र 3(1) में, और जून 2026 के बदलाव के बाद नगर क्षेत्र में प्रपत्र 3(1)(A) में। सर्वे FAQ के अनुसार इसकी जाँच ग्राम सभा, पंचायत सेवक या चौकीदार/दफ़ादार से होती है। वारिस पटना शहर या बिहार से बाहर रहते हों, तब भी वंशावली उसी राजस्व गाँव में बनती है, मुखिया, वार्ड सदस्य, सरपंच या चौकीदार की मदद से।
क्या ये हिस्से मुस्लिम और ईसाई परिवारों पर भी लागू हैं?
नहीं। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम हिंदू परिवारों पर लागू है; मुस्लिम और ईसाई परिवारों के क़ानून अलग हैं। हिस्से कागज़ हाथ में लेकर वकील से तय कराइए।
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पटना में पुश्तैनी ज़मीन ख़रीद रहे हैं? ये 6 बातें पक्की करें
- जमाबंदी किसके नाम है? दादा या पिता के नाम है, तो बेचने वाला अकेला मालिक नहीं।
- वंशावली लीजिए और देखिए उसमें बेटियाँ और गुज़र चुके वारिसों के बच्चे हैं।
- हर वारिस केवाले में बेचने वाले के रूप में शामिल हो, या उसकी रजिस्टर्ड रिलीज़ डीड या बँटवारा-पत्र हो। हमारी राय में सिर्फ़ नोटरी वाला "सहमति पत्र" काफ़ी नहीं।
- बँटवारे में बेचने वाले को मिला खेसरा ही बिक रहा है, और नक्शे पर वही टुकड़ा है (भू-नक्शा)।
- उस प्लॉट पर कोई दाखिल-खारिज आपत्ति, राजस्व केस या सिविल मुक़दमा लंबित नहीं।
- सबसे अच्छा क्रम: पहले परिवार का बँटवारा और बेचने वाले की अलग जमाबंदी, फिर केवाला। पूरी सूची: प्लॉट ख़रीद गाइड।
स्रोत (Sources)
- दाखिल-खारिज से संबंधित FAQ, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार: प्रश्न 4 (ग) बँटवारे के मान्य कागज़, (घ) विरासत में मृत्यु प्रमाण पत्र और वंशावली, 90 दिन; प्रश्न 5 (विलंब माफ़ी); प्रश्न 6 (वंशावली, रिश्ते का सबूत, हिस्सेदारों का सहमति-पत्र); प्रश्न 17 (35/75 कार्य दिवस); प्रश्न 18 (निःशुल्क); प्रश्न 22 (बिना बँटवारे बिक्री पर आपत्ति) — biharbhumi.bihar.gov.in/Biharbhumi/FAQ/13.html
- विशेष सर्वेक्षण FAQ: प्रश्न 12 (गाँव में न रहने वाले वारिसों की वंशावली), प्रश्न 46 (वंशावली का सत्यापन), प्रश्न 48 (प्रपत्र 3(1)), प्रश्न 65 (बेटा, बेटी, माँ को बराबर हिस्सा; पिता Class I में नहीं) — PDF; बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त (संशोधन) नियमावली, 2026, गजट सं. 624, 1 जून 2026: नियम 6(3) (ग्रामीण प्रपत्र 3(1), नगर क्षेत्र प्रपत्र 3(1)(A)) — PDF
- राजस्व महा-अभियान 2025 (16 अगस्त–20 सितंबर 2025): उत्तराधिकार नामांतरण और बँटवारा नामांतरण के कागज़ — biharbhumiplus.bihar.gov.in/mah
- नागरिक सुविधाओं के बारे में जानकारी, भाग-19: बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम, 2009, धारा 4 (ङ) "भू-खंड का विभाजन" — biharbhumi.bihar.gov.in/Biharbhumi/CitizenInfo.aspx
- "Table of Stamp Duty & Registration Fee", निबंधन विभाग, बिहार: पेज 6, क्रम 39 (Partition Deed; विरासत/पारिवारिक संपत्ति पर ₹50 + ₹50; बाक़ी बँटवारे अनुच्छेद 45 के तहत, अनुच्छेद 15 की बॉन्ड दर से) — PDF
- सुप्रीम कोर्ट: Vineeta Sharma v. Rakesh Sharma, 11.08.2020, पैरा 127-129 (धारा 6, बेटी सहदायिक, मौखिक बँटवारा) · B.S. Lalitha v. Bhuvanesh, 2026 INSC 499, पैरा 61 (Class I वारिस) · Samiullah v. State of Bihar, 2025 INSC 1292, 07.11.2025, पैरा 38 (अधिसूचना IV.M-1-12/2019-3644 दिनांक 10.10.2019 रद्द) — sci.gov.in
यह जानकारी सरकारी स्रोतों से 28 अक्टूबर 2026 को जाँची गई है। नियम बदलते रहते हैं, पैसा देने से पहले रजिस्ट्री या अंचल ऑफ़िस से पक्का कर लें।