पटना में प्लॉट खरीदने से पहले पूरी गाइड (2026) — कागज़, नाप, लोकेशन और खर्च
पटना में प्लॉट खरीदना ज़्यादातर परिवारों के लिए ज़िंदगी का सबसे बड़ा फ़ैसला होता है। प्लॉट में आज़ादी है — जैसा घर चाहिए, जब चाहिए, वैसा बनाइए। लेकिन बने-बनाए फ़्लैट की तरह प्लॉट में कुछ भी "तैयार" नहीं मिलता। कागज़, रास्ता, पानी की निकासी, आस-पड़ोस, यहाँ तक कि मिट्टी — सब कुछ आपको ख़ुद जाँचना पड़ता है।
पटना में प्लॉट खरीदने वालों को जो दिक्कतें आती हैं, वो ज़्यादातर किस्मत की वजह से नहीं, इन तीन चूकों से आती हैं: ज़मीन के कागज़ ठीक से नहीं जाँचे, बारिश में जगह देखी ही नहीं, या बजट में ऊपर के खर्च जोड़ना भूल गए। यह गाइड इन तीनों को उसी क्रम में समझाती है जिसमें आपको जाँच करनी चाहिए।
पहले तय करें: पटना में प्लॉट क्यों खरीद रहे हैं?
सबसे पहले ख़ुद से एक सवाल पूछिए: प्लॉट जल्दी घर बनाने के लिए है या निवेश के लिए?
- 1–3 साल में घर बनाना है: तो ऐसा प्लॉट चाहिए जहाँ आज ही रहना मुमकिन हो — पक्का रास्ता, बिजली, पानी, नाली, और पास में स्कूल-बाज़ार। ऐसे प्लॉट आम तौर पर बसे हुए पटना के अंदर या उसके पास मिलते हैं।
- 5–10 साल के लिए निवेश: तो पटना के बाहरी, विकसित हो रहे इलाक़े देख सकते हैं — जैसे दानापुर–बिहटा की तरफ़, सगुना मोड़ और खगौल के आस-पास, नौबतपुर, फुलवारी शरीफ़ और संपतचक की ओर, या फतुहा की तरफ़। यहाँ दाम कम हैं, लेकिन कागज़, रास्ते और इलाक़े की भविष्य की योजनाओं की जाँच और ज़्यादा सख़्ती से करनी होगी।
इसी एक जवाब से तय होता है कि पटना का कौन-सा इलाक़ा आपके लिए सही है, कितना दाम देना ठीक है और कितना जोखिम उठा सकते हैं।
पटना में ज़मीन की नाप: कट्ठा, धुर और डिसमिल
पटना में प्लॉट की बात आम तौर पर कट्ठा और धुर में होती है, जबकि केवाला (सेल डीड) और सरकारी रिकॉर्ड में रकबा अक्सर डिसमिल में लिखा होता है। रेट भी "प्रति कट्ठा" बताया जाता है। दाम की बात करने से पहले ये हिसाब समझ लें:
| इकाई (पटना में चलन) | स्क्वायर फीट | दूसरी इकाइयों में |
|---|---|---|
| 1 धुर | लगभग 68 sq ft | 1/20 कट्ठा |
| 1 डिसमिल | 435.6 sq ft | 1/100 एकड़ |
| 1 कट्ठा | लगभग 1,361 sq ft | 20 धुर = 3.125 डिसमिल |
| 2 कट्ठा | लगभग 2,722 sq ft | 6.25 डिसमिल |
| 1 बीघा | लगभग 27,225 sq ft | 20 कट्ठा = 62.5 डिसमिल |
| 1 एकड़ | 43,560 sq ft | 100 डिसमिल = 32 कट्ठा |
दो काम की बातें:
- कट्ठे का माप इलाक़े और स्थानीय चलन के हिसाब से थोड़ा अलग हो सकता है। जो रकबा केवाला और रिकॉर्ड में लिखा है, वही मान्य है — अमीन से नपवाकर मिलान ज़रूर करें।
- दो प्लॉट की तुलना करनी हो तो "प्रति कट्ठा" रेट को प्रति स्क्वायर फीट में बदल लें। ₹10 लाख प्रति कट्ठा का मतलब है लगभग ₹735 प्रति स्क्वायर फीट।
पटना में प्लॉट खरीदने से पहले कानूनी जाँच
दिखने में सुंदर प्लॉट, अगर कागज़ कमज़ोर हैं, तो वो संपत्ति नहीं — पैसे देकर खरीदी गई मुसीबत है। बिहार में ज़मीन के रिकॉर्ड के अपने नाम हैं। हर कागज़ क्या है और उसमें क्या मिलाना है, यहाँ समझिए।
1. खतियान — ज़मीन का अधिकार अभिलेख
खतियान सर्वे का रिकॉर्ड है: खाता नंबर, खेसरा (प्लॉट) नंबर, रकबा, ज़मीन की किस्म और किसके नाम दर्ज थी। विक्रेता जो ज़मीन बेच रहा है, उसका खाता, खेसरा और रकबा खतियान से मिलाइए। अगर बेचा जा रहा रकबा रिकॉर्ड से ज़्यादा है, तो वहीं रुकिए और वजह पूछिए।
2. जमाबंदी — आज ज़मीन किसके नाम है
जमाबंदी वो रजिस्टर है जिसमें दर्ज है कि अभी ज़मीन किसके पास है और लगान कौन भरता है। विक्रेता का नाम जमाबंदी में होना ही चाहिए। जमाबंदी आप बिहार भूमि पोर्टल पर ऑनलाइन देख सकते हैं — ज़िला पटना, फिर अंचल, मौज़ा और खाता नंबर डालकर। ऑनलाइन रिकॉर्ड पहली जाँच है — असली कागज़ से मिलान हमेशा करें।
3. लगान रसीद
विक्रेता के नाम से हाल की लगान रसीद बताती है कि ज़मीन उनके नाम दर्ज है और बकाया भरा हुआ है। पुरानी या गायब रसीद ख़तरे का संकेत है।
4. दाखिल-खारिज — अंचल कार्यालय में नामांतरण
ज़मीन बिकने पर ख़रीदार का नाम सरकारी रिकॉर्ड में दाखिल-खारिज से चढ़ता है, जो उस इलाक़े के अंचल कार्यालय में होता है — जैसे पटना सदर, दानापुर, फुलवारी या संपतचक। अगर विक्रेता ने ख़ुद यह ज़मीन किसी से खरीदी थी, तो देखिए कि उनका दाखिल-खारिज पूरा हुआ है या नहीं। जिसके पास सिर्फ़ केवाला है पर दाखिल-खारिज नहीं, वो रिकॉर्ड में अभी पूरी तरह मालिक दर्ज नहीं है।
5. केवाला की पूरी चेन
पिछले सभी रजिस्टर्ड केवाले माँगिए — जितना पीछे तक मिल सकें, बेहतर हो 30 साल तक। चेन जुड़ी होनी चाहिए: एक केवाले का ख़रीदार अगले केवाले का विक्रेता हो। पटना और आसपास के ज़्यादातर ज़मीन विवाद इसी चेन की किसी टूटी कड़ी से शुरू होते हैं।
6. पुश्तैनी ज़मीन: वंशावली और सभी हिस्सेदारों की सहमति
पटना के आसपास की बहुत-सी ज़मीन पुश्तैनी है। ऐसी ज़मीन में परिवार के हर वारिस का हिस्सा हो सकता है। वंशावली माँगिए और पक्का कीजिए कि हर हिस्सेदार या तो केवाले पर दस्तख़त करे या रजिस्टर्ड कागज़ से अपना हिस्सा छोड़ चुका हो। एक भी भाई, बहन या वारिस छूट गया तो वो सालों बाद बिक्री को चुनौती दे सकता है।
7. पावर ऑफ़ अटॉर्नी से बिक्री
अगर कोई मालिक की जगह बेच रहा है, तो देखिए कि पावर ऑफ़ अटॉर्नी रजिस्टर्ड है, उसमें बेचने का अधिकार लिखा है, और मालिक जीवित हैं व उन्होंने उसे रद्द नहीं किया है। जहाँ तक हो सके, रिकॉर्ड में दर्ज मालिक से सीधे खरीदिए।
8. एलपीसी — भूमि दखल प्रमाण पत्र
एलपीसी अंचल अधिकारी जारी करते हैं और यह ज़मीन पर कब्ज़े की पुष्टि करता है। पटना में बैंक ज़मीन पर लोन देने से पहले आम तौर पर एलपीसी माँगते हैं, इसलिए पहले ही पता कर लें कि इस प्लॉट का एलपीसी बन सकता है या नहीं।
9. पटना में खेती की ज़मीन: क्या कन्वर्ज़न ज़रूरी है?
पटना के बाहरी इलाक़ों की बहुत-सी ज़मीन रिकॉर्ड में खेती की (कृषि) ज़मीन के रूप में दर्ज है। ऐसी ज़मीन पर घर बनाने के लिए आम तौर पर गैर-कृषि उपयोग में बदलाव (कन्वर्ज़न) करवाना पड़ता है। दाम तय करने से पहले पता कीजिए कि कन्वर्ज़न हुआ है या नहीं, हो सकता है या नहीं, और कितना खर्च आएगा।
10. नक्शा पास और इलाक़े की योजनाएँ
- नक्शा पास: घर का नक्शा पास करवाना होगा — शहर की सीमा के अंदर पटना नगर निगम से, और बाहर उस इलाक़े की स्थानीय संस्था या योजना प्राधिकरण से। पूछिए कि इस प्लॉट पर कितनी मंज़िल और कितना सेटबैक मान्य है।
- डेवलपर की कॉलोनी: अगर किसी डेवलपर की प्लॉटिंग वाली कॉलोनी में खरीद रहे हैं, तो देखिए कि प्रोजेक्ट रेरा बिहार (RERA Bihar) में रजिस्टर्ड है और आपका प्लॉट नंबर रजिस्टर्ड लेआउट में है।
- पटना मास्टर प्लान और सड़क चौड़ीकरण: मास्टर प्लान देखिए और अंचल कार्यालय में पूछिए कि ज़मीन का कोई हिस्सा सड़क, नाले या सरकारी अधिग्रहण के लिए तो चिह्नित नहीं है।
- पटना एयरपोर्ट के पास: एयरपोर्ट के आसपास के प्लॉट पर इमारत की ऊँचाई की सीमा हो सकती है। दो-तीन मंज़िल से ज़्यादा बनाना है तो पहले यह जाँच लें।
11. बैंक का कर्ज़ और कोर्ट केस
पक्का कीजिए कि प्लॉट किसी बैंक में गिरवी नहीं है और किसी कोर्ट केस में नहीं फँसा है। विक्रेता की खरीद के बाद उसी प्लॉट पर कोई और केवाला तो नहीं हुआ, यह रजिस्ट्री रिकॉर्ड में देखिए। महँगे प्लॉट के लिए वकील से टाइटल सर्च करवाना समझदारी है — इसका खर्च प्लॉट की क़ीमत के मुक़ाबले बहुत कम है।
पटना में साइट विज़िट: ज़मीन पर क्या देखें
कागज़ बताते हैं कि ज़मीन किसकी है। साइट विज़िट बताती है कि वहाँ रहना चाहेंगे या नहीं। कम से कम दो बार जाइए: एक बार किसी आम दिन दोपहर में, और एक बार तेज़ बारिश के दौरान या ठीक बाद।
अमीन से नपाई और चौहद्दी
- लाइसेंसधारी अमीन से प्लॉट नपवाइए और लंबाई, चौड़ाई और रकबा (कट्ठा / डिसमिल) केवाले और नक्शे से मिलाइए।
- देखिए कि सीमा के निशान या दीवार सही जगह हैं और पड़ोसी उनसे सहमत हैं।
- सीधा, आयताकार प्लॉट बेहतर है — टेढ़े-मेढ़े प्लॉट में घर बनाते समय जगह बर्बाद होती है।
रास्ता
- क्या प्लॉट तक कानूनी, सार्वजनिक रास्ता है, या किसी और की ज़मीन से होकर जाना पड़ता है? जो रास्ता सिर्फ़ किसी की मेहरबानी पर है, वो बाद में बंद हो सकता है।
- रास्ता कितना चौड़ा है? पतली गली में निर्माण, पार्किंग और इमरजेंसी में दिक्कत होती है, और दोबारा बेचने पर दाम भी कम मिलता है।
- रास्ता पक्का है? बरसात में चलने लायक रहता है?
पटना में जलजमाव: प्लॉट का लेवल ज़रूर देखें
पटना में यह सबसे ज़रूरी जाँच है। तेज़ मानसूनी बारिश में पूरे के पूरे मोहल्ले डूब जाते हैं — 2019 में राजेंद्र नगर और कंकड़बाग़ जैसे इलाक़ों में कई दिनों तक पानी भरा रहा। गंगा, सोन और पुनपुन के पास के कई इलाक़े नीचे भी हैं।
- प्लॉट सड़क से ऊँचा है या नीचा? सड़क से नीचे का प्लॉट हर बारिश में पानी जमा करेगा, और उसकी भराई में पैसा लगेगा।
- पड़ोसियों और दुकानदारों से पूछिए: "पिछली बड़ी बारिश में यहाँ पानी आया था? कितना ऊपर? कितने दिन रहा?"
- आसपास की दीवारों पर पानी के निशान, हाल में भरी गई नीची ज़मीन और बंद नालियाँ देखिए।
- सड़क पर ठीक से नाली है? और वो पानी कहाँ ले जाती है?
मिट्टी और ज़मीन
जो ज़मीन हाल तक पोखर, नीचा खेत या कूड़े की जगह थी और मिट्टी डालकर भरी गई है, वो असमान रूप से धँस सकती है। पूछिए कि पहले ज़मीन क्या थी, और नींव डिज़ाइन करने से पहले सॉइल टेस्ट करवाइए।
बिजली, पानी और सीवर
- बिजली: पास में खंभा और लाइन है? नया कनेक्शन कितनी दूर से आएगा?
- पानी: नगर निगम की सप्लाई है, या बोरिंग पर निर्भर रहना होगा? पड़ोस के घरों से पानी की गहराई और गुणवत्ता पूछिए।
- सीवर: सीवर लाइन है, या सेप्टिक टैंक बनाना पड़ेगा?
- मोबाइल और इंटरनेट सिग्नल: प्लॉट पर खड़े होकर अपने फ़ोन से जाँचिए।
प्लॉट के बगल में ये चीज़ें न हों
- प्लॉट के ऊपर से या बहुत पास से जाती हाई-टेंशन बिजली की लाइन
- ठीक बगल में खुला नाला, कूड़ा डंपिंग की जगह या श्मशान
- बहुत पास में व्यस्त हाईवे या रेलवे लाइन — शोर और सुरक्षा
- बगल में विवादित या अतिक्रमण वाला प्लॉट
पटना और आसपास: पर्यावरण से जुड़ी जाँच
- बाढ़ का ख़तरा: गंगा, सोन, पुनपुन और तटबंधों से दूरी देखिए, और पिछले मानसून में इलाक़े का हाल पूछिए।
- भूजल की गुणवत्ता: बिहार के गंगा किनारे के कुछ इलाक़ों के भूजल में आर्सेनिक पाया जाता है। बोरिंग का पानी इस्तेमाल करना है तो फ़ैसले से पहले लैब में पानी की जाँच करवाइए।
- हवा की गुणवत्ता: पास में ईंट-भट्ठे, फ़ैक्ट्री या भारी ट्रकों का आना-जाना तो नहीं? धुआँ और धूल रोज़ की परेशानी बनते हैं।
- हरियाली और खुली जगह: पेड़, पार्क और खुली ज़मीन पटना की तेज़ गर्मी में सच में बड़ा फ़र्क़ डालते हैं।
- धूप और दिशा: देखिए सड़क किस तरफ़ है और धूप किधर से आती है। इससे घर कितना रोशन और ठंडा रहेगा, यह तय होता है।
आस-पड़ोस: रोज़ की ज़िंदगी कैसी होगी
आप सिर्फ़ ज़मीन नहीं, अपने परिवार के रहने की जगह चुन रहे हैं। इन सबकी दूरी "पास ही है" से नहीं, पटना के ट्रैफ़िक में असली समय से नापिए:
- बच्चों की उम्र के हिसाब से स्कूल
- अस्पताल और क्लिनिक — रात में इमरजेंसी हो तो कितनी जल्दी पहुँचेंगे?
- रोज़ की ज़रूरत का बाज़ार — सब्ज़ी, राशन, दवा
- आपका दफ़्तर — ऑफ़िस के समय पर एक बार जाकर देखिए
- पब्लिक ट्रांसपोर्ट — बस रूट, ऑटो स्टैंड, और वो मेट्रो या सड़क प्रोजेक्ट जिन पर सच में काम चल रहा है
- थाना और स्ट्रीट लाइट — हो सके तो अँधेरा होने के बाद घूमकर देखिए
- आसपास कितने घर बन चुके हैं — जहाँ लोग पहले से रहते हैं, वो इलाक़ा ख़ाली लेआउट से ज़्यादा सुरक्षित होता है और तेज़ी से विकसित होता है
"आने वाले" प्रोजेक्ट पर एक बात: पटना के बाहरी इलाक़ों में विक्रेता अक्सर कहते हैं कि "नई सड़क, पुल या मेट्रो बस आने ही वाली है"। इसे बोनस मानिए, खरीदने की वजह नहीं। आधिकारिक स्थिति ख़ुद जाँचिए, और देखिए कि प्रोजेक्ट सालों देर से आए तब भी प्लॉट समझदारी का सौदा रहे।
पटना में प्लॉट खरीदने का कुल खर्च
बहुत-से पहली बार के ख़रीदार सिर्फ़ प्लॉट की क़ीमत का बजट बनाते हैं और बाद में परेशान होते हैं। इन सबके लिए तैयार रहिए:
| खर्च | क्या है |
|---|---|
| प्लॉट की क़ीमत | तय दाम — प्लॉट की तुलना के लिए प्रति कट्ठा रेट को प्रति sq ft में बदलें |
| स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फ़ीस | केवाला रजिस्ट्री के समय बिहार सरकार को दी जाती है; सौदे की रक़म या सरकारी दर (MVR), जो ज़्यादा हो, उसका प्रतिशत। बजट पक्का करने से पहले अपने मामले की मौजूदा दरें जाँच लें। |
| कानूनी और जाँच का खर्च | वकील का टाइटल सर्च, अमीन की नपाई, कागज़ों की कॉपी |
| दाखिल-खारिज और कन्वर्ज़न | आपके नाम दाखिल-खारिज; ज़रूरत हो तो भूमि उपयोग में बदलाव |
| चारदीवारी और भराई | बाउंड्री वॉल, और प्लॉट सड़क से नीचा हो तो मिट्टी भराई |
| बिजली-पानी के कनेक्शन | बिजली, पानी, सीवर |
| निर्माण | अगर घर बनाना है — आम तौर पर प्लॉट से भी कहीं ज़्यादा |
प्लॉट लोन: बैंक तैयार मकान के मुक़ाबले प्लॉट पर क़ीमत का कम हिस्सा लोन देते हैं, और कुछ प्लॉट लोन में तय समय के अंदर निर्माण शुरू करना ज़रूरी होता है। कोई भी एडवांस देने से पहले बैंक से बात कीजिए और पक्का कीजिए कि बैंक इस प्लॉट के कागज़ मानेगा।
दाम: उसी सड़क पर हाल में हुई बिक्री से तुलना कीजिए, ब्रोकर के बताए "रेट" से नहीं। पटना के अच्छे इलाक़े में बहुत सस्ता प्लॉट मिल रहा है, तो उसकी कोई वजह ज़रूर होगी — उसे खोजिए।
पटना में प्लॉट का सौदा सुरक्षित तरीके से कैसे करें
- सारे कागज़ों की कॉपी लीजिए — कोई भी पैसा देने से पहले।
- जाँच कीजिए — बिहार भूमि रिकॉर्ड, अंचल कार्यालय, वकील से टाइटल जाँच, अमीन की नपाई और साइट विज़िट।
- सिर्फ़ छोटा टोकन दीजिए — बैंक ट्रांसफ़र या चेक से, लिखित रसीद के साथ।
- इक़रारनामा (सेल एग्रीमेंट) कीजिए — जिसमें दाम, भुगतान का समय, रजिस्ट्री की तारीख़ लिखी हो, और यह भी कि कागज़ में कमी निकली तो टोकन वापस होगा।
- केवाला रजिस्ट्री करवाइए — उस इलाक़े के निबंधन कार्यालय में। हर मालिक और हिस्सेदार दस्तख़त के लिए मौजूद हो। बाक़ी रक़म बैंक से दीजिए — बड़ी नक़द रक़म से बचिए।
- दाखिल-खारिज के लिए आवेदन कीजिए — रजिस्ट्री के तुरंत बाद, और लगान भरिए ताकि रसीद आपके नाम से आने लगे।
- कब्ज़ा लीजिए — सीमा के निशान लगवाइए और सारे असली कागज़ सुरक्षित रखिए।
पटना में ज़मीन खरीदते समय ख़तरे के संकेत
- विक्रेता का नाम जमाबंदी में नहीं है, या रिकॉर्ड का रकबा बेचे जा रहे रकबे से कम है
- विक्रेता जल्दबाज़ी में है और "आज ही" बड़ा नक़द एडवांस माँग रहा है
- परिवार के कुछ सदस्य दस्तख़त के लिए "उपलब्ध नहीं" हैं
- असली कागज़ "किसी रिश्तेदार के पास" या "बैंक में" हैं
- सार्वजनिक रास्ता नहीं — बस वादा कि रास्ता बन जाएगा
- प्लॉट सड़क से नीचा है, या पड़ोसी बताते हैं कि हर बरसात वहाँ पानी भरता है
- डेवलपर की कॉलोनी जिसका रेरा बिहार में रजिस्ट्रेशन नहीं
- प्रति कट्ठा दाम उसी सड़क के दूसरे प्लॉट से बहुत कम है
पटना प्लॉट खरीद चेकलिस्ट
| विषय | क्या जाँचें |
|---|---|
| मालिकाना | खतियान, विक्रेता के नाम जमाबंदी, हाल की लगान रसीद, दाखिल-खारिज पूरा |
| टाइटल | केवाले की चेन (~30 साल), वंशावली और सभी हिस्सेदारों की सहमति, गिरवी या कोर्ट केस नहीं |
| रकबा | केवाले का कट्ठा / डिसमिल अमीन की नपाई से मेल खाता है |
| उपयोग | ज़मीन की किस्म, कन्वर्ज़न, नक्शा पास के नियम, पटना मास्टर प्लान / सड़क चौड़ीकरण, एयरपोर्ट की ऊँचाई सीमा |
| प्रोजेक्ट | डेवलपर कॉलोनी का रेरा बिहार रजिस्ट्रेशन |
| साइट | कानूनी रास्ता और उसकी चौड़ाई, सड़क के मुक़ाबले प्लॉट का लेवल, चौहद्दी |
| पानी | बरसात में जलजमाव का इतिहास, नाली, भूजल (आर्सेनिक) जाँच |
| सुविधाएँ | बिजली, पानी सप्लाई, सीवर, मोबाइल सिग्नल |
| आस-पड़ोस | स्कूल, अस्पताल, बाज़ार, ट्रांसपोर्ट, सुरक्षा, पहले से बने घर |
| पैसा | स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री, कानूनी खर्च, दाखिल-खारिज, भराई और चारदीवारी, लोन की मंज़ूरी |
पटना में प्लॉट खरीदने से जुड़े सवाल-जवाब
- पटना में प्लॉट खरीदने के लिए कौन-कौन से कागज़ चाहिए?
कम से कम: खतियान, विक्रेता के नाम जमाबंदी, हाल की लगान रसीद, दाखिल-खारिज का सबूत, पिछले केवालों की चेन, और पुश्तैनी ज़मीन हो तो वंशावली। एलपीसी भी काम का है, ख़ासकर अगर बैंक लोन लेना है।
- पटना में ज़मीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन कैसे देखें?
बिहार भूमि पोर्टल पर जाइए। ज़िला पटना चुनिए, फिर अंचल और मौज़ा, और खाता या खेसरा नंबर से जमाबंदी देखिए। ऑनलाइन जो दिखे, उसका असली कागज़ों से मिलान ज़रूर करें।
- पटना में 1 कट्ठा में कितना स्क्वायर फीट होता है?
पटना में 1 कट्ठा आम तौर पर लगभग 1,361 स्क्वायर फीट माना जाता है, यानी 20 धुर या 3.125 डिसमिल। स्थानीय चलन में थोड़ा फ़र्क़ हो सकता है, इसलिए हमेशा केवाले में लिखे रकबे को मानिए और अमीन से नपाई करवाइए।
- क्या पटना के बाहरी इलाक़े में प्लॉट खरीदना सुरक्षित है?
यह अच्छा निवेश हो सकता है, लेकिन वहाँ जाँच और ज़रूरी है: कानूनी सार्वजनिक रास्ता, ज़मीन की किस्म और कन्वर्ज़न, बरसात में प्लॉट का लेवल, और हर हिस्सेदार के दस्तख़त। सिर्फ़ किसी वादे वाली सड़क या प्रोजेक्ट के भरोसे न खरीदें।
- कैसे पता करें कि पटना के किसी इलाक़े में जलजमाव होता है?
तेज़ बारिश के दौरान या ठीक बाद जाइए, प्लॉट का लेवल सड़क से मिलाइए, और सालों से वहाँ रहने वालों से पूछिए कि पिछली बरसातों में पानी कितना ऊपर आया था। उनकी याद सबसे भरोसेमंद रिकॉर्ड है।
- क्या पटना में खेती की ज़मीन खरीदकर घर बना सकते हैं?
आम तौर पर घर के लिए ज़मीन गैर-कृषि उपयोग में दर्ज होनी चाहिए, इसलिए खेती की ज़मीन का पहले कन्वर्ज़न करवाना पड़ता है। दाम तय करने से पहले पता कीजिए कि कन्वर्ज़न हो सकता है या नहीं और कितना खर्च आएगा।
- पटना में प्लॉट की रजिस्ट्री के बाद तुरंत क्या करें?
अंचल कार्यालय में अपने नाम दाखिल-खारिज के लिए आवेदन कीजिए, लगान भरना शुरू कीजिए ताकि रसीद आपके नाम से आए, चारदीवारी या सीमा के निशान लगवाइए, और असली केवाला व सारे पुराने कागज़ सुरक्षित रखिए।
पटना में प्लॉट खरीदना मुश्किल नहीं है, बस सही क्रम में जाँच कीजिए: पहले कागज़, फिर साइट, फिर पैसा। इनमें से कोई एक भी बात न बैठे, तो बाद में सुधारने से बेहतर है कि सौदा छोड़ दें।