रजिस्ट्री के ख़ास मामले बिहार: घर पर रजिस्ट्री, ई-स्टांप रिफ़ंड, केवाले में सुधार
सीधा जवाब
बिहार में रजिस्ट्री की तीन मुश्किलों के अलग नियम हैं: उम्र, बेकार गया ई-स्टांप, और केवाले में ग़लती।
- बेचने वाले की उम्र 75+: अधिकारी घर आ सकता है, ₹1,000 फ़ीस पर।
- बिना इस्तेमाल का ई-स्टांप: 1 साल के भीतर रिफ़ंड माँगें; 10% कटता है (₹200 से ₹5,000)।
- केवाले में ग़लती: सुधार का केवाला। छोटी ग़लती सस्ती; क़ीमत या रकबा बदलना नए केवाले जितना महँगा।
75 साल से ज़्यादा उम्र या बीमार हों तो घर पर रजिस्ट्री
आम तौर पर बेचने वाले को रजिस्ट्री ऑफ़िस आना होता है। पर बिहार की 2026 की नियमावली में 75 साल या ज़्यादा उम्र वाले को शारीरिक रूप से कमज़ोर व्यक्ति माना गया है। इसलिए अधिकारी उनके पास आ सकता है।
| किसके लिए | सरकारी फ़ीस |
|---|---|
| 75 साल या ज़्यादा उम्र वाले | ₹1,000 |
| बीमारी या कमज़ोरी से न आ सकने वाले, जेल में बंद लोग, और जिन्हें क़ानूनन कोर्ट में हाज़िर होने से छूट है | ₹5,000 |
| किसी के भी घर जाकर अधिकारी का रजिस्ट्री के लिए केवाला लेना | ₹15,000 |
यह फ़ीस स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री फ़ीस (निबंधन शुल्क) के ऊपर है। स्रोत: बिहार रजिस्ट्री नियमावली (निबंधन नियमावली) 2026 का फ़ीस परिशिष्ट, 5 अगस्त 2026 के बदलाव के साथ।
यह कैसे होता है
- अधिकारी ख़ुद आता है, या अपने किसी वेतनभोगी कर्मचारी को "कमीशन" पर भेजता है।
- घर पर केवाला करने वाले की फ़ोटो और अँगूठा/आँख की पुतली ली जाती है।
- वह व्यक्ति किसी दूसरे उप-ज़िले में रहता है, तो कमीशन वहाँ के रजिस्ट्री अधिकारी (निबंधन पदाधिकारी) को जाता है।
- इसके बाद उसी ऑनलाइन सिस्टम से रजिस्ट्री तुरंत हो जाती है।
- रजिस्ट्री ऑफ़िसों में मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट भी बन सकती हैं। ये पहले फ़ीस भरने पर घर या बताई गई जगह पर रजिस्ट्री करती हैं।
2026 की मूल नियमावली में यह उम्र 80 साल थी। 5 अगस्त 2026 के बदलाव ने इसे 75 कर दिया। आवेदन कैसे करें, यह अपने रजिस्ट्री ऑफ़िस (अवर निबंधन कार्यालय) से पूछें, और तारीख़ से पहले बुक कर लें।
ई-स्टांप ख़रीद लिया पर रजिस्ट्री नहीं हुई: पैसा वापस मिलेगा?
हाँ, कुछ कटौती के साथ। बिहार ई-स्टांप नियमावली 2026 में "ख़राब", "ग़लत इस्तेमाल" या "अब ज़रूरत नहीं" वाले ई-स्टांप सर्टिफ़िकेट या ई-स्टांप कोड का रिफ़ंड मिलता है।
- ऑनलाइन आवेदन ई-रजिस्ट्रेशन सिस्टम से फ़ॉर्म-E में करें, ई-स्टांप सर्टिफ़िकेट के साथ।
- समय पर आवेदन: कलेक्टर / प्रमंडलीय AIG को, ई-स्टांप जारी होने की तारीख़ से एक साल के भीतर।
- जाँच: कलेक्टर सर्विस प्रोवाइडर से हलफ़नामा लेते हैं। उसमें ई-स्टांप असली होने, चालान का ब्योरा और किसी रजिस्ट्री में इस्तेमाल न होने की बात होती है।
- रिफ़ंड: स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्री फ़ीस और बाक़ी फ़ीस, हर मद का पैसा अलग-अलग लौटता है, जमा रक़म का 10% काटकर (कम से कम ₹200, ज़्यादा से ज़्यादा ₹5,000)।
मंज़ूरी के आदेश के बाद रजिस्ट्री ऑफ़िस का भुगतान अधिकारी पैसा देता है। रिफ़ंड का आवेदन लेने का अधिकार किसी रजिस्ट्री अधिकारी को भी दिया जा सकता है।
उदाहरण: आपने ₹40 लाख के प्लॉट के लिए ₹2,80,000 का ई-स्टांप लिया और सौदा टूट गया। 10% यानी ₹28,000 बनता, पर अधिकतम सीमा ₹5,000 है। तो स्टांप ड्यूटी के ₹2,75,000 वापस मिलेंगे। फिर भी, सौदा पक्का होने से पहले ई-स्टांप न ख़रीदें।
सौदा नहीं टूटा, छपाई में ग़लती है? छपा ई-स्टांप सर्टिफ़िकेट कुछ लिखे जाने से पहले ख़राब हो जाए, तो सर्विस प्रोवाइडर नया जारी कर सकता है। इसके लिए फ़ॉर्म-D में आवेदन और रजिस्ट्री अधिकारी की लिखित अनुमति चाहिए।
स्रोत: बिहार ई-स्टांप नियमावली 2026 (गजट सं. 606)।
रजिस्टर्ड केवाले में ग़लती मिली?
रजिस्टर्ड केवाले की ग़लती सुधार के केवाले (rectification deed) से ठीक होती है। यह बाद में रजिस्टर होने वाला एक पूरक दस्तावेज़ है। नियमावली दो तरह के बदलाव में साफ़ फ़र्क़ करती है:
| किस तरह की | उदाहरण | खर्च |
|---|---|---|
| छोटी ग़लती | नाम की छोटी स्पेलिंग ग़लती, जिससे नाम पूरा न बदले; खाता नंबर, खेसरा नंबर (चौहद्दी न बदले तो), तौज़ी नंबर, जमाबंदी नंबर, क्रम या डीड नंबर, या पिछले केवाले के साल/तारीख़ में टाइपिंग की ग़लती | नए केवाले वाली ड्यूटी सिर्फ़ बड़े बदलाव पर है। छोटे सुधार की फ़ीस ऑफ़िस से पूछें। |
| बड़ा बदलाव | पक्षकार बदलना या जोड़ना; चौहद्दी, लोकेशन या रकबा बदलना; केवाले की तारीख़ या क़ीमत बदलना | नए केवाले जितनी स्टांप ड्यूटी और फ़ीस, सुधार वाले केवाले की तारीख़ की MVR पर |
- सुधार का केवाला अपने-आप कोई हक़ नहीं बनाता या देता। वह सिर्फ़ पुराने केवाले को ठीक करता है।
- रजिस्ट्री अधिकारी सुधार की जाँच करता है और उसकी ज़िम्मेदारी लेता है।
- फिर अधिकारी सुधार का सार रजिस्ट्री के रिकॉर्ड पर लिखता है। अगर आप असली केवाला लाएँ, तो उस पर भी लिखा जाता है।
क्यों ज़रूरी है: ₹40 लाख के प्लॉट में क़ीमत या रकबा बदलने का मतलब है आज की MVR पर पूरी ड्यूटी और फ़ीस दोबारा। e-Sign से पहले प्रीव्यू को जमाबंदी, खतियान और आधार से मिलाना सबसे सस्ता बचाव है।
स्रोत: बिहार रजिस्ट्री नियमावली 2026, पूरक दस्तावेज़।
आपको क्या करना चाहिए? (हमारी सलाह)
- बेचने वाले की उम्र 75+? उन्हें ऑफ़िस लाने की जगह ₹1,000 वाली घर पर रजिस्ट्री पहले से बुक करें।
- ई-स्टांप सबसे आख़िर में ख़रीदें, जब क़ीमत, कागज़ और रजिस्ट्री की तारीख़ सब पक्की हो।
- सौदा टूट गया? तुरंत रिफ़ंड माँगें। एक साल की सीमा ई-स्टांप जारी होने की तारीख़ से गिनी जाती है।
- e-Sign से पहले ड्राफ़्ट एक-एक लाइन पढ़ें। ग़लत क़ीमत या रकबा बाद में नए केवाले जितना महँगा पड़ता है।
- छोटी ग़लती मिली? दाखिल-खारिज के आवेदन से पहले सुधार का केवाला करा लें, ताकि रिकॉर्ड मेल खाएँ।
रजिस्ट्री के ख़ास मामले: सवाल-जवाब
- मेरे पिता 78 साल के हैं और दूसरे ज़िले में रहते हैं। क्या घर से रजिस्ट्री हो सकती है?
हाँ। 75 या ज़्यादा उम्र पर वे शारीरिक रूप से कमज़ोर व्यक्ति माने जाते हैं। वे दूसरे उप-ज़िले में रहते हैं, तो कमीशन वहाँ के रजिस्ट्री अधिकारी को जाता है। वहीं उनकी फ़ोटो और बायोमेट्रिक ली जाती है।
- क्या 10% कटौती पूरे ई-स्टांप की रक़म पर होती है?
नियम के अनुसार हर मद (स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्री फ़ीस, बाक़ी फ़ीस) का पैसा अलग-अलग लौटता है, जमा रक़म का 10% काटकर। कटौती कम से कम ₹200 और ज़्यादा से ज़्यादा ₹5,000 है।
- केवाले में पिता के नाम की स्पेलिंग ग़लत है। क्या सुधर सकती है?
हाँ, सुधार के केवाले से। छोटी स्पेलिंग ग़लती, जिससे नाम पूरा न बदले, छोटा सुधार है। नाम बदलना या नया पक्षकार जोड़ना बड़ा बदलाव है, और उस पर नए केवाले जितना खर्च आता है।
- क्या सुधार का केवाला ज़मीन में किसी को नया हक़ देता है?
नहीं। वह सिर्फ़ पुराने केवाले को ठीक करता है। वह कोई हक़ नहीं बनाता, देता, घटाता या ख़त्म करता, और स्टांप क़ानून में नया दस्तावेज़ नहीं माना जाता।
स्रोत (Sources)
- बिहार निबंधन नियमावली, 2026 (S.O. IV/M1-1-02/2026-4219, 11 जुलाई 2026), बिहार गजट (असाधारण) सं. 759, 13 जुलाई 2026: नियम 23 (ऑफ़िस के बाहर रजिस्ट्री, मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट), नियम 27 (सुधार का केवाला), परिशिष्ट-E (फ़ीस K(1)(a), K(1)(b), J(1)) — PDF
- बिहार निबंधन (संशोधन) नियमावली, 2026 (सं. IV/M1-1-02/2026/4871, 5 अगस्त 2026), बिहार गजट (असाधारण) सं. 942, 6 अगस्त 2026: नियम 23(5) और परिशिष्ट-E क्रम 01 में 80 की जगह 75 साल — PDF
- बिहार स्टांप (सर्विस प्रोवाइडर लाइसेंस और ई-स्टांप आपूर्ति) नियमावली, 2026, बिहार गजट (असाधारण) सं. 606, 11 जून 2026: नियम 16 (सुधार, फ़ॉर्म-D), नियम 17 (रिफ़ंड, फ़ॉर्म-E, एक साल, 10% / ₹200–₹5,000) — PDF
- रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908: धारा 31, 33, 38
यह जानकारी सरकारी स्रोतों से 28 अक्टूबर 2026 को जाँची गई है। नियम बदलते रहते हैं, पैसा देने से पहले रजिस्ट्री या अंचल ऑफ़िस से पक्का कर लें।