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Bihar Land Conversion 2026: क़ानून ख़त्म, पटना में खेत की ज़मीन पर घर

सीधा जवाब

बिहार में लैंड कन्वर्ज़न का क़ानून ख़त्म हो चुका है, 3 अगस्त 2026 से।

  • खेत की ज़मीन पर घर के लिए अब SDO से कन्वर्ज़न और बाज़ार मूल्य का 10% शुल्क नहीं। पोर्टल बंद है।
  • ज़मीन कमर्शियल बनानी हो तो रजिस्टर्ड Conversion Deed: (कमर्शियल MVR − कृषि MVR) का 7% + 2%।
  • पटना प्लानिंग एरिया में घर बनेगा या नहीं, यह मास्टर प्लान का ज़ोन और नक्शा पास तय करता है।
📑 5 हिस्सों में सीधे जाएँ
  1. खेती की ज़मीन पर घर: क्या चाहिए
  2. Conversion Deed और उसका ख़र्च
  3. ज़मीन की श्रेणी सही लिखें
  4. पुराना आवेदन या सर्टिफ़िकेट
  5. सवाल-जवाब

अब पटना में खेती की ज़मीन पर घर बनाने के लिए क्या चाहिए?

बिहटा या नौबतपुर की तरफ़ 4 कट्ठा ली है, जो जमाबंदी में खेती की ज़मीन दर्ज है? 2026 से पहले कहा जाता: "पहले कन्वर्ज़न कराइए, बाज़ार मूल्य का 10%।" वह ख़त्म हुआ। अब ये बातें देखिए:

  1. ज़मीन पटना प्लानिंग एरिया में है या नहीं: पटना मास्टर प्लान 2031 का प्लानिंग एरिया 1,167.04 वर्ग किमी का है, जिसमें 13 प्रखंडों के 575 राजस्व गाँव हैं (बिहटा, दानापुर, फुलवारी, पुनपुन, नौबतपुर, मनेर, फतुहा, संपतचक वग़ैरह)। यहाँ ज़मीन का इस्तेमाल मास्टर प्लान से तय होता है। ज़ोनल प्लान आने तक भूमि-उपयोग नहीं बदल सकता (रिपोर्ट, पेज 150)।
  2. ज़मीन किस ज़ोन में है: रिहायशी ज़ोन में आसान है; बाक़ी में सख़्त शर्तें (नीचे टेबल)। ज़ोन जानने का तरीका: पटना मास्टर प्लान 2031 आसान भाषा में।
  3. नक्शा पास: नगर निकाय या प्लानिंग प्राधिकरण बिल्डिंग बायलॉज से नक्शा पास करता है। 2026 के ड्राफ़्ट बायलॉज भी ज़मीन का इस्तेमाल मास्टर प्लान के ज़ोन से जोड़ते हैं, राजस्व कन्वर्ज़न सर्टिफ़िकेट से नहीं; ड्राफ़्ट अभी अंतिम नहीं।
  4. पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप: इसके गाँवों में निर्माण पर अलग रोक है: रजिस्ट्री खुली, निर्माण पर रोक।
मास्टर प्लान ज़ोन (पटना)घर बनाने का नियम
रिहायशी (R1/R2)घर बन सकता है, नक्शा पास कराकर
गाँव बसावट (Village Settlement)गाँव की आबादी के चारों ओर 100 मीटर की पट्टी बढ़ोतरी के लिए; FAR 1 (पेज 71)
शहरी कृषि (Urban Agriculture)FAR 0.75; घर तभी, जब कवरेज 20% से ज़्यादा न हो, ऊँचाई 7 मीटर तक हो और कम-से-कम 60% ज़मीन पर पेड़-पौधे/खेती हो (पेज 71, DCR पेज 278)
संरक्षण (Conservation)FAR 0.5; प्लॉटिंग वाले मकान मना; अपार्टमेंट सिर्फ़ प्राधिकरण की विशेष अनुमति से; नदी/नहर और तटबंध के बीच कोई निर्माण नहीं (पेज 71, 274)

मतलब: कन्वर्ज़न ख़त्म होने से "हर खेत पर घर" की छूट नहीं मिली। SDO वाली जाँच न रहने से ख़रीदने से पहले ज़ोन देखना और ज़रूरी हो गया है। और पढ़ें: ग्रीन बेल्ट में घर बन सकता है?

Conversion Deed क्या है और इसका ख़र्च कितना है?

15 सितंबर 2026 से खेत की ज़मीन का वर्गीकरण कमर्शियल करने के लिए रजिस्टर्ड Conversion Deed (रूपांतरण दस्तावेज़) होता है। इसका ख़र्च:

खर्चदर (23 सितंबर 2026 से)
स्टांप ड्यूटी(कमर्शियल MVR − कृषि MVR) × 7%
रजिस्ट्री फ़ीस(कमर्शियल MVR − कृषि MVR) × 2%
कुल सरकारी खर्चMVR के अंतर का 9%

उदाहरण (काल्पनिक दर): कमर्शियल MVR ₹5 लाख प्रति डिसमिल, कृषि MVR ₹1 लाख प्रति डिसमिल, ज़मीन 10 डिसमिल (लगभग 3.2 कट्ठा)। अंतर = (5 − 1) × 10 = ₹40 लाख। स्टांप ड्यूटी ₹2,80,000, फ़ीस ₹80,000, कुल ₹3,60,000। अपने मौज़े का असली MVR रजिस्ट्री ऑफ़िस या e-Nibandhan से पता कीजिए।

घर (रिहायशी) के लिए? 18 अक्टूबर 2026 तक के सरकारी नोटिफ़िकेशन में Conversion Deed सिर्फ़ कृषि से कमर्शियल के लिए है। रिहायशी इस्तेमाल का कोई अलग दस्तावेज़ या शुल्क नहीं। नया आदेश आए तो हम यह लेख अपडेट करेंगे।

स्रोत: निबंधन (बिहार संशोधन) अधिनियम 2026 और 23 सितंबर 2026 के नोटिफ़िकेशन (पूरी सूची सबसे नीचे)।

ज़मीन की श्रेणी सही लिखिए

रजिस्ट्री का खर्च MVR पर लगता है, और हर श्रेणी का MVR अलग है। जून 2026 के बदलाव से पूरे बिहार में श्रेणियाँ एक जैसी हुईं (सूची नीचे बंद बॉक्स में)। उसी से MVR एक बार बढ़ा: ग्रामीण इलाक़ों में 1.6 गुना, शहरी और बाहरी इलाक़ों में 2 गुना। उसके बाद हर वित्त वर्ष 5% बढ़ोतरी। पूरा हिसाब: पटना रजिस्ट्री खर्च।

ग़लत श्रेणी का ख़तरा: अगस्त 2026 के स्टांप क़ानून में बदलाव के बाद, वर्गीकरण, लोकेशन या ढाँचा ग़लत लगे तो रजिस्ट्री अधिकारी मामला कलेक्टर/AIG को भेजेंगे। कलेक्टर 4 साल तक (पहले 2) केवाला दोबारा खोल सकते हैं। जानबूझकर ग़लत जानकारी पर कम पड़ी ड्यूटी के बराबर (100%) जुर्माना। मकान वाली ज़मीन को "खेत" बताकर सस्ती रजिस्ट्री बाद में महँगी पड़ सकती है।

पुराना आवेदन पेंडिंग था या सर्टिफ़िकेट मिल चुका है, तो अब क्या?

आपकी स्थितिक़ानून क्या कहता है
कन्वर्ज़न सर्टिफ़िकेट 7 जुलाई 2026 से पहले मिल चुका हैमान्य रहेगा: निरसन अधिनियम कहता है कि पुराने क़ानून में जो हो चुका, उस पर सवाल नहीं उठेगा। कॉपी संभालकर रखें।
आवेदन किया था, पर फ़ैसला नहीं हुआ थाअध्यादेश के अनुसार जो कार्यवाही अंतिम नहीं हुई थी, वह ख़त्म (abate) हो गई। पोर्टल पर भी लिखा है कि सारे चालू आवेदन रोक दिए गए हैं।
शुल्क भर दिया था, पर सर्टिफ़िकेट नहीं मिलापैसे की वापसी पर कोई सरकारी आदेश हमें 18 अक्टूबर 2026 तक नहीं मिला। SDO कार्यालय या राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से लिखित में पूछें, और रसीद संभालकर रखें।

SDO और CO के नंबर: पटना अंचल अधिकारी सूची।

आपको क्या करना चाहिए? (हमारी सलाह)

  • "कन्वर्ज़न करा देंगे" कहकर पैसा माँगे, तो न दें। यह प्रक्रिया अब है ही नहीं; ऐसी माँग ख़तरे का संकेत है (ज़मीन फ़्रॉड)।
  • खेती की ज़मीन ख़रीदने से पहले जमाबंदी-खतियान (तरीका), मास्टर प्लान ज़ोन, MVR श्रेणी, प्लॉट तक सार्वजनिक रास्ता, और पुनपुन, सोन, गंगा के पास बरसात का पानी देखिए।
  • ज़ोन के हिसाब से दाम लगाइए। शहरी कृषि या संरक्षण ज़ोन की ज़मीन का रिहायशी दाम न दें।
  • दुकान बनानी है? ख़रीदने से पहले कमर्शियल और कृषि MVR पूछिए; अंतर का 9% Conversion Deed में जाएगा।
  • पुराना कन्वर्ज़न सर्टिफ़िकेट है? संभालकर रखिए; बेचते समय काम आता है।
  • पूरी सूची: पटना प्लॉट ख़रीद गाइड।

बिहार लैंड कन्वर्ज़न से जुड़े सवाल-जवाब

  1. लैंड कन्वर्ज़न क़ानून ख़त्म क्यों किया गया?

    अध्यादेश में सरकार ने लिखा है: इससे उम्मीद के मुताबिक़ राजस्व नहीं मिल रहा था, और "Ease of Doing Business", "Ease of Living" और तेज़ औद्योगीकरण में रुकावट आ रही थी।

  2. बिहार भूमि के FAQ में अब भी कन्वर्ज़न लिखा है। क्या वह लागू है?

    नहीं। पुराना FAQ पेज 18 अक्टूबर 2026 को भी ऑनलाइन था और उसमें पुरानी प्रक्रिया है। landconversion.bihar.gov.in पर विभाग की सूचना कहती है कि पोर्टल स्थायी रूप से बंद है और कोई नया आवेदन, भुगतान या कागज़ नहीं लिया जाएगा।

  3. क्या पटना नगर निगम के अंदर कभी कन्वर्ज़न लगता था?

    नहीं। 2010 का क़ानून बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 वाले नगर क्षेत्र और कैंटोनमेंट पर लागू ही नहीं था। शहर में नक्शा और मास्टर प्लान के नियम तब भी लगते थे, अब भी लगते हैं।

  4. क्या उद्योग या कारोबार के लिए तेज़ रास्ता है?

    हाँ, उद्यमों के लिए। बिहार ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस अधिनियम, 2026 में ज़िला अधिकार-प्राप्त समिति से "Certificate of In-Principle Approval" मिलते ही ज़मीन का गैर-कृषि उपयोग उसी तारीख़ से माना जाता है। इसके लिए तय फ़ीस देनी होती है। इसी अधिनियम में उद्यमों के 24 मीटर तक के रिहायशी भवनों के नक्शे पर third-party certification भी है। यह आम प्लॉट ख़रीदार के लिए नहीं।

अगला कदम Patna Green Belt Me Ghar Ban Sakta Hai? मास्टर प्लान 2031 के ज़ोन नियम अब देखिए मास्टर प्लान उस ज़मीन पर घर बनाने देता है या नहीं। आगे पढ़िए →
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क़ानून कैसे ख़त्म हुआ: तारीख़ें और सरकारी कागज़
तारीख़क्या हुआसरकारी कागज़
7 जुलाई 2026अध्यादेश से 2010 वाला कन्वर्ज़न क़ानून निरस्त। जो आवेदन अंतिम नहीं हुए थे, वे ख़त्म (abate) हो गएबिहार अध्यादेश 04, 2026; बिहार गजट (असाधारण) सं. 742
जुलाई 2026विधानमंडल के मानसून सत्र में निरसन विधेयक पासबिहार कृषि भूमि (गैर कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) विधेयक, 2026
3 अगस्त 2026राज्यपाल की मंज़ूरी (2 अगस्त) के बाद निरसन अधिनियम गजट में छपा और उसी दिन से लागूबिहार अधिनियम 18, 2026; गजट सं. 920
15 सितंबर 2026"Conversion Deed" अनिवार्य रूप से रजिस्टर होने वाले दस्तावेज़ों में जोड़ा गयानिबंधन (बिहार संशोधन) अधिनियम, 2026 (बिहार अधिनियम 31, 2026); गजट सं. 1117
23 सितंबर 2026Conversion Deed पर 7% स्टांप ड्यूटी और 2% रजिस्ट्री फ़ीस (कमर्शियल और कृषि MVR के अंतर पर) तयनिबंधन विभाग के नोटिफ़िकेशन, गजट सं. 1147 और 1148

पुराना नियम, जानकारी के लिए: खेती की ज़मीन के बाज़ार मूल्य का 10% शुल्क, ऑनलाइन; मंज़ूरी SDO देते थे, CO की जाँच और ज़िला अवर निबंधक की शुल्क रिपोर्ट के बाद; बिना कन्वर्ज़न इस्तेमाल पर शुल्क के ऊपर 50% जुर्माना। तब भी रैयत का अपने घरेलू, खेती या शिक्षा के लिए मकान, तालाब, कुआँ; एक एकड़ से कम का सूक्ष्म गृह उद्योग; 500 वर्ग फ़ुट तक की छोटी दुकान वग़ैरह छूट में थे।

बिहार में MVR की ज़मीन श्रेणियाँ (जून 2026 से)
ग्रामीण और बाहरी इलाक़ाशहरी और महानगर इलाक़ा
कमर्शियल ज़मीनप्रधान सड़क: कमर्शियल/रिहायशी
औद्योगिक ज़मीनमुख्य सड़क: कमर्शियल/रिहायशी
रिहायशी ज़मीनऔद्योगिक ज़मीन
हाईवे और MDR से सटी ज़मीनशाखा सड़क: कमर्शियल/रिहायशी
सिंचित ज़मीनदूसरी सड़कें (गली): रिहायशी
असिंचित ज़मीनकृषि/गैर-रिहायशी
परती (बलुआही, पथरीली, दियारा, चौर वग़ैरह)—

दर प्रति डिसमिल (बिहार स्टांप नियमावली में बदलाव, गजट सं. 635)।

स्रोत (Sources)
  • बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) अध्यादेश, 2026 (बिहार अध्यादेश 04, 2026), दिनांक 4 जुलाई 2026, बिहार गजट (असाधारण) सं. 742, 7 जुलाई 2026, पेज 3: धारा 2 (निरसन; अंतिम न हुई कार्यवाही abate) — PDF
  • बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) अधिनियम, 2026 (बिहार अधिनियम 18, 2026), राज्यपाल की अनुमति 2 अगस्त 2026, गजट सं. 920, 3 अगस्त 2026: धारा 1(2), 2 (निरसन और व्यावृत्ति) — PDF
  • निबंधन (बिहार संशोधन) अधिनियम, 2026 (बिहार अधिनियम 31, 2026), गजट सं. 1117, 15 सितंबर 2026: धारा 17(1)(f) "Conversion Deed" — PDF
  • मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग की अधिसूचनाएँ, 23 सितंबर 2026: अनुसूची-1A अनुच्छेद 23A (Conversion Deed पर 7% स्टांप ड्यूटी), गजट सं. 1147 — PDF; निबंधन शुल्क तालिका अनुच्छेद A(1) (2%), गजट सं. 1148 — PDF
  • बिहार स्टांप (लिखतों के अवमूल्यन का निवारण) (संशोधन) नियमावली, 2026, गजट सं. 635, 19 जून 2026: नियम 5 (ज़मीन की श्रेणियाँ), नियम 6(2)(c)-(d) (हर 3 साल पूरा संशोधन, सालाना 5%, एक बार 1.6/2 गुना) — PDF
  • भारतीय स्टांप (बिहार संशोधन) अधिनियम, 2026 (बिहार अधिनियम 29, 2026), गजट सं. 1017, 20 अगस्त 2026: धारा 47A(1), (3), (7) — PDF
  • पुराना क़ानून: बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) अधिनियम, 2010, धारा 1(2) (नगर क्षेत्र और कैंटोनमेंट बाहर) — PDF; पुरानी प्रक्रिया, 10% शुल्क, धारा 6(4), 8, 9: बिहार भूमि FAQ — biharbhumi.bihar.gov.in
  • "Portal Closure Notice: Repeal of the Land Conversion Act", राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, 18 अक्टूबर 2026 को देखा — landconversion.bihar.gov.in
  • बिहार ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस अधिनियम, 2026, गजट सं. 1120, 16 सितंबर 2026: धारा 2(d) (deemed change in land use), अनुसूची III (third-party certification) — PDF
  • पटना मास्टर प्लान 2031 रिपोर्ट (TCPO, नगर विकास एवं आवास विभाग): पेज 22-23 (प्लानिंग एरिया), 71 (ज़ोन), 150 (भूमि-उपयोग), DCR पेज 274, 278

यह जानकारी सरकारी स्रोतों से 28 अक्टूबर 2026 को जाँची गई है। नियम बदलते रहते हैं, पैसा देने से पहले रजिस्ट्री या अंचल ऑफ़िस से पक्का कर लें।

प्रेम प्रकाश यादव

भारतीय वायुसेना में 36+ साल की सेवा, और साथ-साथ पटना की ज़मीन का 20+ साल का अनुभव।

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