पटना में फ़्लैट ख़रीदने से पहले चेकलिस्ट 2026: RERA से कब्ज़े तक
सीधा जवाब: पटना में बिल्डर से फ़्लैट लेने से पहले सबसे पहले देखें कि प्रोजेक्ट RERA बिहार में रजिस्टर्ड है (नंबर BRERAP से शुरू होता है) — rera.bihar.gov.in पर। फिर उसी पेज पर ज़मीन के कागज़, पास नक्शा और पूरा होने की तारीख़ मिलाएँ। रजिस्टर्ड एग्रीमेंट से पहले बिल्डर को 10% से ज़्यादा न दें, और कब्ज़ा तभी लें जब ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट (OC) मिल चुका हो।
पटना में दानापुर, सगुना मोड़, बेली रोड और कंकड़बाग जैसे इलाक़ों में बहुत-से अपार्टमेंट प्रोजेक्ट हैं। बाहर नौकरी करने वाले बहुत-से लोग सिर्फ़ ब्रोशर और साइट विज़िट देखकर बुकिंग कर देते हैं — और बाद में देरी, नक्शे में बदलाव या रजिस्ट्री न होने की परेशानी झेलते हैं। यह चेकलिस्ट RERA क़ानून और RERA बिहार के आधिकारिक FAQ से बनी है, ताकि आप बुकिंग से कब्ज़े तक हर क़दम पर सही चीज़ जाँच सकें।
एक नज़र में: पटना में फ़्लैट ख़रीदने की चेकलिस्ट
| कब | क्या जाँचें |
|---|---|
| बुकिंग से पहले | RERA रजिस्ट्रेशन नंबर (BRERAP…), प्रोजेक्ट पेज पर पास नक्शा, ज़मीन के कागज़, पूरा होने की तारीख़, बिल्डर के पिछले प्रोजेक्ट, एजेंट का RERA रजिस्ट्रेशन |
| बुकिंग के समय | 10% से ज़्यादा नहीं; कार्पेट एरिया, पार्किंग, सुविधाएँ, भुगतान का शेड्यूल लिखित में |
| एग्रीमेंट | रजिस्टर्ड एग्रीमेंट फ़ॉर सेल, बिहार RERA नियमावली के तय फ़ॉर्मेट में; कब्ज़े की तारीख़ लिखी हो |
| निर्माण के दौरान | RERA पेज पर हर तिमाही की प्रगति रिपोर्ट और फ़ोटो; भुगतान काम के हिसाब से |
| कब्ज़े के समय | OC मिल चुका हो; 2 महीने में कब्ज़ा लें; फ़्लैट का केवाला (कन्वेयन्स डीड) रजिस्टर्ड हो |
| कब्ज़े के बाद | 5 साल तक ढाँचे/कारीगरी की कमी बिल्डर मुफ़्त ठीक करेगा |
RERA बिहार में प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन कैसे चेक करें?
जिस प्रोजेक्ट में 500 वर्ग मीटर से ज़्यादा ज़मीन या 8 से ज़्यादा फ़्लैट (सभी फ़ेज़ मिलाकर) हैं, उसका RERA में रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है। रजिस्ट्रेशन से पहले बिल्डर न विज्ञापन दे सकता है, न बुकिंग ले सकता है।
- rera.bihar.gov.in खोलें और Projects में "Search Project" या "RERA Registered Projects" (ज़िलेवार सूची) चुनें।
- प्रोजेक्ट या बिल्डर का नाम डालकर खोजें। बिल्डर के ब्रोशर पर लिखा BRERAP… नंबर पोर्टल से मिलाएँ — "Verify Project Registration" भी है।
- प्रोजेक्ट "Rejected Projects List" में तो नहीं, यह भी देख लें।
- ब्रोकर/एजेंट के ज़रिए ख़रीद रहे हैं तो "Registered Agents" में उसका नाम देखें — RERA के तहत रियल एस्टेट एजेंट का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है, और प्रॉपर्टी बेचने वाले वेब-पोर्टल भी इसी दायरे में आते हैं।
रजिस्ट्रेशन ज़रूरी होने के बावजूद जो प्रोजेक्ट रजिस्टर्ड नहीं है, उसमें पैसा न लगाएँ — यह RERA बिहार की ख़ुद की सलाह है। ऐसे प्रोजेक्ट की शिकायत पोर्टल पर "Report Unregistered Project" से की जा सकती है; शिकायत करने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाती है।
RERA पेज पर बुकिंग से पहले क्या-क्या देखें?
हर रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट को RERA बिहार के पोर्टल पर ये जानकारी डालनी होती है — इसे खोलकर ज़रूर पढ़ें:
- पास नक्शा और लेआउट, मंज़ूरियाँ और निर्माण शुरू करने की अनुमति (commencement)
- फ़्लैटों की संख्या, प्रकार और कार्पेट एरिया; गैरेज और खुली पार्किंग की संख्या
- प्रोजेक्ट पूरा होने का चरणवार शेड्यूल और सुविधाओं की सूची
- ज़मीन का मालिकाना हक़ — प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन के लिए खतियान/केवाला, दाखिल-खारिज या ताज़ा लगान रसीद, LPC या जमाबंदी, और नॉन-एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफ़िकेट माँगे जाते हैं
- अगर बिल्डर ज़मीन का मालिक नहीं है, तो ज़मीन मालिक के साथ डेवलपमेंट एग्रीमेंट
- ज़रूरत हो तो फ़ायर, एयरपोर्ट अथॉरिटी और पर्यावरण की NOC
- पिछले 5 साल के प्रोजेक्ट और उनसे जुड़े मुक़दमे
- हर तिमाही की अपडेट — कितने फ़्लैट बुक हुए, निर्माण की स्थिति फ़ोटो सहित
पटना के लिए ख़ास सलाह: प्रोजेक्ट की ज़मीन का खाता-खेसरा लेकर उसकी जमाबंदी ख़ुद भी ऑनलाइन देखें (तरीक़ा यहाँ), और ज़मीन मास्टर प्लान में किस ज़ोन में है, यह पटना मास्टर प्लान 2031 से मिलाएँ। 2019 के जलजमाव के बाद पटना में बेसमेंट पार्किंग और ग्राउंड फ़्लोर का लेवल भी साइट पर जाकर ख़ुद देखें।
बुकिंग अमाउंट कितना होना चाहिए? (10% नियम)
RERA अधिनियम की धारा 13(1) के अनुसार बिल्डर फ़्लैट की क़ीमत का 10% से ज़्यादा एडवांस या आवेदन शुल्क के रूप में तब तक नहीं ले सकता, जब तक आपके साथ लिखित एग्रीमेंट फ़ॉर सेल करके उसकी रजिस्ट्री न करा दे।
बुकिंग/अलॉटमेंट के समय बिल्डर को आपको पास नक्शा, लेआउट, स्पेसिफ़िकेशन और प्रोजेक्ट पूरा होने का चरणवार शेड्यूल (पानी, सीवर, बिजली की व्यवस्था सहित) देना होता है।
कोटेशन लिखित में लें: फ़्लैट की बेसिक क़ीमत, पार्किंग, क्लब/सुविधा शुल्क, मेंटेनेंस डिपॉज़िट, GST और रजिस्ट्री का खर्च — सब अलग-अलग लाइन में। रजिस्ट्री पर कितना लगेगा, यह हमारी पटना रजिस्ट्री खर्च गाइड में है।
कार्पेट एरिया क्या है? सुपर बिल्ट-अप से कैसे अलग है?
RERA के अनुसार कार्पेट एरिया = फ़्लैट का वह असल इस्तेमाल लायक़ फ़र्श क्षेत्र, जिसमें बाहरी दीवारें, सर्विस शाफ़्ट, अपनी बालकनी/बरामदा और अपनी खुली छत शामिल नहीं, पर अंदर की दीवारें शामिल हैं।
RERA पोर्टल पर फ़्लैट कार्पेट एरिया में ही दर्ज होते हैं। अगर बिल्डर "1,400 sq ft" बता रहा है, तो पूछें — यह कार्पेट है या सुपर बिल्ट-अप? दोनों में अक्सर काफ़ी फ़र्क़ होता है। एग्रीमेंट में कार्पेट एरिया साफ़ लिखा हो, और बालकनी/छत का क्षेत्रफल अलग।
एग्रीमेंट फ़ॉर सेल में क्या ज़रूर देखें?
- बिहार RERA नियमावली, 2017 में एग्रीमेंट फ़ॉर सेल का तय फ़ॉर्मेट है। बिल्डर को यही फ़ॉर्मेट इस्तेमाल करना है, उसमें बदलाव की अनुमति नहीं है। आपको दिया गया एग्रीमेंट उस फ़ॉर्मेट से मेल खाता है या नहीं, यह जाँचें — RERA पोर्टल पर प्रोजेक्ट के साथ उसका प्रोफ़ॉर्मा भी होता है।
- कब्ज़े की तारीख़ साफ़ लिखी हो।
- भुगतान काम की प्रगति के अनुपात में हो — RERA रजिस्ट्रेशन के लिए भी बुकिंग 10% से ज़्यादा न होने और भुगतान योजना अनुपातिक होने की शर्त है।
- ज़मीन का विवरण, प्रोजेक्ट का नाम और बिल्डर का PAN/CIN लिखा हो।
आपके पैसे की सुरक्षा: बिल्डर को हर रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट का अलग बैंक खाता रखना होता है, और ख़रीदारों से मिली रक़म का 70% उसी खाते में जमा करना होता है, जिससे काम की प्रगति के हिसाब से ही निकासी हो सकती है। पास नक्शा, स्पेसिफ़िकेशन और कॉमन एरिया की जानकारी ख़रीदार को दे दिए जाने के बाद बिल्डर दो-तिहाई ख़रीदारों की लिखित सहमति के बिना पास नक्शे या कॉमन एरिया में बदलाव नहीं कर सकता।
कब्ज़ा लेते समय क्या जाँचें? (OC और रजिस्ट्री)
- ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट (OC): बिल्डर को उसी सक्षम प्राधिकार से OC लेना होता है जिसने नक्शा पास किया था। OC की कॉपी माँगें।
- 2 महीने का नियम: OC जारी होने के 2 महीने के भीतर ख़रीदार को कब्ज़ा लेना होता है।
- फ़्लैट का केवाला (कन्वेयन्स डीड): RERA के अनुसार, अगर स्थानीय क़ानून में अलग अवधि न हो, तो OC जारी होने के 3 महीने के भीतर बिल्डर को आपके नाम रजिस्टर्ड कन्वेयन्स डीड करनी होती है, और कॉमन एरिया का हिस्सा ख़रीदारों के संघ (एसोसिएशन) को।
- ख़रीदारों का संघ: स्थानीय क़ानून में अलग व्यवस्था न हो तो, ज़्यादातर फ़्लैट बुक हो जाने के 3 महीने के भीतर बिल्डर को एसोसिएशन/सोसाइटी बनाने में मदद करनी होती है।
- कब्ज़े के बाद कमी: कब्ज़े की तारीख़ से 5 साल के भीतर ढाँचे, कारीगरी, गुणवत्ता या सुविधा में कोई कमी बताई जाए, तो बिल्डर को उसे 30 दिन में बिना पैसे ठीक करना होता है; न करे तो आप मुआवज़े के हक़दार हैं। इसलिए कमियों की शिकायत हमेशा लिखित में (ईमेल/पत्र) करें।
बिल्डर कब्ज़े में देरी करे तो क्या हक़ है?
अगर बिल्डर एग्रीमेंट की तारीख़ तक फ़्लैट नहीं देता, तो RERA की धारा 18 के तहत आपके पास दो रास्ते हैं:
| आप क्या चाहते हैं | आपका हक़ |
|---|---|
| प्रोजेक्ट से बाहर निकलना | पूरी जमा रक़म ब्याज और मुआवज़े के साथ वापस |
| प्रोजेक्ट में बने रहना | कब्ज़ा मिलने तक हर महीने की देरी का ब्याज |
बिहार RERA नियमावली के अनुसार यह ब्याज SBI की प्रचलित प्राइम लेंडिंग रेट से 2% ज़्यादा की दर से लगता है (SBI की बेंचमार्क दर बदलने पर उसी के हिसाब से), और रिफ़ंड देय होने के 60 दिन के भीतर देना होता है। ध्यान दें: यही दर आप पर भी लागू होती है अगर आप भुगतान में देर करें।
शिकायत कहाँ करें: RERA बिहार के पोर्टल पर — मुआवज़ा माँगना है तो न्यायनिर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer) के पास फ़ॉर्म N में, बाक़ी शिकायतें प्राधिकरण के पास फ़ॉर्म M में। जल्दी समझौते के लिए RERA बिहार का सुलह और विवाद निवारण सेल भी है, जहाँ आम तौर पर 2–3 बैठकों में मामला निपट जाता है।
रीसेल (पुराना) फ़्लैट ख़रीद रहे हैं तो?
- विक्रेता के नाम रजिस्टर्ड कन्वेयन्स डीड हो — सिर्फ़ अलॉटमेंट लेटर या एग्रीमेंट नहीं।
- फ़्लैट पर लोन बाक़ी है तो बैंक से बकाया चुकता होने और कागज़ वापसी का लिखित सबूत।
- प्रोजेक्ट का OC और एसोसिएशन से मेंटेनेंस बकाया न होने का पत्र।
- रजिस्ट्री का खर्च फ़्लैट की लिखी क़ीमत और MVR में जो ज़्यादा हो, उस पर लगेगा।
- रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 — धारा 2(k) कार्पेट एरिया, 3 रजिस्ट्रेशन, 13(1) 10% नियम, 14(2) नक्शे में बदलाव, 14(3) 5 साल की कमी-ज़िम्मेदारी, 17 कन्वेयन्स डीड, 18 देरी पर रिफ़ंड/ब्याज, 19(10) 2 महीने में कब्ज़ा — PDF (rera.bihar.gov.in)
- बिहार भू-संपदा (विनियमन और विकास) नियमावली, 2017 — नियम 17 (ब्याज: SBI प्राइम लेंडिंग रेट + 2%), नियम 18 (60 दिन में रिफ़ंड), एग्रीमेंट फ़ॉर सेल का प्रोफ़ॉर्मा — PDF
- RERA बिहार FAQ — प्रश्न 1, 8, 10, 12–18, 20, 22–29, 32, 33, 35 और अनुलग्नक-I (प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन के कागज़) — PDF
- पोर्टल के विकल्प (Search Project, Verify Project Registration, Rejected Projects List, Registered Agents, Report Unregistered Project) — rera.bihar.gov.in
- सभी दस्तावेज़ और पोर्टल 14.10.2026 को जाँचे गए।
आपको क्या करना चाहिए? (हमारी सलाह)
- पहले RERA, फिर साइट विज़िट: प्रोजेक्ट 500 वर्ग मीटर से बड़ी ज़मीन पर है या उसमें 8 से ज़्यादा फ़्लैट हैं, और फिर भी RERA नंबर नहीं है — तो बात वहीं ख़त्म। इससे छोटे प्रोजेक्ट पर RERA लागू नहीं होता, वहाँ ज़मीन के कागज़, पास नक्शा और OC की जाँच और भी ज़रूरी है।
- प्रोजेक्ट की ज़मीन के कागज़ ख़ुद जाँचें — खाता-खेसरा, जमाबंदी, ज़मीन मालिक से डेवलपमेंट एग्रीमेंट। ज़मीन के कागज़ में गड़बड़ी हो तो पूरा प्रोजेक्ट अटक सकता है।
- 10% से ज़्यादा कैश/एडवांस बिना रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के कभी न दें, और हर भुगतान बैंक से, रसीद के साथ।
- बाहर रहते हैं? हर तिमाही RERA पेज पर निर्माण की फ़ोटो देखें, और भरोसेमंद किसी व्यक्ति से साइट देखवाते रहें।
- OC के बिना कब्ज़ा लेने का दबाव न मानें, और OC की कॉपी ज़रूर लें। प्लॉट ख़रीदने का सोच रहे हैं, तो हमारी पटना में प्लॉट ख़रीदने की पूरी गाइड देखें।
पटना में फ़्लैट ख़रीदने से जुड़े सवाल-जवाब
- पटना में फ़्लैट ख़रीदने से पहले क्या देखना चाहिए?
सबसे पहले RERA बिहार रजिस्ट्रेशन (BRERAP से शुरू नंबर; 500 वर्ग मीटर से बड़ी ज़मीन या 8 से ज़्यादा फ़्लैट वाले प्रोजेक्ट के लिए ज़रूरी), फिर RERA पेज पर पास नक्शा, ज़मीन के कागज़, पूरा होने की तारीख़ और बिल्डर के पिछले प्रोजेक्ट। रजिस्टर्ड एग्रीमेंट से पहले 10% से ज़्यादा न दें, और OC मिलने के बाद ही कब्ज़ा लें।
- RERA बिहार में प्रोजेक्ट कैसे चेक करें?
rera.bihar.gov.in पर Projects में "Search Project" या "RERA Registered Projects" खोलें, प्रोजेक्ट या बिल्डर का नाम डालें, और ब्रोशर पर लिखा BRERAP नंबर मिलाएँ। "Rejected Projects List" भी देख लें।
- बिल्डर बुकिंग के समय कितना पैसा ले सकता है?
RERA की धारा 13(1) के अनुसार रजिस्टर्ड एग्रीमेंट फ़ॉर सेल से पहले बिल्डर फ़्लैट की क़ीमत का 10% से ज़्यादा नहीं ले सकता।
- कार्पेट एरिया क्या होता है?
फ़्लैट का असल इस्तेमाल लायक़ फ़र्श क्षेत्र — बाहरी दीवारें, सर्विस शाफ़्ट, अपनी बालकनी/बरामदा और खुली छत को छोड़कर, पर अंदर की दीवारें मिलाकर। RERA में फ़्लैट इसी में दर्ज होते हैं।
- फ़्लैट मिलने में देरी हो तो बिल्डर से क्या मिलेगा?
आप प्रोजेक्ट छोड़ना चाहें तो पूरी रक़म ब्याज और मुआवज़े के साथ वापस, और बने रहना चाहें तो कब्ज़े तक हर महीने का ब्याज। बिहार में यह ब्याज SBI की प्राइम लेंडिंग रेट से 2% ज़्यादा है। शिकायत RERA बिहार में होती है।
- फ़्लैट की रजिस्ट्री कब होती है?
RERA के अनुसार, स्थानीय क़ानून में अलग अवधि न हो तो OC जारी होने के 3 महीने के भीतर बिल्डर को ख़रीदार के नाम कन्वेयन्स डीड करनी होती है। ख़रीदार को OC के 2 महीने के भीतर कब्ज़ा लेना होता है।
- फ़्लैट में दरार या सीपेज आए तो बिल्डर की ज़िम्मेदारी कब तक है?
कब्ज़े की तारीख़ से 5 साल तक। इस दौरान बताई गई ढाँचे या कारीगरी की कमी बिल्डर को 30 दिन में बिना पैसे ठीक करनी होती है, वरना ख़रीदार मुआवज़े का हक़दार है।
यह लेख 14 अक्टूबर 2026 तक RERA अधिनियम 2016, बिहार RERA नियमावली 2017 और RERA बिहार के पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। यह क़ानूनी सलाह नहीं है — बड़ा भुगतान करने से पहले अपने कागज़ किसी जानकार से जाँच करवाएँ।