पटना में प्रॉपर्टी ख़रीद रहे हैं? ₹5,000 की स्वतंत्र जाँच कराए बिना ₹50 लाख मत दीजिए। हम रजिस्ट्री, भार-मुक्त प्रमाण पत्र, जमाबंदी / खतियान, कोर्ट रिकॉर्ड और RERA — सब असली दफ़्तर में जाकर जाँचते हैं। 48 घंटे में PDF रिपोर्ट।
पटना में ज़मीन के रिकॉर्ड की बिहार वाली अपनी उलझनें हैं। ये लोकल ख़तरे बिहार ई-निबंधन या आम ऑनलाइन पोर्टल पर नहीं दिखते — सिर्फ़ अंचल ऑफ़िस और रजिस्ट्री ऑफ़िस में जाकर सामने आते हैं।
आप कागज़ ख़ुद भी जाँच सकते हैं। यहाँ ईमानदारी से देखिए कि पटना में बिना जानकार के आपको असल में क्या मिलता है — और क्या छूट जाता है।
हर वेरिफिकेशन में पटना के रजिस्ट्री ऑफ़िस, अंचल ऑफ़िस और कोर्ट रिकॉर्ड में जाकर कागज़ों की जाँच होती है। आपको किसी दफ़्तर नहीं जाना। हम जाते हैं, सब लिखते हैं, और आपको PDF देते हैं।
सेल डीड पटना रजिस्ट्री ऑफ़िस में जाँची जाती है और बिहार ई-निबंधन पोर्टल से मिलाई जाती है। हम 30 साल पीछे तक मालिकाना हक़ देखते हैं — पटना में प्रॉपर्टी विवाद की सबसे बड़ी वजह पुश्तैनी प्रॉपर्टी में टूटी हुई टाइटल चेन है।
रजिस्ट्री ऑफ़िस से निकाला गया 30 साल का भार-मुक्त प्रमाण पत्र प्रॉपर्टी पर कोई भी छुपा बैंक लोन, गिरवी या रजिस्टर्ड क़ानूनी दावा दिखा देता है — इस जाँच के बिना यह नहीं दिखता। पुरानी पुश्तैनी प्रॉपर्टी के लिए बहुत ज़रूरी।
राजस्व रिकॉर्ड संबंधित अंचल ऑफ़िस में मिलाए जाते हैं। हम पक्का करते हैं कि दाखिल-खारिज मौजूदा बेचने वाले के नाम हो चुका है। ज़रूरत हो तो LPC (भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र) भी जाँचते हैं।
चल रहे केस, बँटवारे के मुक़दमे और पारिवारिक झगड़े पटना सिविल कोर्ट और पटना हाई कोर्ट में जाँचे जाते हैं। पुश्तैनी प्रॉपर्टी के झगड़े वाले बेचने वाले चल रहे केस शायद ही बताते हैं — हम ढूँढ निकालते हैं।
पटना में बिल्डर प्रोजेक्ट के लिए हम बिल्डिंग प्लान की मंज़ूरी और RERA रजिस्ट्रेशन आधिकारिक RERA बिहार पोर्टल पर जाँचते हैं — शिकायतों का इतिहास और पूरा होने की समय-सीमा भी। होर्डिंग पर लिखा RERA नंबर अकेले कोई सबूत नहीं है।
बिहार के लिए ख़ास जाँच — गैर मजरुआ (सरकारी) ज़मीन, भूदान ज़मीन और वक़्फ़ या ट्रस्ट रजिस्ट्रेशन। इन श्रेणियों की ज़मीन निजी तौर पर बेची ही नहीं जा सकती — ऐसी धोखे वाली बिक्री शुरू से ही शून्य (void) होती है और आपका पूरा पैसा ख़तरे में पड़ जाता है।
हम रजिस्ट्री ऑफ़िस में इंडेक्स रजिस्टर का हाथ से मुआयना करते हैं ताकि मालिकाना हक़ का पूरा इतिहास निकले। चेन डीड की हर कड़ी — असली मालिक से मौजूदा बेचने वाले तक — जाँची जाती है कि वो क़ानूनी तरीके से बनी, स्टांप लगी और रजिस्टर्ड है।
हम देखते हैं कि प्लॉट गंगा या पुनपुन के पास किसी नीचे या बाढ़ वाले इलाके में तो नहीं, और रिकॉर्ड में ज़मीन का इस्तेमाल वही है या नहीं जो आप चाहते हैं — रिहायशी या कमर्शियल।
प्रॉपर्टी के खसरा और गाटा नंबर पर राजस्व अदालतों में पूरी खोज, ताकि पक्का हो कि कोई वाद-विवाद (चल रहा केस) नहीं है। हम स्टे ऑर्डर, पारिवारिक बँटवारे के मुक़दमे और सीलिंग विवाद भी देखते हैं जो आम रजिस्ट्री पोर्टल पर नहीं दिखते।
ऊपर की हर जाँच के लिए मौके पर जाना और लोकल जानकारी चाहिए। हम आपके लिए यह सब 48 घंटे में करते हैं।
₹5,000 वाली फ़ीस देखें →पटना में प्रॉपर्टी फ़्रॉड छह तरीकों से होता है। जानकार की जाँच इन छहों को पकड़ लेती है — बयाना देने से पहले, बाद में नहीं।
गैर मजरुआ, भूदान या वक़्फ़ की ज़मीन निजी बताकर बेची जाती है। ऐसी बिक्री क़ानूनन शून्य होती है — आपका पूरा पैसा डूब जाता है और वापस नहीं मिलता।
एक वारिस भाई-बहनों या परिवार की मंज़ूरी के बिना बेच देता है। पटना के आसपास बिना बँटी पुश्तैनी ज़मीन में यह आम है। इससे दशकों तक केस चलते हैं।
चल रहे बँटवारे के मुक़दमे या प्रॉपर्टी विवाद जो बेचने वाले ने कभी बताए ही नहीं। साइन करते ही वो केस सालों तक लड़ने वाली आपकी परेशानी बन जाता है।
प्लॉट किसी नीचे, बाढ़ वाले इलाके में है या उसकी ज़मीन के इस्तेमाल में मकान बनाने की इजाज़त नहीं। ख़रीदारों को यह पैसे देने के बाद ही पता चलता है।
प्रॉपर्टी पर रजिस्टर्ड बैंक लोन या क़ानूनी दावे — रजिस्ट्री ऑफ़िस से 30 साल के भार-मुक्त प्रमाण पत्र के बिना नहीं दिखते।
नकली कागज़, ख़ासकर Bihta, Danapur और Bypass Road जैसे तेज़ी से बढ़ते इलाकों में। असली है या नहीं, यह सिर्फ़ रजिस्ट्री ऑफ़िस में जाकर जाँचने से पक्का होता है।
पहले WhatsApp मैसेज से PDF रिपोर्ट तक। हर स्टेप साफ़। आपको पटना आने की ज़रूरत नहीं — मौके पर सब हम सँभालते हैं।
प्रॉपर्टी का पता और बेचने वाले का नाम WhatsApp पर भेजिए। हम 2 घंटे में बिहार ई-निबंधन पर मुफ़्त शुरुआती जाँच करते हैं और ईमानदारी से बताते हैं कि पूरा वेरिफिकेशन कराना ठीक है या नहीं।
सेल डीड, रजिस्ट्री की कॉपी, जमाबंदी / खतियान, RERA नंबर — जो भी आपके पास हो। शुरू करने के लिए सिर्फ़ प्रॉपर्टी का पता और बेचने वाले का नाम भी काफ़ी है।
रिहायशी प्लॉट और फ़्लैट के लिए ₹5,000, कमर्शियल के लिए ₹7,000, साइट विज़िट वाले प्रीमियम के लिए ₹10,000। UPI या बैंक ट्रांसफ़र। रसीद (इनवॉइस) मिलती है।
हमारी टीम रजिस्ट्री ऑफ़िस, अंचल ऑफ़िस, प्लानिंग अथॉरिटी के रिकॉर्ड और कोर्ट रिकॉर्ड में जाकर कागज़ जाँचती है, और सरकारी / ट्रस्ट ज़मीन की श्रेणी भी देखती है — सिर्फ़ ऑनलाइन पोर्टल नहीं।
हर जाँच, हर ख़तरे का संकेत लिखा हुआ, और साफ़ आख़िरी फ़ैसला: "ख़रीदना सुरक्षित है" या "आगे न बढ़ें।" 48 घंटे में।
पटना के हर ख़रीदार को क्या मिलता है, उसका एक नमूना — साफ़, सबूत के साथ कागज़, जो झगड़ा होने पर आप दिखा सकते हैं।
प्लॉट XX/XX, नमूना इलाका, पटना · नमूना तारीख़ · सिर्फ़ समझाने के लिए
तय फ़ीस। हर कागज़ का अलग चार्ज नहीं। कोई छुपा ख़र्च नहीं। पेमेंट के बाद रसीद (इनवॉइस) मिलती है।
पटना शहर और पूरे ज़िले में प्रॉपर्टी वेरिफिकेशन। किसी इलाके, दूरी या ज़ोन का कोई अलग चार्ज नहीं।
प्रॉपर्टी का पता और बेचने वाले का नाम WhatsApp पर भेजिए। हम बुनियादी जाँच करते हैं — मुफ़्त, 2 घंटे में — और ईमानदारी से बताते हैं कि ₹5,000 वाला पूरा वेरिफिकेशन कराना ठीक है या नहीं।