बाहर रहकर पटना में प्रॉपर्टी कैसे ख़रीदें: NRI गाइड 2026
सीधा जवाब: दूसरे राज्य में नौकरी करते हुए आप पटना में प्रॉपर्टी वैसे ही ख़रीद सकते हैं जैसे पटना में रहने वाला कोई भी व्यक्ति — फ़र्क़ बस दूरी का है। NRI/OCI पटना में मकान, फ़्लैट और प्लॉट ख़रीद सकते हैं, पर खेती की ज़मीन, फ़ार्म हाउस और प्लांटेशन नहीं (रिज़र्व बैंक का नियम), और भुगतान सिर्फ़ बैंकिंग चैनल से। दूर से कागज़ ऑनलाइन जाँचें, रजिस्ट्री के दिन ख़ुद आ सकें तो सबसे अच्छा, नहीं तो सही तरीक़े से बनी पावर ऑफ़ अटॉर्नी से काम होता है। ₹50 लाख या ज़्यादा की ख़रीद पर 1% TDS काटना ख़रीदार की ज़िम्मेदारी है।
पटना के लाखों लोग पुणे, बेंगलुरु, दिल्ली-NCR, हैदराबाद या दुबई-सऊदी-क़तर में काम करते हैं, और घर के लिए प्लॉट या फ़्लैट पटना में ही लेना चाहते हैं। सबसे बड़ा डर यही होता है: "मैं वहाँ नहीं हूँ, कोई धोखा तो नहीं कर देगा?" यह गाइड बताती है कि दूर बैठकर क्या-क्या आप ख़ुद जाँच सकते हैं, किन क़ानूनी नियमों का ध्यान रखना है, और किस काम के लिए पटना आना ज़रूरी है।
एक नज़र में: आप कहाँ रहते हैं, क्या ध्यान रखें
| आप | पटना में क्या ख़रीद सकते हैं | ख़ास ध्यान |
|---|---|---|
| भारत में ही दूसरे राज्य/शहर में (पुणे, बेंगलुरु, दिल्ली…) | सब कुछ — प्लॉट, मकान, फ़्लैट, खेती की ज़मीन | दूर से कागज़ जाँच, रजिस्ट्री के दिन मौजूदगी या पावर ऑफ़ अटॉर्नी |
| NRI (विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिक) / OCI कार्डधारक | मकान, फ़्लैट, प्लॉट और कमर्शियल प्रॉपर्टी | खेती की ज़मीन, फ़ार्म हाउस, प्लांटेशन ख़रीद से नहीं; पैसा सिर्फ़ बैंक से; विदेश में बनी पावर ऑफ़ अटॉर्नी के अलग नियम |
| दोनों | ₹50 लाख या ज़्यादा की ख़रीद पर 1% TDS (विक्रेता भारत का निवासी हो तो); रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज ऑनलाइन | |
दूसरे राज्य में रहते हैं — पटना में प्रॉपर्टी लेने में कोई रोक है?
नहीं। भारत के नागरिक के लिए पटना में प्लॉट, मकान या फ़्लैट ख़रीदने के नियम वही हैं, चाहे आप पटना में रहें या पुणे में। रजिस्ट्री का खर्च भी वही — आम तौर पर 6% स्टांप ड्यूटी + 2% निबंधन शुल्क, लिखी क़ीमत और MVR में जो ज़्यादा हो उस पर (पूरा हिसाब: पटना रजिस्ट्री खर्च गाइड)।
असली चुनौती दूरी है: ज़मीन ख़ुद देख नहीं पाते, कागज़ बिचौलिये के भरोसे रहते हैं, और रजिस्ट्री के लिए छुट्टी लेनी पड़ती है। नीचे हर चुनौती का तरीक़ा है।
NRI पटना में क्या ख़रीद सकता है और क्या नहीं?
रिज़र्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार NRI (विदेश में रहने वाला भारतीय नागरिक) और OCI कार्डधारक:
- ख़रीद सकते हैं: भारत में कोई भी अचल संपत्ति — मकान, फ़्लैट, प्लॉट, दुकान — खेती की ज़मीन, फ़ार्म हाउस और प्लांटेशन को छोड़कर। विक्रेता भारत का निवासी, NRI या OCI कोई भी हो सकता है।
- RBI से अलग अनुमति: इन (गैर-कृषि) संपत्तियों को ख़रीदने-बेचने के लिए RBI की पहले से अनुमति नहीं चाहिए।
- विरासत और गिफ़्ट: विरासत में संपत्ति मिल सकती है। गैर-कृषि संपत्ति भारत के निवासी से, या रिश्तेदार NRI/OCI से गिफ़्ट में ली जा सकती है।
- NRI के पास पहले से खेती की ज़मीन है (जैसे विरासत की) — उसे बेचना या गिफ़्ट करना सिर्फ़ भारत में रहने वाले भारतीय नागरिक को हो सकता है।
पटना के लिए ख़ास सावधानी: बिहटा, नौबतपुर, पुनपुन, फतुहा या दानापुर की तरफ़ बहुत-से "प्लॉट" असल में खेत से काटे गए टुकड़े होते हैं। अगर ज़मीन खेती की है, तो NRI के नाम उसकी ख़रीद जोखिम में पड़ सकती है। बयाना देने से पहले खतियान/जमाबंदी में ज़मीन का प्रकार और मौक़े पर उसका इस्तेमाल देखें, और शक हो तो किसी जानकार या CA से पूछ लें। किसी रिश्तेदार के नाम ख़रीदने का सोच रहे हैं, तो याद रखें — क़ानूनन मालिक वही होगा जिसके नाम रजिस्ट्री है।
NRI पटना की प्रॉपर्टी का पैसा कैसे भेजें?
- भुगतान भारत में बैंकिंग चैनल से होना चाहिए — विदेश से भेजा गया पैसा (इनवर्ड रेमिटेंस), या आपके NRE, FCNR(B) या NRO खाते से।
- ट्रैवलर्स चेक या विदेशी नोट से भुगतान नहीं हो सकता।
- हर भुगतान विक्रेता/बिल्डर के उसी बैंक खाते में करें जिसका नाम कागज़ पर विक्रेता के नाम से मिलता हो, और रक़म केवाले में लिखवाएँ। किसी बिचौलिये के खाते में या नक़द पैसा कभी न दें।
भारत में रहने वाले (दूसरे राज्य वाले) ख़रीदार के लिए भी यही सलाह है: सारा भुगतान बैंक से, रसीद के साथ।
दूर बैठकर पटना की ज़मीन या फ़्लैट की जाँच कैसे करें?
अच्छी बात यह है कि बिहार में ज़मीन के ज़्यादातर रिकॉर्ड अब ऑनलाइन हैं। ये काम आप पुणे या दुबई से भी कर सकते हैं:
| क्या जाँचें | कहाँ (ऑनलाइन) |
|---|---|
| विक्रेता के नाम जमाबंदी, खाता-खेसरा, रकबा, खतियान | बिहार भूमि पोर्टल — तरीक़ा: जमाबंदी, खतियान, LPC ऑनलाइन |
| ज़मीन रजिस्ट्री पर रोक वाली सूची में तो नहीं | enibandhan.bihar.gov.in → "View Prohibited Properties" |
| विक्रेता के केवाले की प्रमाणित कॉपी, भार-मुक्त प्रमाणपत्र (Encumbrance Certificate) | enibandhan.bihar.gov.in → "Certified Copy", "Encumbrance Certificate" |
| फ़्लैट/अपार्टमेंट का प्रोजेक्ट | rera.bihar.gov.in — तरीक़ा: पटना फ़्लैट चेकलिस्ट |
| ज़मीन मास्टर प्लान में किस ज़ोन में है | पटना मास्टर प्लान 2031 आसान भाषा में |
पर कुछ काम ऑनलाइन नहीं हो सकते:
- मौक़े पर कब्ज़ा: ज़मीन पर असल में किसका कब्ज़ा है, रास्ता कितना चौड़ा है, पड़ोसी क्या कहते हैं — यह किसी भरोसेमंद व्यक्ति को भेजकर देखें, वीडियो कॉल पर।
- नाप: अमीन से नपवाएँ। पटना में प्लॉट कट्ठा-धुर में बिकता है (आम तौर पर 1 कट्ठा ≈ 1,361.25 sq ft = 20 धुर, पर इलाक़े के हिसाब से फ़र्क़ होता है — केवाले में लिखे रकबे से मिलाएँ)।
- पानी भरना: 2019 के जलजमाव के बाद यह सबसे ज़रूरी सवाल है। बरसात में साइट का वीडियो मँगवाएँ।
सबसे ज़्यादा धोखा वहीं होता है जहाँ ख़रीदार बिचौलिये के दिखाए कागज़ और फ़ोटो पर भरोसा कर लेता है। हर कागज़ सरकारी पोर्टल से ख़ुद मिलाएँ।
रजिस्ट्री के दिन पटना आना ज़रूरी है?
सबसे सुरक्षित तरीक़ा है कि रजिस्ट्री के दिन आप ख़ुद अवर निबंधन कार्यालय में मौजूद रहें — केवाले पर आपके दस्तख़त और पहचान सीधे आपसे होती है, और किसी तीसरे पर निर्भरता नहीं रहती।
अगर आना संभव नहीं, तो रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 की धारा 32 के अनुसार दस्तावेज़ ख़ुद पक्षकार के अलावा उसके पावर ऑफ़ अटॉर्नी वाले एजेंट के ज़रिए भी पेश हो सकता है — बशर्ते पावर ऑफ़ अटॉर्नी धारा 33 के तरीक़े से बनी और प्रमाणित हो (नीचे देखें)। आपकी ग़ैरमौजूदगी में ऑफिस आपसे जुड़े कौन-से कागज़, पहचान या फ़ोटो माँगेगा, यह पहले से उसी अवर निबंधन कार्यालय से पूछ लें जहाँ रजिस्ट्री होगी (बिहार निबंधन विभाग का हेल्पडेस्क: 14544)। आधे-अधूरे तरीक़े से बनी पावर ऑफ़ अटॉर्नी पर रजिस्ट्री अटक सकती है।
व्यावहारिक सलाह: कागज़ की जाँच, बयाना और ड्राफ़्ट दूर से करा लें, और सिर्फ़ रजिस्ट्री के लिए 2–3 दिन की छुट्टी लेकर आएँ। उसी हफ़्ते दाखिल-खारिज का आवेदन भी कर दें।
बाहर रहकर पावर ऑफ़ अटॉर्नी कैसे बनवाएँ?
रजिस्ट्री में इस्तेमाल होने वाली पावर ऑफ़ अटॉर्नी कहाँ बनेगी, यह इस पर निर्भर है कि आप उस समय कहाँ रहते हैं (रजिस्ट्रेशन अधिनियम, धारा 33):
| आप कहाँ रहते हैं | पावर ऑफ़ अटॉर्नी किसके सामने बनेगी और प्रमाणित होगी |
|---|---|
| भारत में (जैसे पुणे, बेंगलुरु, दिल्ली) | जिस ज़िले/उप-ज़िले में आप रहते हैं, वहाँ के रजिस्ट्रार या सब-रजिस्ट्रार के सामने |
| विदेश में (जैसे दुबई, अमेरिका) | नोटरी पब्लिक, कोर्ट/जज/मजिस्ट्रेट, भारतीय दूतावास के कॉन्सल/वाइस-कॉन्सल, या केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के सामने |
- विदेश में बनी पावर ऑफ़ अटॉर्नी का स्टांप: भारतीय स्टांप अधिनियम की धारा 18 के अनुसार, भारत के बाहर बना दस्तावेज़ भारत पहुँचने के 3 महीने के भीतर स्टांप कराया जा सकता है। देर न करें।
- बिहार में स्टांप ड्यूटी (सरकारी तालिका):
- सिर्फ़ आपकी तरफ़ से ख़रीदने/रजिस्ट्री कराने जैसे काम के लिए (बिहार की संपत्ति बेचने के अधिकार के बिना) — ₹1,000
- बिहार की संपत्ति बेचने के लिए, परिवार के सदस्य को — ₹1,000
- बिहार की संपत्ति बेचने के लिए, परिवार से बाहर के व्यक्ति को — MVR वाली क़ीमत का 6% (बिक्री जैसा)
- किसे दें: परिवार के किसी भरोसेमंद सदस्य को, और सिर्फ़ एक ख़ास प्रॉपर्टी के लिए (स्पेशल पावर ऑफ़ अटॉर्नी) — "सब कुछ करने" वाली जनरल पावर नहीं। काम पूरा होते ही उसे रद्द (revoke) करा दें।
अगर विक्रेता ख़ुद बाहर रहता है और उसकी जगह कोई पावर ऑफ़ अटॉर्नी लेकर बेच रहा है, तो सावधान रहें: असली मालिक से वीडियो कॉल पर बात करें, पावर ऑफ़ अटॉर्नी की तारीख़ और दायरा देखें, और पक्का करें कि वह रद्द नहीं हुई है।
₹50 लाख से ज़्यादा की प्रॉपर्टी पर TDS: ख़रीदार को क्या करना है?
1 अप्रैल 2026 से आयकर अधिनियम, 2025 लागू है, और प्रॉपर्टी पर TDS का नियम अब इसकी धारा 393 में है (पहले धारा 194-IA थी)।
| बात | नियम |
|---|---|
| कब लागू | खेती की ज़मीन को छोड़कर किसी भी अचल संपत्ति की ख़रीद, जब क़ीमत या स्टांप ड्यूटी वाला मूल्य ₹50 लाख या उससे ज़्यादा हो, और विक्रेता भारत का निवासी हो |
| कितना | सौदे की क़ीमत और स्टांप ड्यूटी वाले मूल्य में जो ज़्यादा हो, उसका 1% |
| कौन काटेगा | ख़रीदार — भुगतान करते समय (ख़रीदार NRI हो, तब भी) |
| कैसे जमा करें | आयकर ई-फ़ाइलिंग पोर्टल पर PAN से लॉगिन → e-Pay Tax → Income Tax Act 2025 → Form 141 (पहले Form 26QB था) |
| कब तक | जिस महीने TDS काटा, उसके ख़त्म होने के 30 दिन के भीतर |
विक्रेता NRI है तो? तब यह 1% वाला नियम नहीं, धारा 393(2) का अलग नियम लागू होता है (1 अक्टूबर 2026 से इसकी रिपोर्टिंग Form 141 के Schedule E में होती है)। कितना TDS काटना है, यह पैसा देने से पहले किसी CA से तय करवाएँ — इसकी ज़िम्मेदारी ख़रीदार की है।
रजिस्ट्री के बाद दूर रहकर ज़मीन की देखभाल कैसे करें?
- दाखिल-खारिज: रजिस्ट्री के बाद ऑनलाइन आवेदन करें — यह कहीं से भी हो सकता है, कोई सरकारी फ़ीस नहीं। तरीक़ा: पटना में दाखिल-खारिज ऑनलाइन।
- लगान: नई जमाबंदी बनने के बाद हर साल bhulagan.bihar.gov.in पर ऑनलाइन लगान भरें और रसीद रखें — यह आपके कब्ज़े का रोज़ का सबूत है।
- SMS अलर्ट: बिहार भूमि पर अपने खेसरा पर SMS अलर्ट चालू करें, ताकि उस पर दाखिल-खारिज जैसा कोई बदलाव होने से पहले आपको सूचना मिले।
- मौक़े पर कब्ज़ा: खाली प्लॉट पर चहारदीवारी और अपने नाम का बोर्ड लगवाएँ, और कोई भरोसेमंद व्यक्ति कुछ महीनों में चक्कर लगाता रहे।
- भारतीय रिज़र्व बैंक — "Purchase of Immovable Property" FAQ (6 अप्रैल 2023 तक अद्यतन), भाग II, प्रश्न 1, 2 और 7 — rbi.org.in; RBI मास्टर डायरेक्शन (अचल संपत्ति का अधिग्रहण और हस्तांतरण) — rbi.org.in; OCI पर स्पष्टीकरण, RBI प्रेस रिलीज़ 29.12.2021
- आयकर विभाग — Form 141 FAQ (Schedule B: धारा 393(1) तालिका क्रम 3(i); Schedule E: धारा 393(2), 1 अक्टूबर 2026 से; 30 दिन; PAN लॉगिन) — incometax.gov.in; आयकर अधिनियम, 2025 (वित्त अधिनियम 2026 से संशोधित), धारा 393 — 1%, ₹50 लाख, खेती की ज़मीन छोड़कर
- रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 — धारा 32 (दस्तावेज़ कौन पेश कर सकता है, पावर ऑफ़ अटॉर्नी वाला एजेंट भी), धारा 33(1)(a) और (c) (पावर ऑफ़ अटॉर्नी का प्रमाणन) — indiacode.nic.in
- भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 — धारा 18 (भारत के बाहर बने दस्तावेज़, 3 महीने) — indiacode.nic.in
- "Table of Stamp Duty & Registration Fee", मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, बिहार — पेज 7, क्रम 43 (पावर ऑफ़ अटॉर्नी, अनुच्छेद 48(a) और 48(b)) — nibandhan.bihar.gov.in
- enibandhan.bihar.gov.in — सेवाएँ: Certified Copy, Encumbrance Certificate, View Prohibited Properties; हेल्पडेस्क 14544
- सभी स्रोत 14.10.2026 को जाँचे गए।
आपको क्या करना चाहिए? (हमारी सलाह)
- बिचौलिये के भरोसे नहीं, सरकारी पोर्टल के भरोसे: जमाबंदी, रोक-सूची, केवाले की कॉपी और RERA — सब ख़ुद देखें।
- NRI हैं तो पहले ज़मीन का प्रकार: खेती की ज़मीन है तो वहीं रुकें और सलाह लें।
- पैसा सिर्फ़ बैंक से, विक्रेता के अपने खाते में — कभी नक़द या किसी तीसरे के खाते में नहीं।
- रजिस्ट्री के लिए ख़ुद आएँ — न आ सकें तो सिर्फ़ इसी प्रॉपर्टी के लिए, परिवार के सदस्य को, धारा 33 के तरीक़े से बनी पावर ऑफ़ अटॉर्नी दें, और रजिस्ट्री ऑफिस से पहले पुष्टि करें।
- ₹50 लाख या ज़्यादा का सौदा है तो TDS का हिसाब पहली किस्त से पहले कर लें। प्लॉट की पूरी जाँच-सूची हमारी पटना में प्लॉट ख़रीदने की पूरी गाइड में है।
बाहर रहकर पटना में प्रॉपर्टी ख़रीदने से जुड़े सवाल-जवाब
- क्या NRI बिहार में ज़मीन ख़रीद सकता है?
हाँ, NRI और OCI पटना/बिहार में मकान, फ़्लैट, प्लॉट और कमर्शियल प्रॉपर्टी ख़रीद सकते हैं, इसके लिए RBI की अलग अनुमति नहीं चाहिए। पर खेती की ज़मीन, फ़ार्म हाउस और प्लांटेशन NRI/OCI ख़रीद से नहीं ले सकते।
- दूसरे राज्य में रहकर पटना में प्लॉट ख़रीद सकते हैं?
हाँ। भारत के नागरिक के लिए नियम वही हैं जो पटना में रहने वाले के लिए। कागज़ ऑनलाइन जाँचें, मौक़े पर किसी भरोसेमंद व्यक्ति से कब्ज़ा और नाप देखवाएँ, और रजिस्ट्री के दिन ख़ुद आएँ या पावर ऑफ़ अटॉर्नी दें।
- पावर ऑफ़ अटॉर्नी से बिहार में रजिस्ट्री हो सकती है?
हाँ, रजिस्ट्रेशन अधिनियम की धारा 32 और 33 के तहत एजेंट पावर ऑफ़ अटॉर्नी से दस्तावेज़ पेश कर सकता है, अगर पावर ऑफ़ अटॉर्नी सही अधिकारी के सामने बनी और प्रमाणित हो — भारत में आपके इलाक़े के सब-रजिस्ट्रार, विदेश में नोटरी या भारतीय कॉन्सल। आपकी ग़ैरमौजूदगी में ऑफिस क्या-क्या माँगेगा, यह रजिस्ट्री ऑफिस से पहले पूछ लें।
- बिहार में पावर ऑफ़ अटॉर्नी पर कितनी स्टांप ड्यूटी लगती है?
सरकारी तालिका के अनुसार बिहार की संपत्ति बेचने के लिए परिवार के सदस्य को ₹1,000, परिवार से बाहर के व्यक्ति को MVR वाली क़ीमत का 6%। बेचने के अधिकार के बिना (जैसे सिर्फ़ ख़रीद/रजिस्ट्री के लिए) ₹1,000।
- NRI पटना की प्रॉपर्टी का भुगतान कैसे करे?
बैंकिंग चैनल से — विदेश से भेजा पैसा या NRE, FCNR(B), NRO खाते से। ट्रैवलर्स चेक या विदेशी नोट से भुगतान नहीं हो सकता।
- प्रॉपर्टी ख़रीदने पर 1% TDS कब काटना पड़ता है?
जब खेती की ज़मीन को छोड़कर किसी प्रॉपर्टी की क़ीमत या स्टांप ड्यूटी वाला मूल्य ₹50 लाख या ज़्यादा हो और विक्रेता भारत का निवासी हो। ख़रीदार 1% काटकर Form 141 से जमा करता है। विक्रेता NRI हो तो अलग नियम (धारा 393(2)) लागू होता है।
- रजिस्ट्री के बाद बाहर रहकर दाखिल-खारिज कैसे कराएँ?
दाखिल-खारिज का आवेदन बिहार भूमि पोर्टल पर ऑनलाइन होता है, इसकी कोई सरकारी फ़ीस नहीं है। रजिस्ट्री के 90 दिन के भीतर आवेदन करें, और खेसरा पर SMS अलर्ट चालू कर लें।
यह लेख 14 अक्टूबर 2026 तक RBI, आयकर विभाग, रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1908, भारतीय स्टांप अधिनियम 1899 और बिहार निबंधन विभाग की प्रकाशित जानकारी पर आधारित है। यह क़ानूनी या टैक्स सलाह नहीं है — बड़ा भुगतान करने से पहले अपने कागज़ और टैक्स किसी जानकार से जाँच करवाएँ।