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Power of Attorney Kaise Banaye Bihar: पटना में मुख़्तारनामा गाइड 2026

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सीधा जवाब: पावर ऑफ़ अटॉर्नी (POA), जिसे पटना में मुख़्तारनामा भी कहते हैं, एक लिखित अधिकार-पत्र है जिससे कोई दूसरा व्यक्ति आपकी जगह तय काम कर सकता है, जैसे रजिस्ट्री ऑफ़िस में केवाला पेश करना। इससे ज़मीन का मालिकाना हक़ नहीं बदलता। बिहार में परिवार के सदस्य को बेचने की POA पर ₹1,000 स्टांप ड्यूटी लगती है, और परिवार से बाहर वाले को बिक्री जितनी ड्यूटी। रजिस्ट्री में इस्तेमाल होने वाली POA रजिस्ट्रेशन अधिनियम की धारा 33 के तहत प्रमाणित होनी चाहिए। मालिक की मृत्यु या रद्द करने पर POA ख़त्म हो जाती है।

पटना में POA सबसे ज़्यादा तीन हालात में आती है: मालिक बाहर (पुणे, बेंगलुरु, दिल्ली, खाड़ी) रहते हैं, कोई बुज़ुर्ग या बीमार है, या कोई "GPA पर ज़मीन" बेच रहा है। पहले दो ठीक इस्तेमाल हैं, तीसरा ख़तरनाक। इस लेख में समझिए POA कैसे बनती है, कितना खर्च है, कब ख़त्म होती है, और POA वाले से ज़मीन ख़रीदने से पहले क्या जाँचें।

पावर ऑफ़ अटॉर्नी (मुख़्तारनामा) क्या है?

  • दो पक्ष: जो अधिकार देता है वह प्रिंसिपल (मालिक), और जिसे मिलता है वह एजेंट या मुख़्तार।
  • असर: एजेंट जो काम POA में लिखे दायरे में करता है, वह मालिक पर वैसे ही लागू होता है जैसे मालिक ने ख़ुद किया हो (पावर ऑफ़ अटॉर्नी अधिनियम 1882, धारा 1A और 2)।
  • यह बिक्री नहीं है: सुप्रीम कोर्ट ने सूरज लैंप एंड इंडस्ट्रीज़ बनाम हरियाणा राज्य (11.10.2011) में कहा कि पावर ऑफ़ अटॉर्नी अचल संपत्ति के हक़ को ट्रांसफ़र करने का दस्तावेज़ नहीं है। "इर्रिवोकेबल" (अपरिवर्तनीय) POA से भी एजेंट मालिक नहीं बनता।

आम (जनरल) और ख़ास (स्पेशल) मुख़्तारनामा में फ़र्क़

ख़ास (स्पेशल) POAआम (जनरल) POA
दायराएक तय काम, जैसे "मौज़ा X, खाता Y, खेसरा Z की ज़मीन का केवाला पेश करना"कई काम या सारी संपत्ति का प्रबंधन
ख़तराकम, क्योंकि एजेंट उसके बाहर कुछ नहीं कर सकताज़्यादा, ग़लत हाथ में गई तो कई सौदे हो सकते हैं
प्रमाणन फ़ीस (विभाग की तालिका)₹100₹250
किसके लिए ठीकएक प्लॉट की ख़रीद या बिक्री, एक रजिस्ट्रीलंबे समय तक बाहर रहने वाले, जिन्हें किराया, टैक्स, केस सब संभालना है, और सिर्फ़ बहुत भरोसेमंद व्यक्ति को

ज़मीन के एक सौदे के लिए हमेशा ख़ास POA बनवाएँ: संपत्ति का पूरा ब्योरा (मौज़ा, थाना नंबर, खाता, खेसरा, रकबा), क्या करना है, न्यूनतम दाम, और वह बैंक खाता जिसमें पैसा आएगा।

बिहार में पावर ऑफ़ अटॉर्नी पर स्टांप ड्यूटी और फ़ीस कितनी है?

निबंधन विभाग की "Table of Stamp Duty & Registration Fee" (पृष्ठ 7, मद 43, अनुच्छेद 48) के अनुसार:

किस काम के लिए POAस्टांप ड्यूटीफ़ीस
बिहार की संपत्ति बेचने/ट्रांसफ़र के लिए, परिवार के सदस्य को₹1,000₹1,000
बिहार की संपत्ति बेचने/ट्रांसफ़र के लिए, परिवार से बाहर वाले कोबिक्री (कन्वेयंस) जितनी, MVR वाले मूल्य पर: तालिका में 6% लिखा है; 18 जून 2026 से बिक्री की दर 7% है, इसलिए ताज़ा दर निबंधन कार्यालय से पक्की करें₹10,000
कोर्ट केस के लिए, या बेचने के अलावा किसी और काम के लिए (जैसे आपकी तरफ़ से ख़रीदना, किराया वसूलना)₹1,000₹1,000
POA का प्रमाणन (धारा 33)तालिका में ₹1,000 (मद 48(b)(iii))प्रमाणन फ़ीस: ख़ास ₹100, आम ₹250
प्रमाणित POA रद्द करना–₹100

परिवार का मतलब इस तालिका में: पिता, माता, पति या पत्नी, बेटा, बेटी, सगे भाई-बहन, बहू, और बेटे या बेटी के बच्चे। चाचा, भतीजा, दामाद, साला इस सूची में नहीं हैं, इसलिए उन्हें बेचने की POA पर बिक्री जितनी ड्यूटी लगेगी।

ध्यान दें: विभाग की यह तालिका दिसंबर 2020 की है। जून 2026 की अधिसूचना (गजट सं. 636) ने सिर्फ़ केवाला और दानपत्र की दर बदली, POA वाला अनुच्छेद 48 नहीं, इसलिए ऊपर के आँकड़े अभी लागू माने जा रहे हैं। फिर भी फ़ीस और "बिक्री जितनी" ड्यूटी की दर रजिस्ट्री से पहले निबंधन कार्यालय से पक्की करें। रजिस्ट्री का पूरा खर्च: पटना में रजिस्ट्री का खर्च।

पटना में पावर ऑफ़ अटॉर्नी कैसे बनवाएँ (स्टेप बाय स्टेप)

  1. दायरा लिखें: कौन-सी संपत्ति, कौन-सा काम, कितने समय के लिए। ख़ास POA रखें।
  2. सही स्टांप: ऊपर की तालिका से ड्यूटी तय करें। परिवार का सदस्य है तो रिश्ता साफ़ लिखें।
  3. प्रमाणन कहाँ होगा (रजिस्ट्रेशन अधिनियम, धारा 33):
    • आप भारत में रहते हैं (पटना हो या पुणे): जहाँ आप रहते हैं, उस ज़िले या उप-ज़िले के रजिस्ट्रार या सब-रजिस्ट्रार के सामने।
    • आप विदेश में हैं: नोटरी पब्लिक, कोर्ट, जज या मजिस्ट्रेट, भारतीय कॉन्सुल या वाइस-कॉन्सुल, या केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के सामने। ऐसी POA भारत पहुँचने के तीन महीने के अंदर स्टांप करानी होती है (भारतीय स्टांप अधिनियम, धारा 18)।
  4. ऑफ़िस में: मालिक ख़ुद आते हैं, पहचान होती है, और अधिकारी POA पर प्रमाणन का पृष्ठांकन (Form-X) लगाकर उसे "पावर ऑफ़ अटॉर्नी रजिस्टर" में दर्ज करता है (नियम 28(3), 28(4))। जो शारीरिक कमज़ोरी या बीमारी के कारण ऑफ़िस नहीं आ सकते, उनके लिए अधिकारी घर जाकर जाँच कर प्रमाणित कर सकता है (Form-X का भाग (b))। इसकी फ़ीस अलग है, ऑफ़िस से पूछें।
  5. नंबर और कॉपी रखें: प्रमाणन नंबर, तारीख़ और कॉपी संभालकर रखें। रजिस्ट्री के दिन एजेंट मूल POA लेकर जाएगा।

रजिस्ट्री ऑफ़िस में POA कब मानी जाती है?

  • साफ़ अधिकार चाहिए: POA में उस काम का सीधा या निहित अधिकार न हो तो एजेंट उसे नहीं कर सकता (बिहार निबंधन नियमावली 2026, नियम 28(1))।
  • धारा 33 का प्रमाणन ज़रूरी: जो POA मालिक की जगह केवाला पेश करने (धारा 32) या उसका निष्पादन मानने (धारा 34) के लिए इस्तेमाल हो, वह धारा 33 के तहत प्रमाणित होनी चाहिए (नियम 28(2))।
  • नहीं तो इनकार: एजेंट की POA अधिनियम के अनुसार न बनी हो तो रजिस्ट्री से इनकार किया जा सकता है (नियम 24(8))।
  • इस्तेमाल का निशान: रजिस्ट्री में ख़ास POA इस्तेमाल होने पर उस पर पृष्ठांकन लगता है कि वह किस केवाले के लिए पेश हुई (नियम 29, Form-XI)।

रजिस्ट्री के दिन का पूरा क्रम: पटना में रजिस्ट्री कैसे होती है।

पावर ऑफ़ अटॉर्नी कब ख़त्म हो जाती है?

भारतीय संविदा अधिनियम 1872 की धारा 201 के अनुसार एजेंसी (POA) ख़त्म होती है जब:

  • मालिक उसे रद्द कर दे, या एजेंट काम छोड़ दे;
  • जिस काम के लिए बनी थी, वह पूरा हो जाए (जैसे केवाला रजिस्टर हो गया);
  • मालिक या एजेंट की मृत्यु हो जाए, या कोई मानसिक रूप से अस्वस्थ हो जाए;
  • मालिक दिवालिया घोषित हो जाए।

सबसे ज़रूरी बात: मालिक की मृत्यु होते ही POA ख़त्म हो जाती है, इसलिए उसके बाद POA के सहारे केवाला करना-कराना बड़ा जोखिम है। तब ज़मीन वारिसों की होती है, और उनसे ही ख़रीदना होगा (देखें पुश्तैनी ज़मीन का बँटवारा)।

अपवाद: अगर एजेंट का ख़ुद उस संपत्ति में हित (इंटरेस्ट) है, जैसे मालिक ने उसे ज़मीन बेचकर अपना कर्ज़ वसूलने का अधिकार दिया हो, तो बिना साफ़ समझौते के उसे उस हित के नुकसान पर रद्द नहीं किया जा सकता, और मालिक की मृत्यु से भी ख़त्म नहीं होती (धारा 202)। पर ऐसी POA भी एजेंट को मालिक नहीं बनाती।

पावर ऑफ़ अटॉर्नी रद्द कैसे करें?

  1. लिखित रद्दीकरण बनाएँ: POA की तारीख़, प्रमाणन नंबर, एजेंट का नाम लिखकर कि आप उसे रद्द कर रहे हैं।
  2. उसी रजिस्ट्री ऑफ़िस में आवेदन दें जहाँ POA प्रमाणित हुई थी। प्रमाणित POA रद्द करने की फ़ीस विभाग की तालिका में ₹100 है, और ऐसे आवेदन ऑफ़िस में 50 साल तक रखे जाते हैं (नियमावली 2026 की रिकॉर्ड सूची)।
  3. एजेंट को लिखित सूचना दें और उसकी पावती रखें। क़ानून के अनुसार रद्दीकरण एजेंट पर तब लागू होता है जब उसे पता चले, और दूसरे लोगों (जैसे ख़रीदार) पर तब जब उन्हें पता चले (धारा 208)। उचित सूचना न देने से एजेंट को नुकसान हो तो उसकी भरपाई करनी पड़ सकती है (धारा 206)।
  4. मूल POA वापस लें, और अगर संपत्ति पर सौदे की आशंका हो तो अख़बार में सूचना देना भी समझदारी है।

मालिक ने ख़ुद वह काम कर लिया जिसके लिए POA दी थी (जैसे ख़ुद ज़मीन बेच दी), तो यह निहित रद्दीकरण है (धारा 207)। फिर भी काग़ज़ पर रद्द कराना सबसे सुरक्षित है।

"GPA पर ज़मीन" ख़रीदना: क्यों ख़तरनाक है?

कई जगह लोग स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री का खर्च बचाने के लिए "एग्रीमेंट + जनरल पावर ऑफ़ अटॉर्नी + वसीयत" पर ज़मीन लेते-देते हैं। सुप्रीम कोर्ट (सूरज लैंप, 2011) ने साफ़ कहा:

  • ऐसे "GPA सेल" से मालिकाना हक़ नहीं मिलता और यह ट्रांसफ़र नहीं है;
  • इनके आधार पर नगर निगम या राजस्व रिकॉर्ड में दाखिल-खारिज नहीं होना चाहिए;
  • बिक्री सिर्फ़ स्टांप लगे और रजिस्टर्ड केवाले से होती है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि असली कामों के लिए POA ठीक है: जैसे कोई पति-पत्नी, बेटे, बेटी, भाई, बहन या रिश्तेदार को अपना काम संभालने या केवाला निष्पादित करने के लिए POA दे। यानी POA वाला एजेंट मालिक की ओर से रजिस्टर्ड केवाला कर सकता है, बशर्ते POA सही हो।

POA वाले से ज़मीन ख़रीद रहे हैं? यह जाँच ज़रूर करें

जाँचकैसे
मालिक जीवित हैं और राज़ी हैंमालिक से वीडियो कॉल पर बात करें, पहचान मिलाएँ, दाम और तारीख़ उनसे सुनें
POA असली और प्रमाणित हैमूल POA देखें; प्रमाणन नंबर लेकर उसी रजिस्ट्री ऑफ़िस से पुष्टि कराएँ
POA रद्द नहीं हुईऑफ़िस से रद्दीकरण का आवेदन तो नहीं, पूछें; मालिक से लिखित पुष्टि लें
बेचने का अधिकार इसी संपत्ति का हैPOA में आपका खाता-खेसरा और "बेचने/केवाला करने" का साफ़ अधिकार हो
सही स्टांप लगा हैएजेंट परिवार से बाहर है तो POA पर बिक्री जितनी ड्यूटी लगी होनी चाहिए
ज़मीन मालिक के नाम हैजमाबंदी, रसीद, दाखिल-खारिज मालिक के नाम: ऑनलाइन जाँच का तरीका
पैसा मालिक के खाते मेंबैंक से सीधे मालिक के खाते में भुगतान, एजेंट के निजी खाते में नहीं

POA वाले सौदों में धोखे के आम तरीके (फ़र्ज़ी POA, रद्द हो चुकी POA, मृत मालिक): पटना में ज़मीन फ़्रॉड से कैसे बचें। प्लॉट के सारे कागज़: प्लॉट ख़रीदने से पहले पूरी गाइड। बाहर रहकर ख़रीदना या बेचना है? देखें बाहर रहकर प्रॉपर्टी कैसे ख़रीदें और बाहर रहकर ज़मीन कैसे बेचें।

आधिकारिक स्रोत
  • बिहार निबंधन नियमावली, 2026, बिहार गजट (असाधारण) सं. 759, 13 जुलाई 2026: नियम 24(8), अध्याय XI नियम 28 और 29, Form-X और Form-XI (पृष्ठ 76–77), Form-II (पृष्ठ 78), रिकॉर्ड रखने की सूची (पृष्ठ 100) — PDF
  • "Table of Stamp Duty & Registration Fee", मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, बिहार (दिसंबर 2020): पृष्ठ 7, मद 43 (अनुच्छेद 48(a), 48(b); प्रमाणन और रद्दीकरण फ़ीस) — PDF
  • केवाला/दानपत्र की नई दर 7% (अनुच्छेद 23, 33): अधिसूचना 4060, 18 जून 2026, बिहार गजट सं. 636 — PDF
  • रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908: धारा 32, 33, 34; भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899: धारा 18 (indiacode.nic.in)
  • भारतीय संविदा अधिनियम, 1872: धारा 201, 202, 206, 207, 208 — PDF (indiacode)
  • सुप्रीम कोर्ट, सूरज लैंप एंड इंडस्ट्रीज़ प्रा. लि. बनाम हरियाणा राज्य, SLP (C) 13917/2009, 11.10.2011 (हरियाणा सरकार के परिपत्र मेमो DA/2012/1420-42, 20.03.2012 में उद्धृत सार)

आपको क्या करना चाहिए? (हमारी सलाह)

  • हो सके तो रजिस्ट्री में ख़ुद आएँ। POA सुविधा है, ज़रूरत नहीं।
  • POA देनी ही है तो ख़ास POA, सिर्फ़ एक संपत्ति और एक काम के लिए, परिवार के भरोसेमंद सदस्य को।
  • काम होते ही रद्द कराएँ। पुरानी POA सालों बाद धोखे का रास्ता बनती है।
  • "GPA पर ज़मीन" न लें, न दें। मालिकाना हक़ सिर्फ़ रजिस्टर्ड केवाले से मिलता है।
  • POA वाले से ख़रीदने से पहले मालिक से बात और ऑफ़िस से POA की पुष्टि, दोनों करें।

पावर ऑफ़ अटॉर्नी बिहार: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

  1. पावर ऑफ़ अटॉर्नी कैसे बनाएं बिहार में?

    दायरा तय करें (एक संपत्ति, एक काम), सही स्टांप लगाएँ, और जहाँ आप रहते हैं वहाँ के सब-रजिस्ट्रार के सामने उसे धारा 33 के तहत प्रमाणित कराएँ। विदेश में हैं तो नोटरी या भारतीय कॉन्सुल के सामने बनाएँ और भारत आने के तीन महीने के अंदर स्टांप कराएँ।

  2. बिहार में पावर ऑफ़ अटॉर्नी पर कितनी स्टांप ड्यूटी लगती है?

    विभाग की तालिका के अनुसार परिवार के सदस्य को बेचने की POA पर ₹1,000 और फ़ीस ₹1,000। परिवार से बाहर वाले को बेचने की POA पर बिक्री जितनी ड्यूटी (MVR वाले मूल्य पर) और फ़ीस ₹10,000। बेचने के अलावा दूसरे कामों की POA पर ₹1,000। ताज़ा दर निबंधन कार्यालय से पक्की करें।

  3. क्या पावर ऑफ़ अटॉर्नी से ज़मीन बेची जा सकती है?

    हाँ, अगर POA में बेचने या केवाला करने का साफ़ अधिकार हो और वह धारा 33 के तहत प्रमाणित हो, तो एजेंट मालिक की ओर से रजिस्टर्ड केवाला कर सकता है। पर सिर्फ़ GPA थमा देने से ज़मीन नहीं बिकती; मालिकाना हक़ रजिस्टर्ड केवाले से ही बदलता है।

  4. जनरल पावर ऑफ़ अटॉर्नी और स्पेशल पावर ऑफ़ अटॉर्नी में क्या अंतर है?

    स्पेशल (ख़ास) POA एक तय काम के लिए होती है, जैसे एक प्लॉट का केवाला। जनरल (आम) POA कई कामों या पूरी संपत्ति के लिए। ज़मीन के सौदे में ख़ास POA सुरक्षित है। विभाग की तालिका में प्रमाणन फ़ीस ख़ास के लिए ₹100 और आम के लिए ₹250 है।

  5. मालिक की मृत्यु के बाद पावर ऑफ़ अटॉर्नी चलती है क्या?

    आम तौर पर नहीं। संविदा अधिनियम की धारा 201 के अनुसार मालिक की मृत्यु पर POA ख़त्म हो जाती है, और ज़मीन वारिसों की हो जाती है। अपवाद सिर्फ़ तब, जब एजेंट का ख़ुद उस संपत्ति में हित हो (धारा 202)।

  6. पावर ऑफ़ अटॉर्नी कैंसिल कैसे करें?

    लिखित रद्दीकरण बनाकर उसी रजिस्ट्री ऑफ़िस में आवेदन दें जहाँ POA प्रमाणित हुई थी (तालिका में फ़ीस ₹100), एजेंट को लिखित सूचना दें और मूल POA वापस लें। रद्दीकरण दूसरों पर तब लागू होता है जब उन्हें इसकी जानकारी हो, इसलिए सूचना का सबूत रखें।

  7. क्या भाई या भतीजे को दी गई POA पर ₹1,000 ही लगेगा?

    सगे भाई-बहन तालिका की "परिवार" सूची में हैं, इसलिए बेचने की POA पर ₹1,000। भतीजा, चाचा, दामाद इस सूची में नहीं हैं, इसलिए उन्हें बेचने की POA पर बिक्री जितनी ड्यूटी लगेगी।

यह लेख 24 अक्टूबर 2026 को बिहार निबंधन नियमावली 2026 (गजट सं. 759), निबंधन विभाग की स्टांप-फ़ीस तालिका (दिसंबर 2020), गजट सं. 636 (जून 2026), भारतीय संविदा अधिनियम 1872, रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1908 और सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के आधार पर लिखा गया है। फ़ीस और दरें बदल सकती हैं; रजिस्ट्री से पहले निबंधन कार्यालय से पक्का करें। यह सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं; बड़े या उलझे मामलों में वकील से सलाह लें।

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ध्यान दें: यह जानकारी आम समझ के लिए है। हम इसे सरकारी नियमों और पोर्टल से लेकर ध्यान से जाँचते हैं, पर नियम और रेट बदलते रहते हैं। पैसा देने या कुछ भी साइन करने से पहले रजिस्ट्री ऑफ़िस या अंचल कार्यालय से पक्का कर लें, या हमसे पूछ लें।
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PP Properties Team

लेखक · PP Properties, पटना

PP Properties पटना का प्रॉपर्टी एडवाइज़र है। हम कागज़ जाँचते हैं और ज़मीन, मकान, फ़्लैट ख़रीदने-बेचने में मदद करते हैं। यह लेख बिहार निबंधन नियमावली 2026 (बिहार गजट सं. 759), निबंधन विभाग की स्टांप-फ़ीस तालिका, भारतीय संविदा अधिनियम 1872 और सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के आधार पर लिखा गया है।

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