Zameen Fraud Se Kaise Bache: पटना में ज़मीन धोखाधड़ी के 8 तरीके
सीधा जवाब: पटना में ज़मीन की ज़्यादातर धोखाधड़ी कुछ जाने-पहचाने तरीकों से होती है: नकली मालिक, एक ही ज़मीन दो लोगों को बेचना, हिस्सेदारों से छिपाकर पुश्तैनी ज़मीन बेचना, फ़र्ज़ी पावर ऑफ़ अटॉर्नी, रोक वाली या गिरवी ज़मीन, और कागज़ में एक प्लॉट दिखाकर साइट पर दूसरा। इनमें से लगभग हर एक को पैसा देने से पहले सरकारी पोर्टल पर ख़ुद जाँचकर पकड़ा जा सकता है: बिहार भूमि (जमाबंदी, दाखिल-खारिज, बंधक) और ई-निबंधन (रोक वाली ज़मीन, भार प्रमाण पत्र)। ख़रीदने के बाद अपनी जमाबंदी पर SMS अलर्ट चालू कर दें, ताकि कोई आपकी ज़मीन का दाखिल-खारिज चुपके से न करा सके।
एक उदाहरण: मान लीजिए दुबई में काम करने वाले किसी व्यक्ति को फुलवारी अंचल में 3 कट्ठा का प्लॉट "बाज़ार से सस्ता" मिल रहा है। विक्रेता ने WhatsApp पर केवाले की फ़ोटो, जमाबंदी का स्क्रीनशॉट और आधार कार्ड भेज दिया और कहा: "दो और पार्टी लगी हैं, आज ₹2 लाख बयाना भेज दीजिए।" यही वो पल है जहाँ ज़्यादातर ठगी होती है। नीचे दिए 8 तरीके और उनकी जाँच इसी पल के लिए हैं।
पटना में ज़मीन धोखाधड़ी के 8 आम तरीके
| # | धोखा कैसे होता है | पैसा देने से पहले कैसे पकड़ें |
|---|---|---|
| 1 | नकली मालिक: कोई और व्यक्ति असली मालिक बनकर बेच देता है | जमाबंदी में नाम, पिता का नाम और पता मिलाएँ; मालिक से उनके घर पर मिलें; विक्रेता का अपना केवाला और दाखिल-खारिज देखें |
| 2 | एक ज़मीन दो बार बेचना | ई-निबंधन से भार प्रमाण पत्र (EC); बिहार भूमि पर उस प्लॉट पर दायर दाखिल-खारिज आवेदन देखें |
| 3 | पुश्तैनी ज़मीन एक भाई ने बाकी हिस्सेदारों से छिपाकर बेच दी | वंशावली; हर हिस्सेदार के दस्तख़त या रजिस्टर्ड त्याग-पत्र |
| 4 | फ़र्ज़ी या रद्द पावर ऑफ़ अटॉर्नी से बिक्री | रजिस्टर्ड POA की ई-निबंधन से प्रमाणित कॉपी; मालिक जीवित हैं और POA रद्द नहीं हुई |
| 5 | रोक वाली ज़मीन: जिसकी रजिस्ट्री या निर्माण पर रोक है | ई-निबंधन पर "View Prohibited Properties"; पाटलिपुत्र टाउनशिप जैसे इलाक़ों की अधिसूचना |
| 6 | गिरवी ज़मीन बैंक का कर्ज़ छिपाकर बेचना | बिहार भूमि पर "बंधक भूमि" खोज; जमाबंदी में बंधक का विवरण; बैंक का NOC |
| 7 | कागज़ में एक प्लॉट, साइट पर दूसरा | भू-नक्शा पर खेसरा और चौहद्दी मिलाएँ; अमीन या ई-मापी से नपाई |
| 8 | बयाना लेकर ग़ायब या ऑनलाइन फ़र्ज़ी विज्ञापन | छोटा टोकन, सिर्फ़ बैंक से, लिखित इक़रारनामे के साथ; जाँच से पहले कोई बड़ी रक़म नहीं |
अब हर तरीके को थोड़ा खोलकर समझते हैं: धोखा कहाँ छिपा होता है और आप कौन-सी सरकारी जाँच ख़ुद कर सकते हैं।
1. नकली मालिक: असली मालिक कोई और, बेचने वाला कोई और
इसमें कोई व्यक्ति ज़मीन के असली मालिक के नाम से (कई बार नकली पहचान पत्र बनाकर) केवाला कर देता है। असली मालिक अक्सर बाहर रहता है, बुज़ुर्ग है, या उसे पता ही नहीं होता। भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 में इसे "प्रतिरूपण द्वारा छल" (cheating by personation, धारा 319) कहा गया है।
- जमाबंदी ख़ुद देखें: biharbhumi.bihar.gov.in पर "जमाबंदी पंजी देखें" में ज़िला पटना, अंचल, हल्का और मौज़ा चुनकर खाता-खेसरा या नाम से खोजें। रैयत का नाम, पिता/पति का नाम और पता विक्रेता के पहचान पत्र से मिलाएँ। विक्रेता का भेजा स्क्रीनशॉट काफ़ी नहीं है।
- मालिक से उनके घर पर मिलें, किसी होटल या ब्रोकर के दफ़्तर में नहीं। पड़ोसियों से पूछें कि ज़मीन किसकी है और कौन जोतता या कब्ज़े में रखता है।
- विक्रेता ने ज़मीन कहाँ से पाई? अगर ख़रीदी थी तो उसका केवाला और उस पर हुआ दाखिल-खारिज देखें। केवाले की असलियत के लिए ई-निबंधन से उसकी प्रमाणित प्रति (Certified Copy) निकलवाएँ और हाथ वाले केवाले से मिलाएँ।
जमाबंदी देखने का पूरा तरीका: जमाबंदी, खतियान, LPC ऑनलाइन कैसे देखें।
2. एक ही ज़मीन दो लोगों को बेचना: कैसे पकड़ें?
इसमें विक्रेता एक ख़रीदार को केवाला कर देता है, और जमाबंदी अभी उसी के नाम होने का फ़ायदा उठाकर वही ज़मीन किसी दूसरे को भी बेच देता है। ऐसा तब होता है जब पहले ख़रीदार ने दाखिल-खारिज नहीं कराया होता। दो सरकारी जाँचें इसे पकड़ लेती हैं:
- भार प्रमाण पत्र (Encumbrance Certificate): enibandhan.bihar.gov.in पर "Encumbrance Certificate" से उस ज़मीन पर किसी अवधि में हुए रजिस्टर्ड लेन-देन की जानकारी मिलती है। अगर विक्रेता के केवाले के बाद उसी खेसरा का कोई और केवाला दिखे, तो वहीं रुकें।
- उस प्लॉट पर दायर दाखिल-खारिज आवेदन: राजस्व विभाग के अनुसार बिहार भूमि पर "दाखिल-खारिज आवेदन स्थिति देखें" में ज़िला, अंचल और वर्ष चुनकर, फिर मौज़ा और प्लॉट (खेसरा) नंबर भरकर देखा जा सकता है कि उस वित्तीय वर्ष में उस प्लॉट पर कौन-कौन से दाखिल-खारिज आवेदन दायर हुए हैं। अगर किसी और ख़रीदार ने पहले से आवेदन डाला है, तो यहाँ दिख जाएगा। इसे पिछले 2-3 वित्तीय वर्षों के लिए भी देखें।
दाखिल-खारिज का पूरा तरीका और समय-सीमा: दाखिल-खारिज ऑनलाइन गाइड।
3. पुश्तैनी ज़मीन: एक हिस्सेदार ने बाकियों से छिपाकर बेच दी
पटना के आसपास बहुत-सी ज़मीन पुश्तैनी है और जमाबंदी अक्सर दादा या परदादा के नाम पर चल रही होती है। ऐसे में एक वारिस "मेरा हिस्सा है" कहकर पूरी ज़मीन, या बिना बँटवारे वाला हिस्सा, बेच देता है। बाद में बाकी भाई-बहन बिक्री को चुनौती देते हैं और ख़रीदार सालों के मुक़दमे में फँस जाता है।
- वंशावली माँगें और देखें कि जमाबंदी किसके नाम है।
- हर हिस्सेदार या तो केवाले पर दस्तख़त करे, या रजिस्टर्ड कागज़ से अपना हिस्सा छोड़ चुका हो।
- "बहन ने मौखिक रूप से मना कर दिया है" या "चाचा बाद में साइन कर देंगे" पर कभी भरोसा न करें।
इस पर विस्तार से: पटना में प्लॉट ख़रीदने से पहले पूरी गाइड (वंशावली और हिस्सेदारों वाला हिस्सा), और पुश्तैनी ज़मीन का बँटवारा और वंशावली।
4. फ़र्ज़ी या रद्द हो चुकी पावर ऑफ़ अटॉर्नी
बाहर रहने वाले मालिकों की ज़मीन अक्सर पावर ऑफ़ अटॉर्नी (मुख़्तारनामा) से बिकती है। धोखा तीन तरह से होता है: POA बनी ही नहीं (फ़र्ज़ी), मालिक ने उसे रद्द कर दिया, या मालिक की मृत्यु हो चुकी है।
- POA रजिस्टर्ड हो और उसमें बेचने का अधिकार साफ़ लिखा हो। उसकी प्रमाणित प्रति ई-निबंधन से निकलवाकर मिलाएँ।
- मालिक से फ़ोन या वीडियो कॉल पर ख़ुद बात करें और पूछें कि क्या वे यह ज़मीन बेच रहे हैं और POA अभी लागू है।
- जहाँ तक हो सके, जमाबंदी में दर्ज मालिक से सीधे केवाला करवाएँ।
बाहर रहकर ख़रीदने वालों के लिए POA का सुरक्षित तरीका: बाहर रहकर पटना में प्रॉपर्टी कैसे ख़रीदें।
5. रोक वाली ज़मीन: रजिस्ट्री या निर्माण पर पाबंदी
कुछ ज़मीनों की रजिस्ट्री पर सरकारी रोक दर्ज होती है। ब्रोकर अक्सर यह बात छिपा लेता है, या रजिस्ट्री के दिन "छोटी-सी दिक़्क़त" बताकर और पैसे माँगता है। ई-निबंधन पर "View Prohibited Properties" में रजिस्ट्री कार्यालय, अंचल और गाँव चुनकर देखें कि उस गाँव की कौन-सी ज़मीनों पर रोक है, रोक किस तरह की है और वह अभी लागू (Active) है या नहीं।
ध्यान दें: रजिस्ट्री खुली होने का मतलब यह नहीं कि घर भी बन सकता है। पटना के पास पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप के गाँवों में रजिस्ट्री होती है, पर निर्माण पर रोक है। देखें: पाटलिपुत्र टाउनशिप: रजिस्ट्री खुली, निर्माण पर रोक और गाँवों की पूरी सूची।
6. गिरवी ज़मीन: बैंक का कर्ज़ छिपाकर बिक्री
अगर ज़मीन पर पहले से बैंक का कर्ज़ है, तो ख़रीदने के बाद भी बैंक का दावा बना रह सकता है। बिहार भूमि पर बंधक भूमि देखने की सुविधा में कम्प्यूटरीकृत जमाबंदी नंबर डालकर बिना लॉगिन देखा जा सकता है कि ज़मीन पर कोई बंधक दर्ज है या नहीं। यहाँ वही बंधक दिखते हैं जो ऑनलाइन दर्ज हुए हैं; इसलिए विक्रेता से लिखित घोषणा भी लें, और कर्ज़ चल रहा हो तो बैंक का कर्ज़ चुकता होने का प्रमाण (NOC) केवाले से पहले लें।
7. कागज़ में एक प्लॉट, साइट पर दूसरा
यह पटना की नई कॉलोनियों में बहुत आम है: केवाला किसी पीछे वाले या नीचे वाले खेसरे का होता है, और साइट पर सड़क किनारे का प्लॉट दिखा दिया जाता है। कॉलोनी का "प्लॉट नंबर" डेवलपर का अपना नंबर है, सरकारी रिकॉर्ड में खेसरा नंबर चलता है।
- भू-नक्शा पर उस खेसरे का नक्शा और LPM रिपोर्ट निकालें, और साइट पर जाकर बगल के खेसरे, सड़क और नाले से मिलाएँ। तरीका: भू-नक्शा बिहार कैसे देखें।
- महँगे प्लॉट के लिए सरकारी अमीन से नपाई (ई-मापी) करवाएँ।
- खाता, खेसरा और प्लॉट नंबर का फ़र्क: खाता, खेसरा, प्लॉट नंबर में अंतर।
8. बयाना लेकर ग़ायब, और ऑनलाइन ठगी
"आज ही बयाना दीजिए, कल दूसरी पार्टी ले लेगी" वाला दबाव धोखे का सबसे बड़ा संकेत है। सोशल मीडिया और लिस्टिंग साइट पर सस्ते प्लॉट का विज्ञापन डालकर, साइट दिखाए बिना UPI से "बुकिंग अमाउंट" माँगना भी आम ठगी है।
- सारी जाँच पूरी होने तक सिर्फ़ छोटा टोकन दें, वो भी बैंक ट्रांसफ़र या चेक से, विक्रेता (जमाबंदी वाले मालिक) के ही खाते में, ब्रोकर के खाते में नहीं।
- लिखित इक़रारनामा (सेल एग्रीमेंट) करें, जिसमें लिखा हो कि कागज़ में कमी निकली तो टोकन वापस होगा।
- अगर ऑनलाइन पेमेंट से ठगी हो गई है, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें (गृह मंत्रालय के I4C की सेवा)। जितनी जल्दी शिकायत, पैसा रुकवाने की उतनी ज़्यादा संभावना।
बिल्डर के फ़्लैट या प्लॉटिंग वाले प्रोजेक्ट में RERA की जाँच अलग से ज़रूरी है: पटना में फ़्लैट ख़रीदने से पहले चेकलिस्ट।
ख़रीदने के बाद: अपनी ज़मीन को धोखे से कैसे बचाएँ? (Jamabandi SMS Alert)
धोखा सिर्फ़ ख़रीदते समय नहीं होता। कई बार कोई और व्यक्ति आपकी ज़मीन का दाखिल-खारिज अपने नाम कराने का आवेदन डाल देता है। राजस्व विभाग के अनुसार जमाबंदी या खेसरा में बदलाव का एक ही रास्ता दाखिल-खारिज है (पुराने डिजिटाइज़ रिकॉर्ड की ग़लती का सुधार परिमार्जन प्लस से होता है)। इसलिए इन तीन चीज़ों पर नज़र रखें:
- SMS अलर्ट चालू करें: बिहार भूमि पर "SMS अलर्ट सेवा प्राप्त करें" पर क्लिक करें, मोबाइल नंबर से लॉगिन करें (नए हैं तो पहले रजिस्ट्रेशन), ज़िला और अंचल चुनें, फिर हल्का, मौज़ा, भाग संख्या और पृष्ठ संख्या भरकर अपनी जमाबंदी खोजें। जिन प्लॉट पर अलर्ट चाहिए उन पर टिक करें (या "Check All"), Proceed करें और OTP भरकर Submit करें। इसके बाद उस खेसरे पर दाखिल-खारिज या परिमार्जन प्लस का कोई भी आवेदन चलने पर, शुरू होते समय और पूरा होने पर, SMS आएगा।
- जमाबंदी से आधार और सही मोबाइल जुड़वाएँ: राजस्व विभाग के अनुसार जमाबंदी से आधार जोड़ने का काम राजस्व कर्मचारी करते हैं; जुड़ा नहीं है तो अपने राजस्व कर्मचारी या अंचल कार्यालय से संपर्क करें। इसके बाद जमाबंदी में बदलाव या आपकी जमाबंदी के ख़िलाफ़ दाखिल-खारिज आवेदन की सूचना मोबाइल पर आती है। स्थिति बिहार भूमि पर "आधार / मोबाइल सीडिंग स्थिति जांचें" में कम्प्यूटरीकृत जमाबंदी नंबर डालकर देखें।
- साल में एक-दो बार ख़ुद देखें: जमाबंदी पंजी और "दाखिल-खारिज आवेदन स्थिति देखें" (अपने मौज़ा और खेसरा से)। बाहर रहते हैं तो यह आदत ज़रूर डालें।
ध्यान दें: विभाग के FAQ के अनुसार जमाबंदी को दाखिल-खारिज के लिए "लॉक" करने का कोई प्रावधान नहीं है। आपकी सुरक्षा SMS अलर्ट और समय पर आपत्ति से ही है।
किसी ने आपकी ज़मीन पर दाखिल-खारिज डाल दिया? आपत्ति कैसे करें
राजस्व विभाग के FAQ के अनुसार अंचलाधिकारी दाखिल-खारिज का आदेश देने से पहले आम सूचना और ख़ास सूचना जारी करते हैं और 14 दिन तक आपत्ति का इंतज़ार करते हैं। इसी बीच आपत्ति दर्ज करें:
- बिहार भूमि पर "दाखिल-खारिज वाद पर आपत्ति दर्ज करें" पर क्लिक करें और मोबाइल नंबर से लॉगिन करें।
- ज़िला और अंचल चुनें, दाखिल-खारिज का वाद संख्या और वर्ष भरकर Next करें। विवरण सही हो तो "File Objection" पर क्लिक करें।
- आपत्ति का विवरण लिखें, अपने कागज़ों (केवाला, जमाबंदी, लगान रसीद) की PDF लगाएँ, Proceed करें और OTP भरकर Submit करें।
विभाग के अनुसार आपकी आपत्ति वाद अभिलेख का हिस्सा बन जाती है, और आपको सुने बिना अंचलाधिकारी वाद का निपटारा नहीं कर सकते। सुनवाई की तारीख़ SMS से और भौतिक नोटिस से बताई जाती है। अगर आदेश फिर भी आपके ख़िलाफ़ हो गया, तो आदेश के 30 दिन के भीतर भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) के पास अपील कर सकते हैं।
पटना में ज़मीन की ठगी हो जाए तो शिकायत कहाँ करें?
| क्या हुआ | कहाँ जाएँ |
|---|---|
| किसी ने आपकी ज़मीन पर दाखिल-खारिज का आवेदन डाला | बिहार भूमि पर ऑनलाइन आपत्ति; आदेश के ख़िलाफ़ 30 दिन में DCLR के पास अपील |
| नकली मालिक, जाली केवाला या जाली कागज़ से बिक्री | थाने में FIR। BNS 2023 में छल (धारा 318), प्रतिरूपण द्वारा छल (धारा 319), कूटरचना/जालसाज़ी (धारा 336) और जाली कागज़ को असली बताकर इस्तेमाल करना (धारा 340) अपराध हैं। केवाला रद्द कराने के लिए वकील से सिविल केस |
| ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा या रंगदारी | हर शनिवार थाने में अंचलाधिकारी और थानाध्यक्ष की संयुक्त बैठक में आवेदन |
| सीमा विवाद, बँटवारा, अनधिकृत निर्माण, रिकॉर्ड में ग़लत प्रविष्टि | बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम, 2009 के तहत DCLR के पास वाद (बिहार भूमि के "राजस्व न्यायालय" से ऑनलाइन) |
| UPI/ऑनलाइन पेमेंट से ठगी | तुरंत 1930 या cybercrime.gov.in, साथ में थाने में शिकायत |
| अंचल कार्यालय में काम समय पर न हो | लोक शिकायत: पटना अंचल कार्यालय और CO की सूची देखें |
शनिवार की बैठक: राजस्व विभाग की सूचना के अनुसार बिहार के सभी अंचलों में हर शनिवार अंचलाधिकारी और थानाध्यक्ष की संयुक्त बैठक थाना भवन पर होती है। ज़मीन पर रंगदारी या अवैध दख़ल का विवाद हो, या किसी कोर्ट/अधिकारी के आदेश का पालन कराना हो, तो यहाँ आवेदन दे सकते हैं।
भूमि विवाद निराकरण अधिनियम, 2009: विभाग के अनुसार यह क़ानून ऐसे विवादों के 90 दिन के भीतर संक्षिप्त निपटारे के लिए लाया गया। इसमें सक्षम प्राधिकार भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) हैं, और उनके आदेश के ख़िलाफ़ 30 दिन के भीतर आयुक्त के पास अपील होती है। कौन-सा मामला किस क़ानून में आएगा, यह अपने कागज़ लेकर किसी वकील से तय करें।
- बिहार भूमि, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग: जमाबंदी पंजी, दाखिल-खारिज आवेदन स्थिति, दाखिल-खारिज वाद पर आपत्ति, SMS अलर्ट, आधार/मोबाइल सीडिंग स्थिति, राजस्व न्यायालय — biharbhumi.bihar.gov.in
- नागरिक सुविधाओं के बारे में जानकारी, भाग-8 (SMS अलर्ट), भाग-14 (शनिवारीय बैठक), भाग-15 (प्लॉट पर दायर दाखिल-खारिज आवेदन), भाग-16 (आपत्ति की प्रक्रिया), भाग-17 (जमाबंदी से आधार), भाग-19 (भूमि विवाद निराकरण अधिनियम-2009, धारा 4 और 14) — biharbhumi.bihar.gov.in/Biharbhumi/CitizenInfo.aspx
- FAQ of Mutation (प्रश्न 17, 22-29: 14 दिन का नोटिस पीरियड, जमाबंदी लॉक का प्रावधान नहीं, DCLR के पास 30 दिन में अपील) और FAQ of SMS Alert — biharbhumi.bihar.gov.in/Biharbhumi/FAQ_Help.aspx
- बंधक भूमि खोज — land.bihar.gov.in/Encumbrances
- ई-निबंधन, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, बिहार: Certified Copy, Encumbrance Certificate, View Prohibited Properties, Grievance; हेल्पडेस्क 14544 — enibandhan.bihar.gov.in
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 (अधिनियम सं. 45, भारत का राजपत्र 25.12.2023): धारा 318, 319, 336, 340 — egazette.gov.in
- साइबर अपराध की शिकायत: 1930 और cybercrime.gov.in — भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), गृह मंत्रालय, i4c.mha.gov.in
- सभी पोर्टल और सूचनाएँ 18.10.2026 को खोलकर जाँची गईं।
आपको क्या करना चाहिए? (हमारी सलाह)
- सस्ता सौदा और जल्दबाज़ी साथ में दिखें, तो मान लीजिए कुछ छिपाया जा रहा है। पटना में अच्छी ज़मीन "आज ही" नहीं बिकती।
- हर जाँच ख़ुद करें: जमाबंदी, दाखिल-खारिज आवेदन (उस प्लॉट पर), बंधक, रोक वाली सूची और EC। विक्रेता या ब्रोकर के भेजे स्क्रीनशॉट से नहीं, सीधे सरकारी पोर्टल से।
- पैसा सिर्फ़ बैंक से, जमाबंदी वाले मालिक के खाते में। बड़ी नक़द रक़म कभी नहीं।
- रजिस्ट्री के तुरंत बाद दाखिल-खारिज का आवेदन करें (90 दिन के भीतर), और नई जमाबंदी पर SMS अलर्ट चालू करें। दूसरी बार बिकने का ख़तरा यहीं ख़त्म होता है।
- बाहर रहते हैं तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति के साथ-साथ एक स्वतंत्र जाँच भी करवाएँ, जिसका सौदे में कोई कमीशन न हो।
- पूरी जाँच-सूची: पटना में प्लॉट ख़रीदने से पहले पूरी गाइड। सारे सरकारी रिकॉर्ड एक जगह: बिहार लैंड रिकॉर्ड ऑनलाइन कैसे देखें।
ज़मीन धोखाधड़ी से जुड़े सवाल-जवाब
- पटना में ज़मीन फ़्रॉड से कैसे बचें?
पैसा देने से पहले बिहार भूमि पर जमाबंदी, उस प्लॉट पर दायर दाखिल-खारिज आवेदन और बंधक ख़ुद देखें; ई-निबंधन पर रोक वाली ज़मीन की सूची और भार प्रमाण पत्र (EC) देखें; मालिक से उनके घर पर मिलें; और टोकन छोटा, बैंक से, लिखित इक़रारनामे के साथ दें।
- एक ही ज़मीन दो लोगों को बेच दी गई है, कैसे पता करें?
ई-निबंधन से उस ज़मीन का भार प्रमाण पत्र (EC) लें, उसमें रजिस्टर्ड लेन-देन दिखते हैं। साथ ही बिहार भूमि पर "दाखिल-खारिज आवेदन स्थिति देखें" में अंचल, वर्ष, मौज़ा और प्लॉट नंबर डालकर देखें कि उस प्लॉट पर किसी और ने दाखिल-खारिज का आवेदन तो नहीं डाला।
- जमाबंदी पर SMS अलर्ट कैसे लगाएँ?
biharbhumi.bihar.gov.in पर "SMS अलर्ट सेवा प्राप्त करें" खोलें, मोबाइल से लॉगिन करें, ज़िला-अंचल चुनें, हल्का, मौज़ा, भाग और पृष्ठ संख्या से जमाबंदी खोजें, प्लॉट पर टिक करें और OTP से Submit करें। फिर उस खेसरे पर दाखिल-खारिज या परिमार्जन का आवेदन चलने पर SMS आएगा।
- कोई मेरी ज़मीन का दाखिल-खारिज अपने नाम करा रहा है, क्या करूँ?
बिहार भूमि पर "दाखिल-खारिज वाद पर आपत्ति दर्ज करें" से वाद संख्या और वर्ष डालकर, अपने कागज़ों की PDF के साथ ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करें। अंचलाधिकारी आदेश से पहले 14 दिन आपत्ति का इंतज़ार करते हैं, और आपको सुने बिना निपटारा नहीं कर सकते। आदेश ख़िलाफ़ हो तो 30 दिन में DCLR के पास अपील करें।
- ज़मीन की धोखाधड़ी की शिकायत कहाँ करें?
जाली कागज़ या नकली मालिक के मामले में थाने में FIR करें (BNS 2023 की धारा 318, 319, 336, 340 जैसे अपराध)। अवैध कब्ज़े के लिए शनिवार को थाने में अंचलाधिकारी-थानाध्यक्ष की बैठक में आवेदन दें। ऑनलाइन पेमेंट की ठगी पर तुरंत 1930 पर कॉल करें। केवाला रद्द कराने के लिए वकील से सलाह लें।
- क्या जमाबंदी को लॉक कर सकते हैं ताकि कोई बेच न सके?
नहीं। राजस्व विभाग के FAQ के अनुसार जमाबंदी को दाखिल-खारिज के लिए लॉक करने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके बदले SMS अलर्ट चालू करें और जमाबंदी से आधार-मोबाइल जुड़वाएँ, ताकि कोई भी आवेदन होते ही आपको पता चले और आप आपत्ति कर सकें।
- पावर ऑफ़ अटॉर्नी वाली ज़मीन खरीदना सुरक्षित है?
तभी, जब POA रजिस्टर्ड हो, उसमें बेचने का अधिकार लिखा हो, उसकी प्रमाणित प्रति ई-निबंधन से मिल जाए, और आपने मालिक से ख़ुद बात करके पक्का कर लिया हो कि वे जीवित हैं और POA रद्द नहीं हुई। जहाँ हो सके, मालिक से सीधे केवाला कराएँ।
यह लेख 18 अक्टूबर 2026 को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार के बिहार भूमि पोर्टल, नागरिक सुविधा सूचनाओं और FAQ, ई-निबंधन पोर्टल, भारतीय न्याय संहिता 2023 और I4C (गृह मंत्रालय) पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। यह सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। धोखाधड़ी के किसी मामले में तुरंत किसी वकील से सलाह लें, और कोई भी सौदा करने से पहले मूल कागज़, सरकारी रिकॉर्ड और अंचल कार्यालय से पुष्टि करें।