Bihar Land Conversion 2026: क़ानून ख़त्म, पटना में खेत की ज़मीन पर घर
सीधा जवाब: बिहार में खेती की ज़मीन का कन्वर्ज़न (संपरिवर्तन) कराने वाला क़ानून, बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए संपरिवर्तन) अधिनियम, 2010, ख़त्म हो चुका है: पहले 7 जुलाई 2026 को अध्यादेश से, फिर 3 अगस्त 2026 को क़ानून (बिहार अधिनियम 18, 2026) से। यानी पटना या बिहार में खेती की ज़मीन पर घर बनाने के लिए अब SDO से कन्वर्ज़न और बाज़ार मूल्य का 10% शुल्क वाली प्रक्रिया नहीं है, और landconversion.bihar.gov.in पोर्टल बंद है। पर दो बातें अब भी लागू हैं: (1) ज़मीन को कमर्शियल इस्तेमाल में बदलने के लिए 23 सितंबर 2026 से "Conversion Deed" (रूपांतरण दस्तावेज़) की रजिस्ट्री का नियम है, जिसमें (कमर्शियल MVR − कृषि MVR) का 7% स्टांप ड्यूटी + 2% निबंधन शुल्क लगता है; (2) पटना प्लानिंग एरिया में घर बनेगा या नहीं, यह मास्टर प्लान का ज़ोन और नक्शा पास तय करता है, ज़मीन का "कृषि" दर्ज होना नहीं।
एक उदाहरण: मान लीजिए आपने बिहटा या नौबतपुर की तरफ़ 4 कट्ठा ज़मीन ली है, जो जमाबंदी में खेती की ज़मीन के रूप में दर्ज है। 2026 से पहले आपसे कहा जाता: "पहले कन्वर्ज़न कराइए, बाज़ार मूल्य का 10% लगेगा।" अब वह क़ानून ही नहीं है। आपके सवाल अब ये हैं: यह ज़मीन मास्टर प्लान के किस ज़ोन में है? नक्शा पास होगा या नहीं? और अगर आगे दुकान या गोदाम बनाना है, तो Conversion Deed का खर्च कितना आएगा? नीचे यही सब है।
बिहार में लैंड कन्वर्ज़न क़ानून कब और कैसे ख़त्म हुआ?
पूरा क्रम बिहार गजट में छपे सरकारी कागज़ों से:
| तारीख़ | क्या हुआ | सरकारी कागज़ |
|---|---|---|
| 7 जुलाई 2026 | अध्यादेश से 2010 वाला कन्वर्ज़न क़ानून निरस्त। जो आवेदन अंतिम नहीं हुए थे, वे ख़त्म (abate) हो गए | बिहार अध्यादेश 04, 2026; बिहार गजट (असाधारण) सं. 742 |
| जुलाई 2026 | विधानमंडल के मानसून सत्र में निरसन विधेयक पास | बिहार कृषि भूमि (गैर कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) विधेयक, 2026 |
| 3 अगस्त 2026 | राज्यपाल की मंज़ूरी (2 अगस्त) के बाद निरसन अधिनियम गजट में छपा और उसी दिन से लागू | बिहार अधिनियम 18, 2026; गजट सं. 920 |
| 15 सितंबर 2026 | रजिस्ट्रेशन अधिनियम की धारा 17(1) में "Conversion Deed" जोड़ा गया, यानी यह अनिवार्य रूप से रजिस्टर होने वाला दस्तावेज़ बना | निबंधन (बिहार संशोधन) अधिनियम, 2026 (बिहार अधिनियम 31, 2026); गजट सं. 1117 |
| 23 सितंबर 2026 | Conversion Deed पर 7% स्टांप ड्यूटी और 2% निबंधन शुल्क (कमर्शियल और कृषि MVR के अंतर पर) तय | निबंधन विभाग की अधिसूचनाएँ, गजट सं. 1147 और 1148 |
सरकार ने अध्यादेश में वजह लिखी है: इस क़ानून से उम्मीद के मुताबिक़ राजस्व नहीं मिल रहा था, और "Ease of Doing Business", "Ease of Living" और तेज़ औद्योगीकरण में रुकावट आ रही थी।
ध्यान दें: बिहार भूमि वेबसाइट का पुराना FAQ पेज ("कृषि भूमि का गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्त्तन") 18 अक्टूबर 2026 को भी ऑनलाइन है और उसमें अब भी पुरानी प्रक्रिया लिखी है। वह अब लागू नहीं है। लैंड कन्वर्ज़न पोर्टल पर विभाग की सूचना साफ़ लिखती है कि क़ानून निरस्त होने के बाद पोर्टल स्थायी रूप से बंद है और कोई नया आवेदन, भुगतान या कागज़ नहीं लिया जाएगा।
पहले क्या नियम था? (2010 वाला कन्वर्ज़न क़ानून)
बहुत-से लोग अब भी पुरानी बात बताते हैं, इसलिए एक बार समझ लीजिए कि क्या ख़त्म हुआ है:
- शुल्क: खेती की ज़मीन के बाज़ार मूल्य का 10%, ऑनलाइन।
- कौन देता था मंज़ूरी: अनुमंडल पदाधिकारी (SDO)। अंचलाधिकारी (CO) ज़मीन की जाँच करते थे और ज़िला अवर निबंधक शुल्क बताते थे।
- बिना कन्वर्ज़न इस्तेमाल पर: शुल्क के ऊपर उसका 50% जुर्माना (धारा 6(4))।
- पहले से छूट: रैयत का अपने घरेलू, खेती या शिक्षा के काम के लिए मकान, तालाब, कुआँ; एक एकड़ से कम का सूक्ष्म गृह उद्योग; 500 वर्ग फ़ुट तक की छोटी दुकान वग़ैरह (धारा 8)।
- नगर निकाय में लागू ही नहीं था: क़ानून की धारा 1(2) के अनुसार यह बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के तहत बने नगर क्षेत्र और कैंटोनमेंट पर लागू नहीं होता था। यानी पटना नगर निगम के अंदर इस क़ानून वाला कन्वर्ज़न पहले भी नहीं लगता था।
पुराना कन्वर्ज़न आवेदन पेंडिंग था या सर्टिफ़िकेट मिल चुका है, तो अब क्या?
| आपकी स्थिति | क़ानून क्या कहता है |
|---|---|
| कन्वर्ज़न सर्टिफ़िकेट 7 जुलाई 2026 से पहले मिल चुका है | मान्य रहेगा। निरसन अधिनियम की धारा 2 कहती है कि पुराने क़ानून के तहत जो हो चुका, उसकी वैधता पर सवाल नहीं उठेगा। सर्टिफ़िकेट की कॉपी संभालकर रखें। |
| आवेदन किया था, पर फ़ैसला नहीं हुआ था | अध्यादेश के अनुसार जो कार्यवाही अंतिम नहीं हुई थी, वह ख़त्म (abate) हो गई। पोर्टल पर भी लिखा है कि सारे चालू आवेदन रोक दिए गए हैं। |
| शुल्क भर दिया था, पर सर्टिफ़िकेट नहीं मिला | पैसे की वापसी पर कोई सरकारी आदेश हमें 18 अक्टूबर 2026 तक नहीं मिला। अपने अनुमंडल कार्यालय (SDO) या राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से लिखित में पूछें, और भुगतान की रसीद संभालकर रखें। |
पटना के SDO और CO कार्यालयों के नंबर: पटना सर्किल ऑफ़िसर लिस्ट।
अब पटना में खेती की ज़मीन पर घर बनाने के लिए क्या चाहिए?
राजस्व वाला कन्वर्ज़न ख़त्म हुआ है, पर शहर बसाने के नियम ख़त्म नहीं हुए। घर बनाने से पहले ये चार बातें देखिए:
- ज़मीन पटना प्लानिंग एरिया में है या नहीं: पटना मास्टर प्लान 2031 का प्लानिंग एरिया 1,167.04 वर्ग किमी का है, जिसमें 13 प्रखंडों के 575 राजस्व गाँव आते हैं (बिहटा, दानापुर, फुलवारी, पुनपुन, नौबतपुर, मनेर, फतुहा, संपतचक वग़ैरह)। इस इलाक़े में ज़मीन का इस्तेमाल मास्टर प्लान से तय होता है। मास्टर प्लान रिपोर्ट (पेज 150) के अनुसार ज़ोनल प्लान आने तक विकास मास्टर प्लान के हिसाब से होगा और भूमि-उपयोग में बदलाव की अनुमति नहीं है।
- ज़मीन किस ज़ोन में है: रिहायशी ज़ोन में घर बनाना आसान है। पर कुछ ज़ोन में सख़्त शर्तें हैं (नीचे टेबल देखें)। ज़ोन जानने का तरीका: पटना मास्टर प्लान 2031 आसान भाषा में।
- नक्शा पास: नगर निगम/नगर परिषद या प्लानिंग एरिया में बिल्डिंग बायलॉज के हिसाब से नक्शा पास कराना होता है। 2026 के ड्राफ़्ट बिल्डिंग बायलॉज भी ज़मीन का इस्तेमाल मास्टर प्लान/डेवलपमेंट प्लान के ज़ोन से ही जोड़ते हैं, किसी राजस्व कन्वर्ज़न सर्टिफ़िकेट से नहीं। (ड्राफ़्ट अभी अंतिम नहीं है।) बिहार ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस अधिनियम, 2026 (16 सितंबर 2026) में उद्यमों (बिल्डर/डेवलपर समेत) के 24 मीटर तक के रिहायशी भवनों के नक्शे पर third-party certification का प्रावधान है; आम व्यक्ति के अपने घर पर यह कैसे लागू होगा, अपने नगर निकाय से पक्का करें।
- पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप: इसके गाँवों में निर्माण पर अलग रोक और नियम हैं। अपना गाँव ज़रूर देखें: पाटलिपुत्र टाउनशिप: रजिस्ट्री खुली, निर्माण पर रोक।
| मास्टर प्लान ज़ोन (पटना) | घर बनाने का नियम |
|---|---|
| रिहायशी (R1/R2) | घर बन सकता है, नक्शा पास कराकर |
| गाँव बसावट (Village Settlement) | गाँव की आबादी के चारों ओर 100 मीटर की पट्टी बढ़ोतरी के लिए; FAR 1 (पेज 71) |
| शहरी कृषि (Urban Agriculture) | FAR 0.75; घर तभी, जब कवरेज 20% से ज़्यादा न हो, ऊँचाई 7 मीटर तक हो और कम-से-कम 60% ज़मीन पर पेड़-पौधे/खेती हो (पेज 71, DCR पेज 278) |
| संरक्षण (Conservation) | FAR 0.5; प्लॉटिंग और अपार्टमेंट मना; नदी/नहर और तटबंध के बीच कोई निर्माण नहीं (पेज 71, 274) |
मतलब: कन्वर्ज़न ख़त्म होने से "हर खेत पर घर" की छूट नहीं मिली है। प्लॉट ख़रीदने से पहले ज़ोन देखना अब और ज़रूरी हो गया है, क्योंकि पहले जो SDO की जाँच होती थी, वह अब नहीं है।
दुकान, गोदाम या कमर्शियल इस्तेमाल के लिए Conversion Deed क्या है?
15 सितंबर 2026 के संशोधन के बाद "Conversion Deed" (रूपांतरण/संपरिवर्तन दस्तावेज़) वह रजिस्टर्ड दस्तावेज़ है, जिससे ज़मीन का मालिक उसका वर्गीकरण कृषि से कमर्शियल में बदलवाना चाहता है। यह अवर निबंधन कार्यालय में रजिस्टर होता है और इस पर ये खर्च लगता है:
| खर्च | दर (23 सितंबर 2026 से) |
|---|---|
| स्टांप ड्यूटी | (कमर्शियल MVR − कृषि MVR) × 7% |
| निबंधन शुल्क | (कमर्शियल MVR − कृषि MVR) × 2% |
| कुल सरकारी खर्च | MVR के अंतर का 9% |
हिसाब का उदाहरण (काल्पनिक दर): मान लीजिए किसी मौज़े में कमर्शियल ज़मीन का MVR ₹5 लाख प्रति डिसमिल और खेती की ज़मीन का MVR ₹1 लाख प्रति डिसमिल है। आपकी ज़मीन 10 डिसमिल (लगभग 3.2 कट्ठा) है। अंतर = (5 − 1) × 10 = ₹40 लाख। स्टांप ड्यूटी = ₹2,80,000, निबंधन शुल्क = ₹80,000, कुल ₹3,60,000। आपके मौज़े का असली MVR अवर निबंधन कार्यालय या e-Nibandhan से पता करें।
उद्योग/कारोबार (enterprise) के लिए: बिहार ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस अधिनियम, 2026 के अनुसार जिस उद्यम के प्रस्ताव को ज़िला अधिकार-प्राप्त समिति (DEC) से “Certificate of In-Principle Approval” मिल जाए, उसकी ज़मीन का कृषि से गैर-कृषि उपयोग उसी तारीख़ से बदला हुआ माना जाएगा (deemed), तय फ़ीस देकर। यह रास्ता कारोबारी प्रस्तावों के लिए है, आम प्लॉट ख़रीदार के लिए नहीं।
घर (रिहायशी) के लिए? 18 अक्टूबर 2026 तक जारी अधिसूचनाओं में Conversion Deed सिर्फ़ कृषि से कमर्शियल के लिए परिभाषित है। रिहायशी इस्तेमाल के लिए ऐसा कोई अलग दस्तावेज़ या शुल्क इनमें नहीं है। कोई नया आदेश आए तो हम यह लेख अपडेट करेंगे।
MVR में ज़मीन की श्रेणी अब क्यों ज़्यादा मायने रखती है?
रजिस्ट्री का खर्च MVR (न्यूनतम मूल्य) पर लगता है और हर श्रेणी का MVR अलग होता है। जून 2026 में बिहार स्टांप (लिखतों के अवमूल्यन का निवारण) नियमावली में संशोधन (गजट सं. 635) से पूरे राज्य में ये श्रेणियाँ एक जैसी कर दी गईं, और दर प्रति डिसमिल तय होगी:
| ग्रामीण और बाहरी इलाक़ा | शहरी और महानगर इलाक़ा |
|---|---|
| कमर्शियल ज़मीन | प्रधान सड़क: कमर्शियल/रिहायशी |
| औद्योगिक ज़मीन | मुख्य सड़क: कमर्शियल/रिहायशी |
| रिहायशी ज़मीन | औद्योगिक ज़मीन |
| हाईवे और MDR से सटी ज़मीन | शाखा सड़क: कमर्शियल/रिहायशी |
| सिंचित ज़मीन | दूसरी सड़कें (गली): रिहायशी |
| असिंचित ज़मीन | कृषि/गैर-रिहायशी |
| परती (बलुआही, पथरीली, दियारा, चौर वग़ैरह) | — |
इसी संशोधन से MVR एक बार में बढ़ाया गया: ग्रामीण इलाक़ों में 1.6 गुना, शहरी और बाहरी इलाक़ों में 2 गुना, और इसके बाद हर वित्त वर्ष की शुरुआत में 5% अपने-आप बढ़ोतरी। पूरा हिसाब: पटना रजिस्ट्री खर्च 2026।
ग़लत श्रेणी लिखने का ख़तरा: अगस्त 2026 के भारतीय स्टांप (बिहार संशोधन) अधिनियम के बाद, अगर रजिस्ट्री में ज़मीन का वर्गीकरण, लोकेशन या उस पर बने ढाँचे की जानकारी ग़लत लगे, तो निबंधन पदाधिकारी मामला कलेक्टर/AIG को भेज देगा। रजिस्ट्री के 4 साल तक जाँच हो सकती है, और जानबूझकर ग़लत जानकारी पर कम पड़ी स्टांप ड्यूटी के बराबर (100%) जुर्माना लगेगा। यानी जिस ज़मीन पर मकान बना है, उसे "खेत" बताकर सस्ती रजिस्ट्री कराना महँगा पड़ सकता है।
पटना में खेती वाली ज़मीन का प्लॉट ख़रीदने से पहले की जाँच
- जमाबंदी और खतियान में ज़मीन की क़िस्म और रैयत का नाम देखें: खतियान कैसे निकालें।
- मास्टर प्लान ज़ोन पक्का करें: रिहायशी है, या शहरी कृषि/संरक्षण।
- MVR की श्रेणी अवर निबंधन कार्यालय से पूछें, ताकि रजिस्ट्री का असली खर्च पता हो।
- रास्ता: सरकारी या रजिस्टर्ड रास्ता है या सिर्फ़ खेत की मेड़? नक्शा पास होने में सड़क की चौड़ाई मायने रखती है।
- बाढ़ और जलजमाव: पुनपुन, सोन और गंगा के निचले इलाक़ों में बरसात में प्लॉट ज़रूर देखें।
- "कन्वर्ज़न करा देंगे" के नाम पर पैसा न दें: यह प्रक्रिया अब है ही नहीं। ऐसी माँग धोखे का संकेत है: ज़मीन फ़्रॉड से कैसे बचें।
पूरी चेकलिस्ट: पटना में प्लॉट कैसे ख़रीदें: पूरी गाइड।
- बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) अध्यादेश, 2026 (बिहार अध्यादेश 04, 2026), दिनांक 4 जुलाई 2026, बिहार गजट (असाधारण) सं. 742, 7 जुलाई 2026, पेज 3: धारा 2 (निरसन; अंतिम न हुई कार्यवाही abate) — PDF
- बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) अधिनियम, 2026 (बिहार अधिनियम 18, 2026), राज्यपाल की अनुमति 2 अगस्त 2026, गजट सं. 920, 3 अगस्त 2026: धारा 1(2), 2 (निरसन और व्यावृत्ति) — PDF
- निबंधन (बिहार संशोधन) अधिनियम, 2026 (बिहार अधिनियम 31, 2026), गजट सं. 1117, 15 सितंबर 2026: धारा 17(1)(f) "Conversion Deed" — PDF
- मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग की अधिसूचनाएँ, 23 सितंबर 2026: अनुसूची-1A अनुच्छेद 23A (Conversion Deed पर 7% स्टांप ड्यूटी), गजट सं. 1147 — PDF; निबंधन शुल्क तालिका अनुच्छेद A(1) (2%), गजट सं. 1148 — PDF
- बिहार स्टांप (लिखतों के अवमूल्यन का निवारण) (संशोधन) नियमावली, 2026, गजट सं. 635, 19 जून 2026: नियम 5 (ज़मीन की श्रेणियाँ), नियम 6(2)(c)-(d) (हर 3 साल पूरा संशोधन, सालाना 5%, एक बार 1.6/2 गुना) — PDF
- भारतीय स्टांप (बिहार संशोधन) अधिनियम, 2026 (बिहार अधिनियम 29, 2026), गजट सं. 1017, 20 अगस्त 2026: धारा 47A(1), (3), (7) — PDF
- पुराना क़ानून: बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए सम्परिवर्तन) अधिनियम, 2010, धारा 1(2) (नगर क्षेत्र और कैंटोनमेंट बाहर) — PDF; पुरानी प्रक्रिया, 10% शुल्क, धारा 6(4), 8, 9: बिहार भूमि FAQ — biharbhumi.bihar.gov.in
- "Portal Closure Notice: Repeal of the Land Conversion Act", राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, 18 अक्टूबर 2026 को देखा — landconversion.bihar.gov.in
- बिहार ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस अधिनियम, 2026, गजट सं. 1120, 16 सितंबर 2026: धारा 2(d) (deemed change in land use), अनुसूची III (third-party certification) — PDF
- पटना मास्टर प्लान 2031 रिपोर्ट (TCPO, नगर विकास एवं आवास विभाग): पेज 22-23 (प्लानिंग एरिया), 71 (ज़ोन), 150 (भूमि-उपयोग), DCR पेज 274, 278
आपको क्या करना चाहिए? (हमारी सलाह)
- "कन्वर्ज़न फ़ीस" के नाम पर किसी को पैसा न दें। 7 जुलाई 2026 के बाद SDO वाला कन्वर्ज़न है ही नहीं। वर्गीकरण कमर्शियल में बदलवाना हो तो Conversion Deed की रजिस्ट्री होती है, जिसकी ड्यूटी और फ़ीस रजिस्ट्री के समय सरकार को जाती है।
- पुराना कन्वर्ज़न सर्टिफ़िकेट है तो उसे संभालकर रखें; बेचते समय यह काम आएगा।
- प्लॉट का दाम ज़ोन देखकर तय करें। शहरी कृषि या संरक्षण ज़ोन का प्लॉट रिहायशी ज़ोन के दाम पर न लें।
- दुकान की योजना है तो ख़रीदने से पहले कमर्शियल और कृषि MVR का अंतर पूछ लें; Conversion Deed में उसका 9% जाएगा।
- रजिस्ट्री में ज़मीन का सही वर्गीकरण लिखवाएँ। ग़लत श्रेणी पर 4 साल तक जाँच और 100% जुर्माना हो सकता है।
- बाहर रहते हैं? पूरी प्रक्रिया: बाहर रहकर पटना में प्रॉपर्टी कैसे ख़रीदें।
बिहार लैंड कन्वर्ज़न से जुड़े सवाल-जवाब
- क्या बिहार में अब खेती की ज़मीन का कन्वर्ज़न कराना ज़रूरी है?
नहीं। बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए संपरिवर्तन) अधिनियम, 2010 पहले 7 जुलाई 2026 को अध्यादेश से और फिर 3 अगस्त 2026 को बिहार अधिनियम 18, 2026 से निरस्त हो गया। SDO से कन्वर्ज़न और 10% शुल्क वाली प्रक्रिया अब नहीं है। वर्गीकरण कमर्शियल में बदलवाने के लिए Conversion Deed की रजिस्ट्री का अलग नियम है, और घर बनाने के लिए मास्टर प्लान ज़ोन और नक्शा पास के नियम लागू हैं।
- landconversion.bihar.gov.in पोर्टल क्यों नहीं खुल रहा?
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने क़ानून निरस्त होने के बाद पोर्टल स्थायी रूप से बंद कर दिया है। पोर्टल की सूचना के अनुसार अब नया आवेदन, भुगतान या कागज़ नहीं लिया जाता और सारे चालू आवेदन रोक दिए गए हैं।
- Conversion Deed पर कितना स्टांप और फ़ीस लगती है?
23 सितंबर 2026 की अधिसूचनाओं के अनुसार कमर्शियल MVR और कृषि MVR के अंतर का 7% स्टांप ड्यूटी और 2% निबंधन शुल्क, यानी कुल 9%। उदाहरण: MVR का अंतर ₹40 लाख हो तो ₹2.8 लाख स्टांप और ₹80,000 फ़ीस।
- क्या पटना में खेत की ज़मीन पर घर बना सकते हैं?
राजस्व कन्वर्ज़न की ज़रूरत अब नहीं है, पर पटना प्लानिंग एरिया (575 गाँव) में घर बनेगा या नहीं, यह मास्टर प्लान का ज़ोन तय करता है। रिहायशी ज़ोन में नक्शा पास कराकर घर बन सकता है; शहरी कृषि ज़ोन में 20% कवरेज और 7 मीटर ऊँचाई तक की शर्त है; संरक्षण ज़ोन में प्लॉटिंग मना है।
- मेरा कन्वर्ज़न आवेदन पेंडिंग था, उसका क्या होगा?
निरसन अध्यादेश के अनुसार जो कार्यवाही 7 जुलाई 2026 तक अंतिम नहीं हुई थी, वह ख़त्म (abate) हो गई। पहले मिल चुके सर्टिफ़िकेट मान्य रहेंगे। भरे हुए शुल्क की वापसी पर कोई सरकारी आदेश हमें नहीं मिला; अपने SDO कार्यालय से लिखित में पूछें।
- क्या पटना नगर निगम के अंदर पहले कन्वर्ज़न लगता था?
नहीं। 2010 वाले क़ानून की धारा 1(2) के अनुसार यह बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के तहत बने नगर क्षेत्र और कैंटोनमेंट पर लागू नहीं होता था। वहाँ नक्शा पास और मास्टर प्लान के नियम ही लागू थे, जो आज भी हैं।
- खेती की ज़मीन की रजिस्ट्री सस्ती पड़ती है, क्या "कृषि" लिखवा लें?
नहीं। अगस्त 2026 के स्टांप संशोधन के बाद ज़मीन का वर्गीकरण या उस पर बना ढाँचा ग़लत बताने पर मामला कलेक्टर/AIG को जाता है, रजिस्ट्री के 4 साल तक जाँच हो सकती है, और जानबूझकर ग़लत जानकारी पर कम पड़ी स्टांप ड्यूटी के बराबर जुर्माना लगता है।
यह लेख 18 अक्टूबर 2026 को बिहार गजट में छपे अध्यादेश, अधिनियमों और अधिसूचनाओं (गजट सं. 635, 742, 920, 1017, 1117, 1120, 1147, 1148), लैंड कन्वर्ज़न पोर्टल की सूचना, बिहार भूमि FAQ और पटना मास्टर प्लान 2031 रिपोर्ट पर आधारित है। MVR की दरें मौज़े और श्रेणी के हिसाब से अलग हैं; अपनी ज़मीन की दर अवर निबंधन कार्यालय से पक्की करें। यह सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। बड़ा निवेश या निर्माण करने से पहले अपने कागज़ और ज़ोन किसी जानकार से जाँच करवाएँ।