Zameen Bechne Par Tax Kitna Lagta Hai: पटना कैपिटल गेन 2026
सीधा जवाब: पटना में 24 महीने से ज़्यादा रखी ज़मीन, मकान या फ़्लैट बेचने पर जो मुनाफ़ा होता है, वह लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन है और आयकर अधिनियम, 2025 में उस पर 12.5% टैक्स है। अगर आप भारत में रहने वाले व्यक्ति या HUF हैं और ज़मीन 23 जुलाई 2024 से पहले ली थी, तो आपका टैक्स इंडेक्सेशन के साथ 20% वाले हिसाब से ज़्यादा नहीं होगा, यानी दोनों में जो कम हो वही देना है। ग्रामीण खेती की ज़मीन कैपिटल एसेट ही नहीं है, इसलिए उसकी बिक्री पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता। तय समय में मकान, बॉन्ड या नई खेती की ज़मीन में पैसा लगाकर टैक्स बचाया भी जा सकता है। पूरी बात, उदाहरण और पटना की ख़ास बातें नीचे हैं।
1 अप्रैल 2026 से आयकर अधिनियम, 1961 की जगह आयकर अधिनियम, 2025 लागू है। संपत्ति बेचने के नियम लगभग वही हैं, पर धाराओं के नंबर बदल गए हैं: पुरानी धारा 54 अब 82 है, 54F अब 86, 54EC अब 85 और 54B अब 83। बहुत सी वेबसाइटें अब भी पुराने नंबर लिखती हैं। यह लेख नए अधिनियम के पाठ से लिखा गया है।
क्या आपकी ज़मीन कैपिटल एसेट है? पटना की खेती वाली ज़मीन का नियम
2025 के अधिनियम की धारा 2(22) के अनुसार भारत में खेती की ज़मीन कैपिटल एसेट नहीं है, जब तक वह:
- 10,000 या ज़्यादा आबादी वाली नगरपालिका, नगर निगम, नगर पंचायत या छावनी के अंदर न हो; या
- ऐसे निकाय की सीमा से नीचे दी गई हवाई दूरी के अंदर न हो:
| नगर निकाय / छावनी की आबादी | इतनी दूरी तक खेती की ज़मीन कैपिटल एसेट है |
|---|---|
| 10,000 से ज़्यादा और 1,00,000 तक | 2 किमी |
| 1,00,000 से ज़्यादा और 10,00,000 तक | 6 किमी |
| 10,00,000 से ज़्यादा | 8 किमी |
आबादी का मतलब टैक्स-वर्ष से पहले छपी आख़िरी जनगणना, जो आज जनगणना 2011 है। पटना नगर निगम की आबादी 2011 में लगभग 17 लाख थी (नगर निगम की अपनी वेबसाइट), इसलिए पटना नगर निगम की सीमा से 8 किमी हवाई दूरी तक की खेती की ज़मीन कैपिटल एसेट है, और उस पर टैक्स लगेगा। उससे आगे हो तो नज़दीकी दूसरे शहरी निकाय (दानापुर, फुलवारी शरीफ़, खगौल, मसौढ़ी, बाढ़, बिहटा वग़ैरह) को भी देखें, क्योंकि हर एक का दायरा उसकी अपनी आबादी से तय होता है। निकाय की अधिसूचित सीमा से हवाई दूरी नक्शे पर नापें और उसका प्रिंट टैक्स के कागज़ों के साथ रखें।
दो सावधानियाँ। पहली, ज़मीन सच में खेती की ज़मीन होनी चाहिए; खेत काटकर प्लॉट बनाकर बेचना अलग सवाल है। दूसरी, टैक्स न बने तब भी बिक्री को रिटर्न में सही तरह दिखाना होता है। शक हो तो बिक्री से पहले CA को दिखा दें।
शॉर्ट-टर्म या लॉन्ग-टर्म?
- 24 महीने या उससे कम रखी: शॉर्ट-टर्म कैपिटल एसेट (धारा 2(101)(a))। मुनाफ़ा आपकी आय में जुड़ता है और आपके सामान्य स्लैब से टैक्स लगता है।
- 24 महीने से ज़्यादा रखी: लॉन्ग-टर्म। धारा 197 से टैक्स।
- विरासत या दान में मिली ज़मीन: पिछले मालिक ने जितने समय रखी, वह भी जुड़ता है (धारा 2(101)(c)(B))। यानी पिताजी ने 1995 में ख़रीदी और 2025 में आपको मिली, तो 2026 में बेचने पर वह लॉन्ग-टर्म है।
कैपिटल गेन कैसे निकालते हैं
कैपिटल गेन = बिक्री मूल्य − बिक्री का खर्च − ख़रीद की लागत − सुधार की लागत (धारा 72(1))।
| मद | क्या गिना जाता है |
|---|---|
| बिक्री मूल्य | केवाले का दाम। पर अगर स्टांप ड्यूटी मूल्य (MVR) दाम के 110% से ज़्यादा है, तो स्टांप ड्यूटी मूल्य ही आपका बिक्री मूल्य माना जाता है (धारा 78)। एग्रीमेंट की तारीख़ तक कुछ पैसा बैंक से मिल गया हो तो एग्रीमेंट वाली तारीख़ का मूल्य लिया जा सकता है। |
| बिक्री का खर्च | सिर्फ़ बिक्री के लिए हुआ खर्च, जैसे ब्रोकरेज या वकील की फ़ीस, रसीद के साथ |
| ख़रीद की लागत | आपने जो दिया, ख़रीदते समय दी गई स्टांप ड्यूटी और फ़ीस समेत। विरासत/दान: पिछले मालिक की लागत (धारा 73, तालिका क्रम 1)। वह पता न चले तो पिछले मालिक को ज़मीन मिलने की तारीख़ का बाज़ार मूल्य (धारा 90(11))। |
| 1 अप्रैल 2001 से पहले की ज़मीन | असली लागत की जगह 1 अप्रैल 2001 का बाज़ार मूल्य ले सकते हैं, पर ज़मीन/मकान के लिए यह 1 अप्रैल 2001 के स्टांप ड्यूटी मूल्य से ज़्यादा नहीं हो सकता (धारा 90(9)-(10))। 2001 का MVR निबंधन कार्यालय या वैल्यूअर से लें। |
| सुधार की लागत | चारदीवारी या निर्माण जैसा पूँजीगत खर्च, बिल के साथ। 2001 से पहले की संपत्ति में सिर्फ़ 1 अप्रैल 2001 के बाद का खर्च गिना जाता है (धारा 90(1))। |
टैक्स दर: 12.5%, या इंडेक्सेशन के साथ 20% अगर वह कम हो
धारा 197(1) लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन पर बिना इंडेक्सेशन 12.5% टैक्स लगाती है। धारा 197(3) भारत में रहने वाले व्यक्ति और HUF को 23 जुलाई 2024 से पहले ली गई ज़मीन या मकान पर एक राहत देती है: अगर 12.5% वाला टैक्स इंडेक्स किए गए गेन पर 20% वाले टैक्स से ज़्यादा है, तो वह ज़्यादा वाला हिस्सा छोड़ दिया जाता है। सीधी भाषा में, दोनों में जो कम हो वही दें। इंडेक्सेशन में आपकी लागत को कॉस्ट इन्फ़्लेशन इंडेक्स (CII) से बढ़ाया जाता है; टैक्स-वर्ष 2026-27 का CII 384 है (CBDT अधिसूचना S.O. 3889(E), 15 जुलाई 2026)।
हेल्थ और एजुकेशन सेस, और ज़्यादा आय पर सरचार्ज, उस साल के वित्त अधिनियम से जुड़ते हैं; यह आपका CA जोड़ देगा। अगर आपकी बाकी आय मूल छूट सीमा से कम है, तो भारत में रहने वाला व्यक्ति बची हुई छूट लॉन्ग-टर्म गेन में घटा सकता है (धारा 197(2))।
पटना के प्लॉट के उदाहरण
उदाहरण 1: दानापुर में एक प्लॉट जून 2010 (वित्त वर्ष 2010-11, CII 167) में स्टांप ड्यूटी समेत ₹10 लाख में ख़रीदा, नवंबर 2026 में ₹60 लाख में बेचा। आसानी के लिए कोई और खर्च नहीं।
| 12.5%, बिना इंडेक्सेशन | इंडेक्सेशन के साथ 20% | |
|---|---|---|
| लागत | ₹10,00,000 | ₹10,00,000 × 384 ÷ 167 = ₹22,99,401 |
| गेन | ₹50,00,000 | ₹37,00,599 |
| टैक्स (सेस से पहले) | ₹6,25,000 | ₹7,40,120 |
यहाँ 12.5% कम है, इसलिए टैक्स ₹6,25,000 और सेस।
उदाहरण 2: वही प्लॉट, पर 2010-11 में ₹30 लाख में ख़रीदा और ₹60 लाख में बेचा। 12.5% पर गेन ₹30 लाख और टैक्स ₹3,75,000। इंडेक्सेशन से लागत ₹30,00,000 × 384 ÷ 167 = ₹68,98,204 हो जाती है, जो बिक्री मूल्य से ज़्यादा है, इसलिए इंडेक्स किया गया गेन शून्य है। धारा 197(3) से तब टैक्स शून्य होगा। जहाँ दाम धीरे बढ़े हों, वहाँ इंडेक्सेशन वाला विकल्प पूरा टैक्स बचा सकता है; इसीलिए हर बार दोनों हिसाब मिलाना ज़रूरी है।
2010-11 का CII (167) CBDT अधिसूचना सं. 44/2017 से है। अपने ख़रीद-वर्ष का CII CA से मिलवा लें।
पटना में ज़मीन बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स कैसे बचाएँ
| धारा (पुराना नंबर) | आप बेचते हैं | आपको करना है | मुख्य सीमाएँ |
|---|---|---|---|
| 82 (पुरानी 54) | रिहायशी मकान (लॉन्ग-टर्म) | बिक्री से 1 साल पहले या 2 साल बाद तक भारत में एक मकान ख़रीदें, या 3 साल में बनवाएँ | नए मकान की लागत तक छूट; जीवन में एक बार, गेन ₹2 करोड़ या कम हो तो दो मकान; ₹10 करोड़ से ऊपर की लागत नहीं गिनी जाती |
| 86 (पुरानी 54F) | कोई और लॉन्ग-टर्म एसेट, जैसे प्लॉट या ज़मीन | 1 साल पहले या 2 साल बाद तक एक मकान ख़रीदें, या 3 साल में बनवाएँ | पूरी छूट के लिए पूरी शुद्ध बिक्री राशि (सिर्फ़ गेन नहीं) लगानी होती है, नहीं तो अनुपात में; नए के अलावा पहले से एक से ज़्यादा मकान हों तो नहीं मिलती; ₹10 करोड़ की सीमा |
| 85 (पुरानी 54EC) | लॉन्ग-टर्म ज़मीन या मकान | गेन 6 महीने के अंदर NHAI या REC बॉन्ड (या अधिसूचित बॉन्ड) में लगाएँ | ₹50 लाख तक; 5 साल का लॉक-इन; बॉन्ड पर लोन लेना भी भुनाना माना जाता है |
| 83 (पुरानी 54B) | ऐसी ज़मीन जिस पर बिक्री से पहले के 2 साल आप, आपके माता-पिता या HUF खेती करते थे (जहाँ वह कैपिटल एसेट हो) | 2 साल के अंदर दूसरी खेती की ज़मीन ख़रीदें | नई ज़मीन की लागत तक छूट; नई ज़मीन 3 साल के अंदर न बेचें |
रिटर्न भरने की तारीख़ तक मकान नहीं ख़रीदा? धारा 82, 83 और 86 में बची रकम रिटर्न की नियत तारीख़ से पहले बैंक में अधिसूचित कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम में जमा करनी होती है, और समय-सीमा में इस्तेमाल करनी होती है। नहीं तो छूट चली जाती है। बाद में मकान बनवाएँ तो निर्माण के बिल सँभालकर रखें।
पटना में एक आम रास्ता यह है: बिहटा का पुराना प्लॉट बेचें, 3 साल के अंदर शहर के प्लॉट पर मकान बनवाएँ, और धारा 86 की छूट लें। हर भुगतान बैंक से करें।
TDS, बयाना और विक्रेता के लिए दूसरी बातें
- 1% TDS: ₹50 लाख या ज़्यादा (दाम या स्टांप ड्यूटी मूल्य) की ग़ैर-कृषि संपत्ति पर ख़रीदार आपके PAN में 1% काटता है (धारा 393(1), तालिका क्रम 3(i))। इसे अपने रिटर्न में क्लेम करें। NRI विक्रेता पर अलग और ज़्यादा TDS लगता है; देखें बाहर रहकर ज़मीन बेचना।
- सौदा टूटने पर रखा गया बयाना: बातचीत के दौरान मिला एडवांस ज़ब्त हो जाए, तो जिस साल ज़ब्त हुआ उस साल वह "अन्य स्रोतों से आय" में टैक्स होता है (धारा 92(2)(h))। पहले ज़ब्त होकर टैक्स हो चुका एडवांस लागत से दोबारा नहीं घटता (धारा 81)। ज़्यादा जानकारी बयाना और इकरारनामा में।
- समय पर भरें: गेन बिक्री वाले टैक्स-वर्ष की आय है। ब्याज़ से बचने के लिए एडवांस टैक्स के बारे में अपने CA से पूछें।
- स्टांप ड्यूटी बचाने के लिए MVR से कम दाम लिखना आपका टैक्स नहीं बचाता: आपका गेन MVR पर गिना जाता है, जब तक MVR दाम के 110% के अंदर न हो। दाम कैसे तय करें: पटना में MVR से सही दाम।
- आयकर अधिनियम, 2025 (2025 का अधिनियम सं. 30), भारत का राजपत्र (असाधारण) भाग II खंड 1, 21 अगस्त 2025: धारा 2(22) (कैपिटल एसेट; खेती की ज़मीन और 2/6/8 किमी तालिका), 2(101) (शॉर्ट-टर्म, 24 महीने; पिछले मालिक की अवधि), 67, 72 (गणना; CII और इंडेक्स की गई लागत), 73 तालिका क्रम 1 (विरासत/दान की संपत्ति की लागत), 78 (स्टांप ड्यूटी मूल्य; 110%; एग्रीमेंट की तारीख़), 81 और 92(2)(h) (एडवांस), 82, 83, 85, 86 (छूट), 90(1), 90(9)-(11) (सुधार लागत, 1 अप्रैल 2001 का मूल्य, स्टांप ड्यूटी की सीमा), 197 (12.5%; 23.07.2024 से पहले की ज़मीन पर इंडेक्सेशन के साथ 20%), 393(1) तालिका क्रम 3(i) (1% TDS) — PDF
- CBDT अधिसूचना S.O. 3889(E), 15 जुलाई 2026 (अधिसूचना सं. 85/2026): कॉस्ट इन्फ़्लेशन इंडेक्स 2026-27 = 384, धारा 72(8)(a) के अंतर्गत
- CBDT अधिसूचना सं. 44/2017: 2001-02 से CII तालिका (2010-11 = 167)
- पटना नगर निगम, "Introduction": जनगणना 2011 के अनुसार आबादी 17 लाख — pmc.bihar.gov.in
- सभी स्रोत 22.10.2026 को जाँचे गए।
आपको क्या करना चाहिए? (हमारी सलाह)
- बिक्री से पहले: ख़रीद का केवाला, तब दी गई स्टांप ड्यूटी और निर्माण के बिल निकाल लें। 2001 से पहले की या विरासत की ज़मीन हो तो 1 अप्रैल 2001 का MVR लें।
- पटना के पास खेती की ज़मीन: टैक्स-फ़्री मानने से पहले पटना नगर निगम और नज़दीकी शहर से हवाई दूरी नापें।
- दोनों विकल्प मिलाएँ (12.5% और इंडेक्सेशन वाला 20%), अगर 23 जुलाई 2024 से पहले ख़रीदी थी।
- दोबारा निवेश का फ़ैसला जल्दी करें: बॉन्ड 6 महीने में, मकान 1-2 साल में (या बनवाने के लिए 3 साल), और रिटर्न से पहले डिपॉज़िट अकाउंट।
- इन आँकड़ों के साथ CA से बात करें; यह लेख कानून समझाता है, आपके मामले में और बातें भी हो सकती हैं।
पटना में ज़मीन पर कैपिटल गेन टैक्स: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- 2026 में पटना में ज़मीन बेचने पर कितना टैक्स लगता है?
24 महीने से ज़्यादा रखी हो तो गेन पर 12.5%। भारत में रहने वाले व्यक्ति और HUF, जिन्होंने 23 जुलाई 2024 से पहले ज़मीन ली, इसके और इंडेक्स किए गए गेन पर 20% में से जो कम हो वह देते हैं। 24 महीने या कम रखी हो तो गेन आपके स्लैब से टैक्स होता है। सेस और सरचार्ज (अगर लगे) अलग।
- बिहार में खेती की ज़मीन बेचने पर टैक्स लगता है?
ग्रामीण खेती की ज़मीन हो, यानी 10,000+ आबादी वाले किसी नगर निकाय और उसके आसपास के हवाई दायरे (आबादी के हिसाब से 2, 6 या 8 किमी) से बाहर, तो कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता। पटना नगर निगम की 2011 में लगभग 17 लाख आबादी थी, इसलिए उसका दायरा 8 किमी है। इन सीमाओं के अंदर की खेती की ज़मीन पर दूसरी ज़मीन की तरह टैक्स लगता है।
- धारा 54 और 54EC का नया नंबर क्या है?
आयकर अधिनियम, 2025 में पुरानी धारा 54 (मकान बेचकर मकान) अब धारा 82 है, 54F (दूसरी संपत्ति बेचकर मकान) अब 86, 54EC (बॉन्ड) अब 85 और 54B (खेती की ज़मीन के बदले खेती की ज़मीन) अब 83।
- विरासत में मिली ज़मीन की लागत क्या मानी जाती है?
पिछले मालिक की लागत, सुधार के खर्च समेत। पिछले मालिक को ज़मीन 1 अप्रैल 2001 से पहले मिली हो तो आप 1 अप्रैल 2001 का बाज़ार मूल्य ले सकते हैं, जो उस तारीख़ के स्टांप ड्यूटी मूल्य से ज़्यादा नहीं हो सकता। पिछले मालिक की अवधि आपके 24 महीनों में जुड़ती है।
- क्या ज़मीन पर अब भी इंडेक्सेशन मिलता है?
सिर्फ़ तुलना के तौर पर, भारत में रहने वाले व्यक्ति और HUF को, 23 जुलाई 2024 से पहले ली गई ज़मीन या मकान पर: बिना इंडेक्सेशन 12.5% और इंडेक्सेशन के साथ 20% में से जो कम हो। 2026-27 का CII 384 है।
- MVR से कम दाम पर बेचें तो क्या टैक्स कम होगा?
नहीं। अगर स्टांप ड्यूटी मूल्य केवाले के दाम के 110% से ज़्यादा है, तो धारा 78 में स्टांप ड्यूटी मूल्य ही बिक्री मूल्य माना जाता है। अगर आपको लगता है कि MVR बाज़ार मूल्य से ज़्यादा है, तो वैल्यूएशन ऑफ़िसर के पास भेजने की माँग कर सकते हैं।
- प्लॉट बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स कैसे बचाएँ?
धारा 86 में शुद्ध बिक्री राशि से एक रिहायशी मकान ख़रीदें या बनवाएँ (बिक्री से 1 साल पहले या 2 साल बाद तक ख़रीद, या 3 साल में निर्माण), या धारा 85 में गेन के ₹50 लाख तक 6 महीने के अंदर NHAI/REC बॉन्ड में लगाएँ। बची रकम रिटर्न की तारीख़ से पहले कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम में जमा करें।
यह लेख 22 अक्टूबर 2026 को भारत के राजपत्र में छपे आयकर अधिनियम, 2025 और कॉस्ट इन्फ़्लेशन इंडेक्स पर CBDT अधिसूचनाओं के आधार पर लिखा गया है। सेस और सरचार्ज की दरें हर साल के वित्त अधिनियम से आती हैं। टैक्स कानून में कई शर्तें और अपवाद हैं जो यहाँ नहीं आए; अपने मामले के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह लें। यह सामान्य जानकारी है, टैक्स सलाह नहीं।