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पटना में प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के जानकार

पटना में रजिस्ट्री — वकील से डीड
और रजिस्ट्री ऑफ़िस में
पूरा साथ

रजिस्ट्री की ज़्यादातर परेशानी उसी दिन डीड में लिख दी जाती है जिस दिन साइन होता है — बाद में तो बस पता चलता है। हम पहली बार में ही शर्तें, सर्किल रेट (MVR) और सही रजिस्ट्री ऑफ़िस ठीक करते हैं — और हमारी तरफ़ से वकील काउंटर पर आपके साथ खड़ा रहता है।

डीड वकील बनाते हैं
आपके मौज़े का MVR (सर्किल रेट) और स्टांप ड्यूटी जाँची जाती है
पटना के रजिस्ट्री ऑफ़िस में साथ जाना
रजिस्ट्री सहायता
शुरू से आख़िर तक रजिस्ट्री में साथ
पुरानी डीड पढ़ने से लेकर रजिस्टर्ड कागज़ हाथ में आने तक — कागज़, ऑफ़िस और रजिस्ट्री का दिन, सब हम सँभालते हैं।
  • वकील से बनी सेल डीड / इकरारनामा
  • आपके मौज़े का MVR (सर्किल रेट) जाँचा जाता है
  • महिला ख़रीदार और ख़ून के रिश्ते वाली छूट जाँची जाती है
  • पटना के 4 रजिस्ट्री ऑफ़िस में साथ जाना
  • रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज का पूरा रास्ता लिखकर
WhatsApp पर फ़ीस पूछें →
🔒 काम शुरू होने से पहले फ़ीस लिखित में
4+
रजिस्ट्री ऑफ़िस कवर
24 घंटे
में कागज़ की पहली जाँच
₹0
आपका पैसा हमारे हाथ से नहीं जाता
100%
तय फ़ीस, डील का % नहीं
कहाँ गड़बड़ होती है

पटना में रजिस्ट्री में कहाँ गड़बड़ होती है

इनमें से कोई भी दिक्कत रजिस्ट्री वाले दिन नहीं दिखती। ये तब सामने आती हैं जब आप प्रॉपर्टी बेचने, उस पर लोन लेने या उसे बचाने जाते हैं — अक्सर सालों बाद, जब सामने वाला कहीं और जा चुका होता है।

⚠️
डीड पुराना फ़ॉर्मेट है, बस नाम बदल दिए गए

ब्रोकर जो ड्राफ़्ट देते हैं उनमें अक्सर टाइटल वारंटी और क्षतिपूर्ति (इंडेम्निटी) वाली शर्तें होती ही नहीं। इनके बिना, रजिस्ट्री के बाद अगर कोई हिस्सेदार दावा कर दे, कोई छुपा बैंक लोन निकल आए या परिवार में बँटवारे का केस हो जाए, तो बेचने वाले के ख़िलाफ़ आपके पास लिखित में कुछ नहीं होता।

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ड्यूटी ग़लत MVR कैटेगरी पर लगाई गई

बिहार के MVR (न्यूनतम मूल्य रजिस्टर) में मौज़े और ज़मीन की कैटेगरी के हिसाब से अलग रेट होते हैं — मेन रोड, ब्रांच रोड, आवासीय, व्यावसायिक, कृषि। ग़लत कैटेगरी लगाने से डीड पर कम स्टांप लगता है, और बाद में जुर्माने के साथ केस खुल सकता है।

🙈
कोई नहीं बताता कि आप क्या साइन कर रहे हैं

लाइन, फ़ोटो-अँगूठे और क्लर्क के सवालों के बीच पहली बार ख़रीदने वाले जो कागज़ थमाया जाता है, उस पर साइन कर देते हैं। पेमेंट का तरीका, कब्ज़े की तारीख़ और पुराना बकाया कौन देगा — ये शर्तें महीनों बाद पहली बार पढ़ी जाती हैं, अक्सर झगड़े के वक़्त।

डीड बनवाना

हम कौन-कौन से कागज़ बनाते हैं

नीचे का हर कागज़ हमारी टीम का वकील बनाता या जाँचता है — आपकी असली पुरानी डीड और राजस्व रिकॉर्ड देखकर, किसी बने-बनाए फ़ॉर्मेट में भरकर नहीं।

📝
इकरारनामा (Agreement to Sell)

तारीख़ के साथ पेमेंट की किस्तें, बयाना ज़ब्त होने की शर्तें गोल-मोल शब्दों में नहीं बल्कि रकम में, रजिस्ट्री से पहले बेचने वाले की ज़िम्मेदारी कि ज़मीन पर कोई बोझ (लोन/बकाया) साफ़ करे और जमाबंदी अपडेट कराए, और अगर बीच में टाइटल में गड़बड़ी निकले तो डील से बाहर निकलने का लिखित रास्ता।

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सेल डीड (केवाला / बैनामा)

चारों तरफ़ की चौहद्दी, खाता और खेसरा (प्लॉट) नंबर, थाना नंबर और मौज़ा, रकबा उसी इकाई में जो पुरानी डीड में है, पेमेंट का पूरा ब्योरा और तरीका, और टाइटल वारंटी व इंडेम्निटी की शर्तें जो रजिस्ट्री के बाद भी लागू रहें।

🎁
दानपत्र (गिफ़्ट डीड) और पारिवारिक बँटवारा

ऐसे बनाया जाता है कि परिवार के हर सदस्य का रिश्ता और हिस्सा साफ़ लिखा हो, और सब-रजिस्ट्रार जो सहायक कागज़ माँगेंगे वो सही तरह से लगे हों — पुश्तैनी ज़मीन पर बाद में होने वाले पारिवारिक झगड़ों की सबसे आम वजह यही होती है।

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सहायक कागज़

NRI या बाहर रहने वाले बेचने वालों के लिए पावर ऑफ़ अटॉर्नी, हक़-त्याग पत्र (रिलिंक्विशमेंट डीड), पहले से रजिस्टर्ड कागज़ की ग़लती सुधारने के लिए शुद्धि-पत्र (रेक्टिफ़िकेशन डीड), और कब्ज़ा पत्र।

स्टांप ड्यूटी और बचत

स्टांप ड्यूटी और MVR (सर्किल रेट)

ड्यूटी MVR वैल्यू और तय कीमत में से जो ज़्यादा हो, उस पर लगती है। ये सब डीड बनने से पहले जाँच लें — रजिस्ट्री के बाद इन्हें ठीक नहीं किया जा सकता।

स्टांप लगने से पहले हम क्या जाँचते हैं

  • 18 जून 2026 से रेट: स्टांप ड्यूटी 7% और रजिस्ट्रेशन फ़ीस 2% — कुल 9%। पुरुष किसी महिला को बेचे तो 6.6% + 1.9% (8.5%); महिला किसी पुरुष को बेचे तो 7% + 2.1% (9.1%)। जो "6% + 2%" बता रहा है, वो पुराना रेट बता रहा है।
  • महिला ख़रीदार: पुरुष बेचने वाले से महिला के नाम ख़रीदने पर लगभग 0.5% कम लगता है। साझा ख़रीद (जैसे पति-पत्नी) पर अधिसूचना साफ़ नहीं है, इसलिए डीड बनने से पहले हम रजिस्ट्री ऑफ़िस से जवाब ले लेते हैं।
  • MVR कैटेगरी: MVR का रेट मौज़े और ज़मीन की कैटेगरी (मेन रोड, ब्रांच रोड, आवासीय, व्यावसायिक, कृषि) पर निर्भर करता है। हम सही कैटेगरी जाँचते हैं, कॉलोनी के नाम से अंदाज़ा नहीं लगाते।

रेट, सीमा और छूट सरकारी अधिसूचना से बदलते रहते हैं। आपके पैसे देने से पहले हम आपकी डील के लिए मौजूदा स्थिति जाँच लेते हैं। स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फ़ीस ख़रीदार के अपने नाम से सीधे सरकार को जाती है — हम आवेदन तैयार करते हैं, आपका पैसा हमारे हाथ से नहीं जाता।

कवरेज

आपकी प्रॉपर्टी किस रजिस्ट्री ऑफ़िस में जाएगी

रजिस्ट्री ऑफ़िस प्रॉपर्टी के हिसाब से तय होता है, आपके पते से नहीं। ग़लत ऑफ़िस में डीड ले गए तो स्लॉट और पूरा दिन बर्बाद — इसलिए कुछ भी बुक करने से पहले हम सही ऑफ़िस पक्का कर लेते हैं।

📍
ज़िला सब-रजिस्ट्री ऑफ़िस, पटना

शहरी पटना का ज़्यादातर हिस्सा — Boring Road, Bailey Road, Kankarbagh, Rajendra Nagar, Patliputra और बीच के वार्ड।

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दानापुर रजिस्ट्री ऑफ़िस

Danapur, Khagaul, Saguna More, Gola Road, Rupaspur और Bihta की तरफ़ का पश्चिमी इलाका।

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पटना सिटी रजिस्ट्री ऑफ़िस

Patna City (पटना साहिब), Gulzarbagh, Agamkuan और बाईपास के साथ का पूर्वी इलाका।

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मसौढ़ी / ग्रामीण रजिस्ट्री ऑफ़िस

पटना ज़िले के दक्षिणी और ग्रामीण प्रखंड — रजिस्ट्री ऑफ़िस इस बात से तय होता है कि ज़मीन कहाँ है।

आसान प्रक्रिया

काम कैसे होता है — 4 स्टेप

स्टांप लगने से पहले आप ड्राफ़्ट पास करते हैं, और स्टेप 3 से पहले आपको पूरा ख़र्च पता होता है।

1
24 कामकाजी घंटों में जाँच
कागज़ भेजिए

पिछली टाइटल डीड, जमाबंदी / लगान रसीद, खतियान या LPC (अगर हो), दोनों पार्टी का पहचान पत्र, और तय कीमत व पेमेंट की शर्तें — WhatsApp पर भेजिए। हम सबसे पहले पुरानी डीड और जमाबंदी पढ़ते हैं, क्योंकि रजिस्ट्री की ज़्यादातर दिक्कतें वहीं दिख जाती हैं।

2
स्टांप से पहले आपकी मंज़ूरी
ड्राफ़्ट और जाँच

वकील डीड बनाते हैं और हम आपको PDF भेजते हैं। हर शर्त समझाने के लिए एक कॉल होती है, और जब तक ड्राफ़्ट में वही न लिखा हो जो आपने तय किया था, तब तक बदलाव होते रहते हैं। आपकी लिखित हाँ के बिना कुछ भी स्टांप पर नहीं जाता।

3
MVR से मिलान
ड्यूटी का हिसाब और स्लॉट

हम आपके मौज़े और ज़मीन की कैटेगरी का MVR (न्यूनतम मूल्य रजिस्टर) रेट जाँचते हैं, MVR वैल्यू और तय कीमत में जो ज़्यादा हो उस पर ड्यूटी निकालते हैं, और सही रजिस्ट्री ऑफ़िस में ई-निबंधन से स्लॉट बुक कराने में मदद करते हैं।

4
कोई आपके साथ खड़ा है
रजिस्ट्री का दिन

आपके वकील आपके साथ जाते हैं — फ़ोटो और अँगूठे का निशान, गवाह की औपचारिकता, रजिस्ट्री क्लर्क के सवालों के जवाब, और निकलने से पहले यह पक्का करना कि रजिस्टर्ड कागज़ बन गया है।

पहले पुरानी डीड भेजिए

ज़्यादातर दिक्कतें पिछले टाइटल कागज़ में ही दिख जाती हैं। उसे WhatsApp पर भेजिए — बयाना देने से पहले हम बता देंगे कि क्या ठीक कराना है। पहली जाँच का कोई पैसा नहीं।

फ़र्क़ क्यों पड़ता है

जानकार सँभाले तो क्या बदलता है

एक ही रजिस्ट्री तीन अलग तरीकों से कैसे होती है — सीधी तुलना।

तुलना: ब्रोकर के ज़रिए बनाम ख़ुद से बनाम PP Properties रजिस्ट्री सहायता
चरण ब्रोकर के ज़रिए ख़ुद से PP Properties रजिस्ट्री सहायता
ड्राफ़्ट की क्वालिटी पुराना फ़ॉर्मेट, बस नाम बदले कातिब (डीड राइटर) का फ़ॉर्मेट, शर्तें बिना पढ़े वकील का बनाया, टाइटल वारंटी और इंडेम्निटी शर्तों के साथ
MVR (सर्किल रेट) मुँह-ज़बानी अंदाज़ा जो कातिब मान ले आपके मौज़े और ज़मीन की कैटेगरी के हिसाब से जाँचा
महिला ख़रीदार का रेट शायद ही कोई बताता है पूछना नहीं आता तो छूट जाता है महिला ख़रीदार की कम ड्यूटी जाँचकर लागू
रजिस्ट्री का दिन आपको किसी दलाल के हवाले लाइन में लगिए और अंदाज़ा लगाइए शुरू से आख़िर तक वकील आपके साथ
रजिस्ट्री के बाद संपर्क ख़त्म दाखिल-खारिज अक्सर भूल जाते हैं उसी हफ़्ते दाखिल-खारिज का लिखित रास्ता
आप क्या देते हैं डील की रकम का प्रतिशत कोई अंदाज़ा नहीं तय फ़ीस, काम से पहले बताई गई
साफ़ फ़ीस

फ़ीस

तय फ़ीस, काम शुरू होने से पहले लिखित में। सरकारी स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फ़ीस क़ानूनी शुल्क हैं जो आप सीधे सरकार को देते हैं — ये कभी हमारे ज़रिए नहीं जाते।

इकरारनामा — बनाना और जाँच
एक बार बदलाव शामिल
फ़ीस के लिए WhatsApp करें →
सेल डीड — बनाना, ड्यूटी का हिसाब और रजिस्ट्री के दिन साथ जाना
सरकारी स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फ़ीस आप अलग से, सीधे जमा करते हैं
फ़ीस के लिए WhatsApp करें →
दानपत्र या पारिवारिक बँटवारा
रिश्ते के कागज़ में मदद शामिल
फ़ीस के लिए WhatsApp करें →
कोई भी काम शुरू होने से पहले फ़ीस लिखित में पक्की। कोटेशन के लिए डीड का प्रकार और प्रॉपर्टी की जानकारी +91 90288 75915 पर WhatsApp करें।
सवाल-जवाब

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पटना में रजिस्ट्री से पहले ख़रीदार जो पूछते हैं, उनके जवाब।

यह इस पर निर्भर करता है कि ज़मीन असल में कहाँ है — उसका मौज़ा और थाना नंबर — न कि आप कहाँ रहते हैं। पटना ज़िले में कई रजिस्ट्री ऑफ़िस हैं जो अलग-अलग इलाके देखते हैं, और ग़लत ऑफ़िस में जाना रिजेक्शन की आम वजह है। कोई भी स्लॉट बुक करने से पहले हम पुरानी डीड के मौज़ा और थाना नंबर से सही ऑफ़िस पक्का करते हैं।
18 जून 2026 से बिहार में कहीं भी सेल डीड (केवाला) पर 7 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी और 2 प्रतिशत रजिस्ट्रेशन फ़ीस लगती है — कुल 9 प्रतिशत। पुरुष किसी महिला को बेचे तो 6.6 + 1.9 प्रतिशत (8.5 प्रतिशत), और महिला किसी पुरुष को बेचे तो 7 + 2.1 प्रतिशत (9.1 प्रतिशत)। ड्यूटी MVR (न्यूनतम मूल्य रजिस्टर) वाली वैल्यू और तय कीमत में से जो ज़्यादा हो, उस पर लगती है — और जून 2026 में MVR भी बढ़ा है (ग्रामीण इलाकों में 1.6 गुना, शहरी और आसपास के इलाकों में 2 गुना), इसलिए आपके प्लॉट की MVR कैटेगरी मायने रखती है। रेट अधिसूचना से बदलते हैं, इसलिए पैसे देने से पहले हम आपकी डील के लिए मौजूदा स्थिति जाँचते हैं।
होनी चाहिए। अगर चालू जमाबंदी (राजस्व रिकॉर्ड) बेचने वाले के नाम नहीं है, तो रजिस्ट्री में और बाद में दाखिल-खारिज में दिक्कत आ सकती है, क्योंकि राजस्व रिकॉर्ड और डीड आपस में मेल नहीं खाएँगे। डीड बनने से पहले हम बिहार भूमि पोर्टल और अंचल ऑफ़िस में जमाबंदी जाँचते हैं, और बताते हैं कि पहले क्या ठीक कराना है।
इकरारनामा दोनों पार्टी के बीच एक क़रार की ज़िम्मेदारी बनाता है, लेकिन ट्रांसफ़र ऑफ़ प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 54 के तहत यह अपने आप मालिकाना हक़ नहीं देता — वो सिर्फ़ रजिस्टर्ड सेल डीड से मिलता है। इकरारनामा आपके इस हक़ को बचाता है कि सौदा पूरा कराया जाए, और उसमें लिखी शर्तों पर बयाना वापस मिले। इसीलिए बयाना ज़ब्त होने और वापसी की शर्तें साफ़-साफ़ लिखी होनी चाहिए।
बार काउंसिल में रजिस्टर्ड वकील, वकील के तौर पर। PP Properties काम का तालमेल करता है, कागज़ात जुटाता है और रजिस्ट्री से जुड़ी भाग-दौड़ सँभालता है; क़ानूनी ड्राफ़्टिंग ख़ुद वकील का काम है। अगर मामला विवाद में बदल जाए और केस की ज़रूरत पड़े, तो हम साफ़ बता देते हैं और आपको सीधे वकील से जोड़ देते हैं।
रजिस्ट्री अधिकारी कम कीमत वाले कागज़ को मूल्यांकन के लिए भेज सकता है, और कम लगी स्टांप ड्यूटी बाद में जुर्माने के साथ वसूली जा सकती है। ऐसे नोटिस रजिस्ट्री के बहुत बाद आ सकते हैं, जब बेचने वाले से संपर्क ही न हो। उसी दिन सही MVR कैटेगरी लगवाना बाद में केस लड़ने से कहीं सस्ता पड़ता है।
दाखिल-खारिज अलग सेवा है, लेकिन रजिस्ट्री वाले हर क्लाइंट को उसी हफ़्ते लिखित रास्ता मिलता है — बिहार भूमि पर ऑनलाइन आवेदन कैसे करें, कौन सा अंचल ऑफ़िस देखेगा, कौन से कागज़ लगेंगे और असल में कितना समय लगता है। रजिस्ट्री से मालिकाना हक़ बदलता है; दाखिल-खारिज से राजस्व रिकॉर्ड अपडेट होता है, ताकि जमाबंदी आपके नाम चले — लगान रसीद, लोन और आगे बेचने के लिए।
हाँ, लेकिन रजिस्ट्री ऑफ़िस तभी मानेगा जब पावर ऑफ़ अटॉर्नी सही तरह से बनी और सत्यापित हो — देश के हिसाब से भारतीय दूतावास (कॉन्सुलेट) के सामने बनी हो या अपोस्टिल हो, और भारत पहुँचने के बाद तय समय के अंदर बिहार में स्टांप लगी हो। ग़लत POA की वजह से स्लॉट बर्बाद होना आम बात है। स्लॉट बुक होने से पहले हम POA जाँच लेते हैं।
रजिस्ट्री से पहले पढ़ें

काम की जानकारी

डीड बनाना और रजिस्ट्री ऑफ़िस में साथ जाना बार काउंसिल में रजिस्टर्ड वकील अपनी पेशेवर हैसियत से करते हैं। PP Properties एक प्रॉपर्टी सर्विस कंपनी है — यह ख़ुद वकालत नहीं करती और न ही अदालत में किसी की तरफ़ से पेश होती है। स्टांप ड्यूटी, सर्किल रेट और छूट बिहार सरकार तय करती है और अधिसूचना से बदलती रहती है — इस पेज के आँकड़े अंदाज़े के लिए हैं और हर डील में बिहार निबंधन विभाग की मौजूदा अधिसूचना से मिलाए जाते हैं। यहाँ लिखी कोई बात क़ानूनी सलाह नहीं है।