Home About Articles
#पटना #मास्टर प्लान #ग्रीन बेल्ट #अर्बन एग्रीकल्चर ज़ोन #कंज़र्वेशन ज़ोन #नक्शा पास

Patna Green Belt Me Ghar Ban Sakta Hai? मास्टर प्लान 2031 के ज़ोन नियम

🇬🇧 Read in English
WhatsApp

सीधा जवाब: पटना में जिसे लोग "ग्रीन बेल्ट" कहते हैं, वह मास्टर प्लान 2031 के नक्शे पर हरे रंग वाले ज़ोन हैं, ख़ासकर अर्बन एग्रीकल्चर ज़ोन और कंज़र्वेशन (संरक्षण) ज़ोन। अर्बन एग्रीकल्चर ज़ोन में घर बन सकता है, पर कड़ी शर्तों के साथ: ज़मीन लीज़ वाली न हो, मकान प्लॉट के 20% से ज़्यादा हिस्से पर न हो, ऊँचाई 7 मीटर तक हो और कम से कम 60% ज़मीन पर पेड़-पौधे या खेती हो। कंज़र्वेशन ज़ोन में प्लॉटिंग वाले मकान मना हैं; वहाँ खेती करने वालों के मकान की अनुमति है। गाँव की बसावट के चारों ओर 100 मीटर की पट्टी इन दोनों से अलग है, वहाँ आम मकान बन सकता है।

पटना के बाहरी इलाक़ों (बिहटा, नौबतपुर, फुलवारी, संपतचक, पुनपुन, फतुहा) में सस्ते प्लॉट बेचते समय अक्सर यह बात छुपा ली जाती है कि ज़मीन ग्रीन बेल्ट में है। ख़रीदार को पता तब चलता है जब नक्शा पास नहीं होता। इस लेख में हम पटना मास्टर प्लान 2031 की रिपोर्ट और उसके नियमों (DCR) से बताएँगे कि हर हरे ज़ोन में क्या बन सकता है, 2–5 कट्ठे के प्लॉट पर असल में कितना मकान बनेगा, और ख़रीदने से पहले ज़ोन कैसे जाँचें। पूरे मास्टर प्लान की आसान जानकारी हमारे मुख्य लेख में है: पटना मास्टर प्लान 2031 आसान भाषा में।

पटना में "ग्रीन बेल्ट" किसे कहते हैं? क्या मास्टर प्लान में ऐसा कोई ज़ोन है?

मास्टर प्लान में "ग्रीन बेल्ट" नाम का कोई अलग ज़ोन नहीं है। DCR के नियम 27 में पटना प्लानिंग एरिया के ज़ोन गिनाए गए हैं: आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, सार्वजनिक/अर्ध-सार्वजनिक, ओपन स्पेस, पुराना शहर, अर्बन सेंटर, ग्राम बसावट, अर्बन एग्रीकल्चर, कंज़र्वेशन, जल निकाय, स्पेशल रिज़र्वेशन और परिवहन। "Green belts" शब्द सिर्फ़ ओपन स्पेस ज़ोन में अनुमत उपयोगों की सूची में आता है।

बोलचाल में "ग्रीन बेल्ट" इसलिए कहा जाता है क्योंकि मास्टर प्लान के भूमि-उपयोग नक्शे पर ये ज़ोन हरे रंग में हैं। रिपोर्ट ख़ुद इन्हें "Green cover (Forest, Bio Conservation, Urban Agriculture)" कहती है, जो लगभग 525.97 वर्ग किमी है। इसमें अर्बन एग्रीकल्चर ज़ोन लगभग 134.06 वर्ग किमी का है। पूरा प्लानिंग एरिया 1,167.04 वर्ग किमी का है और उसका लगभग आधा (49.89%) विकास के लिए नहीं रखा गया है।

पटना मास्टर प्लान 2031 का प्रस्तावित भूमि-उपयोग नक्शा, हरे रंग में अर्बन एग्रीकल्चर और कंज़र्वेशन ज़ोन (ग्रीन बेल्ट)
पटना मास्टर प्लान 2031 का प्रस्तावित भूमि-उपयोग नक्शा (Map 21, रिपोर्ट पृ. 67)। दाईं तरफ़ के लेजेंड में: नारंगी = आवासीय, मध्यम हरा = Urban Agriculture, बहुत हल्का हरा = Conservation, जैतूनी हरा = Bio-Conservation, गहरा हरा = Forest। यह 1:50,000 पैमाने का नक्शा है; किसी एक खेत का ज़ोन इससे पक्का नहीं होता।

पटना के ग्रीन बेल्ट वाले ज़ोन कौन-कौन से हैं और कहाँ हैं?

ज़ोनकहाँ हैFARघर बन सकता है?
अर्बन एग्रीकल्चरशहर के मुख्य हिस्से (कोर एरिया) और बिहटा, नौबतपुर, फतुहा की प्रस्तावित टाउनशिप (ग्रोथ नोड्स) के चारों ओर की पट्टी0.75हाँ, शर्तों के साथ: 20% कवरेज, 7 मीटर ऊँचाई, 60% ज़मीन पर पेड़/खेती, लीज़ की ज़मीन नहीं
कंज़र्वेशन (संरक्षण)अर्बन एग्रीकल्चर के बाहर, बाक़ी लगभग पूरा ग्रामीण इलाक़ा0.50प्लॉटिंग वाले मकान मना। खेती करने वालों के मकान की अनुमति। बाक़ी आवास सिर्फ़ प्राधिकरण की विशेष अनुमति से, 2% कवरेज तक
बायो-कंज़र्वेशनगंगा के लैगून और पुनपुन नदी के किनारे का इलाक़ा—मकान के लिए नहीं रखा गया; रिवर फ़्रंट और सार्वजनिक मनोरंजन के लिए
ओपन स्पेस बफ़रनदी, नहर, तालाब के किनारे—नहीं; छोटे नाले/जलधारा से कम से कम 9 मीटर और बड़ी नहर से 15 मीटर तक कोई निर्माण नहीं
ग्राम बसावट + 100 मीटर पट्टी (हरा नहीं, पर इसी इलाक़े में)गाँव की बसावट और उसके बाहर 100 मीटर1हाँ, हर तरह के आवासीय भवन

FAR का मतलब है प्लॉट के क्षेत्रफल के मुक़ाबले सभी मंज़िलें मिलाकर कुल कितना निर्माण हो सकता है। FAR 0.75 पर 1 कट्ठा (लगभग 1,361 वर्ग फ़ुट) के प्लॉट पर कुल लगभग 1,021 वर्ग फ़ुट बन सकता है। पर ग्रीन बेल्ट में असली सीमा FAR नहीं, कवरेज और ऊँचाई की शर्तें हैं, जो नीचे उदाहरण में दिखेगा।

अर्बन एग्रीकल्चर ज़ोन में घर बनाने की शर्तें क्या हैं?

DCR के नियम 28(4) के अनुसार अर्बन एग्रीकल्चर ज़ोन में आवासीय और दूसरे भवन तभी बन सकते हैं जब ये सभी शर्तें पूरी हों (बाक़ी नियमों के साथ):

  1. ज़मीन लीज़होल्ड न हो, यानी पट्टे की नहीं, ख़ुद की (फ़्रीहोल्ड) हो।
  2. भवन का ग्राउंड कवरेज 20% से ज़्यादा न हो।
  3. भवन की ऊँचाई 7 मीटर से ज़्यादा न हो।
  4. कम से कम 60% ज़मीन पर पेड़-पौधे या खेती हो।

इस ज़ोन की तालिका (DCR Table 4) में "All types of Residential Buildings" अनुमत उपयोग में है, साथ में खेती, बाग़वानी, डेयरी-पोल्ट्री, फ़ार्म हाउस, खेती करने वालों के मकान, पार्क, खेल मैदान और खेत की उपज का भंडारण-प्रोसेसिंग। स्कूल, एग्रो-प्रोसेसिंग, कोल्ड स्टोरेज, गोदाम और "पहले से मौजूद घरेलू ज़मीन पर सामान्य विस्तार" जैसे काम सिर्फ़ प्राधिकरण की विशेष अनुमति से हो सकते हैं। भारी उद्योग, बूचड़खाना, थोक मंडी और ख़तरनाक सामान के गोदाम मना हैं।

बड़ी टाउनशिप: नियम 28(5) के अनुसार अर्बन एग्रीकल्चर ज़ोन में प्लान्ड टाउनशिप की अनुमति प्राधिकरण दे सकता है, पर बिहार शहरी आयोजना तथा विकास बोर्ड की मंज़ूरी के साथ। यानी अगर कोई बिल्डर ग्रीन बेल्ट में टाउनशिप बेच रहा है, तो उससे यह मंज़ूरी का कागज़ माँगिए। सिर्फ़ ज़मीन ख़रीदकर प्लॉट काट देना टाउनशिप नहीं है।

2 या 5 कट्ठे के प्लॉट पर ग्रीन बेल्ट में कितना बड़ा मकान बनेगा?

यह हिसाब पटना के 1 कट्ठा = लगभग 1,361 वर्ग फ़ुट के आधार पर है (अपनी डीड का रकबा देखें)। 7 मीटर की ऊँचाई में आम तौर पर ग्राउंड + 1 मंज़िल ही आती है।

प्लॉटकुल क्षेत्रफलग्राउंड फ़्लोर (20%)ग्राउंड + 1 मंज़िलपेड़/खेती (कम से कम 60%)
1 कट्ठा~1,361 वर्ग फ़ुट~272 वर्ग फ़ुट~544 वर्ग फ़ुट~817 वर्ग फ़ुट
2 कट्ठा~2,723 वर्ग फ़ुट~544 वर्ग फ़ुट~1,089 वर्ग फ़ुट~1,634 वर्ग फ़ुट
5 कट्ठा (~15.6 डिसमिल)~6,806 वर्ग फ़ुट~1,361 वर्ग फ़ुट~2,722 वर्ग फ़ुट~4,084 वर्ग फ़ुट
10 कट्ठा~13,613 वर्ग फ़ुट~2,722 वर्ग फ़ुट~5,445 वर्ग फ़ुट~8,168 वर्ग फ़ुट

मतलब: अर्बन एग्रीकल्चर ज़ोन में 1–2 कट्ठे का प्लॉट आम परिवार के मकान के लायक़ नहीं है। 1 कट्ठे पर ग्राउंड फ़्लोर सिर्फ़ लगभग 272 वर्ग फ़ुट, यानी एक बड़े कमरे जितना। यह ज़ोन बड़े प्लॉट पर फ़ार्म हाउस जैसे कम घने मकान के लिए बना है। अगर कोई ग्रीन बेल्ट की कॉलोनी में 1–2 कट्ठे के प्लॉट बेच रहा है और कह रहा है कि "आराम से तीन मंज़िल बन जाएगा", तो वह मास्टर प्लान के नियम से मेल नहीं खाता।

कंज़र्वेशन ज़ोन में ज़मीन है तो क्या घर बन सकता है?

कंज़र्वेशन ज़ोन पटना प्लानिंग एरिया का सबसे बड़ा ग्रामीण हिस्सा है, अर्बन एग्रीकल्चर पट्टी के बाहर। यहाँ नियम और सख़्त हैं (DCR Table 4, पृ. 274–275):

  • अनुमत: खेती, बाग़वानी, जंगल; खेती करने वालों के मकान और उससे जुड़े भवन (ग्रामीण बसावट); पहले से मौजूद मकान और बसे गाँव; बिना बिजली वाले एग्रो कुटीर उद्योग; दूध चिलिंग, अनाज गोदाम, खाद और उपज का भंडारण; पेट्रोल पंप; रिसॉर्ट, पिकनिक, रिवर फ़्रंट; गाँव की बसावट का विस्तार।
  • सिर्फ़ प्राधिकरण की विशेष अनुमति से: अपार्टमेंट/कॉर्पोरेट हाउसिंग, बड़े शिक्षण और शोध संस्थान, अस्पताल, और खेती से जुड़े मकानों के अलावा दूसरा आवासीय उपयोग, 2% ग्राउंड कवरेज की शर्त पर।
  • मना: प्लॉटिंग वाले मकान (plotted housing), छोटे उद्योग या छोटे संस्थान, और नदी/नहर/धारा और तटबंध के बीच किसी भी तरह का निर्माण।

2% कवरेज कितना कम है, इसे ऐसे समझिए: 1 एकड़ (लगभग 32 कट्ठा) पर भी ग्राउंड कवरेज सिर्फ़ लगभग 871 वर्ग फ़ुट; 2 कट्ठे पर लगभग 54 वर्ग फ़ुट। यानी कंज़र्वेशन ज़ोन में कॉलोनी काटकर बेचे गए छोटे प्लॉट पर क़ानूनी तरीक़े से मकान का रास्ता लगभग नहीं है।

गाँव के पास की 100 मीटर पट्टी का नियम क्या है?

यह नियम ग्रीन बेल्ट में ज़मीन रखने वालों के लिए सबसे काम का है। मास्टर प्लान (पृ. 71) के अनुसार कोर एरिया और ग्रोथ नोड्स के बाहर के हर गाँव की बसावट, जैसी राजस्व रिकॉर्ड (खसरा नक्शे) में दर्ज है, ग्राम बसावट ज़ोन है। साथ ही बसावट के बाहर 100 मीटर चौड़ी पट्टी भी इसी ज़ोन में मानी जाती है, ताकि गाँव स्वाभाविक रूप से बढ़ सके। यहाँ FAR 1 है।

रिपोर्ट साफ़ लिखती है: नक्शे पर भले यह पट्टी कंज़र्वेशन ज़ोन जैसी दिखे, इसे कंज़र्वेशन ज़ोन नहीं माना जाएगा। गाँव के अंदर हर तरह के आवासीय भवन, क्लिनिक, स्कूल, दुकान, धार्मिक स्थल, पारंपरिक घरेलू उद्योग वग़ैरह अनुमत हैं।

व्यावहारिक सलाह: अगर प्लॉट गाँव की बसावट से सटा है, तो भू-नक्शा पर बसावट की सीमा से प्लॉट की दूरी देखिए। 100 मीटर के अंदर होना ग्रीन बेल्ट के बीच के प्लॉट से बिल्कुल अलग स्थिति है। पर सीमा कहाँ से गिनी जाएगी, यह बड़े सौदे से पहले नक्शा पास करने वाले कार्यालय से लिखित में पक्का करें।

ग्रीन बेल्ट में पहले से बना मकान है तो क्या होगा?

DCR के नियम 27(2) और 28(9) के अनुसार मास्टर प्लान लागू होने से पहले जो उपयोग क़ानूनी तौर पर चल रहा था, वह जारी रह सकता है। पर जो उपयोग ज़ोन के नियम से मेल नहीं खाता (non-conforming), उसे बढ़ाया नहीं जा सकता। कंज़र्वेशन ज़ोन में "पहले से मौजूद आवासीय या दूसरे उपयोग" अनुमत सूची में हैं। अर्बन एग्रीकल्चर ज़ोन में मौजूदा घरेलू ज़मीन पर सामान्य विस्तार प्राधिकरण की विशेष अनुमति से हो सकता है।

ध्यान दें: यह छूट "क़ानूनी" उपयोग के लिए है। बिना नक्शा पास कराए बाद में बना मकान इस नियम से अपने-आप क़ानूनी नहीं हो जाता।

क्या ग्रीन बेल्ट की ज़मीन की रजिस्ट्री हो सकती है?

हाँ। मास्टर प्लान का ज़ोन ज़मीन की ख़रीद-बिक्री नहीं रोकता; उसके नियम निर्माण और विकास पर लागू होते हैं (DCR नियम 27: किसी भी प्लॉट का विकास उसके ज़ोन के अनुसार ही होगा)। इसीलिए ग्रीन बेल्ट के प्लॉट की रजिस्ट्री आराम से हो जाती है, और कई ख़रीदार इसी से मान लेते हैं कि घर भी बन जाएगा। रजिस्ट्री होना और नक्शा पास होना दो अलग बातें हैं। रजिस्ट्री की प्रक्रिया: पटना में रजिस्ट्री कैसे होती है।

अपवाद: पाटलिपुत्र ग्रीनफ़ील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के विशेष क्षेत्र (9 प्रखंडों के 273 गाँव) में ख़रीद-बिक्री पर रोक 1 अगस्त 2026 से हट चुकी है, पर विकास और निर्माण पर रोक 30.03.2027 तक है, और वहाँ PMP 2031 की जगह ड्राफ़्ट डेवलपमेंट प्लान 2047 आना है। देखें: पाटलिपुत्र टाउनशिप: रजिस्ट्री खुली, निर्माण पर रोक और 273 गाँवों की लिस्ट।

कन्वर्ज़न ख़त्म हो गया, तो क्या अब ग्रीन बेल्ट में भी घर बन जाएगा?

नहीं। 2026 में बिहार का ज़मीन कन्वर्ज़न (संपरिवर्तन) वाला क़ानून ख़त्म हुआ है, यानी खेती की ज़मीन पर घर के लिए SDO से कन्वर्ज़न की ज़रूरत नहीं रही। पर पटना प्लानिंग एरिया में घर बनेगा या नहीं, यह मास्टर प्लान का ज़ोन तय करता है, और ग्रीन बेल्ट के नियम जस के तस हैं। मास्टर प्लान (पृ. 150) के अनुसार ज़ोनल प्लान आने तक भूमि-उपयोग में बदलाव की अनुमति नहीं है। पूरी जानकारी: बिहार में लैंड कन्वर्ज़न ख़त्म: अब खेती की ज़मीन पर घर के नियम।

सरकारी प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार ज़ोन के नियमों में ढील दे सकती है (नियम 28(8)), पर यह छूट निजी प्लॉट के लिए नहीं है।

पटना में मेरी ज़मीन ग्रीन बेल्ट में है या नहीं, कैसे पता करें?

  1. गाँव पटना प्लानिंग एरिया में है या नहीं: खतियान/जमाबंदी में प्रखंड और मौज़ा का नाम देखें। 13 प्रखंडों के 575 गाँवों की जानकारी हमारे मास्टर प्लान वाले लेख में है।
  2. मास्टर प्लान रिपोर्ट का Map 21 देखें: रिपोर्ट PMAA की वेबसाइट पर मुफ़्त है। ऊपर बताए रंगों से अंदाज़ा लगाएँ कि आपका इलाक़ा नारंगी (आवासीय) में है या हरे में।
  3. खेसरा नक्शे से मिलान करें: भू-नक्शा पोर्टल से अपने खेसरा का नक्शा निकालें; गाँव की बसावट से दूरी भी यहीं दिखेगी।
  4. लिखित पुष्टि लें: सीमा के पास का प्लॉट हो या बड़ा सौदा, तो नक्शा पास करने वाले कार्यालय (नगर निकाय या पटना मेट्रोपॉलिटन एरिया अथॉरिटी) से ज़ोन लिखित में पक्का करें। विक्रेता या एजेंट की ज़ुबानी बात काफ़ी नहीं।
  5. बिल्डर की कॉलोनी हो तो: ले-आउट की मंज़ूरी, अर्बन एग्रीकल्चर ज़ोन में टाउनशिप हो तो नियम 28(5) वाली मंज़ूरी, और RERA रजिस्ट्रेशन के कागज़ माँगें।
आधिकारिक स्रोत
  • पटना मास्टर प्लान 2031 रिपोर्ट — टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ऑर्गनाइज़ेशन, नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार (अधिसूचना 831, दिनांक 28.10.2016 से लागू)। पृष्ठ (रिपोर्ट पर छपे नंबर): भूमि-उपयोग का हिसाब, ग्रीन कवर 525.97 वर्ग किमी, अर्बन एग्रीकल्चर ~134.06 वर्ग किमी — पृ. 66; प्रस्तावित भूमि-उपयोग नक्शा (Map 21) — पृ. 67; ग्राम बसावट, अर्बन एग्रीकल्चर, कंज़र्वेशन ज़ोन — पृ. 71; बायो-कंज़र्वेशन — पृ. 72; ज़ोनल प्लान तक भूमि-उपयोग में बदलाव नहीं — पृ. 150 — रिपोर्ट PDF (pmaa.bihar.gov.in)
  • पटना मास्टर प्लान 2031 डेवलपमेंट कंट्रोल रेगुलेशन (उसी रिपोर्ट में): नियम 27 (ज़ोन) — पृ. 260; Table 4 — ग्राम बसावट पृ. 263–264, ओपन स्पेस ज़ोन ("Green belts") पृ. 272, ओपन स्पेस बफ़र 9/15 मीटर पृ. 273, कंज़र्वेशन ज़ोन पृ. 274–275, अर्बन एग्रीकल्चर ज़ोन पृ. 276–278; नियम 28(4), 28(5) — पृ. 278–279; नियम 28(8), 28(9) — पृ. 279
  • पाटलिपुत्र टाउनशिप में निर्माण पर रोक: अधिसूचना 4655, दिनांक 24.04.2026; ख़रीद-बिक्री की रोक हटी: अधिसूचना 8024, दिनांक 01.08.2026 (नगर विकास एवं आवास विभाग)
  • बिहार गजट (नगर विकास विभाग) 18.10.2026 तक देखा: 2026 के बिहार भवन उपविधि संशोधन (गजट सं. 462, 07.05.2026) में ज़ोन के इन नियमों में कोई बदलाव नहीं; बिहार भवन उपविधि 2026 अभी ड्राफ़्ट है।

ग्रीन बेल्ट का प्लॉट लेने से पहले क्या करें? (हमारी सलाह)

  • ज़ोन पहले, दाम बाद में। ग्रीन बेल्ट का प्लॉट सस्ता इसलिए होता है क्योंकि वहाँ मकान की गुंजाइश कम है। आवासीय ज़ोन वाला दाम ग्रीन बेल्ट के प्लॉट पर न दें।
  • "नक्शा पास हो जाएगा, हम करवा देंगे" जैसी बात पर लिखित गारंटी या नियम का हवाला माँगें। ऊपर की शर्तें कोई एजेंट नहीं बदल सकता।
  • छोटे प्लॉट से बचें। अर्बन एग्रीकल्चर ज़ोन में 1–2 कट्ठे पर काम का मकान नहीं बनता; कंज़र्वेशन ज़ोन में प्लॉटिंग वाले मकान मना हैं।
  • गाँव से दूरी नापें। बसावट से 100 मीटर के अंदर का प्लॉट ग्राम बसावट ज़ोन में आ सकता है, जहाँ नियम आसान हैं।
  • नदी-नहर से दूरी देखें। नदी/नहर और तटबंध के बीच कोई निर्माण नहीं; छोटे नाले से 9 मीटर और बड़ी नहर से 15 मीटर बफ़र।
  • निवेश के लिए ले रहे हैं तो याद रखें: ज़ोन बदलने का कोई तय रास्ता या तारीख़ अभी नहीं है। ज़ोनल प्लान आने पर क्या बदलेगा, कोई पक्का नहीं कह सकता।
  • कागज़ भी पूरे हों। ज़ोन ठीक हो तब भी जमाबंदी, दाखिल-ख़ारिज और केवाले की चेन देखें: पटना में प्लॉट ख़रीदने की पूरी गाइड और ज़मीन फ़्रॉड से कैसे बचें।

पटना ग्रीन बेल्ट से जुड़े सवाल-जवाब

  1. पटना ग्रीन बेल्ट में घर बना सकते हैं?

    अर्बन एग्रीकल्चर ज़ोन में हाँ, शर्तों के साथ: ज़मीन लीज़ की न हो, ग्राउंड कवरेज 20% तक, ऊँचाई 7 मीटर तक और कम से कम 60% ज़मीन पर पेड़-पौधे या खेती। कंज़र्वेशन ज़ोन में प्लॉटिंग वाले मकान मना हैं; वहाँ खेती करने वालों के मकान की अनुमति है।

  2. ग्रीन बेल्ट में नक्शा पास होगा?

    तभी, जब मकान ज़ोन के नियमों के भीतर हो। अर्बन एग्रीकल्चर ज़ोन में 20% कवरेज और 7 मीटर ऊँचाई से बड़ा नक्शा नियम से मेल नहीं खाता। कंज़र्वेशन ज़ोन में आम प्लॉट पर मकान का नक्शा मिलना बहुत मुश्किल है, क्योंकि वहाँ प्लॉटिंग वाले मकान मना हैं।

  3. अर्बन एग्रीकल्चर ज़ोन में FAR कितना है?

    0.75। कंज़र्वेशन ज़ोन में 0.50 और गाँव की बसावट वाले ज़ोन में 1। पर अर्बन एग्रीकल्चर ज़ोन में असली सीमा 20% कवरेज और 7 मीटर ऊँचाई की है।

  4. गाँव के पास 100 मीटर का नियम क्या है?

    राजस्व नक्शे में दर्ज गाँव की बसावट के बाहर 100 मीटर की पट्टी ग्राम बसावट ज़ोन में मानी जाती है, भले मास्टर प्लान के नक्शे पर वह कंज़र्वेशन ज़ोन जैसी दिखे। यहाँ FAR 1 है और हर तरह के आवासीय भवन बन सकते हैं।

  5. ग्रीन बेल्ट की ज़मीन की रजिस्ट्री होती है?

    हाँ, मास्टर प्लान का ज़ोन रजिस्ट्री नहीं रोकता; उसके नियम निर्माण पर लागू होते हैं। इसलिए रजिस्ट्री हो जाना इस बात का सबूत नहीं है कि वहाँ घर बन सकता है। अपवाद: पाटलिपुत्र टाउनशिप के विशेष क्षेत्र में निर्माण पर 30.03.2027 तक रोक है।

  6. ग्रीन बेल्ट का ज़ोन बदल सकता है क्या?

    मास्टर प्लान के अनुसार ज़ोनल डेवलपमेंट प्लान आने तक भूमि-उपयोग में बदलाव की अनुमति नहीं है। ज़ोनल प्लान अभी ज़्यादातर ज़ोन के लिए अधिसूचित नहीं हुए हैं, इसलिए ज़ोन बदलने की उम्मीद पर प्लॉट न लें।

  7. कन्वर्ज़न ख़त्म होने के बाद क्या ग्रीन बेल्ट में घर बनाना आसान हो गया?

    नहीं। राजस्व कन्वर्ज़न ख़त्म हुआ है, पर पटना प्लानिंग एरिया में मास्टर प्लान के ज़ोन के नियम पहले की तरह लागू हैं। घर बनेगा या नहीं, यह ज़ोन और नक्शा पास तय करते हैं।

यह लेख 18 अक्टूबर 2026 को पटना मास्टर प्लान 2031 की आधिकारिक रिपोर्ट और उसके डेवलपमेंट कंट्रोल रेगुलेशन, पाटलिपुत्र टाउनशिप की अधिसूचनाओं (4655, 8024) और बिहार गजट (नगर विकास विभाग) को देखकर लिखा गया है। कट्ठे का हिसाब 1 कट्ठा ≈ 1,361 वर्ग फ़ुट पर है; अपनी डीड का रकबा देखें। मास्टर प्लान का नक्शा बड़े पैमाने का है; किसी एक प्लॉट का ज़ोन नक्शा पास करने वाले कार्यालय से पक्का करें। यह सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। बड़ा सौदा करने से पहले अपने कागज़ और ज़ोन किसी जानकार से जाँच करवाएँ।

किसी जानने वाले को पटना में ज़मीन, मकान या फ़्लैट लेना है? यह लेख उन्हें भेजिए।

WhatsApp पर भेजें
Disclaimer: The information on this website is shared for general awareness about property and real estate, collected from various reports and news sources. While we strive to provide accurate and updated details, we do not guarantee the completeness, accuracy, or reliability of the content. We are not responsible for any financial, legal, or property-related decisions made based on this information. For accurate details, please verify with the concerned authorities before proceeding.
P

PP Properties Team

Author · PP Properties

PP Properties पटना में ज़मीन और मकान ख़रीदने वालों को कागज़ और सरकारी योजनाओं की जाँच में मदद करता है। यह लेख पटना मास्टर प्लान 2031 की आधिकारिक रिपोर्ट और उसके डेवलपमेंट कंट्रोल रेगुलेशन (DCR) के आधार पर लिखा गया है।

Buy Property in Patna