Zameen Bechne Se Pehle Kagaz Thik Kare: पटना विक्रेता चेकलिस्ट
सीधा जवाब: पटना में ज़मीन बेचने से पहले यह पक्का करें कि ख़रीदार का दाखिल-खारिज हो सके। इसके लिए आपकी जमाबंदी ऑनलाइन होनी चाहिए, उसी खाता-खेसरा और पूरे रकबे के साथ जो केवाले में लिखा जाएगा। एंट्री छूटी या ग़लत है तो परिमार्जन प्लस से ठीक कराएँ। जमाबंदी अब भी गुज़र चुके माता-पिता के नाम है तो उत्तराधिकार दाखिल-खारिज कराएँ (मुफ़्त)। ज़मीन पूरे परिवार की है तो हर वारिस या तो केवाले में साथ बेचे, या रजिस्टर्ड बँटवारा या हक़-त्याग डीड दे। लगान और बंधक साफ़ करें। यह काम बेचने से 2-3 महीने पहले शुरू करें।
पटना में ज़्यादातर सौदे दाम पर नहीं, कागज़ पर टूटते हैं: ख़रीदार के वकील को जमाबंदी दादाजी के नाम मिलती है, या कोई बुआ जिनसे पूछा ही नहीं गया, या ऑनलाइन 8 डिसमिल जबकि केवाले में 10। बयाना देने के बाद ख़रीदार को यह पता चले तो वह या तो सौदा छोड़ता है या भारी छूट माँगता है। ख़रीदार ढूँढने से पहले यह ठीक कर लें, तो ज़मीन जल्दी और बेहतर दाम पर बिकती है।
ख़रीदार सबसे पहले आपकी जमाबंदी क्यों देखता है
सुप्रीम कोर्ट (समीउल्लाह बनाम बिहार राज्य, 7 नवंबर 2025) ने बिहार का वह नियम रद्द कर दिया जिससे जमाबंदी विक्रेता के नाम न होने पर रजिस्ट्री रोकी जा सकती थी। यानी रजिस्ट्री तो हो जाएगी। पर राजस्व विभाग के दाखिल-खारिज FAQ के अनुसार ख़रीदार का दाखिल-खारिज तभी आगे बढ़ेगा जब:
- विक्रेता (पिछले जमाबंदीदार) की जमाबंदी ऑनलाइन हो, और
- उसमें केवाले वाला ही खाता और खेसरा, पूरे रकबे के साथ हो।
और अगर बेचने वाला खुद जमाबंदीदार नहीं है (मान लीजिए ज़मीन पिताजी के नाम है), तो ख़रीदार को वंशावली, जमाबंदीदार से विक्रेता के रिश्ते का सबूत और बाकी हिस्सेदारों की सहमति भी लगानी होती है। आपको यही सूची तैयार रखनी है।
पटना की छह आम कमियाँ, और हर एक का इलाज
| समस्या | इलाज | कहाँ / कौन |
|---|---|---|
| जमाबंदी चालू है (रसीद कटती है) पर ऑनलाइन नहीं | छूटी जमाबंदी को ऑनलाइन कराने का आवेदन | परिमार्जन प्लस; जाँच के बाद अंचल अधिकारी |
| ऑनलाइन जमाबंदी में नाम, पिता का नाम, खाता, खेसरा, रकबा या लगान ग़लत | सबूत (केवाला, खतियान, रसीद) के साथ सुधार | परिमार्जन प्लस; अंचल अधिकारी |
| जमाबंदी अब भी गुज़र चुके माता-पिता या दादा के नाम | उत्तराधिकार दाखिल-खारिज: मृत्यु प्रमाण पत्र + वंशावली | बिहार भूमि पर ऑनलाइन; मुफ़्त |
| संयुक्त पारिवारिक ज़मीन, कई वारिस | बँटवारा डीड और बँटवारा दाखिल-खारिज, या सब वारिस साथ बेचें, या बाकी हक़-त्याग डीड दें | निबंधन कार्यालय, फिर बिहार भूमि |
| लगान बकाया | ऑनलाइन भरें; LPC के लिए भी ज़रूरी | भू-लगान पोर्टल |
| ज़मीन पर लोन या बंधक | लोन चुकाएँ, कागज़ वापस लें, बंधक हटवाएँ | आपका बैंक; फिर EC और बंधक खोज जाँचें |
जमाबंदी ऑनलाइन नहीं या ग़लत है: परिमार्जन प्लस
बिहार के जमाबंदी रजिस्टर 2017-18 में हाथ से लिखे रजिस्टरों से टाइप करके ऑनलाइन किए गए, इसलिए नाम, खाता-खेसरा, रकबे और लगान में गलतियाँ आम हैं, और कुछ चालू जमाबंदियाँ ऑनलाइन चढ़ी ही नहीं। राजस्व विभाग ने दोनों के लिए एक ही रास्ता दिया है, परिमार्जन प्लस पोर्टल:
- एंट्री में गलती (नाम, पिता का नाम, पता, खाता, खेसरा, रकबा, चौहद्दी या लगान): सबूत के साथ आवेदन करें; अंचल अधिकारी जाँच के बाद सुधार करते हैं।
- चालू जमाबंदी ऑनलाइन नहीं है: उसे ऑनलाइन कराने का आवेदन करें।
- जमाबंदी ग़लत मौज़े में चढ़ गई है, तो विभाग के अनुसार अंचल अधिकारी को ऑफ़लाइन आवेदन दें।
सबूत के तौर पर केवाला, खतियान की कॉपी और पुरानी लगान रसीदें तैयार रखें। अपने खेसरों पर बिहार भूमि का SMS अलर्ट चालू करें; परिमार्जन आवेदन शुरू होने और पूरा होने की सूचना भी उसी से आती है। जमाबंदी कैसे देखें: जमाबंदी, खतियान और LPC ऑनलाइन। अपने अंचल का नंबर: पटना अंचल अधिकारी सूची।
जमाबंदी गुज़र चुके माता-पिता के नाम: पहले उत्तराधिकार दाखिल-खारिज
पटना के परिवारों में यह सबसे आम स्थिति है। ज़मीन बच्चों को मिल गई, पर रिकॉर्ड में अब भी पिता, माता या दादा का नाम है। बेचने से पहले:
- जमाबंदीदार का मृत्यु प्रमाण पत्र लें।
- हर जीवित वारिस की वंशावली बनवाएँ: बेटे, बेटियाँ (शादीशुदा भी), विधवा, और गुज़र चुके किसी वारिस के बच्चे। गाँव में सरपंच वंशावली देते हैं; पटना शहर की ज़मीन के लिए अपने अंचल कार्यालय से पूछें (देखें वंशावली गाइड)।
- बिहार भूमि पर उत्तराधिकार दाखिल-खारिज का आवेदन करें। दाखिल-खारिज मुफ़्त है; आपत्ति न हो तो अंचल अधिकारी को 35 कार्य-दिवस में और आपत्ति हो तो 75 कार्य-दिवस में फ़ैसला करना होता है।
बिहार की एक ख़ास बात: राजस्व विभाग के विशेष सर्वेक्षण FAQ में लिखा है कि बेटा, बेटी और माँ प्रथम श्रेणी के वारिस के तौर पर बराबर हिस्सा पाते हैं। वंशावली में बेटी का नाम छोड़ देना ही वह गलती है जिससे बाद में सबसे ज़्यादा आपत्ति आती है और सौदा अटकता है।
संयुक्त ज़मीन: किस-किस के दस्तख़त ज़रूरी हैं?
कई वारिसों की ज़मीन में आप सिर्फ़ अपना हिस्सा बेच सकते हैं। जो ख़रीदार पूरे प्लॉट का पैसा दे रहा है, उसे हर हिस्सेदार की सहमति चाहिए। तीन साफ़ रास्ते हैं:
| रास्ता | कैसे होता है | खर्च (निबंधन विभाग की तालिका) |
|---|---|---|
| पहले बँटवारा | सब वारिस बँटवारा डीड रजिस्टर कराते हैं; बँटवारा दाखिल-खारिज से हर एक की अलग जमाबंदी; फिर विक्रेता अपना प्लॉट बेचता है | विरासत/पारिवारिक संपत्ति का बँटवारा: ₹50 स्टांप + ₹50 फ़ीस |
| सब वारिस साथ बेचें | हर हिस्सेदार एक ही केवाले में विक्रेता बनता है, रजिस्ट्री में आता है और तय हिसाब से पैसा बाँटा जाता है | सामान्य बिक्री का खर्च, आम तौर पर ख़रीदार देता है |
| एक वारिस के पक्ष में हक़-त्याग | बाकी वारिस रजिस्टर्ड हक़-त्याग (रिलीज़) डीड से अपना हिस्सा एक भाई/बहन को छोड़ देते हैं; फिर वह बेचता है | नज़दीकी रिश्तेदारों के बीच (तालिका में दी सूची): छोड़े गए हिस्से के MVR मूल्य का 3% + ₹1,000 फ़ीस |
हमारी राय में बाकी वारिसों का बिना रजिस्ट्री वाला "सहमति पत्र" या नोटरी वाला हलफ़नामा कमज़ोर है। कोई बाद में मुकर जाए तो वह टिक नहीं भी सकता। बँटवारा और अलग जमाबंदी, फिर बिक्री, थोड़ा ज़्यादा समय लेता है पर ज़मीन सबसे आसानी से बिकती है। पूरी प्रक्रिया: पटना में पुश्तैनी ज़मीन का बँटवारा।
ज़मीन खुद ख़रीदी थी? क्या आपका अपना दाखिल-खारिज हुआ?
पटना में बहुत से विक्रेताओं ने 10-15 साल पहले प्लॉट ख़रीदा, पर अपना दाखिल-खारिज कभी पूरा नहीं कराया। तब जमाबंदी अब भी पुराने मालिक के नाम रहती है, और आपका ख़रीदार आपसे दाखिल-खारिज नहीं करा सकता। अपने रजिस्टर्ड केवाले से अभी आवेदन करें। यह मुफ़्त है। ख़रीद को 90 दिन से ज़्यादा हो गए हों तो FAQ के अनुसार विलंब माफ़ी की अर्ज़ी साथ लगाएँ। प्रक्रिया: पटना में दाखिल-खारिज ऑनलाइन।
लगान, बंधक और नापी: आख़िरी तीन जाँच
- लगान: भू-लगान पोर्टल पर बकाया ऑनलाइन भरें। ख़रीदार का बैंक अक्सर LPC माँगता है, और लगान अप-टू-डेट हुए बिना ऑनलाइन LPC का आवेदन नहीं होता।
- बंधक: ज़मीन पर लोन लिया था तो चुकाकर कागज़ वापस लें। ख़रीदार e-Nibandhan पर EC और बिहार भूमि पर बंधक खोज ज़रूर करेगा; पहले खुद कर लें। देखें EC और लोन की जाँच।
- नापी और मेड़: अमीन से प्लॉट को भू-नक्शे और अपने केवाले से मिलाकर नपवाएँ, और पड़ोसी से मेड़ का कोई झगड़ा हो तो अभी सुलझाएँ। पटना में प्लॉट कट्ठा-धुर में बिकते हैं; कट्ठे के रकबे को जमाबंदी के डिसमिल से मिलाएँ (कट्ठा कन्वर्टर)।
कितना समय लगता है? एक असली योजना
| काम | समय (नियम / व्यवहार में) |
|---|---|
| बिना आपत्ति दाखिल-खारिज | नियम से 35 कार्य-दिवस |
| आपत्ति वाला दाखिल-खारिज | नियम से 75 कार्य-दिवस |
| परिमार्जन प्लस सुधार | अंचल अधिकारी की जाँच के बाद; कोई तय सार्वजनिक समय-सीमा नहीं, इसलिए जल्दी शुरू करें |
| बँटवारा या हक़-त्याग डीड की रजिस्ट्री | सब वारिस मौजूद हों तो उसी दिन |
| लगान बकाया | उसी दिन, ऑनलाइन |
इसलिए पैसे की ज़रूरत से 2-3 महीने पहले शुरू करें। बयाना तभी लें जब आपके नाम की जमाबंदी ऑनलाइन हो जाए, और जमाबंदी नंबर इकरारनामे में लिखें।
- दाखिल-खारिज FAQ, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार: प्रश्न 4 (बिक्री, उत्तराधिकार, बँटवारे के कागज़), प्रश्न 5 (90 दिन बाद विलंब माफ़ी), प्रश्न 6 (विक्रेता जमाबंदीदार न हो तो वंशावली, रिश्ते का सबूत और हिस्सेदारों की सहमति), प्रश्न 17 (35/75 कार्य-दिवस), प्रश्न 18 (मुफ़्त) — biharbhumi.bihar.gov.in → User Manual, Process and FAQ
- जमाबंदी FAQ, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार (परिमार्जन प्लस: सुधार और छूटी जमाबंदी ऑनलाइन करना; ग़लत मौज़ा हो तो CO को ऑफ़लाइन) — biharbhumi.bihar.gov.in
- बिहार भूमि की नागरिक सेवा सूचनाएँ: SMS अलर्ट, ऑनलाइन LPC (लगान अप-टू-डेट होना ज़रूरी)
- विशेष सर्वेक्षण FAQ, प्रश्न 65 (बेटा, बेटी और माँ का बराबर हिस्सा) — राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार
- "Table of Stamp Duty & Registration Fee", मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, बिहार: पृष्ठ 6, क्रम 39 (बँटवारा डीड, पारिवारिक संपत्ति ₹50 + ₹50); पृष्ठ 8, क्रम 47 (सूचीबद्ध रिश्तेदारों के बीच हक़-त्याग) — nibandhan.bihar.gov.in
- सुप्रीम कोर्ट, समीउल्लाह बनाम बिहार राज्य, 7 नवंबर 2025
- सभी तथ्य 22.10.2026 को हमारी पहले से जाँची गई गाइडों से मिलाए गए।
आपको क्या करना चाहिए? (हमारी सलाह)
- आज ही अपनी जमाबंदी ऑनलाइन खोलें और नाम, खाता, खेसरा, रकबा अपने केवाले से एक-एक करके मिलाएँ।
- कुछ छूटा या ग़लत है: परिमार्जन प्लस अभी, ख़रीदार मिलने के बाद नहीं।
- विरासत की ज़मीन: पूरी वंशावली (बेटियों समेत) के साथ उत्तराधिकार दाखिल-खारिज।
- संयुक्त ज़मीन: बँटवारा या रजिस्टर्ड हक़-त्याग, या सब वारिस साथ बेचें। बिना रजिस्ट्री वाला सहमति पत्र नहीं।
- बयाना तभी लें जब कागज़ साफ़ हों, ताकि ख़रीदार को मोलभाव या पीछे हटने की वजह न मिले।
बेचने से पहले कागज़ ठीक करना: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- जमाबंदी ऑनलाइन नहीं है, क्या ज़मीन बेच सकते हैं?
रजिस्ट्री हो सकती है, पर ख़रीदार का दाखिल-खारिज नहीं होगा, क्योंकि विभाग के अनुसार पिछले जमाबंदीदार की जमाबंदी उसी खाता, खेसरा और रकबे के साथ ऑनलाइन होनी चाहिए। पहले परिमार्जन प्लस से उसे ऑनलाइन कराएँ; ज़्यादातर समझदार ख़रीदार यही माँगेंगे।
- जमाबंदी स्वर्गीय पिताजी के नाम है, बेचने से पहले क्या करें?
उनके मृत्यु प्रमाण पत्र और सभी वारिसों (बेटियों समेत) की वंशावली के साथ बिहार भूमि पर उत्तराधिकार दाखिल-खारिज कराएँ। यह मुफ़्त है, और आपत्ति न हो तो 35 कार्य-दिवस में फ़ैसला होना है। कई वारिस हों तो बँटवारे पर भी सहमति बनाएँ, या सब साथ बेचें।
- पुश्तैनी ज़मीन बेचने में बहनों के दस्तख़त ज़रूरी हैं?
अगर वे ज़मीन की वारिस हैं, तो हाँ। बेटा, बेटी और माँ प्रथम श्रेणी के वारिस के तौर पर बराबर हिस्सा पाते हैं। हर बहन या तो केवाले में विक्रेता बने, या रजिस्टर्ड बँटवारा या हक़-त्याग डीड दे। ख़रीदार के दाखिल-खारिज में सभी हिस्सेदारों की सहमति लगती है।
- ऑनलाइन जमाबंदी में ग़लत रकबा या खेसरा कैसे ठीक कराएँ?
केवाला, खतियान और रसीद जैसे सबूत के साथ परिमार्जन प्लस पोर्टल पर आवेदन करें। अंचल अधिकारी जाँच के बाद सुधार करते हैं। ज़मीन ग़लत मौज़े में चढ़ी है तो अंचल अधिकारी को ऑफ़लाइन आवेदन दें।
- बिहार में हक़-त्याग (रिलीज़) डीड का खर्च कितना है?
निबंधन विभाग की तालिका के अनुसार पुश्तैनी संपत्ति में हिस्सा भाई-बहन, माता-पिता, पति-पत्नी या गुज़र चुके बेटे के बच्चों के पक्ष में छोड़ने पर हिस्से के MVR मूल्य का 3% स्टांप ड्यूटी और ₹1,000 रजिस्ट्री फ़ीस लगती है। ताज़ा आँकड़ा निबंधन कार्यालय से पक्का करें।
- सालों पहले प्लॉट ख़रीदा, दाखिल-खारिज नहीं कराया। क्या बेच सकते हैं?
रजिस्ट्री हो सकती है, पर जब तक जमाबंदी पुराने मालिक के नाम है, आपका ख़रीदार आपसे दाखिल-खारिज नहीं करा पाएगा। पहले अपने रजिस्टर्ड केवाले से अपना दाखिल-खारिज कराएँ; 90 दिन बीत गए हों तो विलंब माफ़ी की अर्ज़ी लगाएँ।
यह लेख 22 अक्टूबर 2026 को बिहार राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के दाखिल-खारिज, जमाबंदी और विशेष सर्वेक्षण FAQ और निबंधन विभाग की स्टांप ड्यूटी तालिका के आधार पर लिखा गया है। नियम, पोर्टल और समय-सीमा बदल सकते हैं; अपने अंचल और निबंधन कार्यालय से पुष्टि करें। यह सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं।