Encumbrance Certificate Bihar: ज़मीन पर लोन या केस कैसे देखें (पटना 2026)
सीधा जवाब: पटना या बिहार में किसी ज़मीन पर पहले से कोई रजिस्टर्ड लेन-देन (बिक्री, बंधक, दान वग़ैरह) हुआ है या नहीं, यह भार प्रमाण पत्र (Encumbrance Certificate / Non-Encumbrance Certificate, बिहार में e-NEC) से पता चलता है। इसका आवेदन ई-निबंधन पोर्टल enibandhan.bihar.gov.in पर "Encumbrance Certificate" में लॉगिन करके ऑनलाइन होता है, फ़ीस भी ऑनलाइन भरी जाती है, और प्रमाण पत्र डिजिटल हस्ताक्षर के साथ ऑनलाइन मिलता है (बिहार निबंधन नियमावली 2026, नियम 49)। पर EC में सिर्फ़ रजिस्ट्री ऑफ़िस के इंडेक्स में दर्ज दस्तावेज़ आते हैं। बैंक का वह लोन जो मूल कागज़ जमा कराकर दिया गया हो, और अदालत में चल रहे मुक़दमे, अक्सर EC में नहीं दिखते। इसलिए EC के साथ तीन और जाँच करें: बिहार भूमि पर बंधक, CERSAI (बैंक लोन की केंद्रीय रजिस्ट्री) और eCourts / राजस्व न्यायालय में मुक़दमे।
एक उदाहरण: मान लीजिए पुणे में काम करने वाले किसी व्यक्ति को दानापुर अंचल में 2 कट्ठा का प्लॉट पसंद आया है। विक्रेता कहता है: "ज़मीन बिल्कुल क्लियर है, कोई लोन नहीं, कोई केस नहीं।" पर अगर विक्रेता ने पाँच साल पहले केवाला किसी बैंक में रखकर लोन लिया हो, या उसके भाई ने बँटवारे का केस डाल रखा हो, तो रजिस्ट्री के बाद भी वह झंझट ख़रीदार के सिर आ सकता है। नीचे बताया है कि पैसा देने से पहले ये चारों बातें घर बैठे कैसे जाँचें।
ज़मीन पर "भार" (encumbrance) का मतलब क्या है?
भार यानी ज़मीन पर किसी और का कोई हक़ या दावा, जो मालिक के बेचने के बाद भी बना रह सकता है। पटना के ख़रीदार के लिए ये चार सबसे ज़रूरी हैं:
| भार का प्रकार | उदाहरण | कहाँ जाँचें |
|---|---|---|
| पहले की रजिस्टर्ड बिक्री या दान | वही ज़मीन किसी और को पहले बेची जा चुकी | ई-निबंधन: Encumbrance Certificate (e-NEC) |
| बैंक का बंधक (गिरवी) | होम लोन, किसान क्रेडिट या बिज़नेस लोन के लिए ज़मीन गिरवी | बिहार भूमि: बंधक भूमि खोज; CERSAI; EC (अगर बंधक रजिस्टर्ड हुआ) |
| अदालत या राजस्व न्यायालय में मुक़दमा | बँटवारा, हक़ का दावा, दाखिल-खारिज की अपील | eCourts (सिविल कोर्ट); बिहार भूमि का ऑनलाइन राजस्व न्यायालय (RCMS) |
| सरकारी रोक | रजिस्ट्री पर रोक वाली ज़मीन | ई-निबंधन: View Prohibited Properties |
बिहार में Encumbrance Certificate (e-NEC) ऑनलाइन कैसे निकालें?
बिहार निबंधन नियमावली, 2026 (13 जुलाई 2026 के बिहार गजट में छपी) के नियम 49 में इसे e-NEC (Electronic Non Encumbrance Certificate) कहा गया है। नियम के अनुसार आवेदन ऑनलाइन होता है और फ़ीस भी ऑनलाइन भरी जा सकती है। तरीका:
- enibandhan.bihar.gov.in खोलें। होम पेज पर "Certified Copy", "Encumbrance Certificate" और "View Prohibited Properties" के विकल्प हैं।
- "Encumbrance Certificate" पर क्लिक करें। यह नागरिक लॉगिन (citizens login) पेज पर ले जाता है, यानी पहले पोर्टल पर अपना खाता बनाकर लॉगिन करना होगा।
- आवेदन फ़ॉर्म (नियमावली का फ़ॉर्म-V) भरें। इसमें ये जानकारियाँ माँगी जाती हैं: आवेदक का नाम, ख़रीदार/दावेदार का नाम, दस्तावेज़ (केवाला) संख्या, रजिस्ट्री की तारीख़ और साल, किस निबंधन कार्यालय में रजिस्ट्री हुई, और संपत्ति का विवरण।
- फ़ीस ऑनलाइन भरें। (फ़ीस के बारे में नीचे देखें।)
- प्रमाण पत्र (फ़ॉर्म-VI) डिजिटल हस्ताक्षर के साथ ऑनलाइन मिलता है। जिन पुराने केवालों का रिकॉर्ड अभी डिजिटल नहीं हुआ है, उनका NEC दफ़्तर में हाथ से तैयार करके ऑनलाइन भेजा जाता है। e-NEC को दफ़्तर से मिले कागज़ी NEC के बराबर माना जाता है।
टिप: फ़ॉर्म में केवाला संख्या और रजिस्ट्री का साल माँगा जाता है। इसलिए विक्रेता से उसके केवाले की फ़ोटोकॉपी पहले ले लें। उसी से उस केवाले की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) भी निकालें और हाथ वाले केवाले से मिलाएँ। पोर्टल में दिक़्क़त हो तो ई-निबंधन हेल्पडेस्क: 14544 / 0612-3522300 (पोर्टल पर दिया गया नंबर)।
भार प्रमाण पत्र में क्या-क्या लिखा होता है?
नियमावली के फ़ॉर्म-VI के हिसाब से प्रमाण पत्र में ये बातें होती हैं:
- संपत्ति: अंचल, गाँव/वार्ड नंबर, खाता, खेसरा/प्लॉट और रकबा।
- खोज की अवधि: किस तारीख़ से किस तारीख़ तक रजिस्ट्री ऑफ़िस के इंडेक्स I और II में खोज की गई।
- मिले हुए लेन-देन: हर एक का कार्यालय, दावेदार का नाम, दस्तावेज़ संख्या, रजिस्ट्री की तारीख़, दस्तावेज़ का प्रकार (केवाला, बंधक, दान वग़ैरह), वॉल्यूम, साल और पेज।
- आख़िर में यह प्रमाणन कि इन लेन-देन के अलावा उस संपत्ति पर कोई और लेन-देन या भार नहीं मिला।
फ़ॉर्म की दो शर्तें ध्यान से पढ़ें: (1) प्रमाण पत्र उसी विवरण पर आधारित है जो आवेदक ने दिया है। खेसरा या गाँव ग़लत भरा, तो जाँच भी ग़लत ज़मीन की होगी। (2) रजिस्ट्रेशन अधिनियम की धारा 57 के अनुसार इंडेक्स में खोज आवेदक का काम है। अगर खोज दफ़्तर के कर्मचारी ने की है, तो फ़ॉर्म में लिखा है कि अनजाने में हुई ग़लती के लिए वे ज़िम्मेदार नहीं होंगे। इसलिए EC को आख़िरी सबूत न मानें; नीचे की बाक़ी जाँचें भी करें।
बिहार में EC की फ़ीस कितनी है?
नियम 46 के अनुसार खोज और कॉपी की फ़ीस विभाग की फ़ीस तालिका के हिसाब से ऑनलाइन भरी जाती है। विभाग की प्रकाशित फ़ीस तालिका (दिसंबर 2020 वाली, जो 18 अक्टूबर 2026 को भी विभाग की सबसे नई प्रकाशित तालिका है) में इंडेक्स खोज (Searching) की फ़ीस है: हर नाम के लिए पहले साल ₹40 और उसके बाद हर साल ₹20, और एक कार्यालय में एक नाम के इंडेक्स की खोज की फ़ीस ₹500 से ज़्यादा नहीं। e-NEC पर असल में कितनी फ़ीस लगेगी, यह आवेदन करते समय पोर्टल पर दिखती है; वही अंतिम मानें।
EC में क्या नहीं दिखता? (सबसे ज़रूरी हिस्सा)
| क्या छूट सकता है | क्यों | फिर कैसे पकड़ें |
|---|---|---|
| बैंक का लोन जो मूल केवाला जमा कराकर दिया गया | EC सिर्फ़ रजिस्ट्री इंडेक्स देखता है। RBI के अनुसार बैंकों के ऐसे बंधक (mortgage by deposit of title deeds) CERSAI में दर्ज होते हैं | CERSAI सर्च + बिहार भूमि बंधक खोज + विक्रेता के पास मूल केवाला है या नहीं |
| अदालत में चल रहा मुक़दमा | मुक़दमा रजिस्ट्री ऑफ़िस में दर्ज नहीं होता। उच्चतम न्यायालय ने ख़ुद (2010) लिखा है कि ख़रीदार के पास यह जाँचने का कोई भरोसेमंद तरीका नहीं है | eCourts पर विक्रेता और हिस्सेदारों के नाम से खोज; RCMS; पड़ोसियों से पूछताछ |
| बिना रजिस्ट्री वाला इक़रारनामा या बयाना | रजिस्टर्ड नहीं हुआ तो इंडेक्स में नहीं | विक्रेता से लिखित घोषणा; ज़मीन पर कब्ज़ा किसका है, यह साइट पर देखें |
| पुश्तैनी ज़मीन में हिस्सेदारों का हक़ | उत्तराधिकार से मिला हक़ किसी केवाले से नहीं आता | वंशावली और हर हिस्सेदार की सहमति: बँटवारा और वंशावली गाइड |
| किसी और का दाखिल-खारिज आवेदन | यह राजस्व विभाग का रिकॉर्ड है, रजिस्ट्री का नहीं | बिहार भूमि पर प्लॉट के हिसाब से दाखिल-खारिज आवेदन: दाखिल-खारिज गाइड |
ज़मीन पर बैंक लोन है या नहीं, कैसे पता करें?
1. बिहार भूमि पर "बंधक भूमि" खोज
बिहार भूमि (biharbhumi.bihar.gov.in) के होम पेज पर "बंधक भूमि को देखने की सुविधा" का लिंक है। यह राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के "Recording of Encumbrances on Land" पेज (land.bihar.gov.in/Encumbrances) पर खुलता है। वहाँ "Computerized Jamabandi No of Your Land" डालकर "Search Now" दबाएँ; इसके लिए लॉगिन नहीं चाहिए। अधिकारियों के लिए उसी पेज पर अलग "Official Login" है। जमाबंदी नंबर कैसे निकालें: जमाबंदी, खतियान, LPC ऑनलाइन। ऑनलाइन जमाबंदी पंजी में भी ऑनलाइन दर्ज बंधक का विवरण दिखता है।
ध्यान रहे: यहाँ वही बंधक दिखते हैं जो इस सिस्टम में दर्ज किए गए हैं। कुछ न दिखे, तो इसका मतलब यह नहीं कि लोन है ही नहीं।
2. CERSAI पर सर्च (बैंक लोन की केंद्रीय रजिस्ट्री)
CERSAI (Central Registry of Securitisation Asset Reconstruction and Security Interest of India) केंद्र सरकार की रजिस्ट्री है। भारतीय रिज़र्व बैंक के 26 मई 2011 के परिपत्र के अनुसार SARFAESI अधिनियम की धारा 23 के तहत बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को संपत्ति पर बनाए गए बंधक (security interest) का विवरण इस रजिस्ट्री में दर्ज करना होता है, इसमें मूल कागज़ जमा कराकर लिया गया लोन भी शामिल है। RBI के शब्दों में इसका मक़सद एक ही संपत्ति पर कई बैंकों से लोन और बंधक छिपाकर संपत्ति बेचने वाले धोखे को रोकना है, और इसके रिकॉर्ड "संपत्ति का सौदा करने वाला कोई भी व्यक्ति" देख सकता है।
- cersai.org.in पर "Public Search" में आम लोग निर्धारित फ़ीस देकर ऑनलाइन सर्च कर सकते हैं (फ़ीस पोर्टल पर दिखती है)।
- Asset Based Search में अचल संपत्ति (Immovable) के लिए Survey Number/Municipal Number, Plot Number या House/Flat Number में से कम से कम एक भरना ज़रूरी है। बिहार में ज़मीन के लिए खेसरा नंबर और प्लॉट नंबर, और फ़्लैट/मकान के लिए होल्डिंग या फ़्लैट नंबर काम आएँगे।
- Debtor Based Search में उधार लेने वाले (यानी विक्रेता) के PAN या नाम से खोज होती है। विक्रेता का PAN हो तो दोनों तरह से खोजें।
- पोर्टल के अनुसार किसी Asset ID की रिपोर्ट एक सर्च में एक ही बार डाउनलोड होती है, इसलिए रिपोर्ट तुरंत सेव कर लें।
CERSAI में बैंक और वित्तीय संस्थाओं के बंधक आते हैं। किसी व्यक्ति, साहूकार या रिश्तेदार से लिया उधार यहाँ नहीं दिखेगा।
3. मूल केवाला किसके पास है?
बैंक जब कागज़ जमा कराकर लोन देता है तो मूल केवाला बैंक के पास रहता है। इसलिए रजिस्ट्री से पहले विक्रेता से मूल केवाला (और पुरानी कड़ी के मूल कागज़) देखने को माँगें। विक्रेता कहे कि "मूल खो गया है, सिर्फ़ फ़ोटोकॉपी है", तो रुकें और कारण लिखित में लें। अगर लोन चल रहा है, तो बैंक से बकाया चुकाने की व्यवस्था, लोन बंद होने का लिखित प्रमाण (No Dues / क्लोज़र पत्र) और मूल कागज़ों की वापसी रजिस्ट्री से पहले तय करें।
ज़मीन पर कोई केस (मुक़दमा) है या नहीं, कैसे देखें?
1. सिविल कोर्ट के केस: eCourts पर नाम से खोज
पटना सिविल कोर्ट समेत देश की ज़िला अदालतों के केस services.ecourts.gov.in पर देखे जा सकते हैं:
- "Case Status" खोलें और State: Bihar, District: Patna और Court Complex चुनें।
- "Party Name" टैब चुनें। नाम का कम से कम 3 अक्षर वाला हिस्सा लिखें। पार्टी का मतलब वादी, प्रतिवादी, अपीलकर्ता वग़ैरह, कोई भी।
- Registration Year भरना ज़रूरी है, इसलिए पिछले कई साल एक-एक करके देखें।
- "Both" (Pending और Disposed दोनों) चुनें, कैप्चा भरें और Go दबाएँ। नतीजे में "View" से केस का पूरा इतिहास दिखता है।
किसके नाम से खोजें: विक्रेता, उसके पिता, और पुश्तैनी ज़मीन हो तो सभी हिस्सेदार। District: Patna में दिखने वाले सभी कोर्ट कॉम्प्लेक्स एक-एक करके देखें, ख़ासकर वह जिसके इलाक़े में ज़मीन है। पुराने केस हर बार ऑनलाइन पूरे न मिलें, इसलिए यह जाँच "कुछ नहीं मिला" का पक्का सबूत नहीं है।
2. राजस्व न्यायालय के केस: बिहार भूमि का RCMS
ज़मीन से जुड़े राजस्व केस, जैसे दाखिल-खारिज की अपील, राजस्व अदालतों (अंचल अधिकारी, DCLR, ADM, DM, कमिश्नर) में चलते हैं। बिहार भूमि पर "ऑनलाइन राजस्व न्यायालय" (Revenue Court Management System) में Case Status, Cause List और Order/Judgement के पेज हैं। Case Status में कोर्ट, अधिनियम, केस का प्रकार, ज़िला, वित्तीय वर्ष और केस नंबर भरना होता है। यानी यहाँ नाम से खोज नहीं, केस नंबर से जाँच होती है। इसलिए विक्रेता से लिखित में पूछें कि कोई राजस्व केस चला या चल रहा है या नहीं, और नंबर मिले तो ख़ुद स्थिति देखें। ज़रूरत हो तो अंचल कार्यालय से पूछें: पटना के अंचल अधिकारियों की सूची।
3. ज़मीन पर जाकर और पड़ोस से पूछें
किसी ज़मीन पर केस की सबसे जल्दी ख़बर अक्सर पड़ोसियों को होती है। साइट पर जाएँ, देखें कि कब्ज़ा किसका है, कोई बोर्ड या नोटिस तो नहीं लगा, और आस-पास से पूछें कि ज़मीन पर कोई झगड़ा तो नहीं।
केस चल रहा हो और ज़मीन ख़रीद लें तो क्या होगा?
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 की धारा 52 (lis pendens) के बारे में उच्चतम न्यायालय ने T.G. Ashok Kumar बनाम Govindammal (8 दिसंबर 2010) में कहा: मुक़दमे के दौरान हुई बिक्री अपने आप अमान्य नहीं होती, पर ख़रीदार उस मुक़दमे के फ़ैसले से बँधा रहता है। उस मामले में बँटवारे का केस चलते एक हिस्सेदार ने ज़मीन बेची थी; फ़ैसले में विक्रेता को जितना हिस्सा मिला, ख़रीदार का हक़ सिर्फ़ उतने पर बचा, बाक़ी पर नहीं। पटना की पुश्तैनी ज़मीनों में यही सबसे आम ख़तरा है।
और कौन सी जाँच साथ में करें?
- रजिस्ट्री पर रोक: ई-निबंधन पर "View Prohibited Properties" में रजिस्ट्री कार्यालय, अंचल और गाँव चुनकर देखें। पाटलिपुत्र टाउनशिप वाले गाँवों की अलग सूची: पाटलिपुत्र टाउनशिप गाँवों की सूची।
- जमाबंदी, खाता-खेसरा और नक्शा विक्रेता के कागज़ से मिलाएँ: खाता, खेसरा, प्लॉट नंबर में फ़र्क और भू-नक्शा कैसे देखें।
- सभी सरकारी रिकॉर्ड एक जगह: बिहार लैंड रिकॉर्ड ऑनलाइन: पूरी गाइड।
- धोखाधड़ी के आम तरीके और उनकी जाँच: ज़मीन फ़्रॉड से कैसे बचें।
- फ़्लैट ले रहे हैं तो बिल्डर के प्रोजेक्ट लोन और RERA की जाँच: फ़्लैट ख़रीदने से पहले चेकलिस्ट।
पूरी प्रक्रिया: पटना में प्लॉट ख़रीदने से पहले पूरी गाइड।
पटना में ज़मीन ख़रीदने से पहले भार और केस की 8-पॉइंट चेकलिस्ट
| # | जाँच | रुक जाएँ अगर |
|---|---|---|
| 1 | e-NEC (लंबी अवधि, सही खेसरा और गाँव के साथ) | विक्रेता के केवाले के बाद उसी ज़मीन का कोई और केवाला या बंधक |
| 2 | विक्रेता के केवाले की Certified Copy | हाथ वाला केवाला रजिस्टर्ड कॉपी से अलग |
| 3 | बिहार भूमि: बंधक भूमि खोज | कोई बंधक दर्ज |
| 4 | CERSAI: खेसरा/प्लॉट नंबर और विक्रेता के PAN/नाम से | किसी बैंक का charge दर्ज |
| 5 | मूल केवाला देखें | मूल नहीं दिखा पा रहे, या बैंक के पास है |
| 6 | eCourts: विक्रेता और हिस्सेदारों के नाम, कई साल | ज़मीन से जुड़ा कोई केस Pending |
| 7 | RCMS और दाखिल-खारिज आवेदन (प्लॉट के हिसाब से) | राजस्व केस या किसी और का दाखिल-खारिज आवेदन |
| 8 | ई-निबंधन: Prohibited Properties | गाँव/खेसरा रोक की सूची में (Active) |
- बिहार निबंधन नियमावली, 2026 (अधिसूचना S.O. IV/M1-1-02/2026-4219, 11 जुलाई 2026), बिहार गजट (असाधारण) सं. 759, 13 जुलाई 2026: नियम 2(xx) (e-NEC की परिभाषा), नियम 46 (खोज और कॉपी का आवेदन, फ़ीस), नियम 49 (e-NEC), परिशिष्ट-C फ़ॉर्म-V (आवेदन) और फ़ॉर्म-VI (प्रमाण पत्र), पेज 51, 67-68, 98-99 — PDF
- ई-निबंधन पोर्टल, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, बिहार: Encumbrance Certificate (लॉगिन), Certified Copy, View Prohibited Properties, हेल्पडेस्क 14544 / 0612-3522300 — enibandhan.bihar.gov.in
- निबंधन विभाग की फ़ीस तालिका (दिसंबर 2020), क्रम 60: Searching/Inspection (₹40 पहला साल, ₹20 हर अगला साल, एक कार्यालय में एक नाम पर अधिकतम ₹500)
- राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार: "बंधक भूमि को देखने की सुविधा" / Recording of Encumbrances on Land — land.bihar.gov.in/Encumbrances; ऑनलाइन राजस्व न्यायालय (RCMS) — biharbhumi.bihar.gov.in
- भारतीय रिज़र्व बैंक, परिपत्र RBI/2010-11/546 (RPCD.CO RCB.BC.No.73/07.38.03/2010-11), 26 मई 2011: SARFAESI अधिनियम, 2002 के तहत Central Electronic Registry — rbi.org.in
- CERSAI पोर्टल: Public Search (Asset Based / Debtor Based), निर्धारित फ़ीस पर — cersai.org.in
- eCourts सेवाएँ, Case Status → Party Name — services.ecourts.gov.in
- उच्चतम न्यायालय, T.G. Ashok Kumar बनाम Govindammal, सिविल अपील 10325/2010, 8 दिसंबर 2010, [2010] 14 (Addl.) S.C.R. 560, पैरा 10 (संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882, धारा 52)
- सभी पोर्टल और दस्तावेज़ 18.10.2026 को खोलकर जाँचे गए।
आपको क्या करना चाहिए? (हमारी सलाह)
- सिर्फ़ EC पर भरोसा न करें। EC, बंधक खोज, CERSAI और eCourts, चारों करें। इनका ख़र्च ज़मीन की क़ीमत के सामने बहुत कम है।
- EC लंबी अवधि का निकालें, कम से कम उस समय से पहले से जब विक्रेता के पास ज़मीन आई।
- बयाना छोटा रखें और इक़रारनामे में लिखवाएँ कि जाँच में बंधक या केस मिला तो पूरा पैसा वापस होगा।
- केवाले में विक्रेता की घोषणा लिखवाएँ कि ज़मीन पर कोई बंधक, केस या किसी और का दावा नहीं है।
- बैंक से होम लोन ले रहे हैं, तो बैंक की क़ानूनी जाँच (legal search) रिपोर्ट की कॉपी माँगें और अपनी जाँच से मिलाएँ।
- बाहर रहते हैं? ये सारी जाँचें ऑनलाइन हो सकती हैं: बाहर रहकर पटना में प्रॉपर्टी कैसे ख़रीदें। रजिस्ट्री का पूरा ख़र्च: पटना रजिस्ट्री ख़र्च गाइड।
Encumbrance Certificate और ज़मीन पर लोन/केस से जुड़े सवाल-जवाब
- बिहार में Encumbrance Certificate ऑनलाइन कैसे निकालें?
enibandhan.bihar.gov.in पर "Encumbrance Certificate" खोलें, नागरिक खाते से लॉगिन करें, फ़ॉर्म में केवाला संख्या, रजिस्ट्री का साल, निबंधन कार्यालय और संपत्ति का विवरण भरें, और फ़ीस ऑनलाइन भरें। बिहार निबंधन नियमावली 2026 के नियम 49 के अनुसार e-NEC डिजिटल हस्ताक्षर के साथ ऑनलाइन मिलता है; पुराने, अभी तक डिजिटल न हुए रिकॉर्ड का NEC दफ़्तर में तैयार करके ऑनलाइन भेजा जाता है।
- भार प्रमाण पत्र (EC) में क्या दिखता है?
चुनी गई अवधि में रजिस्ट्री ऑफ़िस के इंडेक्स I और II में उस संपत्ति से जुड़े रजिस्टर्ड दस्तावेज़: हर दस्तावेज़ की संख्या, तारीख़, प्रकार (केवाला, बंधक वग़ैरह), पार्टी का नाम और वॉल्यूम-पेज। कुछ न मिले तो लिखा होता है कि उस अवधि में कोई लेन-देन या भार नहीं मिला।
- बिहार में EC की फ़ीस कितनी है?
विभाग की फ़ीस तालिका (दिसंबर 2020) में इंडेक्स खोज की फ़ीस हर नाम के लिए पहले साल ₹40 और बाद के हर साल ₹20 है, एक कार्यालय में एक नाम पर अधिकतम ₹500। e-NEC की असल फ़ीस आवेदन के समय पोर्टल पर दिखती है।
- ज़मीन पर लोन है या नहीं कैसे पता करें?
तीन जगह देखें: बिहार भूमि पर "बंधक भूमि को देखने की सुविधा" में कम्प्यूटरीकृत जमाबंदी नंबर से; CERSAI (cersai.org.in) पर खेसरा/प्लॉट नंबर या विक्रेता के PAN/नाम से; और EC में कोई रजिस्टर्ड बंधक। साथ में विक्रेता से मूल केवाला देखने को माँगें, क्योंकि कागज़ जमा कराकर लिए लोन में मूल केवाला बैंक के पास रहता है।
- ज़मीन पर केस है या नहीं कैसे देखें?
सिविल केस के लिए services.ecourts.gov.in पर Case Status → Party Name में State Bihar, District Patna और कोर्ट कॉम्प्लेक्स चुनकर विक्रेता और हिस्सेदारों के नाम से, कई साल के लिए खोजें। राजस्व केस बिहार भूमि के ऑनलाइन राजस्व न्यायालय (RCMS) में केस नंबर से दिखते हैं। पड़ोसियों से भी पूछें।
- क्या EC में "कुछ नहीं मिला" का मतलब ज़मीन पूरी तरह साफ़ है?
नहीं। EC में सिर्फ़ रजिस्टर्ड दस्तावेज़ आते हैं। मूल कागज़ जमा कराकर लिया बैंक लोन, अदालत के केस, बिना रजिस्ट्री का इक़रारनामा और हिस्सेदारों का हक़ इसमें छूट सकते हैं। प्रमाण पत्र आवेदक के दिए विवरण पर ही बनता है, इसलिए खेसरा या गाँव ग़लत भरा तो नतीजा भी ग़लत होगा।
- केस चल रही ज़मीन ख़रीद ली तो क्या होगा?
संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 52 के अनुसार, जैसा उच्चतम न्यायालय ने T.G. Ashok Kumar बनाम Govindammal (2010) में समझाया, ऐसी बिक्री अपने आप रद्द नहीं होती, पर ख़रीदार मुक़दमे के फ़ैसले से बँधा रहता है। विक्रेता केस में जितना हिस्सा जीतेगा, ख़रीदार का हक़ उतने पर ही बचेगा।
यह लेख 18 अक्टूबर 2026 को बिहार निबंधन नियमावली 2026 (बिहार गजट सं. 759), निबंधन विभाग की फ़ीस तालिका, ई-निबंधन, बिहार भूमि और CERSAI पोर्टल, भारतीय रिज़र्व बैंक के परिपत्र, eCourts सेवाओं और उच्चतम न्यायालय के निर्णय को देखकर लिखा गया है। पोर्टल के मेन्यू और फ़ीस बदल सकते हैं; आवेदन के समय पोर्टल पर दिखी जानकारी ही अंतिम मानें। यह सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। बड़ा सौदा करने से पहले अपने कागज़ किसी जानकार से जाँच करवाएँ।