पटना में रजिस्ट्री का खर्च 2026: स्टांप ड्यूटी, फ़ीस और MVR
सीधा जवाब: पटना (पूरे बिहार) में ज़मीन, मकान या फ़्लैट की ख़रीद (केवाला/सेल डीड) की रजिस्ट्री पर आम तौर पर 6% स्टांप ड्यूटी + 2% निबंधन शुल्क = कुल 8% लगता है। पुरुष विक्रेता से महिला ख़रीदार के मामले में यह 5.7% + 1.9% = 7.6% है, और महिला विक्रेता से पुरुष ख़रीदार के मामले में 6.3% + 2.1% = 8.4%। यह प्रतिशत दस्तावेज़ में लिखी क़ीमत पर नहीं, बल्कि लिखी क़ीमत और MVR (सरकारी न्यूनतम मूल्य) में जो ज़्यादा हो, उस पर लगता है।
पटना में प्लॉट या फ़्लैट ख़रीदने वाले ज़्यादातर लोग क़ीमत तो तय कर लेते हैं, पर रजिस्ट्री के खर्च का अंदाज़ा आख़िरी हफ़्ते में लगाते हैं — और तब पता चलता है कि क़ीमत के ऊपर लाखों रुपये और चाहिए। यह गाइड सरकारी तालिका से बताती है कि कौन-सा शुल्क कितना है, किसे कम लगता है, और अपना खर्च पहले से कैसे निकालें।
पटना में रजिस्ट्री का खर्च कितना है? (केवाला / सेल डीड)
| किससे किसको | स्टांप ड्यूटी | निबंधन शुल्क | कुल |
|---|---|---|---|
| पुरुष विक्रेता → महिला ख़रीदार | 5.7% | 1.9% | 7.6% |
| महिला विक्रेता → पुरुष ख़रीदार | 6.3% | 2.1% | 8.4% |
| बाक़ी सभी मामले (जैसे पुरुष → पुरुष, महिला → महिला) | 6% | 2% | 8% |
ये दरें ज़मीन, मकान और फ़्लैट — तीनों की ख़रीद पर एक जैसी हैं; पटना शहर और ग्रामीण इलाक़े (जैसे बिहटा, नौबतपुर, पुनपुन) में प्रतिशत वही है। फ़र्क़ सिर्फ़ MVR का होता है, जो हर इलाक़े में अलग है।
संयुक्त नाम (जैसे पति-पत्नी) में ख़रीद: सरकारी तालिका में सिर्फ़ ऊपर के तीन मामले लिखे हैं। संयुक्त नाम पर कौन-सी दर लगेगी, यह सौदा पक्का करने से पहले अपने अवर निबंधन कार्यालय से पूछकर लिख लें।
MVR क्या है और रजिस्ट्री का खर्च उससे कैसे तय होता है?
MVR (Minimum Value Register / न्यूनतम मूल्य पंजी) सरकार की तय की हुई वह दर है जिससे कम क़ीमत पर किसी इलाक़े की ज़मीन या फ़्लैट की रजिस्ट्री का स्टांप नहीं कटता। आम बोलचाल में लोग इसे सर्किल रेट भी कहते हैं।
- अगर आपके केवाले में लिखी क़ीमत MVR से ज़्यादा है → स्टांप ड्यूटी और फ़ीस लिखी क़ीमत पर।
- अगर लिखी क़ीमत MVR से कम है → स्टांप ड्यूटी और फ़ीस MVR वाली क़ीमत पर।
यानी "काग़ज़ पर कम दाम लिखवा लेंगे तो स्टांप बचेगा" वाली सलाह काम नहीं करती। बिहार निबंधन नियमावली, 2008 के नियम 9(2) के अनुसार, अगर दस्तावेज़ पर MVR से कम स्टांप ड्यूटी दी गई है, तो निबंधन पदाधिकारी मामला स्टांप अधिनियम की धारा 47-A के तहत मूल्यांकन के लिए भेज देता है। और असली दाम से कम लिखवाना आगे बेचने, लोन लेने और टैक्स के हिसाब में आपको ही नुक़सान पहुँचाता है।
2026 में MVR पर ध्यान दें: 2026 में पटना समेत बिहार में MVR बढ़ाए जाने की ख़बरें आई हैं। इसलिए किसी पुराने आँकड़े, वीडियो या प्राइवेट कैलकुलेटर पर भरोसा न करें। अपने मौज़ा, खाता-खेसरा या फ़्लैट की आज की MVR उसी अवर निबंधन कार्यालय से पूछें जहाँ रजिस्ट्री होगी, और बयाना देने से पहले पूरा हिसाब लिखवा लें।
रजिस्ट्री के खर्च का हिसाब: एक उदाहरण
मान लीजिए पटना में एक प्लॉट का सौदा ₹40 लाख में हुआ है और उस प्लॉट की MVR इससे कम है (यानी हिसाब ₹40 लाख पर लगेगा):
| मामला | स्टांप ड्यूटी | निबंधन शुल्क | कुल सरकारी खर्च |
|---|---|---|---|
| पुरुष → पुरुष (6% + 2%) | ₹2,40,000 | ₹80,000 | ₹3,20,000 |
| पुरुष → महिला (5.7% + 1.9%) | ₹2,28,000 | ₹76,000 | ₹3,04,000 |
| महिला → पुरुष (6.3% + 2.1%) | ₹2,52,000 | ₹84,000 | ₹3,36,000 |
इसमें स्कैनिंग फ़ीस (नीचे देखें) अलग से जुड़ती है। अगर उसी प्लॉट की MVR ₹50 लाख होती, तो पूरा हिसाब ₹50 लाख पर होता — पुरुष → पुरुष के मामले में ₹4,00,000।
महिला के नाम रजिस्ट्री का फ़ायदा: पुरुष विक्रेता से ख़रीद पर ₹40 लाख के सौदे में लगभग ₹16,000 कम लगते हैं। पर नाम सिर्फ़ स्टांप बचाने के लिए न चुनें — जिसके नाम रजिस्ट्री होगी, क़ानूनन मालिक वही होगा। होम लोन, विरासत और परिवार की स्थिति देखकर फ़ैसला करें।
स्टांप ड्यूटी और फ़ीस के अलावा और कौन-से खर्च?
| खर्च | कितना |
|---|---|
| स्कैनिंग फ़ीस (सरकारी) | दस्तावेज़ के कुल पन्ने (एंडोर्समेंट और फ़ोटो वाले पन्ने मिलाकर): 1–10 पन्ने ₹250, 11–20 पन्ने ₹500, 20 से ज़्यादा ₹1,000 |
| ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पर छूट | सरकारी तालिका के अनुसार देय स्टांप ड्यूटी पर 1% की छूट, अधिकतम ₹2,000 (आपके मामले में यह मिलेगी या नहीं, रजिस्ट्री ऑफिस से पूछें) |
| दस्तावेज़ लिखने वाले (कातिब/डीड राइटर) या वकील की फ़ीस | सरकारी नहीं — आपसी तय। पहले ही पूछकर लिख लें। |
| होम लोन का बंधक (मॉर्गेज) दस्तावेज़ | बैंक/वित्तीय संस्था के पक्ष में रिटेल हाउसिंग लोन पर स्टांप ड्यूटी अधिकतम ₹20,000 और निबंधन शुल्क अधिकतम ₹5,000 |
रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज की कोई सरकारी फ़ीस नहीं है। उसका तरीक़ा हमारी दाखिल-खारिज ऑनलाइन गाइड में है।
गिफ़्ट, बँटवारा, हक़त्याग और पावर ऑफ़ अटॉर्नी पर कितना लगता है?
पटना में बहुत-से मामले ख़रीद-बिक्री के नहीं, परिवार के भीतर के होते हैं। सरकारी तालिका के अनुसार:
| दस्तावेज़ | स्टांप ड्यूटी | निबंधन शुल्क |
|---|---|---|
| दान (गिफ़्ट डीड) | ख़रीद जैसी ही: पुरुष → महिला 5.7%, महिला → पुरुष 6.3%, बाक़ी 6% | 1.9% / 2.1% / 2% |
| पुश्तैनी/पारिवारिक संपत्ति का बँटवारा (Partition) | ₹50 | ₹50 |
| पुश्तैनी संपत्ति का हक़त्याग (Release) — हक़ छोड़ने वाले के भाई/बहन, माता/पिता, पति/पत्नी, या पहले गुज़र चुके बेटे के बेटा/बेटी (या इनके क़ानूनी वारिस) के द्वारा या उनके पक्ष में | हिस्से की MVR वाली क़ीमत का 3% | ₹1,000 |
| हक़त्याग — बाक़ी मामलों में | 6% (ख़रीद जैसा) | ₹1,000 |
| परिवार के सदस्य के पक्ष में सेटलमेंट डीड | 3% | 2% |
| पावर ऑफ़ अटॉर्नी — परिवार से बाहर के व्यक्ति को, बिहार की संपत्ति बेचने के लिए | 6% (MVR वाली क़ीमत पर) | ₹10,000 |
| पावर ऑफ़ अटॉर्नी — परिवार के सदस्य को (तालिका के अनुसार परिवार = पिता, माता, पति/पत्नी, बेटा, बेटी, भाई/बहन, बहू, और बेटे/बेटी की संतान) | ₹1,000 | ₹1,000 |
ध्यान दें: बिहार में परिवार के भीतर गिफ़्ट पर भी ख़रीद वाली ही दर लगती है — तालिका में इसके लिए अलग छूट नहीं है। बँटवारे और हक़त्याग की शर्तें (कौन-सा रिश्ता गिना जाता है, कौन-सी संपत्ति "पुश्तैनी" मानी जाएगी) हर मामले में अलग होती हैं, इसलिए दस्तावेज़ बनवाने से पहले किसी जानकार से अपना मामला दिखा लें।
बयाना / एग्रीमेंट (एकरारनामा) की रजिस्ट्री पर कितना लगता है?
अचल संपत्ति की बिक्री के एग्रीमेंट पर सरकारी तालिका में 2% स्टांप ड्यूटी और ₹1,000 निबंधन शुल्क लिखा है। बहुत-से लोग बिना रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के सिर्फ़ रसीद पर बयाना दे देते हैं — यह जोखिम भरा है। एग्रीमेंट की स्टांप ड्यूटी बाद में केवाले की ड्यूटी में कैसे गिनी जाएगी, यह अवर निबंधन कार्यालय से पूछकर ही तय करें।
फ़्लैट ख़रीद रहे हैं, तो RERA के तहत बिल्डर रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के बिना कुल क़ीमत का 10% से ज़्यादा नहीं ले सकता। पूरी जाँच-सूची हमारी पटना में फ़्लैट ख़रीदने से पहले चेकलिस्ट में है।
रजिस्ट्री से पहले क्या जाँचें ताकि पैसा न डूबे?
- संपत्ति रजिस्ट्री पर रोक वाली सूची में तो नहीं? निबंधन विभाग के पोर्टल enibandhan.bihar.gov.in पर "View Prohibited Properties" में निबंधन कार्यालय, अंचल, थाना, खाता और प्लॉट नंबर से देखा जा सकता है।
- विक्रेता की जमाबंदी ऑनलाइन है और रकबा पूरा है? नहीं है तो रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज अटकेगा। देखें: जमाबंदी, खतियान, LPC ऑनलाइन कैसे देखें।
- ज़मीन मास्टर प्लान में किस ज़ोन में है? ग्रीन/कृषि ज़ोन या प्रस्तावित सड़क में आने वाली ज़मीन की रजिस्ट्री हो जाती है, पर घर बनाने में दिक्कत आ सकती है। देखें: पटना मास्टर प्लान 2031 आसान भाषा में।
- पूरा खर्च लिखित में: MVR, स्टांप, फ़ीस, स्कैनिंग और डीड राइटर — सबका जोड़ बयाने से पहले।
- "Table of Stamp Duty & Registration Fee", मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग (निबंधन), बिहार सरकार — PDF (nibandhan.bihar.gov.in)
- पेज 3, क्रम 19 (अनुच्छेद 23, Conveyance): 5.7%/1.9%, 6.3%/2.1%, 6%/2%
- पेज 2, क्रम 15: "purchase price or value based on MVR, whichever is higher"
- MVR से कम स्टांप पर: बिहार निबंधन नियमावली, 2008 — नियम 2(v) (MVR की परिभाषा, बिहार स्टांप (लिखतों के अवमूल्यन का निवारण) नियमावली, 1995 के तहत) और नियम 9(2) (धारा 47-A के तहत रेफ़र)
- पेज 1, क्रम 5(b): बिक्री एग्रीमेंट 2% + ₹1,000 · पेज 4, क्रम 28: गिफ़्ट · पेज 5, क्रम 34: मॉर्गेज (हाउसिंग लोन अधिकतम ₹20,000 + ₹5,000)
- पेज 6, क्रम 39: बँटवारा ₹50 + ₹50 · पेज 7, क्रम 43: पावर ऑफ़ अटॉर्नी · पेज 8, क्रम 47 और 50: हक़त्याग, सेटलमेंट
- पेज 10: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पर 1% छूट, अधिकतम ₹2,000 (S.O. No. 10/2016) · पेज 11: स्कैनिंग फ़ीस
- "View Prohibited Properties" — enibandhan.bihar.gov.in
- तालिका और पोर्टल 14.10.2026 को जाँचे गए। विभाग की वेबसाइट पर यही सबसे ताज़ा प्रकाशित तालिका है; MVR की 2026 वाली जानकारी समाचारों पर आधारित है — अपने इलाक़े की MVR रजिस्ट्री ऑफिस से ही पक्की करें।
आपको क्या करना चाहिए? (हमारी सलाह)
- बजट में सिर्फ़ 8% नहीं, थोड़ी गुंजाइश और रखें — स्टांप और फ़ीस के अलावा स्कैनिंग, डीड राइटर और आने-जाने का खर्च भी होता है।
- MVR पहले पूछें: सौदे की बात पक्की होते ही अवर निबंधन कार्यालय से उस खेसरा/फ़्लैट की आज की MVR जान लें। अगर MVR सौदे की क़ीमत से ज़्यादा है, तो खर्च उसी पर लगेगा।
- काग़ज़ पर दाम कम लिखवाने का दबाव न मानें। इससे स्टांप MVR से नीचे नहीं जाता, और आगे आपको ही नुक़सान होता है।
- महिला के नाम ख़रीद पर थोड़ी बचत है — पर मालिकाना हक़ का फ़ैसला सोच-समझकर करें।
- रजिस्ट्री के बाद उसी हफ़्ते दाखिल-खारिज का आवेदन करें। प्लॉट की पूरी जाँच-सूची पटना में प्लॉट ख़रीदने की पूरी गाइड में है।
पटना रजिस्ट्री खर्च से जुड़े सवाल-जवाब
- बिहार में ज़मीन रजिस्ट्री में कितना पैसा लगता है?
आम तौर पर 6% स्टांप ड्यूटी और 2% निबंधन शुल्क, यानी कुल 8%। पुरुष विक्रेता से महिला ख़रीदार के मामले में 5.7% + 1.9% = 7.6%, और महिला विक्रेता से पुरुष ख़रीदार के मामले में 6.3% + 2.1% = 8.4%। यह प्रतिशत लिखी क़ीमत और MVR में जो ज़्यादा हो, उस पर लगता है।
- महिला के नाम रजिस्ट्री कराने पर बिहार में कितनी छूट है?
पुरुष विक्रेता से महिला ख़रीदार को ख़रीद पर स्टांप ड्यूटी 6% की जगह 5.7% और निबंधन शुल्क 2% की जगह 1.9% है। ₹40 लाख के सौदे पर यह लगभग ₹16,000 की बचत है।
- पटना में फ़्लैट की रजिस्ट्री का खर्च कितना है?
फ़्लैट की ख़रीद पर भी वही दरें हैं जो ज़मीन पर: आम तौर पर 6% + 2%। हिसाब फ़्लैट की लिखी क़ीमत और उसकी MVR में जो ज़्यादा हो, उस पर होता है।
- MVR से कम दाम पर रजिस्ट्री हो सकती है क्या?
दस्तावेज़ में कम दाम लिखा जा सकता है, पर स्टांप ड्यूटी और फ़ीस कम से कम MVR वाली क़ीमत पर ही लगेगी। इसलिए दाम कम लिखवाने से स्टांप नहीं बचता।
- पटना में अपनी ज़मीन की MVR कैसे पता करें?
MVR हर इलाक़े में अलग होती है और 2026 में इसके बढ़ने की ख़बरें आई हैं। अपने मौज़ा और खाता-खेसरा की आज की MVR उसी अवर निबंधन कार्यालय से पूछें जहाँ रजिस्ट्री होगी।
- बिहार में पुश्तैनी ज़मीन के बँटवारे की रजिस्ट्री में कितना खर्च है?
सरकारी तालिका के अनुसार पुश्तैनी/पारिवारिक संपत्ति के बँटवारे के दस्तावेज़ पर ₹50 स्टांप ड्यूटी और ₹50 निबंधन शुल्क है।
- दाखिल-खारिज की फ़ीस कितनी है?
बिहार में दाखिल-खारिज की कोई सरकारी फ़ीस नहीं है। रजिस्ट्री के 90 दिन के भीतर बिहार भूमि पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करें।
यह लेख 14 अक्टूबर 2026 तक मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, बिहार की प्रकाशित स्टांप ड्यूटी और फ़ीस तालिका पर आधारित है। दरें और MVR बदल सकती हैं — रजिस्ट्री से पहले अपने अवर निबंधन कार्यालय से पुष्टि करें।