क़ीमत → रजिस्ट्री ख़र्च → अपनी जेब से कितना लगेगा → हर महीने की EMI, सब एक जगह। पटना या बिहार में कहीं भी प्लॉट, मकान या फ़्लैट के लिए।
₹10 लाख तक के मकान पर RBI बैंक को स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री ख़र्च भी क़ीमत में गिनने देता है, यानी लोन से रजिस्ट्री का कुछ हिस्सा निकल सकता है। अपने बैंक से पूछिए।
प्लॉट लोन: हर बैंक नहीं देता। RBI इसकी इजाज़त तभी देता है जब आप लिखकर दें कि बैंक की तय अवधि में उस प्लॉट पर मकान बनाएँगे। प्लॉट पर कितना लोन और किस रेट पर मिलेगा, ये बैंक तय करता है, इसलिए टोकन देने से पहले दोनों पक्का कर लीजिए।
क़ीमत + रजिस्ट्री + बाक़ी ख़र्च + पूरी लोन अवधि का ब्याज (अगर पहले नहीं चुकाया)।
ख़र्च देखने के लिए क़ीमत लिखिए।
लोन क़ीमत से ज़्यादा नहीं हो सकता।
रजिस्ट्री: 18 जून 2026 से लागू बिहार के रेट पर स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क, क़ीमत और MVR में से जो ज़्यादा हो उस पर, और हर दस्तावेज़ पर ₹500 स्कैनिंग फ़ीस (11–20 पेज)। नए फ़्लैट में बिल्डर एग्रीमेंट (2% स्टांप ड्यूटी + ₹5 करोड़ तक ₹20,000 फ़ीस) और टिक करने पर बैंक मॉर्गेज डीड (1%, अधिकतम ₹20,000 + 2%, अधिकतम ₹5,000) भी जुड़ता है।
लोन सीमा: RBI के हिसाब से होम लोन ₹30 लाख तक के लोन पर प्रॉपर्टी की क़ीमत का 90%, ₹30 लाख से ऊपर ₹75 लाख तक 80%, और ₹75 लाख से ऊपर 75% तक ही हो सकता है। स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री ख़र्च क़ीमत में नहीं गिने जाते, सिर्फ़ ₹10 लाख तक के मकान को छोड़कर। आपका बैंक इससे कम भी दे सकता है।
EMI: आम घटते-बैलेंस वाला फ़ॉर्मूला: EMI = L × r × (1 + r)ⁿ ÷ ((1 + r)ⁿ − 1), जहाँ L लोन है, r महीने की दर (सालाना दर ÷ 12 ÷ 100) और n महीनों की गिनती।
स्रोत: बिहार गज़ट अधिसूचना संख्या 636 (18 जून 2026) और मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, बिहार की स्टांप ड्यूटी व फ़ीस तालिका; RBI Master Circular on Housing Finance (लोन-टू-वैल्यू सीमा; ₹10 लाख तक के मकान छोड़कर स्टांप ड्यूटी क़ीमत में नहीं; प्लॉट लोन)।
80% लोन (₹40 लाख) पर: ₹10 लाख डाउन पेमेंट + ₹4,50,000 रजिस्ट्री (7% स्टांप ड्यूटी + 2% फ़ीस, पुरुष से पुरुष) + ₹500 स्कैनिंग फ़ीस = क़रीब ₹14.5 लाख, कातिब, वकील या बैंक के ख़र्च के अलावा। बिल्डर से नया फ़्लैट हो और एग्रीमेंट रजिस्टर हो, तो ₹1,20,500 और (2% स्टांप ड्यूटी + ₹20,000 फ़ीस + स्कैन)।
आम तौर पर नहीं। RBI बैंकों से कहता है कि स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्री और काग़ज़ी ख़र्च प्रॉपर्टी की क़ीमत में न गिनें। सिर्फ़ ₹10 लाख तक के मकान पर छूट है। इसलिए रजिस्ट्री का पैसा अपना तैयार रखिए।
RBI की सीमा: ₹30 लाख तक के लोन पर क़ीमत का 90%, ₹30 लाख से ऊपर ₹75 लाख तक 80%, और ₹75 लाख से ऊपर 75%। आपकी आमदनी, बैंक की वैल्यूएशन और काग़ज़ देखकर बैंक इससे कम भी दे सकता है।
ब्याज दर पर निर्भर है। 8% सालाना पर क़रीब ₹33,458 महीना, 8.5% पर क़रीब ₹34,713, 9% पर क़रीब ₹35,989। 8.5% पर 20 साल में क़रीब ₹43.3 लाख ब्याज जाता है। ये रेट सिर्फ़ उदाहरण हैं: कैलकुलेटर में अपने बैंक का रेट लिखिए।
कुछ बैंक प्लॉट लोन देते हैं। RBI प्लॉट के लिए बैंक लोन तभी देने देता है जब आप लिखकर दें कि बैंक की तय अवधि में उस पर मकान बनाएँगे। कितना लोन और किस रेट पर, ये बैंक तय करता है, और पहले उसका वकील प्लॉट के काग़ज़ जाँचता है।
नहीं, EMI बढ़ती है लेकिन कुल ब्याज बहुत घटता है। ₹40 लाख का लोन 8.5% पर 20 साल के लिए क़रीब ₹34,713 महीना (₹43.3 लाख ब्याज) और 15 साल के लिए क़रीब ₹39,390 महीना (₹30.9 लाख ब्याज) है।
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