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Patna Me Registry Kaise Hoti Hai 2026: 10 स्टेप + कौन-से कागज़ चाहिए

सीधा जवाब

पटना में रजिस्ट्री अब पेपरलेस है: केवाला ऑनलाइन बनता है और आधार e-Sign से दस्तख़त होते हैं।

  • स्टांप ड्यूटी और फ़ीस ई-स्टांप या ई-चालान से ऑनलाइन भरी जाती है।
  • तय दिन बेचने वाला ऑफ़िस में फ़ोटो और आधार बायोमेट्रिक से पहचान कराता है।
  • रजिस्ट्री होते ही कॉपी या PDF लिंक मिल जाता है।

अपना रजिस्ट्री खर्च निकालिए →

📑 8 हिस्सों में सीधे जाएँ
  1. रजिस्ट्री के 10 स्टेप
  2. कौन-से कागज़ चाहिए
  3. रजिस्ट्री से पहले जाँच
  4. रजिस्ट्री के दिन क्या होता है
  5. रजिस्ट्री क्यों रुकती है
  6. पटना से बाहर रहते हैं?
  7. रजिस्ट्री के बाद क्या करें
  8. सवाल-जवाब

पटना में रजिस्ट्री कैसे होती है: 10 स्टेप

  1. MVR देखें और खर्च निकालें। स्टांप ड्यूटी लिखी क़ीमत और सरकारी MVR में जो ज़्यादा हो, उस पर लगती है। बिक्री पर आम तौर पर 7% स्टांप ड्यूटी और 2% रजिस्ट्री फ़ीस (निबंधन शुल्क) लगती है। पुरुष बेचने वाले से महिला ख़रीदार को 6.6% + 1.9%। पूरा हिसाब: रजिस्ट्री खर्च गाइड, या हमारा मुफ़्त रजिस्ट्री खर्च कैलकुलेटर।
  2. केवाला ऑनलाइन बनाएँ। ई-निबंधन पोर्टल (enibandhan.bihar.gov.in, Citizen Login / Document Registration) पर। ख़ुद बनाएँ या किसी लाइसेंस वाले सर्विस प्रोवाइडर से बनवाएँ। ब्योरा भरें, फ़ोटो और नज़री नक़्शा अपलोड करें।
  3. ड्राफ़्ट ध्यान से पढ़ें। सॉफ़्टवेयर एक प्रीव्यू बनाता है। नाम, पिता का नाम, खाता-खेसरा, रकबा, चौहद्दी और क़ीमत एक-एक लाइन मिलाएँ। सर्विस प्रोवाइडर को केवाला पक्षकारों को पढ़कर सुनाना है और सबकी लिखित सहमति रखनी है।
  4. सब e-Sign करें। बेचने वाला, ख़रीदार और गवाह आधार से (या डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफ़िकेट, DSC से) e-Sign करते हैं। केवाला पेश करने वाला भी e-Sign करता है।
  5. स्टांप ड्यूटी और फ़ीस ऑनलाइन भरें, ई-स्टांप या ई-चालान से। सर्विस प्रोवाइडर से एक "ई-स्टांप कोड" बनता है, जिसे रजिस्ट्री अधिकारी जाँचकर लॉक करता है। न नक़द, न काग़ज़ का स्टांप।
  6. ऑनलाइन फ़ाइल करें और समय बुक करें। केवाला ई-फ़ाइलिंग से ऑफ़िस पहुँचता है, और उसी सिस्टम में आपका अपॉइंटमेंट बुक होता है।
  7. ऑफ़िस की पहली जाँच। सही ऑफ़िस, सारे e-Sign और फ़ोटो, पूरी स्टांप ड्यूटी और ठीक ब्योरा देखा जाता है। कमी हो, तो केवाला सुधार के लिए लौटता है।
  8. तय दिन ऑफ़िस जाएँ। बेचने वाले को ख़ुद आना है, और पुश्तैनी ज़मीन में बेचने वाले हर हिस्सेदार को। उनकी फ़ोटो ली जाती है और अँगूठा या आँख की पुतली आधार से मिलाई जाती है। बीमारी या उम्र से बायोमेट्रिक न मिले, तो पहचान DSC से होती है।
  9. क़बूलनामा और रजिस्ट्री। बेचने वाला अधिकारी के सामने मानता है कि केवाला उसी ने किया है। सब ठीक हो, तो अधिकारी e-Sign करके रजिस्ट्री कर देता है।
  10. तुरंत कॉपी। पेश करने वाले को छपी कॉपी मिलती है, और/या पक्षकारों के मोबाइल या ईमेल पर PDF लिंक आता है।

स्रोत: बिहार रजिस्ट्री नियमावली (निबंधन नियमावली) 2026, ई-स्टांप नियमावली 2026।

चार महीने का नियम न भूलें
  • केवाला लिखे जाने की तारीख़ से चार महीने के भीतर रजिस्ट्री के लिए पेश होना चाहिए (रजिस्ट्रेशन एक्ट)।
  • इस समय में बेचने वाला आकर क़बूल न करे, तो अधिकारी रजिस्ट्री मना कर देता है। पक्षकार 30 दिन में रजिस्ट्रार के पास अपील कर सकते हैं। देर होने पर सिर्फ़ जुर्माने के साथ ही केवाला लिया जा सकता है।
  • हमारी सलाह: पूरा भुगतान और रजिस्ट्री की तारीख़ तय होने के बाद ही e-Sign करें।

पटना में रजिस्ट्री के लिए कौन-से कागज़ चाहिए?

क्या चाहिएकिसकाक्यों
आधार नंबर, और आधार से जुड़ा मोबाइलबेचने वाला, ख़रीदार, गवाहe-Sign और बायोमेट्रिक के लिए। आधार की सहमति न हो, तो पहचानने वाला गवाह पहचान कर सकता है।
PAN कार्ड (या आयकर नियमों में बताया विकल्प)बेचने वाला, ख़रीदारअधिकारी आयकर वाली शर्तें जाँचता है। ₹50 लाख या ज़्यादा की ख़रीद पर ख़रीदार को 1% TDS काटना है।
पक्षकारों और गवाहों की फ़ोटोसभीई-फ़ाइलिंग के समय अपलोड।
नज़री नक़्शा (सड़क और आसपास के निशान वाला) और संपत्ति की फ़ोटोसंपत्तिसंपत्ति पहचानने के लिए; इसमें अक्षांश-देशांतर या ULPIN हो सकता है।
पूरा ब्योरा: मौज़ा, थाना नंबर, खाता, खेसरा, रकबा (कट्ठा/धुर या डिसमिल), चौहद्दीसंपत्तिअधूरे ब्योरे पर रजिस्ट्री रुक सकती है। फ़्लैट: नंबर, मंज़िल, सुपर/कारपेट एरिया, ज़मीन का हिस्सा।
पिछला केवाला / खतियान, जमाबंदी नंबर, रसीदबेचने वालाकेवाले में मालिकाना हक़ की कड़ी दिखाने के लिए, और आपकी अपनी जाँच के लिए।
पावर ऑफ़ अटॉर्नी (अगर कोई बेचने वाले की जगह आए)एजेंटपहले रजिस्ट्री ऑफ़िस से प्रमाणित होनी चाहिए, वरना रजिस्ट्री मना हो सकती है।
RERA रजिस्ट्रेशन (नए फ़्लैट या प्रोजेक्ट के प्लॉट)बिल्डरबिना RERA रजिस्ट्रेशन वाले प्रोजेक्ट की यूनिट की रजिस्ट्री मना हो सकती है।

कितने गवाह चाहिए और कोई और कागज़ तो नहीं, यह रजिस्ट्री ऑफ़िस (अवर निबंधन कार्यालय) या ई-निबंधन हेल्पडेस्क (14544) से पहले पूछ लें।

रजिस्ट्री से पहले: पैसा बचाने वाली जाँच

रजिस्ट्री ऑफ़िस यह नहीं जाँचता कि ज़मीन बेचने वाले की है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में बिहार का वह नियम रद्द किया, जिसमें जमाबंदी न होने पर रजिस्ट्री रोकी जा सकती थी। नई नियमावली में भी ऐसी कोई शर्त नहीं है। मतलब रजिस्ट्री हो जाना साफ़ मालिकाना हक़ का सबूत नहीं है। पैसा देने से पहले ये जाँच लें:

पूरी जाँच-सूची: पटना में प्लॉट ख़रीदने की पूरी गाइड।

रजिस्ट्री के दिन ऑफ़िस में क्या होता है?

ऑफ़िस जाना मुख्य रूप से पहचान और क़बूलनामे के लिए है। तय समय पर असली आधार और PAN लेकर पहुँचें।

  • कम स्टांप ड्यूटी: क़ीमत MVR से कम हो, तो केवाला पूरी ड्यूटी के लिए लौटता है। तब भी न भरें, तो मामला कलेक्टर / प्रमंडलीय AIG के पास जाकर रुक जाता है।
  • पहचान पर शक: अधिकारी किसी और से पूछताछ कर सकता है।
  • कुछ ही बेचने वाले आएँ: बाक़ी समय-सीमा में आकर क़बूल कर सकते हैं। सबके क़बूल करने के बाद ही रजिस्ट्री होती है।

किन कारणों से रजिस्ट्री रुक या मना हो सकती है?

कारणकैसे बचें
संपत्ति का ब्योरा पहचान के लिए काफ़ी नहींखाता, खेसरा, रकबा और चौहद्दी जमाबंदी/खतियान से हूबहू लिखें
बेचने वाला न आए, या केवाले से मुकर जाएबयाना कम रखें; पूरा पैसा रजिस्ट्री के दिन दें
आधार की फ़ोटो या ब्योरा केवाले से न मिलेनाम और पिता/पति का नाम आधार जैसा ही लिखें
एजेंट की पावर ऑफ़ अटॉर्नी में कमीपावर ऑफ़ अटॉर्नी पहले जँचवा लें
फ़ीस या जुर्माना नहीं भराई-चालान / ई-स्टांप की रसीद रखें
जिस प्रोजेक्ट को RERA रजिस्ट्रेशन चाहिए था, उसका फ़्लैट/प्लॉट बिना रजिस्ट्रेशनRERA बिहार पर प्रोजेक्ट का नंबर देखें
केवाला करने के बाद बेचने वाले की मौत, और कुछ वारिस मानें, कुछ मुकरेंपहले ही सभी वारिसों की सहमति लें

रजिस्ट्री मना होने पर लिखित कारण डाक, मोबाइल या ईमेल से मिलते हैं। आप रजिस्ट्रार के पास अपील कर सकते हैं।

पटना से बाहर रहते हैं तो रजिस्ट्री कैसे करें?

बेचने वाले को रजिस्ट्री ऑफ़िस आना ही पड़ता है। पुणे, बेंगलुरु या खाड़ी देश में रहने वाला ख़रीदार आम तौर पर किसी भरोसेमंद रिश्तेदार को प्रमाणित पावर ऑफ़ अटॉर्नी देता है। नियमों में वीडियो-KYC सिर्फ़ उन्हीं दस्तावेज़ों के लिए है, जिन्हें IGR सरकारी नोटिफ़िकेशन से तय करे। 18 अक्टूबर 2026 तक ऐसा कोई नोटिफ़िकेशन हमें नहीं मिला। पूरा तरीका: बाहर रहकर पटना में प्रॉपर्टी कैसे ख़रीदें।

बेचने वाले की उम्र 75 साल से ज़्यादा है, रजिस्टर्ड केवाले में ग़लती है, या ई-स्टांप अब काम का नहीं? देखें: ख़ास मामले: घर पर रजिस्ट्री, ई-स्टांप रिफ़ंड, केवाले में सुधार।

रजिस्ट्री के बाद क्या करें?

  1. PDF और छपी कॉपी दो जगह सँभालकर रखें। बाद में सत्यापित कॉपी ई-निबंधन से ऑनलाइन मिल जाती है; ऑनलाइन और ऑफ़िस वाली कॉपी बराबर मानी जाती है।
  2. 90 दिन के भीतर दाखिल-खारिज का आवेदन बिहार भूमि पर करें, वरना जमाबंदी पुराने मालिक के नाम रहेगी: दाखिल-खारिज ऑनलाइन।
  3. दाखिल-खारिज के बाद अपने नाम से लगान रसीद कटाएँ। शहर में नगर निगम का होल्डिंग टैक्स भी अपने नाम करवाएँ।
  4. ₹50 लाख या ज़्यादा की ख़रीद पर अपने CA से पक्का करें कि 1% TDS समय पर जमा हुआ।

आपको क्या करना चाहिए? (हमारी सलाह)

  • कागज़ पहले जँचवा लें। ऑफ़िस पहचान और स्टांप ड्यूटी जाँचता है, मालिकाना हक़ नहीं।
  • ड्राफ़्ट ख़ुद पढ़ें, भले सर्विस प्रोवाइडर बनाए। एक ग़लत खेसरा, रकबा या चौहद्दी बाद में नए केवाले जितनी महँगी पड़ सकती है।
  • स्टांप बचाने के लिए क़ीमत कम न लिखवाएँ। MVR से कम वाले केवाले अटकते हैं और कलेक्टर के पास जाते हैं।
  • पूरा पैसा बैंक से दें और केवाले में लिखवाएँ; नक़द से बचें।
  • रजिस्ट्री के अगले हफ़्ते दाखिल-खारिज का आवेदन कर दें।

पटना रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़े सवाल-जवाब

  1. क्या ख़रीदार और बेचने वाले, दोनों को रजिस्ट्री ऑफ़िस जाना होगा?

    बेचने वाले को ख़ुद आना है, और बेचने वाले हर हिस्सेदार को भी। ख़रीदार ऑनलाइन e-Sign कर चुका होता है। फिर भी सलाह है कि उस दिन ख़रीदार या उसका भरोसेमंद आदमी वहाँ रहे।

  2. पटना में रजिस्ट्री में कितना समय लगता है?

    अधिकारी के सामने पहचान और क़बूलनामा होते ही रजिस्ट्री वहीं हो जाती है और कॉपी तुरंत मिलती है। ऑनलाइन ड्राफ़्ट सुधार के लिए लौटे, या कम स्टांप पर मामला कलेक्टर के पास जाए, तो ज़्यादा समय लगता है।

  3. क्या रजिस्ट्री होना इस बात का सबूत है कि ज़मीन बेचने वाले की थी?

    नहीं। रजिस्ट्री ऑफ़िस पहचान, स्टांप ड्यूटी और संपत्ति का ब्योरा जाँचता है, मालिकाना हक़ नहीं। पैसा देने से पहले बेचने वाले की जमाबंदी, खतियान, पिछला केवाला और लोन/केस ख़ुद जाँचें।

  4. क्या बिहार में घर पर रजिस्ट्री हो सकती है?

    हाँ, कुछ लोगों के लिए। 75 साल या ज़्यादा उम्र वालों के घर अधिकारी या कर्मचारी ₹1,000 फ़ीस पर आ सकता है। पूरा ब्योरा और बाक़ी फ़ीस: रजिस्ट्री के ख़ास मामले।

  5. रजिस्ट्री के बाद खेसरा नंबर या नाम में ग़लती मिले तो क्या करें?

    सुधार का केवाला (rectification deed) रजिस्टर कराएँ। नाम की छोटी स्पेलिंग या नंबर की ग़लती, जिससे चौहद्दी न बदले, छोटी मानी जाती है। पक्षकार, चौहद्दी, रकबा, तारीख़ या क़ीमत बदलने पर नए केवाले जितनी ड्यूटी और फ़ीस लगती है।

अगला कदम Dakhil Kharij Online Bihar: पटना में दाखिल-खारिज, कागज़, समय, स्टेटस रजिस्ट्री के बाद दाखिल-ख़ारिज होने तक सरकारी रिकॉर्ड में ज़मीन आपके नाम नहीं होती। आगे पढ़िए →
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  4. Patna Me Registry Charge Kitna Hai 2026: ज़मीन-फ़्लैट पर 7% + 2%
  5. Patna Me Registry Kaise Hoti Hai 2026: 10 स्टेप + कौन-से कागज़ चाहिए
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  7. Bihar Jamabandi Online Kaise Dekhe: पटना में जमाबंदी, खतियान, LPC (2026)
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  21. Registry Kho Jaye To Kya Kare? ज़मीन के कागज़ दोबारा कैसे निकालें (पटना)
2026 में रजिस्ट्री में क्या-क्या बदला

बिहार सरकार ने 11 जुलाई 2026 को बिहार रजिस्ट्री नियमावली 2026 जारी की, जिसने 2008 वाली नियमावली की जगह ली। ख़रीदार के लिए तीन बड़े बदलाव:

  • सिर्फ़ ऑनलाइन फ़ाइलिंग: केवाला केवल ऑनलाइन ई-फ़ाइलिंग से पेश होगा।
  • दस्तख़त की जगह e-Sign: ड्राफ़्ट देखकर सभी पक्षकार और गवाह आधार या DSC से e-Sign करते हैं।
  • नक़्शा और फ़ोटो ज़रूरी: नज़री नक़्शा और संपत्ति की फ़ोटो अपलोड करनी है।

यह नियमावली तीन चरणों में ऑफ़िस-दर-ऑफ़िस लागू हुई। पटना ज़िले में:

पटना ज़िले का रजिस्ट्री ऑफ़िसपेपरलेस कब सेनोटिफ़िकेशन
रजिस्ट्री ऑफ़िस फतुहा, सम्पतचक18 जुलाई 2026गजट सं. 760 (पहला चरण)
ज़िला ऑफ़िस पटना; रजिस्ट्री ऑफ़िस पटना सिटी, दानापुर, बाढ़, बिक्रम, मसौढ़ी, फुलवारीशरीफ़, बिहटा, पालीगंज17 अगस्त 2026गजट सं. 984 (तीसरा चरण)

तीनों चरणों में 10 + 40 + 91 = 141 ऑफ़िस आए। ई-निबंधन पोर्टल के अनुसार बिहार में कुल 141 रजिस्ट्री ऑफ़िस हैं, यानी अब पूरा राज्य इसी तरीक़े से रजिस्ट्री करता है। आपकी ज़मीन किस ऑफ़िस में जाएगी, यह मौज़ा (गाँव), अंचल और थाना से तय होता है।

स्रोत (Sources)
  • बिहार निबंधन नियमावली, 2026 (अधिसूचना S.O. IV/M1-1-02/2026-4219, 11 जुलाई 2026), बिहार गजट (असाधारण) सं. 759, 13 जुलाई 2026: नियम 2(xxviii), 2(xxxvii), 4, 5, 6, 7 (पेज 52-55), नियम 8, 9 (पेज 55-56), नियम 15-20 (पेज 57-58), नियम 21-23 (पेज 58-59), नियम 24-26 (पेज 60-62), नियम 27-28 (पेज 62-63), नियम 47 (पेज 68), परिशिष्ट-E (पेज 102) — PDF
  • बिहार निबंधन (संशोधन) नियमावली, 2026 (No. IV/M1-1-02/2026/4871, 5 अगस्त 2026), बिहार गजट (असाधारण) सं. 942, 6 अगस्त 2026, पेज 2: नियम 23(5) और परिशिष्ट-E क्रम 01 में 80 की जगह 75 वर्ष — PDF
  • पेपरलेस रजिस्ट्री के चरण: अधिसूचना 4220, 11.07.2026 (गजट सं. 760, पेज 1-2: फतुहा, सम्पतचक 18.07.2026 से; 80+ के लिए घर बैठे रजिस्ट्री पूरे बिहार में) — PDF; अधिसूचना 4808, 01.08.2026 (गजट सं. 916, 40 ऑफ़िस) — PDF; अधिसूचना 4961, 11.08.2026 (गजट सं. 984, पेज 2, क्रम 31-39: पटना के 9 ऑफ़िस 17.08.2026 से) — PDF
  • बिहार स्टांप (सर्विस प्रोवाइडर लाइसेंस और ई-स्टांप की आपूर्ति) नियमावली, 2026 (S.O. No. 10/Ni.(Mudrank Niyamawali)-39/2026/3872), बिहार गजट (असाधारण) सं. 606, 11 जून 2026: नियम 11 (पेज 15), 14-15 (पेज 15-16), 17 (पेज 17) — PDF
  • ई-निबंधन पोर्टल, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, बिहार: Citizen Login, Document Registration, View Prohibited Properties, 141 रजिस्ट्री ऑफ़िस, हेल्पडेस्क 14544 / 0612-3522300 — enibandhan.bihar.gov.in
  • रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908: धारा 23, 25, 31, 32, 34, 38, 72, 73
  • सभी दस्तावेज़ और पोर्टल 18.10.2026 को खोलकर जाँचे गए।

यह जानकारी सरकारी स्रोतों से 28 अक्टूबर 2026 को जाँची गई है। नियम बदलते रहते हैं, पैसा देने से पहले रजिस्ट्री या अंचल ऑफ़िस से पक्का कर लें।

प्रेम प्रकाश यादव

भारतीय वायुसेना में 36+ साल की सेवा, और साथ-साथ पटना की ज़मीन का 20+ साल का अनुभव।

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