Bihar Khatiyan Kaise Nikale: पटना में खतियान PDF, मतलब और प्रकार (2026)
सीधा जवाब: बिहार का खतियान ऑनलाइन भू-अभिलेख पोर्टल (bhuabhilekh.bihar.gov.in) पर मिलता है। मोबाइल नंबर से Public Login करें, दस्तावेज़ का प्रकार (जैसे कैडस्ट्रल सर्वे खतियान) चुनें, ज़िला पटना, अंचल, मौज़ा और खाता/खेसरा भरकर Search करें। View से स्कैन कॉपी दिखेगी, और "Apply for Download Copy" से फ़ीस भरकर डिजिटल हस्ताक्षरित कॉपी (PDF) मिलेगी।
पर सिर्फ़ खतियान निकाल लेना काफ़ी नहीं। उसे पढ़ना, यह समझना कि वह कौन सा खतियान है (CS, RS या चकबंदी), और आज की जमाबंदी से उसका मिलान करना ही असली काम है। इस गाइड में पटना के ख़रीदार और ज़मीन मालिक के हिसाब से यह सब आसान भाषा में है।
एक उदाहरण: मान लीजिए पुणे में नौकरी करने वाले किसी व्यक्ति को दानापुर अंचल में 3 कट्ठा का प्लॉट पसंद आया। विक्रेता ने जमाबंदी दिखाई, नाम सही था। पर खतियान निकालने पर पता चला कि उस खेसरा की किस्म "गैरमजरूआ" लिखी है। ऐसी ज़मीन पर पैसा लगाने से पहले बहुत सावधानी चाहिए (नीचे समझाया है)। यही कारण है कि खतियान देखना ज़रूरी है।
खतियान क्या होता है? (खतियान का मतलब)
राजस्व विभाग की शब्दावली के अनुसार, खतियान सर्वे के बाद बना वह रजिस्टर है जिसे अधिकार अभिलेख (Record of Rights) कहते हैं। इसमें रैयत का नाम, उसका अधिकार, खाता, खेसरा, रकबा, ज़मीन की किस्म, लगान और कब्ज़ा दर्ज होता है। यह मूल स्वामित्व दिखाने वाला सबसे प्रमुख अभिलेख है।
सीधी भाषा में: खतियान ज़मीन की "जड़" है। सर्वे के समय कौन सी ज़मीन किसके नाम दर्ज हुई, वह इसमें है। उसके बाद की हर बिक्री, बँटवारा और उत्तराधिकार जमाबंदी (रजिस्टर-II) में चढ़ता है।
| खतियान में क्या लिखा होता है | इसका मतलब |
|---|---|
| रैयत का नाम | सर्वे के समय ज़मीन किसके नाम दर्ज हुई |
| खाता | रैयत का "खाता नंबर", जिसमें उसकी सारी ज़मीन दिखती है (बैंक पासबुक के खाता नंबर जैसा) |
| खेसरा | सर्वे में हर प्लॉट का नंबर, जो उस राजस्व गाँव (मौज़ा) में अलग (यूनिक) होता है |
| रकबा | ज़मीन का क्षेत्रफल |
| किस्म | ज़मीन किस प्रकार की है (जैसे रैयती, बकाश्त, गैरमजरूआ) |
| लगान | उस ज़मीन पर तय सरकारी लगान |
| अधिकार और कब्ज़ा | रैयत का अधिकार किस तरह का है और कब्ज़ा किसका है |
राजस्व शब्दावली के अनुसार, खरीद-बिक्री या किसी और तरह से ज़मीन का अंतरण होने पर वही खाता नंबर उस ज़मीन के साथ नए उत्तराधिकारी या ख़रीदार को मिलता है। इसलिए पटना में किसी प्लॉट की बात हो तो सबसे पहले विक्रेता से मौज़ा, खाता और खेसरा नंबर लें।
खतियान के प्रकार: CS, RS और चकबंदी खतियान में क्या फ़र्क है?
| खतियान | कब बना | ख़रीदार के लिए क्या मायने |
|---|---|---|
| CS (कैडस्ट्रल सर्वे) खतियान | अंग्रेज़ों के समय, बिहार काश्तकारी अधिनियम 1885 के तहत हुए पहले भू-सर्वे में (बिहार में लगभग 1898 से 1920 के बीच) | पहला अधिकार अभिलेख। ज़्यादातर ज़िलों में आज भी इसे आधार (बेस) रिकॉर्ड माना जाता है। |
| RS (रिविज़नल सर्वे) खतियान | आज़ादी के बाद, कई ज़िलों में 1952 से हुए दूसरे सर्वे में | CS का अद्यतन रूप, कानूनी रूप से अहम। पर यह सर्वे बिहार के सभी ज़िलों में नहीं हुआ। |
| चकबंदी खतियान | जिन गाँवों में चकबंदी (ज़मीन के टुकड़े मिलाकर चक बनाना) हुई | चकबंदी के बाद खेसरा और रकबा बदल सकते हैं। ऐसे गाँव में पुराने और चकबंदी, दोनों खतियान देखें। |
| विशेष सर्वेक्षण का अधिकार अभिलेख | अभी चल रहे बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त में, गाँव-दर-गाँव | जहाँ अंतिम प्रकाशन हो चुका है, वहाँ यही नया खतियान बनेगा। हर रैयत को इसकी "रैयती फर्द" लेनी चाहिए। |
पटना में कौन सा खतियान देखें? भू-अभिलेख पोर्टल पर अपने मौज़े के लिए जो-जो खतियान (कैडस्ट्रल, रिविज़नल, चकबंदी) मिलें, सब देखें। हर मौज़े का हर प्रकार का रिकॉर्ड हो, यह ज़रूरी नहीं। अगर आपके मौज़े का RS खतियान है, तो CS से उसका मिलान करें कि खेसरा और रकबा कैसे बदले।
खतियान में ज़मीन की किस्म: रैयती, बकाश्त, गैरमजरूआ का मतलब
खतियान में लिखी "किस्म" बहुत कुछ बताती है। विभाग की शब्दावली के अनुसार:
| किस्म | मतलब | ख़रीदार ध्यान दें |
|---|---|---|
| रैयती | रैयत (काश्तकार) के अधिकार वाली निजी ज़मीन | सामान्य ख़रीद-बिक्री वाली ज़मीन यही होती है। फिर भी आज की जमाबंदी ज़रूर मिलाएँ। |
| बकाश्त | ज़मींदारी ख़त्म होने (भूमि सुधार अधिनियम, 1950) के समय ज़मींदार की अपनी खेती वाली ज़मीन | देखें कि बाद में यह किसके नाम जमाबंदी में चढ़ी और कैसे। |
| गैरमजरूआ आम | गाँव या समाज के सामूहिक उपयोग की ज़मीन: चरागाह, तालाब, सड़क, कब्रिस्तान, मैदान, नदी-नाला | इस पर किसी व्यक्ति का निजी स्वामित्व नहीं होता। ऐसी ज़मीन न ख़रीदें। |
| गैरमजरूआ खास/मालिक | ज़मींदार के कब्ज़े वाली वह ज़मीन जो रैयत की तरह दर्ज नहीं थी | भूमि सुधार अधिनियम 1950 के बाद यह राज्य सरकार में निहित हो गई। बिना अंचल से पक्की जाँच के पैसा न लगाएँ। |
पटना के बाहरी इलाकों (जैसे दानापुर, फुलवारी, बिहटा, नौबतपुर, पुनपुन) में खेत काटकर प्लॉट बेचे जाते हैं। ऐसे में खेसरा की किस्म ख़ुद खतियान में देखें, बिचौलिये की बात पर भरोसा न करें।
Bihar Khatiyan Kaise Nikale: ऑनलाइन PDF निकालने का तरीका (स्टेप-बाय-स्टेप)
यह तरीका राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की आधिकारिक पुस्तिका "बिहारभूमि: ऑनलाइन सेवाओं के बारे में जानकारी" (पृष्ठ 14-15) के अनुसार है:
- biharbhumi.bihar.gov.in खोलें और भू-अभिलेख पर क्लिक करें, या सीधे bhuabhilekh.bihar.gov.in खोलें।
- Public Login चुनें और मोबाइल नंबर/OTP से लॉगिन करें (पहली बार हैं तो पहले रजिस्टर करें)।
- लॉगिन के बाद अभिलेख खोजने का विकल्प आएगा। दस्तावेज़ का प्रकार चुनें, जैसे "कैडस्ट्रल सर्वे खतियान", "रिविज़नल सर्वे खतियान" या "चकबंदी खतियान"।
- जो लागू हो वह भरें: ज़िला (पटना), अंचल, मौज़ा, खाता, खेसरा, पार्टी (रैयत) का नाम, वाद संख्या, साल। फिर Search दबाएँ।
- मिलते-जुलते अभिलेखों की सूची आएगी। हर अभिलेख के सामने View दबाकर स्कैन कॉपी देखें।
- डिजिटल हस्ताक्षरित कॉपी चाहिए तो Apply for Download Copy दबाएँ। नई स्क्रीन पर लिखें कि कौन-कौन से पृष्ठ चाहिए। देय राशि दिखेगी।
- Send Application दबाएँ, जानकारी जाँचकर Make Payment से भुगतान करें।
- भुगतान के बाद मिली प्राप्ति रसीद सँभालकर रखें। स्थिति देखने के लिए प्रोफ़ाइल आइकन में Track Application खोलें।
फ़ीस कितनी है? डिजिटल हस्ताक्षरित कॉपी की फ़ीस पृष्ठों के हिसाब से पोर्टल पर भुगतान से पहले दिखती है। इंटरनेट पर लिखे "₹10-20 प्रति पेज" जैसे आँकड़े हमें किसी आधिकारिक स्रोत में नहीं मिले, इसलिए पोर्टल पर दिखी राशि ही मानें।
खोज में न मिले तो: पोर्टल की अस्वीकरण सूचना के अनुसार स्कैन की गई छवि (image) ही मान्य/मूल मानी जाती है, जबकि खोज के लिए भरी गई जानकारी (data entry) सिर्फ़ ढूँढने के लिए है। यानी टाइपिंग में नाम या नंबर गड़बड़ हो सकता है। एक तरीके से न मिले तो खाता, खेसरा और नाम से अलग-अलग खोजें, नाम की स्पेलिंग बदलकर देखें।
पोर्टल का रूप समय-समय पर बदलता है। बटन का नाम थोड़ा अलग दिखे तो भी क्रम यही रहता है (15 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया)।
भू-अभिलेख पोर्टल पर खतियान के अलावा और क्या मिलता है?
विभाग की पुस्तिका के अनुसार भू-अभिलेख पोर्टल पर 28 तरह के अभिलेख हैं। पटना के ख़रीदार के काम के मुख्य अभिलेख:
- कैडस्ट्रल सर्वे खतियान, रिविज़नल सर्वे खतियान, चकबंदी खतियान
- राजस्व ग्राम मानचित्र (गाँव का नक्शा)
- जमाबंदी पंजी (डिजिटाइज़्ड)
- नामांतरण (दाखिल-खारिज) पंजी और अभिलेख
- भूमि मापी पंजी और अभिलेख
- गैरमजरूआ आम/खास/कैसरे हिन्द भूमि पंजी
- भू-हदबंदी (सीलिंग) और भू-दान से जुड़ी पंजी
नक्शा (भू-नक्शा) देखने के लिए अलग पोर्टल bhunaksha.bihar.gov.in है, और राजस्व मानचित्र की घर तक डिलीवरी की सुविधा भी विभाग देता है।
पुराना खतियान कैथी लिपि में है? ऐसे पढ़ें
सौ साल से ज़्यादा पुराने खतियान और केवाले अक्सर कैथी लिपि में होते हैं, जिसे आज कम लोग पढ़ पाते हैं। बिहार भूमि पोर्टल पर इसके लिए दो सुविधाएँ हैं:
- कैथी दस्तावेज़ अनुवाद सेवा: बिहार भूमि पर नागरिक लॉगिन करके इसका उपयोग किया जाता है।
- कैथी लिपि पाठ्य पुस्तिका: बिहार भूमि के मुख्य पेज पर मुफ़्त PDF, जिससे अक्षर पहचानना सीख सकते हैं।
फिर भी किसी सौदे का फ़ैसला सिर्फ़ अपने अंदाज़ से पढ़े गए कैथी खतियान पर न करें। किसी जानकार से पढ़वाकर ही आगे बढ़ें।
खतियान और जमाबंदी में क्या फ़र्क है?
| खतियान | जमाबंदी (रजिस्टर-II) | |
|---|---|---|
| क्या बताता है | सर्वे के समय ज़मीन किसके नाम दर्ज हुई | आज ज़मीन किसके नाम दर्ज है, लगान कितना और कब तक भरा |
| बदलता है? | नहीं, नए सर्वे में ही नया बनता है | हाँ, हर दाखिल-खारिज के बाद इसमें प्रविष्टि जुड़ती या सुधरती है |
| कहाँ मिलेगा | भू-अभिलेख पोर्टल (लॉगिन के साथ) | बिहार भूमि पर "जमाबंदी पंजी देखें" (बिना लॉगिन) |
खतियान बताता है ज़मीन कहाँ से आई, जमाबंदी बताती है आज किसकी है। दोनों के बीच की कड़ी केवाले, बँटवारे और दाखिल-खारिज हैं। जमाबंदी और LPC ऑनलाइन देखने का पूरा तरीका हमारी पटना में जमाबंदी, खतियान, LPC ऑनलाइन कैसे देखें गाइड में है।
खतियान दादा-परदादा के नाम पर है: पटना में अब क्या करें?
पटना में बहुत सी ज़मीन का खतियान आज भी दादा या परदादा के नाम पर है। ऐसे में:
- वंशावली बनवाएँ: खतियान के रैयत से आज के सभी वारिसों तक।
- जमाबंदी देखें: क्या वारिसों के नाम चढ़ी है? अगर नहीं, तो उत्तराधिकार या बँटवारे के आधार पर दाखिल-खारिज का आवेदन होता है।
- ख़रीदार हैं तो: ऐसी ज़मीन तभी लें जब सभी हिस्सेदार केवाले पर दस्तख़त करें या अपने हिस्से का पंजीकृत दस्तावेज़ दे चुके हों, और विक्रेता की जमाबंदी ऑनलाइन हो। वरना रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज अटक सकता है।
बिहार विशेष सर्वेक्षण में खतियान क्यों ज़रूरी है?
बिहार में अभी विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त चल रहा है, जिसमें हवाई फ़ोटो की मदद से नए नक्शे और नया अधिकार अभिलेख (खतियान) बन रहा है। विभाग के विशेष सर्वेक्षण FAQ के अनुसार रैयत को:
- अपनी ज़मीन की खेसरावार चौहद्दी के साथ स्व-घोषणा (प्रपत्र-2) शिविर में देनी है, और साथ में जमाबंदी संख्या/मालगुज़ारी रसीद की कॉपी, खतियान की नक़ल (अगर उपलब्ध हो), दावे वाली ज़मीन के कागज़ों का विवरण, मृत रैयत का मृत्यु प्रमाण पत्र (या तिथि/वर्ष), आधार और मोबाइल नंबर आदि लगाना है।
- वंशावली (प्रपत्र 3(1)) भरकर शिविर या बंदोबस्त कार्यालय में जमा करनी है।
- खानापुरी पर्चा, प्रारूप अधिकार अभिलेख और अंतिम अधिकार अभिलेख में ग़लती दिखे तो तय प्रपत्र में दावा/आपत्ति देनी है।
- अंत में अपने अधिकार अभिलेख (खतियान) की एक प्रति "रैयती फर्द" शिविर या बंदोबस्त कार्यालय से ज़रूर लेनी है।
अपने गाँव या शहर में सर्वे किस चरण में है, यह dlrs.bihar.gov.in → विशेष सर्वेक्षण संबंधी सेवाएँ पर "अपने ग्राम/शहर में विशेष सर्वेक्षण की स्थिति देखें" से पता चलता है। वहीं खानापुरी पर्चा और प्रकाशित अधिकार अभिलेख भी देखे जा सकते हैं। बाहर रहने वाले पटना के ज़मीन मालिक यह ज़रूर देखते रहें, ताकि आपत्ति का समय न निकल जाए।
पटना में प्लॉट ख़रीदने से पहले खतियान से क्या मिलाएँ?
| जाँच | कहाँ देखें | ख़तरे का संकेत |
|---|---|---|
| ज़मीन की किस्म | खतियान | गैरमजरूआ आम या खास/मालिक लिखा है |
| खेसरा और रकबा | खतियान + जमाबंदी | बेचा जा रहा रकबा खतियान/जमाबंदी के रकबे से मेल नहीं खाता |
| रैयत से विक्रेता तक कड़ी | खतियान + केवाले + वंशावली | बीच का कोई केवाला या वारिस ग़ायब |
| आज का नाम | जमाबंदी पंजी | विक्रेता के नाम जमाबंदी नहीं है |
| नक्शे पर जगह | भू-नक्शा / राजस्व मानचित्र | दिखाया गया प्लॉट नक्शे के खेसरा से मेल नहीं खाता |
| बंधक | बंधक भूमि देखें | ज़मीन पर बैंक का बंधक दर्ज |
ज़मीन की नाप पटना में कट्ठा-धुर में होती है (मोटे तौर पर 1 कट्ठा = 20 धुर), जबकि सरकारी रिकॉर्ड में रकबा अक्सर एकड़-डिसमिल में होता है। बदलने का तरीका हमारी पटना में प्लॉट ख़रीदने की पूरी गाइड में है।
ज़मीन के बाक़ी सरकारी रिकॉर्ड (नक्शा, दाखिल-खारिज स्टेटस, बंधक, रजिस्ट्री पर रोक, मुक़दमे, ई-मापी) एक जगह: Bihar Land Record Online Kaise Dekhe: पटना की ज़मीन के सारे रिकॉर्ड।
- "बिहारभूमि: ऑनलाइन सेवाओं के बारे में जानकारी" पुस्तिका, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग — पृष्ठ 14 (भू-अभिलेख पोर्टल पर डिजिटल हस्ताक्षरित प्रति लेने का तरीका, बिहार अभिलेख मैनुअल 1960 का नियम-297(क)), पृष्ठ 15 (पोर्टल पर मिलने वाले 28 अभिलेख), पृष्ठ 32 (विशेष सर्वेक्षण सेवाएँ) — PDF
- "राजस्व शब्दावली" (Bihar Revenue Glossary) — CS/RS खतियान, खतियान, खाता, खेसरा, फर्द, बकाश्त, गैरमजरूआ की परिभाषाएँ — PDF
- "FAQ of Bihar Special Survey" — प्रश्न 3 (कैडस्ट्रल सर्वे लगभग 1898–1920, बिहार काश्तकारी अधिनियम 1885), प्रश्न 4 (रैयतों के कर्तव्य, प्रपत्र 2 और 3(1), रैयती फर्द) — PDF
- भू-अभिलेख पोर्टल की अस्वीकरण सूचना (स्कैन छवि मान्य, data entry सिर्फ़ खोज के लिए) — bhuabhilekh.bihar.gov.in
- सभी पोर्टल और PDF 15.10.2026 को जाँचे गए।
आपको क्या करना चाहिए? (हमारी सलाह)
- टोकन देने से पहले विक्रेता से मौज़ा, खाता और खेसरा लेकर ख़ुद खतियान और जमाबंदी दोनों देखें।
- किस्म ज़रूर पढ़ें। गैरमजरूआ लिखा हो तो आगे बढ़ने से पहले अंचल कार्यालय से स्थिति पक्की करें।
- कोर्ट, बैंक या सर्वे के लिए स्कैन का स्क्रीनशॉट नहीं, डिजिटल हस्ताक्षरित कॉपी लें।
- पुराने खतियान से आज के विक्रेता तक की पूरी कड़ी (केवाले, वंशावली, दाखिल-खारिज) जोड़कर देखें। यही सबसे ज़्यादा टूटती है।
- ज़मीन मास्टर प्लान के किस ज़ोन में है, यह भी देखें: पटना मास्टर प्लान 2031 आसान भाषा में। ज़मीन के रिकॉर्ड पर सारे लेख ज़मीन के रिकॉर्ड विषय में हैं।
खतियान से जुड़े सवाल-जवाब
- बिहार में खतियान कैसे निकाले?
bhuabhilekh.bihar.gov.in पर Public Login से मोबाइल नंबर द्वारा लॉगिन करें, दस्तावेज़ का प्रकार (जैसे कैडस्ट्रल सर्वे खतियान) चुनें, ज़िला, अंचल, मौज़ा और खाता/खेसरा भरकर Search करें। View से स्कैन कॉपी देखें, "Apply for Download Copy" से फ़ीस भरकर डिजिटल हस्ताक्षरित कॉपी लें।
- खतियान PDF डाउनलोड करने की फ़ीस कितनी है?
डिजिटल हस्ताक्षरित कॉपी की फ़ीस आप जितने पृष्ठ चुनते हैं उसके हिसाब से भुगतान से पहले पोर्टल पर दिखती है। वही राशि मानें, इंटरनेट पर लिखे अनुमानों पर नहीं।
- खतियान क्या होता है?
खतियान सर्वे के बाद बना अधिकार अभिलेख (Record of Rights) है, जिसमें रैयत का नाम, अधिकार, खाता, खेसरा, रकबा, ज़मीन की किस्म, लगान और कब्ज़ा दर्ज होता है। यह मूल स्वामित्व का सबसे प्रमुख अभिलेख है।
- CS और RS खतियान में क्या अंतर है?
CS (कैडस्ट्रल सर्वे) खतियान अंग्रेज़ों के समय के पहले सर्वे में बना, और ज़्यादातर ज़िलों में बेस रिकॉर्ड है। RS (रिविज़नल सर्वे) खतियान आज़ादी के बाद कई ज़िलों में 1952 से हुए दूसरे सर्वे में बना, पर यह सर्वे सभी ज़िलों में नहीं हुआ।
- खतियान और जमाबंदी में क्या फ़र्क है?
खतियान बताता है कि सर्वे के समय ज़मीन किसके नाम दर्ज हुई। जमाबंदी (रजिस्टर-II) बताती है कि आज किसके नाम है, और हर दाखिल-खारिज के बाद इसमें बदलाव होता है।
- खतियान ऑनलाइन नहीं मिल रहा तो क्या करें?
खाता, खेसरा और रैयत के नाम से अलग-अलग खोजें, क्योंकि खोज वाली जानकारी टाइपिंग से भरी गई है। फिर भी न मिले तो अपने अंचल कार्यालय से पूछें कि उस मौज़े का रिकॉर्ड कहाँ से मिलेगा।
- कैथी में लिखा खतियान कैसे पढ़ें?
बिहार भूमि पोर्टल पर नागरिक लॉगिन से "कैथी दस्तावेज़ अनुवाद सेवा" ली जा सकती है, और वहीं कैथी लिपि पाठ्य पुस्तिका भी मुफ़्त है। सौदे से पहले किसी जानकार से पढ़वाकर पुष्टि करें।
यह लेख 15 अक्टूबर 2026 तक राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार के पोर्टल और प्रकाशनों पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। पोर्टल और नियम बदल सकते हैं — कोई भी फ़ैसला लेने से पहले अंचल कार्यालय से पुष्टि करें।