Patna Me Registry Kaise Hoti Hai: पूरी प्रक्रिया 2026 (पेपरलेस, स्टेप-बाय-स्टेप)
सीधा जवाब: पटना में अब ज़मीन, मकान या फ़्लैट की रजिस्ट्री पेपरलेस होती है। बिहार निबंधन नियमावली 2026 के तहत केवाला (सेल डीड) ऑनलाइन बनता है, विक्रेता, ख़रीदार और गवाह उस पर आधार से e-Sign करते हैं, स्टांप ड्यूटी और फ़ीस ई-स्टांप / ई-चालान से ऑनलाइन भरी जाती है, और दस्तावेज़ ऑनलाइन ही रजिस्ट्री ऑफ़िस को भेजा जाता है। फिर तय दिन विक्रेता ऑफ़िस जाकर फ़ोटो और आधार बायोमेट्रिक (अँगूठा या आँख) से पहचान कराता है, और रजिस्ट्री होते ही कॉपी हाथ में या PDF लिंक मोबाइल/ई-मेल पर मिल जाता है। पटना ज़िले के सभी 11 रजिस्ट्री ऑफ़िसों में यह व्यवस्था 17 अगस्त 2026 तक लागू हो चुकी है।
पटना में बहुत-से लोग अब भी पुरानी तस्वीर लेकर चलते हैं: कातिब के पास कागज़ पर डीड लिखवाओ, स्टांप पेपर ख़रीदो, ऑफ़िस में दिन भर लाइन लगाओ। 2026 में यह बदल चुका है। अगर आप दानापुर, बिहटा, फुलवारीशरीफ़ या पटना सिटी में प्लॉट या फ़्लैट ले रहे हैं, तो यह गाइड नए नियमों से बताती है कि रजिस्ट्री के दिन से पहले क्या तैयार रखना है, ऑफ़िस में क्या होता है, और बाद में क्या करना है। ख़र्च का पूरा हिसाब अलग लेख में है: पटना रजिस्ट्री ख़र्च, स्टांप ड्यूटी और MVR 2026।
पटना में रजिस्ट्री का नया तरीक़ा क्या है? (बिहार निबंधन नियमावली 2026)
बिहार सरकार ने 11 जुलाई 2026 को बिहार निबंधन नियमावली 2026 जारी की, जिसने 2008 की पुरानी नियमावली की जगह ली। इसमें तीन बड़े बदलाव हैं:
- दस्तावेज़ सिर्फ़ ऑनलाइन पेश होगा: नियम 6(1) के अनुसार रजिस्ट्री के लिए दस्तावेज़ ऑफ़िस में केवल ऑनलाइन ई-फ़ाइलिंग से पेश किया जाएगा।
- हस्ताक्षर की जगह e-Sign: डीड का ड्राफ़्ट देखकर सभी पक्षकार और गवाह आधार से (या डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफ़िकेट, DSC से) e-Sign करेंगे (नियम 5(4))।
- कागज़ के साथ नक़्शा और फ़ोटो: ज़मीन/मकान का नज़री नक़्शा (सड़क और आसपास के निशान वाला नक़्शा) और संपत्ति की फ़ोटो अपलोड करना ज़रूरी है (नियम 5(1), 7(1)(iv))।
यह नियमावली तीन चरणों में ऑफ़िस-दर-ऑफ़िस लागू हुई। पटना ज़िले में यह क्रम रहा:
| पटना ज़िले का रजिस्ट्री ऑफ़िस | पेपरलेस रजिस्ट्री कब से | अधिसूचना |
|---|---|---|
| अवर निबंधन कार्यालय फतुहा, सम्पतचक | 18 जुलाई 2026 | गजट सं. 760 (पहला चरण) |
| ज़िला निबंधन कार्यालय पटना; अवर निबंधन कार्यालय पटना सिटी, दानापुर, बाढ़, बिक्रम, मसौढ़ी, फुलवारीशरीफ़, बिहटा, पालीगंज | 17 अगस्त 2026 | गजट सं. 984 (तीसरा चरण) |
तीनों चरणों में कुल 10 + 40 + 91 = 141 ऑफ़िस आए, और ई-निबंधन पोर्टल के अनुसार बिहार में कुल 141 रजिस्ट्री ऑफ़िस हैं। यानी अब पूरे बिहार में रजिस्ट्री नई व्यवस्था से हो रही है। आपकी ज़मीन किस ऑफ़िस में रजिस्टर होगी, यह मौज़ा (गाँव), अंचल और थाना के हिसाब से तय होता है (नियम 4)।
रजिस्ट्री से पहले क्या करें? (सबसे ज़रूरी हिस्सा)
रजिस्ट्री ऑफ़िस यह जाँच नहीं करता कि बेचने वाले का ज़मीन पर पूरा हक़ है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में बिहार का वह नियम रद्द कर दिया था जिसमें विक्रेता के नाम जमाबंदी न होने पर रजिस्ट्री रोकी जा सकती थी, और नई नियमावली में भी ऐसी कोई शर्त नहीं है। मतलब रजिस्ट्री हो जाना इस बात का सबूत नहीं कि ज़मीन साफ़ है। यह जाँच ख़रीदार को ख़ुद, पैसा देने से पहले करनी है:
- विक्रेता के नाम जमाबंदी और ताज़ा लगान रसीद, खतियान और पिछला केवाला: जमाबंदी, खतियान, LPC ऑनलाइन कैसे देखें
- ज़मीन पर पहले की बिक्री, बंधक या केस: Encumbrance Certificate और लोन/केस की जाँच
- ई-निबंधन पोर्टल पर View Prohibited Properties: कहीं वह गाँव/खेसरा रजिस्ट्री-रोक वाली सूची में तो नहीं
- पुश्तैनी ज़मीन है तो सभी हिस्सेदारों की सहमति: पुश्तैनी ज़मीन का बँटवारा और वंशावली
- गाँव पाटलिपुत्र टाउनशिप की अधिसूचना में है तो वहाँ निर्माण-रोक की स्थिति: पाटलिपुत्र टाउनशिप गाँवों की सूची
पूरी जाँच-सूची (नाप, रास्ता, जलजमाव, कट्ठा-धुर का हिसाब) पटना में प्लॉट ख़रीदने की पूरी गाइड में है। यहाँ से आगे मान लेते हैं कि जाँच हो चुकी है और सौदा पक्का है।
पटना में रजिस्ट्री के लिए कौन-से कागज़ चाहिए?
| क्या चाहिए | किसका | क्यों |
|---|---|---|
| आधार नंबर, और आधार से जुड़ा मोबाइल | विक्रेता, ख़रीदार, गवाह | e-Sign और ऑफ़िस में बायोमेट्रिक पहचान (नियम 5(4), 15, 17)। जो आधार पहचान के लिए सहमति न दे, उसकी पहचान अधिकारी किसी पहचानने वाले गवाह से कर सकता है (नियम 15)। |
| PAN कार्ड (या आयकर नियमों में बताया विकल्प) | विक्रेता, ख़रीदार | अधिकारी जाँचता है कि आयकर से जुड़े प्रावधान पूरे हुए हैं (नियम 7(1)(xiii))। ₹50 लाख या ज़्यादा के सौदे पर 1% TDS ख़रीदार को काटना है। |
| पक्षकारों और गवाहों की फ़ोटो | सभी | ई-फ़ाइलिंग के समय अपलोड होना ज़रूरी (नियम 7(1)(vii))। |
| नज़री नक़्शा और संपत्ति की फ़ोटो | संपत्ति | पहचान के लिए ज़रूरी; इसमें अक्षांश-देशांतर या ULPIN जैसा नंबर भी हो सकता है (नियम 2(xxviii), 7(1)(iv))। |
| संपत्ति का पूरा विवरण: मौज़ा, थाना नंबर, खाता, खेसरा, रकबा (कट्ठा/धुर या डिसमिल), चौहद्दी | संपत्ति | विवरण अधूरा हो तो रजिस्ट्री से मना किया जा सकता है (नियम 24(1))। फ़्लैट में फ़्लैट नंबर, मंज़िल, सुपर/कारपेट एरिया और ज़मीन में हिस्सा। |
| पिछला केवाला / खतियान, जमाबंदी नंबर, रसीद | विक्रेता | डीड में "स्वामित्व का स्रोत" लिखने के लिए, और आपकी अपनी जाँच के लिए। |
| पावर ऑफ़ अटॉर्नी (अगर कोई और विक्रेता की जगह आ रहा है) | एजेंट | पेश करने या स्वीकार करने का अधिकार देने वाली POA धारा 33 के तहत प्रमाणित होनी चाहिए (नियम 28(2)), वरना रजिस्ट्री रुक सकती है (नियम 24(8))। |
| RERA पंजीकरण (नए फ़्लैट या प्रोजेक्ट के प्लॉट में) | बिल्डर | जिस प्रोजेक्ट का RERA बिहार में पंजीकरण ज़रूरी था पर नहीं हुआ, उसकी यूनिट की रजिस्ट्री से मना किया जा सकता है (नियम 24(15))। |
गवाह कितने चाहिए और ऑफ़िस किन और कागज़ों की कॉपी माँगता है, यह अपने अवर निबंधन कार्यालय या ई-निबंधन हेल्पडेस्क (14544) से पहले ही पूछ लें।
पटना में रजिस्ट्री कैसे होती है? स्टेप-बाय-स्टेप
- MVR देखें और ख़र्च निकालें। स्टांप ड्यूटी लिखी क़ीमत और सरकारी MVR में जो ज़्यादा हो, उस पर लगती है: ख़रीद पर आम तौर पर 7% स्टांप + 2% निबंधन शुल्क (पुरुष विक्रेता से महिला ख़रीदार को 6.6% + 1.9%)। पूरा हिसाब: रजिस्ट्री ख़र्च गाइड।
- डीड ऑनलाइन तैयार करें। पक्षकार ख़ुद ई-निबंधन पोर्टल (enibandhan.bihar.gov.in, Citizen Login / Document Registration सेवा) पर, या किसी लाइसेंसी सर्विस प्रोवाइडर की मदद से, पक्षकारों और संपत्ति का विवरण भरते हैं और फ़ोटो, नज़री नक़्शा और संपत्ति की फ़ोटो अपलोड करते हैं (नियम 5(1), 5(6))।
- ड्राफ़्ट ध्यान से पढ़ें। सॉफ़्टवेयर डीड का प्रीव्यू बनाता है (नियम 5(3))। नाम, पिता का नाम, खाता-खेसरा, रकबा, चौहद्दी और क़ीमत एक-एक करके मिलाएँ। सर्विस प्रोवाइडर से बनवा रहे हैं तो उसकी ज़िम्मेदारी है कि डीड पढ़कर सुनाए, और सभी पक्षकारों और गवाहों की लिखित सहमति रखे (नियम 5(6) के परंतुक)।
- सभी लोग e-Sign करें। विक्रेता, ख़रीदार और गवाह आधार की सहमति-आधारित सेवा से या DSC से e-Sign करते हैं। जो पक्षकार डीड पेश कर रहा है, उसका e-Sign भी ज़रूरी है (नियम 5(4), 6(2), 6(3))।
- स्टांप ड्यूटी और फ़ीस ऑनलाइन भरें। भुगतान ई-स्टांप या ई-चालान से होता है (नियम 5(5))। सर्विस प्रोवाइडर से लेने पर "ई-स्टांप कोड" बनता है, जिसे रजिस्ट्री अधिकारी जाँचकर लॉक करता है (ई-स्टांप नियमावली 2026, नियम 14(2))। नक़द या पुराने स्टांप पेपर की ज़रूरत नहीं।
- ऑनलाइन जमा करें और स्लॉट बुक करें। दस्तावेज़ ई-फ़ाइलिंग से ऑफ़िस को जाता है (नियम 6(1)), और ऑफ़िस जाने का समय (स्लॉट) भी सिस्टम से बुक होता है (नियम 2(xxxvii))।
- ऑफ़िस की शुरुआती जाँच। अधिकारी देखता है कि सही ऑफ़िस है, सबके e-Sign और फ़ोटो हैं, स्टांप पूरा है और संपत्ति का विवरण ठीक है (नियम 7)। कमी हो तो दस्तावेज़ सुधार के लिए वापस भेजा जाता है, और सुधार के बाद फिर से फ़ाइल होता है (नियम 7(2), 7(3))।
- तय दिन ऑफ़िस जाएँ। दस्तावेज़ लिखने वाले (विक्रेता, और पुश्तैनी ज़मीन में सभी बेचने वाले हिस्सेदार) को ख़ुद रजिस्ट्री अधिकारी के सामने आना होता है (नियम 20(1))। वहाँ उनकी फ़ोटो ली जाती है और आधार से अँगूठे या आँख (आइरिस) का मिलान होता है (नियम 9(5), 17)। बीमारी या उम्र से निशान न मिले, तो DSC से पहचान होती है (नियम 17(7))।
- स्वीकार और रजिस्ट्री। विक्रेता अधिकारी के सामने मानता है कि डीड उसी ने लिखी है (धारा 34)। सब ठीक हो तो अधिकारी अपने e-Sign से पृष्ठांकन करके दस्तावेज़ रजिस्टर कर देता है (नियम 9(6))।
- उसी समय कॉपी। रजिस्ट्री होते ही छपी कॉपी पेश करने वाले को मिलती है और/या रजिस्टर्ड डीड की PDF का लिंक पक्षकारों के मोबाइल/ई-मेल पर भेजा जाता है (नियम 9(8), 20(2))।
- डीड पर दस्तख़त (execution) की तारीख़ से चार महीने के अंदर उसे रजिस्ट्री के लिए पेश करना होता है (रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1908, धारा 23)।
- अगर विक्रेता इन चार महीनों में स्वीकार करने नहीं आया, तो अधिकारी औपचारिक रूप से रजिस्ट्री से मना करता है; पक्षकार 30 दिन में रजिस्ट्रार के पास अपील कर सकते हैं (नियम 26(1))। देरी की माफ़ी जुर्माने के साथ ही मिलती है (नियम 8, धारा 25 और 34)।
- सलाह: e-Sign तभी करें जब पूरा पैसा और रजिस्ट्री की तारीख़ तय हो।
रजिस्ट्री के दिन ऑफ़िस में क्या होता है?
पुरानी व्यवस्था में डीड ऑफ़िस में ही काग़ज़ पर पेश होती थी और कई काउंटर घूमने पड़ते थे। नई व्यवस्था में डीड, भुगतान और e-Sign पहले ही हो चुके होते हैं, इसलिए ऑफ़िस में मुख्य काम पहचान और स्वीकार का है:
- स्लॉट के समय विक्रेता और पेश करने वाला पहुँचें; सबके पास असली आधार और PAN रखें।
- अधिकारी स्टांप और संपत्ति की क़ीमत की जाँच करता है। लिखी क़ीमत MVR से कम निकली और कम स्टांप दी गई हो, तो दस्तावेज़ पूरी ड्यूटी भरने के लिए लौटाया जाता है; न भरने पर मामला कलेक्टर / प्रमंडलीय AIG के पास धारा 47-A में जाता है और रजिस्ट्री वहीं रुक जाती है (नियम 9(4), 21)।
- फ़ोटो और आधार बायोमेट्रिक के बाद अधिकारी पहचान से संतुष्ट न हो, तो किसी और व्यक्ति से भी पूछ सकता है (नियम 18)।
- अगर कुछ विक्रेता आए और कुछ नहीं, तो आए हुए लोगों का हिस्सा दर्ज हो जाता है और बाक़ी समय-सीमा के अंदर आकर स्वीकार कर सकते हैं; पूरी रजिस्ट्री सबके स्वीकार के बाद ही होती है (नियम 9(7))।
किन कारणों से रजिस्ट्री रुक या रिजेक्ट हो सकती है?
| कारण | नियम | कैसे बचें |
|---|---|---|
| संपत्ति का विवरण पहचान के लायक़ नहीं | 24(1) | खाता, खेसरा, रकबा, चौहद्दी जमाबंदी/खतियान से मिलाकर लिखें |
| विक्रेता आया ही नहीं, या लिखने से मुकर गया | 24(2), 24(3) | बयाना छोटा रखें, पूरा भुगतान रजिस्ट्री के दिन |
| आधार से मिली फ़ोटो/जानकारी और डीड की जानकारी मेल नहीं खाती | 24(6) | नाम की स्पेलिंग और पिता/पति का नाम आधार जैसा ही लिखें |
| एजेंट की पावर ऑफ़ अटॉर्नी ठीक से नहीं बनी | 24(8), 28 | POA की जाँच पहले करवाएँ |
| फ़ीस या जुर्माना नहीं भरा | 24(10) | ई-चालान/ई-स्टांप की रसीद सँभालकर रखें |
| RERA में ज़रूरी पंजीकरण के बिना प्रोजेक्ट का फ़्लैट/प्लॉट | 24(15) | RERA बिहार पर प्रोजेक्ट का पंजीकरण नंबर देखें |
| डीड लिखने के बाद विक्रेता की मृत्यु हो गई और उसके कुछ वारिस मान रहे, कुछ मुकर रहे | 24(13) | सभी वारिसों की सहमति पहले लें |
रजिस्ट्री से मना करने पर अधिकारी कारण लिखता है और पक्षकार को डाक, मोबाइल या ई-मेल से बताता है (नियम 25)। लिखने से मुकरने के अलावा किसी और कारण से मना होने पर धारा 72 में रजिस्ट्रार के पास अपील होती है; मुकरने वाले मामले में धारा 73 में आवेदन होता है (नियम 26(4), 26(5))।
75 साल से ज़्यादा उम्र या बीमार हों तो घर पर रजिस्ट्री कैसे होगी?
नई नियमावली में 75 साल या उससे ज़्यादा उम्र के व्यक्ति को धारा 38(1)(a) में "शारीरिक अशक्तता" वाला माना गया है, यानी अधिकारी या उसका भेजा कर्मचारी (कमीशन) घर जाकर फ़ोटो और बायोमेट्रिक ले सकता है। पहले यह सीमा 80 साल थी; 5 अगस्त 2026 के संशोधन से 75 साल हुई। हर रजिस्ट्री ऑफ़िस में मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट भी बनाई जा सकती है (नियम 23)।
| किसके लिए | सरकारी फ़ीस |
|---|---|
| 75 साल या ज़्यादा उम्र के व्यक्ति (अनुच्छेद K(1)(a)) | ₹1,000 |
| बीमारी/अशक्तता से ऑफ़िस न आ सकने वाले, जेल में बंद, या क़ानून से अदालत में हाज़िरी से छूट वाले (अनुच्छेद K(1)(b)) | ₹5,000 |
| धारा 31 में किसी भी व्यक्ति के घर पर अधिकारी का जाना (अनुच्छेद J(1)) | ₹15,000 |
यह फ़ीस स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क के अलावा है। आवेदन कैसे करना है, अपने अवर निबंधन कार्यालय से पूछें।
पटना से बाहर रहते हैं तो रजिस्ट्री कैसे करें?
डीड बनाना, e-Sign और भुगतान ऑनलाइन है, पर विक्रेता की पहचान और स्वीकार के लिए रजिस्ट्री ऑफ़िस में हाज़िरी अब भी ज़रूरी है। ख़रीदार के रूप में आप पुणे, बेंगलुरु या खाड़ी देश में हैं, तो आम रास्ता है किसी भरोसेमंद रिश्तेदार को सही ढंग से बनी और प्रमाणित पावर ऑफ़ अटॉर्नी देना। नियमावली में वीडियो-KYC से पहचान का प्रावधान है, पर वह सिर्फ़ उन दस्तावेज़ों के लिए है जिन्हें IGR अधिसूचित करे (नियम 17(7) के बाद का परंतुक); 18 अक्टूबर 2026 तक ऐसी कोई अधिसूचना हमें गजट में नहीं मिली। पूरा तरीक़ा: बाहर रहकर पटना में प्रॉपर्टी कैसे ख़रीदें।
रजिस्ट्री में ग़लती हो गई तो कैसे सुधरेगी?
रजिस्टर्ड डीड की ग़लती सुधार पत्र (rectification deed) से ठीक होती है (नियम 27)। दो तरह की ग़लती में बड़ा फ़र्क़ है:
- छोटी (minor) ग़लती: नाम की स्पेलिंग में मामूली फ़र्क़, या खाता नंबर, खेसरा नंबर (जिससे चौहद्दी न बदले), तौज़ी नंबर, जमाबंदी नंबर, पुरानी डीड का नंबर/साल/तारीख़ जैसे अंकों की टाइपिंग ग़लती।
- बड़ा बदलाव (material alteration): किसी पक्षकार का नाम बदलना या जोड़ना, चौहद्दी, लोकेशन या रकबा बदलना, execution की तारीख़ या क़ीमत बदलना। इस पर नई डीड जितनी स्टांप ड्यूटी और फ़ीस लगती है, और MVR भी सुधार पत्र की तारीख़ वाली लगती है।
इसलिए e-Sign से पहले प्रीव्यू को जमाबंदी, खतियान और आधार से मिलाना सबसे सस्ता बचाव है।
ई-स्टांप ख़रीद लिया पर रजिस्ट्री नहीं हुई तो पैसा वापस मिलेगा?
हाँ, पर कटौती के साथ। बिहार ई-स्टांप नियमावली 2026 (नियम 17) के अनुसार बिना इस्तेमाल हुए ई-स्टांप या ई-स्टांप कोड की वापसी का आवेदन ई-निबंधन सिस्टम में फ़ॉर्म-E से, जारी होने के एक साल के अंदर, कलेक्टर / प्रमंडलीय AIG को करना होता है। जाँच के बाद रक़म से 10% काटकर (कम से कम ₹200, ज़्यादा से ज़्यादा ₹5,000) बाक़ी लौटाई जाती है। इसलिए सौदा पक्का होने से पहले ई-स्टांप न लें।
रजिस्ट्री के बाद क्या करें?
- डीड की PDF और छपी कॉपी दो जगह सँभालकर रखें। बाद में सर्टिफ़ाइड कॉपी ई-निबंधन से ऑनलाइन मिलती है, और ऑनलाइन व ऑफ़िस वाली कॉपी बराबर मान्य हैं (नियम 47)।
- 90 दिन के अंदर दाखिल-खारिज का आवेदन बिहार भूमि पर करें, वरना जमाबंदी पुराने मालिक के नाम ही रहेगी: दाखिल-खारिज ऑनलाइन कैसे करें।
- दाखिल-खारिज के बाद अपने नाम से लगान रसीद कटवाएँ, और शहर में हैं तो नगर निगम का होल्डिंग टैक्स भी अपने नाम कराएँ।
- ₹50 लाख या ज़्यादा की ख़रीद पर काटा गया 1% TDS समय पर जमा हुआ, यह अपने CA से पक्का कर लें।
- बिहार निबंधन नियमावली, 2026 (अधिसूचना S.O. IV/M1-1-02/2026-4219, 11 जुलाई 2026), बिहार गजट (असाधारण) सं. 759, 13 जुलाई 2026: नियम 2(xxviii), 2(xxxvii), 4, 5, 6, 7 (पेज 52-55), नियम 8, 9 (पेज 55-56), नियम 15-20 (पेज 57-58), नियम 21-23 (पेज 58-59), नियम 24-26 (पेज 60-62), नियम 27-28 (पेज 62-63), नियम 47 (पेज 68), परिशिष्ट-E (पेज 102) — PDF
- बिहार निबंधन (संशोधन) नियमावली, 2026 (No. IV/M1-1-02/2026/4871, 5 अगस्त 2026), बिहार गजट (असाधारण) सं. 942, 6 अगस्त 2026, पेज 2: नियम 23(5) और परिशिष्ट-E क्रम 01 में 80 की जगह 75 वर्ष — PDF
- पेपरलेस रजिस्ट्री के चरण: अधिसूचना 4220, 11.07.2026 (गजट सं. 760, पेज 1-2: फतुहा, सम्पतचक 18.07.2026 से; 80+ के लिए घर बैठे रजिस्ट्री पूरे बिहार में) — PDF; अधिसूचना 4808, 01.08.2026 (गजट सं. 916, 40 ऑफ़िस) — PDF; अधिसूचना 4961, 11.08.2026 (गजट सं. 984, पेज 2, क्रम 31-39: पटना के 9 ऑफ़िस 17.08.2026 से) — PDF
- बिहार स्टांप (सर्विस प्रोवाइडर लाइसेंस और ई-स्टांप की आपूर्ति) नियमावली, 2026 (S.O. No. 10/Ni.(Mudrank Niyamawali)-39/2026/3872), बिहार गजट (असाधारण) सं. 606, 11 जून 2026: नियम 11 (पेज 15), 14-15 (पेज 15-16), 17 (पेज 17) — PDF
- ई-निबंधन पोर्टल, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, बिहार: Citizen Login, Document Registration, View Prohibited Properties, 141 रजिस्ट्री ऑफ़िस, हेल्पडेस्क 14544 / 0612-3522300 — enibandhan.bihar.gov.in
- रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908: धारा 23, 25, 31, 32, 34, 38, 72, 73
- सभी दस्तावेज़ और पोर्टल 18.10.2026 को खोलकर जाँचे गए।
आपको क्या करना चाहिए? (हमारी सलाह)
- रजिस्ट्री को "आख़िरी औपचारिकता" न समझें। ऑफ़िस सिर्फ़ पहचान, स्टांप और विवरण देखता है, मालिकाना हक़ नहीं। कागज़ की जाँच रजिस्ट्री से पहले करवाएँ।
- ड्राफ़्ट ख़ुद पढ़ें, भले सर्विस प्रोवाइडर बना रहा हो। खेसरा, रकबा (कट्ठा-धुर) और चौहद्दी की एक ग़लती बाद में नई डीड जितना ख़र्च करा सकती है।
- कम क़ीमत लिखवाकर स्टांप बचाने की कोशिश न करें। MVR से कम पर रजिस्ट्री अटकती है और मामला 47-A में जाता है।
- पूरा भुगतान बैंक ट्रांसफ़र से और डीड में उसका ज़िक्र; नक़द से बचें।
- घर में 75+ उम्र के विक्रेता हैं तो ₹1,000 की घर-बैठे सुविधा पहले से बुक करें; उन्हें ऑफ़िस ले जाने की ज़रूरत नहीं।
- रजिस्ट्री के अगले हफ़्ते ही दाखिल-खारिज का आवेदन कर दें।
पटना रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़े सवाल-जवाब
- पटना में जमीन की रजिस्ट्री कैसे होती है?
बिहार निबंधन नियमावली 2026 के तहत डीड ई-निबंधन पर ऑनलाइन बनती है, सभी पक्षकार और गवाह आधार से e-Sign करते हैं, स्टांप ड्यूटी और फ़ीस ई-स्टांप/ई-चालान से भरी जाती है और दस्तावेज़ ऑनलाइन जमा होता है। फिर तय दिन विक्रेता रजिस्ट्री ऑफ़िस में फ़ोटो और आधार बायोमेट्रिक से पहचान कराकर स्वीकार करता है, और रजिस्ट्री होते ही कॉपी या PDF लिंक मिल जाता है।
- क्या पटना में रजिस्ट्री पेपरलेस हो गई है?
हाँ। फतुहा और सम्पतचक में 18 जुलाई 2026 से, और ज़िला निबंधन कार्यालय पटना, पटना सिटी, दानापुर, बाढ़, बिक्रम, मसौढ़ी, फुलवारीशरीफ़, बिहटा और पालीगंज में 17 अगस्त 2026 से पेपरलेस रजिस्ट्री लागू है (बिहार गजट सं. 760 और 984)।
- रजिस्ट्री के लिए क्या-क्या कागज़ चाहिए?
विक्रेता, ख़रीदार और गवाहों का आधार (आधार से जुड़ा मोबाइल), विक्रेता और ख़रीदार का PAN, सबकी फ़ोटो, संपत्ति का नज़री नक़्शा और फ़ोटो, और संपत्ति का पूरा विवरण: मौज़ा, थाना नंबर, खाता, खेसरा, रकबा और चौहद्दी। पिछला केवाला, खतियान, जमाबंदी और रसीद अपनी जाँच और डीड में स्वामित्व लिखने के लिए रखें। एजेंट आ रहा हो तो प्रमाणित पावर ऑफ़ अटॉर्नी।
- क्या रजिस्ट्री के दिन ख़रीदार और विक्रेता दोनों को ऑफ़िस जाना ज़रूरी है?
नियम 20(1) के अनुसार दस्तावेज़ लिखने वाले, यानी विक्रेता (सभी बेचने वाले हिस्सेदार), को रजिस्ट्री अधिकारी के सामने आना होता है। ख़रीदार e-Sign पहले ही कर चुका होता है; फिर भी हमारी सलाह है कि ख़रीदार या उसका भरोसेमंद प्रतिनिधि उस दिन ज़रूर मौजूद रहे।
- क्या बिहार में घर बैठे रजिस्ट्री हो सकती है?
हाँ, कुछ लोगों के लिए। 75 साल या ज़्यादा उम्र वालों के लिए अधिकारी या कमीशन घर आ सकता है (फ़ीस ₹1,000), बीमार/अशक्त, जेल में बंद या अदालत में हाज़िरी से छूट वालों के लिए ₹5,000, और धारा 31 में किसी के भी घर पर अधिकारी के जाने की फ़ीस ₹15,000 है। यह स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क के अलावा है।
- रजिस्ट्री होने में कितना समय लगता है?
नियमों के अनुसार सब ठीक हो तो अधिकारी के सामने पहचान और स्वीकार के बाद दस्तावेज़ उसी समय रजिस्टर होता है और कॉपी तुरंत मिलती है। असल समय इस पर निर्भर है कि ऑनलाइन ड्राफ़्ट में कमी के कारण दस्तावेज़ वापस तो नहीं आया, या स्टांप कम होने से मामला 47-A में तो नहीं गया।
- रजिस्ट्री के बाद खेसरा नंबर या नाम में ग़लती मिली तो क्या करें?
सुधार पत्र (rectification deed) रजिस्टर कराएँ। नाम की स्पेलिंग की मामूली ग़लती और खाता/खेसरा/जमाबंदी नंबर जैसी टाइपिंग ग़लती (जिससे चौहद्दी न बदले) छोटी मानी जाती है। पर नाम, चौहद्दी, रकबा, तारीख़ या क़ीमत बदलने पर नई डीड जितनी स्टांप ड्यूटी और फ़ीस लगती है (नियम 27)।
यह लेख 18 अक्टूबर 2026 को बिहार निबंधन नियमावली 2026 और उसके 5 अगस्त 2026 के संशोधन, पेपरलेस रजिस्ट्री की अधिसूचनाओं (बिहार गजट सं. 759, 760, 916, 942, 984), बिहार ई-स्टांप नियमावली 2026 (गजट सं. 606) और ई-निबंधन पोर्टल को देखकर लिखा गया है। पोर्टल के मेन्यू, फ़ीस और ऑफ़िस की व्यवस्था बदल सकती है; रजिस्ट्री से पहले अपने अवर निबंधन कार्यालय से पुष्टि करें। यह सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। बड़ा सौदा करने से पहले अपने कागज़ किसी जानकार से जाँच करवाएँ।