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RERA Bihar Complaint Kaise Kare: पटना में बिल्डर की देरी पर शिकायत 2026

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सीधा जवाब: अगर बिल्डर ने एग्रीमेंट फ़ॉर सेल में लिखी तारीख़ तक फ़्लैट या प्लॉट का पज़ेशन नहीं दिया, तो RERA अधिनियम की धारा 18 आपको दो रास्ते देती है: प्रोजेक्ट से निकलना चाहें तो पूरा पैसा ब्याज और मुआवज़े के साथ वापस, या प्रोजेक्ट में बने रहना चाहें तो पज़ेशन मिलने तक देरी के हर महीने का ब्याज। इसके लिए rera.bihar.gov.in पर Complaints → Complaint filing में ऑनलाइन शिकायत करें। फ़ीस ₹1,000 है और ऑनलाइन भरनी होती है।

पटना में बहुत से लोग, ख़ासकर जो बाहर नौकरी करते हुए यहाँ फ़्लैट बुक करते हैं, सालों तक "अगले दिसंबर तक पक्का" सुनते रहते हैं। ईएमआई और किराया दोनों चलते रहते हैं। RERA में शिकायत के लिए वकील रखना ज़रूरी नहीं, और पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है, इसलिए पुणे, बेंगलुरु या खाड़ी से भी शिकायत हो सकती है। इस लेख में हम क़ानून की धाराएँ, सही फ़ॉर्म, पोर्टल के स्टेप और आदेश के बाद का रास्ता 25 अक्टूबर 2026 की स्थिति के हिसाब से समझा रहे हैं। प्रोजेक्ट की हालत पहले देखनी हो तो पढ़ें RERA बिहार पर प्रोजेक्ट कैसे चेक करें।

बिल्डर की देरी पर क़ानून आपको क्या हक़ देता है?

स्थितिआपका हक़क़ानून
पज़ेशन एग्रीमेंट की तारीख़ तक नहीं मिला, आप प्रोजेक्ट छोड़ना चाहते हैंजमा किया पूरा पैसा ब्याज के साथ वापस, साथ में मुआवज़ाधारा 18(1), 19(4)
पज़ेशन में देरी, पर आप फ़्लैट/प्लॉट लेना चाहते हैंपज़ेशन मिलने तक देरी के हर महीने का ब्याजधारा 18(1) का परंतुक
बिल्डर का रजिस्ट्रेशन रद्द (revoke) हुआ या उसने काम बंद कर दियापैसा ब्याज और मुआवज़े के साथ वापसधारा 18(1)(b)
ज़मीन का टाइटल ख़राब निकलानुक़सान का मुआवज़ा; इस दावे पर कोई समय-सीमा (limitation) लागू नहींधारा 18(2)
पज़ेशन के बाद ढाँचे में ख़राबी, सीलन, ख़राब कामपज़ेशन से 5 साल के अंदर बताएँ तो बिल्डर 30 दिन में मुफ़्त ठीक करे, नहीं तो मुआवज़ाधारा 14(3); FAQ प्रश्न 26
एग्रीमेंट की कोई और शर्त नहीं निभाईमुआवज़ाधारा 18(3)

ब्याज कितना? बिहार RERA नियमावली 2017 के नियम 17 के मुताबिक़ ब्याज की दर स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की उधार दर से 2% ज़्यादा होती है, उस तारीख़ की दर जिस दिन रक़म देय हुई। यही दर तब भी लगती है जब ख़रीदार किस्त देर से दे। नियम 18 कहता है कि रिफ़ंड, ब्याज और मुआवज़ा देय होने के 60 दिन के अंदर बिल्डर को चुकाना है। आपके केस में असल दर और रक़म RERA का आदेश ही तय करेगा।

लैंडओनर के हिस्से का फ़्लैट लिया है? पटना में बहुत से अपार्टमेंट ज़मीन मालिक और बिल्डर के एग्रीमेंट पर बनते हैं। 2026 की विनियमावली (विनियम 10) कहती है कि अगर ज़मीन मालिक निर्माण-विकास में सक्रिय है, मुनाफ़े में हिस्सा लेता है या ख़ुद फ़्लैट बेचता-विज्ञापन करता है, तो शिकायत में उसे भी प्रमोटर माना जा सकता है। ख़राब टाइटल के मुआवज़े के लिए बिल्डर और ज़मीन मालिक दोनों मिलकर ज़िम्मेदार हैं।

RERA बिहार में शिकायत कौन कर सकता है?

  • फ़्लैट या प्लॉट का ख़रीदार (allottee)
  • ख़रीदारों का संघ (association of allottees)
  • किसी क़ानून के तहत रजिस्टर्ड स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन
  • प्रमोटर भी, ख़रीदार या एजेंट के ख़िलाफ़

शिकायत बिल्डर (प्रमोटर), ख़रीदार या रियल एस्टेट एजेंट के ख़िलाफ़ हो सकती है, अधिनियम, नियमों या विनियमों के किसी भी उल्लंघन पर (धारा 31; RERA बिहार FAQ प्रश्न 22–23)। एक ही प्रोजेक्ट के कई ख़रीदार परेशान हैं तो संघ बनाकर साथ शिकायत करना आसान रहता है।

फ़ॉर्म M या फ़ॉर्म N: पटना में कौन सा फ़ॉर्म भरें?

फ़ॉर्म Mफ़ॉर्म N
किसके पासRERA बिहार प्राधिकरण (Authority)न्यायनिर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer, AO)
कबजिस शिकायत में मुआवज़ा नहीं माँगा जा रहाजब मुआवज़ा चाहिए (धारा 12, 14, 18, 19 के मामले)
फ़ीस₹1,000 (नियम 36)₹1,000 (नियम 37)
कौन सुनता हैचेयरपर्सन या सदस्य की बेंच (विनियम 22)ऐसा न्यायिक अधिकारी जो ज़िला जज है या रह चुका है (धारा 71)

राहत की बात: आपको ख़ुद तय नहीं करना पड़ता। पोर्टल पर आप जो प्रार्थना (prayer) चुनते हैं, उसके हिसाब से वह अपने-आप फ़ॉर्म M या फ़ॉर्म N चुन लेता है (RERA बिहार शिकायत यूज़र मैनुअल; FAQ प्रश्न 24–25)। पोर्टल पर ये 11 प्रार्थनाएँ हैं: रिफ़ंड, पज़ेशन, प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द करना, मुआवज़ा, सुविधाएँ (amenities), डेवलपमेंट एग्रीमेंट के हिसाब से पज़ेशन और हिस्सा, पार्किंग, सेल डीड करवाना, एग्रीमेंट फ़ॉर सेल करवाना, ढाँचे की ख़राबी, और ख़राब टाइटल।

RERA बिहार में ऑनलाइन शिकायत कैसे करें (स्टेप बाय स्टेप)

  1. rera.bihar.gov.in पर Complaints → Complaint filing खोलें।
  2. Create an account पर क्लिक करें। मोबाइल पर आए OTP से वेरिफ़ाई करें; यूज़र आईडी और पासवर्ड ईमेल और SMS पर आएगा।
  3. लॉग इन करके शिकायत फ़ॉर्म खोलें। सबसे ऊपर निर्देश और घोषणा पढ़ें, फिर प्रार्थना का प्रकार चुनें।
  4. प्रोजेक्ट की जानकारी: प्रोजेक्ट RERA में रजिस्टर्ड है या नहीं, प्रोजेक्ट और प्रमोटर का नाम, ब्लॉक, फ़्लैट नंबर, RERA रजिस्ट्रेशन नंबर (BRERAP…)।
  5. आपकी जानकारी: नाम, मोबाइल, ईमेल, आधार या पासपोर्ट नंबर (कॉपी अपलोड), पता और नोटिस भेजने का पता।
  6. बिल्डर की जानकारी: नाम, फ़ोन, ईमेल, ऑफ़िस का पता और नोटिस भेजने का पता।
  7. शिकायत: विषय, तथ्य (तारीख़ों के साथ) और आपको क्या राहत चाहिए।
  8. सारे सबूत PDF में अपलोड करें।
  9. कार्ड या नेट बैंकिंग से फ़ीस भरें। भुगतान होते ही कंप्लेंट आईडी बनती है। मैनुअल के मुताबिक़ यह पूरी तरह डिजिटल है, अलग से काग़ज़ जमा नहीं करना।
  10. प्रिंट आइकन से पूरा फ़ॉर्म निकाल लें। RERA की लीगल टीम कोई कमी बताए तो इसी लॉग इन से Rectification (सुधार) अर्ज़ी और अतिरिक्त काग़ज़ ऑनलाइन दें।

भाषा: 2026 की विनियमावली (विनियम 18) कहती है कि प्राधिकरण की कार्यवाही हिंदी या अंग्रेज़ी में होती है और वह हिंदी या अंग्रेज़ी में शिकायत ले सकता है। नियमावली 2017 के फ़ॉर्म के निर्देश अंग्रेज़ी माँगते हैं, इसलिए हिंदी में लिखें तो साथ में अंग्रेज़ी अनुवाद लगाना सुरक्षित है।

शिकायत के साथ कौन से कागज़ लगाएँ? (चेकलिस्ट)

  • एग्रीमेंट फ़ॉर सेल और अलॉटमेंट लेटर (पज़ेशन की तारीख़ वाला पन्ना ज़रूर)
  • हर भुगतान की रसीद और बैंक स्टेटमेंट, जिनमें बिल्डर को गया पैसा दिखे
  • बिल्डर के डिमांड लेटर, ईमेल, व्हाट्सऐप मैसेज जिनमें नई-नई तारीख़ें दी गईं
  • ब्रोशर या विज्ञापन, जिसमें पज़ेशन की तारीख़ या सुविधाओं का वादा हो
  • RERA पोर्टल से प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट और आख़िरी तिमाही प्रगति रिपोर्ट (QPR)
  • होम लोन है तो लोन का सैंक्शन लेटर और ईएमआई का ब्योरा (मुआवज़े के दावे में काम आता है)
  • आधार या पासपोर्ट की कॉपी

धारा 18 कहती है कि बिल्डर "माँग पर" पैसा लौटाने का ज़िम्मेदार है। इसलिए शिकायत से पहले बिल्डर को एक लिखित माँग (ईमेल या रजिस्टर्ड डाक) भेजना और उसकी कॉपी रखना अच्छा रहता है: आप रिफ़ंड चाहते हैं या देरी का ब्याज, साफ़ लिखें।

शिकायत के बाद क्या होता है?

  1. RERA बिल्डर को नोटिस और आपकी शिकायत की कॉपी भेजता है; बिल्डर तय समय में जवाब देता है (नियम 36(2))।
  2. सुनवाई की तारीख़ आपको भी बताई जाती है। बिल्डर ग़लती मान ले तो आदेश उसी आधार पर होता है; न माने तो कागज़ और सबूत माँगे जाते हैं।
  3. RERA गवाह बुला सकता है और कागज़ मँगवा सकता है। कोई पक्ष बुलाने पर न आए तो उसकी ग़ैरहाज़िरी में भी सुनवाई आगे बढ़ सकती है।
  4. आख़िर में लिखित आदेश, जो RERA की वेबसाइट पर अपलोड होता है (विनियम 24)।

कितना समय? क़ानून कहता है कि न्यायनिर्णायक अधिकारी मुआवज़े की अर्ज़ी 60 दिन में निपटाने की कोशिश करे, और न हो पाए तो कारण लिखे (धारा 71(2))। यानी 60 दिन से ज़्यादा भी लग सकता है। मुआवज़ा तय करते समय अधिकारी देखता है कि बिल्डर को कितना ग़लत फ़ायदा हुआ, आपको कितना नुक़सान हुआ, और क्या बिल्डर बार-बार ऐसा करता है (धारा 72)।

ख़ुद नहीं जा सकते? आप ख़ुद पेश हो सकते हैं या धारा 56 के तहत किसी को अधिकृत कर सकते हैं (वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सेक्रेटरी या कॉस्ट अकाउंटेंट); उसके लिए फ़ॉर्म 5 का अधिकार-पत्र या वकालतनामा लगता है (विनियम 23)। RERA बिहार का मुख्यालय: छठी मंज़िल, बिहार राज्य भवन निर्माण निगम परिसर, हॉस्पिटल रोड, शास्त्री नगर, पटना 800023।

केस का स्टेटस और आदेश ऑनलाइन कैसे देखें?

  • Complaints → Search Complaint/Case Status: केस नंबर या कंप्लेंट आईडी से सुनवाई और पूरा इतिहास।
  • Court Proceeding और Interim Orders: सुनवाई की कार्यवाही और अंतरिम आदेश।
  • Order/Judgments (प्राधिकरण) और Order/Judgments AO (न्यायनिर्णायक अधिकारी): अंतिम आदेश। इसी जगह अपने बिल्डर का नाम डालकर देखें कि उसके ख़िलाफ़ पहले कितने केस हुए हैं।

बिना केस के तेज़ रास्ता: BCDRC सुलह

RERA बिहार ने बिहार RERA सुलह और विवाद समाधान सेल (BCDRC) बनाया है। FAQ के मुताबिक़ सुलह आम तौर पर 2–3 बैठकों में पूरी होती है और शिकायत से कम समय और ख़र्च लेती है (FAQ प्रश्न 27–28)।

  • कैसे शुरू करें: कोई भी पक्ष फ़ॉर्म 1-C में अर्ज़ी RERA बिहार/उसकी बेंच, न्यायनिर्णायक अधिकारी या सुलह सेल को ईमेल, रजिस्टर्ड/स्पीड पोस्ट या हाथ से दे सकता है, और दूसरे पक्ष को सुलह का न्योता भेजता है (प्रश्न 29)।
  • सुलहकर्ता: एक ख़रीदार संघ से, एक बिल्डर संघ से, और एक RERA बिहार का सुलह सलाहकार (प्रश्न 30)।
  • समझौता हुआ पर बिल्डर ने नहीं निभाया: तब धारा 40 के तहत RERA या AO के पास execution के लिए जा सकते हैं (प्रश्न 31)।
  • सुलह केस का स्टेटस: Complaints → Search Conciliation Complaint/Case Status।

हमारी राय: जहाँ बिल्डर काम कर रहा है और सिर्फ़ तारीख़ खिसकी है, वहाँ पहले सुलह आज़माना समझदारी है। जहाँ काम महीनों से बंद है या बिल्डर फ़ोन नहीं उठाता, वहाँ सीधे शिकायत करें।

RERA के आदेश के बाद भी बिल्डर पैसा न दे तो?

  • Execution अर्ज़ी: आदेश की तय समय-सीमा में पालन न हो तो फ़ॉर्म 8 में execution अर्ज़ी दें, फ़ीस ₹250 (विनियम 31)। पोर्टल पर Complaints → Execution filing।
  • ज़मीन के बक़ाया राजस्व की तरह वसूली: RERA ने जो ब्याज, जुर्माना या मुआवज़ा लगाया, वह न दिया जाए तो भू-राजस्व के बक़ाये (arrears of land revenue) की तरह वसूला जा सकता है (धारा 40(1))। बिहार में यह सर्टिफ़िकेट (PDR) केस के रूप में चलता है; ऐसे बिल्डर पोर्टल की Defaulter List → Execution / PDR में दिखते हैं।

आदेश से असहमत हों तो अपील

स्तरकब तकज़रूरी बात
रियल एस्टेट अपीलीय ट्रिब्यूनल (Appellate Tribunal)आदेश की कॉपी मिलने से 60 दिन (धारा 44(2)); ठोस कारण हो तो देर से भीफ़ॉर्म L, फ़ीस ₹5,000 (नियम 27)
बिल्डर अपील करे तो—सुनवाई से पहले जुर्माने का कम से कम 30%, या ख़रीदार को देय पूरी रक़म (ब्याज और मुआवज़े समेत) या दोनों, ट्रिब्यूनल में जमा करना होगा (धारा 43(5))
पटना हाईकोर्टट्रिब्यूनल का आदेश मिलने से 60 दिनसिर्फ़ CPC धारा 100 वाले आधारों पर (धारा 58)

RERA, उपभोक्ता आयोग या सिविल कोर्ट: कहाँ जाएँ?

  • सिविल कोर्ट नहीं: जिन मामलों का फ़ैसला RERA, AO या ट्रिब्यूनल कर सकते हैं, उन पर सिविल कोर्ट केस नहीं सुनता (धारा 79)।
  • उपभोक्ता आयोग भी एक रास्ता है: RERA अधिनियम दूसरे क़ानूनों के अतिरिक्त है, उनकी जगह नहीं (धारा 88)। लेकिन RERA के फ़ॉर्म M और N में आपको घोषणा करनी होती है कि यही मामला किसी और कोर्ट, प्राधिकरण या ट्रिब्यूनल में लंबित नहीं है। इसलिए एक ही मामले के लिए एक ही जगह चुनें।
  • रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट के ख़रीदार के लिए RERA आम तौर पर सीधा रास्ता है: ऑनलाइन फ़ाइलिंग, ₹1,000 फ़ीस, बिल्डर के प्रोजेक्ट का पूरा रिकॉर्ड RERA के पास पहले से।

प्रोजेक्ट RERA में रजिस्टर्ड ही नहीं है तो?

शिकायत फ़ॉर्म में "प्रोजेक्ट RERA में रजिस्टर्ड है या नहीं" का विकल्प है, यानी ऐसे प्रोजेक्ट पर भी शिकायत दर्ज होती है। इसके अलावा पोर्टल पर Report Unregistered Project से बिना रजिस्ट्रेशन वाले प्रोजेक्ट की सूचना दे सकते हैं; RERA बिहार कहता है कि सूचना देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाती है (FAQ प्रश्न 32)। ध्यान रहे: छोटे प्रोजेक्ट को रजिस्ट्रेशन से छूट है (धारा 3(2)); कौन से प्रोजेक्ट RERA में आते हैं, यह इस गाइड में है।

आधिकारिक स्रोत
  • रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016: धारा 3(2), 14(3), 18, 19(4), 31, 40, 43(5), 44, 56, 58, 71, 72, 79, 88 — PDF (rera.bihar.gov.in)
  • बिहार रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) नियमावली, 2017: नियम 17 (ब्याज), 18 (रिफ़ंड 60 दिन), 27 (अपील ₹5,000, फ़ॉर्म L), 36 (फ़ॉर्म M, ₹1,000), 37 (फ़ॉर्म N, ₹1,000) — rera.bihar.gov.in
  • बिहार RERA (सामान्य) विनियमावली, 2026, अधिसूचना सं. RERA/Regulation/61/2026-1027, 28 अगस्त 2026, बिहार गजट (असाधारण) सं. 1079, 7 सितंबर 2026: विनियम 10, 17, 18, 22, 23, 24, 31 (अंग्रेज़ी पाठ, पृ. 54–64) — PDF
  • RERA बिहार FAQ (प्रश्न 22–32) — PDF
  • RERA बिहार शिकायत फ़ाइलिंग यूज़र मैनुअल — PDF
  • RERA बिहार पोर्टल: Complaint filing, Search Complaint/Case Status, Search Conciliation Complaint/Case Status, Order/Judgments, Execution filing, संपर्क पेज — rera.bihar.gov.in, 25 अक्टूबर 2026 को जाँचा गया

आपको क्या करना चाहिए? (हमारी सलाह)

  • पहले तय करें कि आपको क्या चाहिए: पैसा वापस (प्रोजेक्ट छोड़ना) या देरी का ब्याज (फ़्लैट लेना)। शिकायत में यही साफ़ लिखें।
  • तारीख़ों की एक टेबल बनाएँ: बुकिंग, एग्रीमेंट, हर भुगतान, एग्रीमेंट की पज़ेशन तारीख़, बिल्डर के दिए नए वादे। यही आपके केस की रीढ़ है।
  • QPR का स्क्रीनशॉट रखें: RERA पोर्टल पर बिल्डर की अपनी रिपोर्ट में दिखा अधूरा काम सबसे मज़बूत सबूत है।
  • पैसा रोकने से पहले सोचें: ख़रीदार किस्त देर से दे तो उस पर भी वही ब्याज लगता है (नियम 17)। किस्त रोकनी हो तो पहले लिखित में कारण दें।
  • बाहर रहते हैं? शिकायत ऑनलाइन करें, और सुनवाई के लिए ज़रूरत हो तो फ़ॉर्म 5 से किसी अधिकृत व्यक्ति को भेजें।

और पढ़ें: पटना में फ़्लैट ख़रीदने से पहले चेकलिस्ट · पटना में ज़मीन फ़्रॉड से कैसे बचें · पटना में प्लॉट ख़रीदने से पहले पूरी गाइड

RERA बिहार शिकायत: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

  1. RERA बिहार में बिल्डर के ख़िलाफ़ शिकायत कैसे करें?

    rera.bihar.gov.in पर Complaints → Complaint filing में मोबाइल OTP से अकाउंट बनाएँ, प्रार्थना चुनें, प्रोजेक्ट, अपनी और बिल्डर की जानकारी भरें, सबूत PDF में अपलोड करें और ₹1,000 फ़ीस ऑनलाइन भरें। भुगतान के बाद कंप्लेंट आईडी मिलती है।

  2. RERA बिहार में शिकायत की फ़ीस कितनी है?

    बिहार RERA नियमावली 2017 के नियम 36 और 37 के मुताबिक़ फ़ॉर्म M (प्राधिकरण) और फ़ॉर्म N (न्यायनिर्णायक अधिकारी) दोनों की फ़ीस ₹1,000 है। Execution अर्ज़ी की फ़ीस ₹250 और ट्रिब्यूनल में अपील की ₹5,000 है।

  3. फ़्लैट का पज़ेशन लेट हो तो बिल्डर से कितना ब्याज मिलेगा?

    नियम 17 के मुताबिक़ स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की उधार दर से 2% ज़्यादा, उस तारीख़ की दर पर जिस दिन रक़म देय हुई। प्रोजेक्ट में बने रहें तो पज़ेशन तक हर महीने का ब्याज, छोड़ें तो पूरा पैसा ब्याज और मुआवज़े के साथ वापस (धारा 18)।

  4. फ़ॉर्म M और फ़ॉर्म N में क्या फ़र्क़ है?

    मुआवज़ा माँगना हो तो फ़ॉर्म N, जो न्यायनिर्णायक अधिकारी के पास जाता है। जिस शिकायत में मुआवज़ा नहीं माँगा, वह फ़ॉर्म M में प्राधिकरण के पास जाती है। पोर्टल आपकी चुनी प्रार्थना के हिसाब से फ़ॉर्म अपने-आप चुनता है।

  5. RERA बिहार में केस का स्टेटस कैसे देखें?

    पोर्टल पर Complaints → Search Complaint/Case Status में केस नंबर या कंप्लेंट आईडी डालें। आदेश Order/Judgments और Order/Judgments AO में मिलते हैं, सुलह वाले केस Search Conciliation Complaint/Case Status में।

  6. क्या RERA शिकायत के लिए वकील ज़रूरी है?

    नहीं। आप ख़ुद शिकायत कर सकते हैं और पेश हो सकते हैं। चाहें तो धारा 56 के तहत वकील या चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसे किसी व्यक्ति को फ़ॉर्म 5 के अधिकार-पत्र से अधिकृत कर सकते हैं।

  7. RERA का आदेश बिल्डर न माने तो क्या करें?

    फ़ॉर्म 8 में ₹250 फ़ीस के साथ execution अर्ज़ी दें (Complaints → Execution filing)। RERA की लगाई रक़म भू-राजस्व के बक़ाये की तरह वसूली जा सकती है (धारा 40)।

यह लेख RERA अधिनियम 2016, बिहार RERA नियमावली 2017, बिहार RERA (सामान्य) विनियमावली 2026 (गजट सं. 1079), RERA बिहार के FAQ, शिकायत यूज़र मैनुअल और 25 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए RERA बिहार पोर्टल के आधार पर लिखा गया है। पोर्टल के मेन्यू, फ़ीस और नियम बदल सकते हैं; शिकायत से पहले पोर्टल पर दोबारा देखें। यह सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं; बड़े या उलझे मामलों में वकील से सलाह लें।

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PP Properties Team

लेखक · PP Properties, पटना

PP Properties पटना का प्रॉपर्टी एडवाइज़र है। हम कागज़ जाँचते हैं और ज़मीन, मकान, फ़्लैट ख़रीदने-बेचने में मदद करते हैं। यह लेख RERA अधिनियम 2016, बिहार RERA नियमावली 2017, बिहार RERA (सामान्य) विनियमावली 2026, RERA बिहार के FAQ, शिकायत यूज़र मैनुअल और 25 अक्टूबर 2026 को जाँचे गए RERA बिहार पोर्टल के आधार पर लिखा गया है।

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